कक्षा 12 राजनीति विज्ञान – अध्याय 3: नियोजित विकास की राजनीति | KK MAHTO
बिहार बोर्ड — कक्षा 12 : राजनीति विज्ञान
अध्याय 3 : नियोजित विकास की राजनीति
KK MAHTO — Founder & Educator, Apni Kaksha
📑 विषय-सूची (Contents)
परिचय एवं पृष्ठभूमि
विकास की अवधारणा
नियोजन क्या है? नियोजित विकास की आवश्यकता
नियोजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (बॉम्बे प्लान, गांधीवादी योजना, जनता की योजना)
योजना आयोग तथा राष्ट्रीय विकास परिषद्
मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल
पंचवर्षीय योजनाएँ (प्रथम से बारहवीं तक)
कृषि एवं भूमि सुधार
हरित क्रांति
औद्योगिक विकास एवं सार्वजनिक क्षेत्र
व्यापार नीति — आयात प्रतिस्थापन
योजना की उपलब्धियाँ एवं कमियाँ
1991 का उदारीकरण (LPG)
नीति आयोग (NITI Aayog)
महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं तथ्य
महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)
1. परिचय एवं पृष्ठभूमि
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के सामने अनेक गंभीर चुनौतियाँ थीं। देश को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं मिली थी, बल्कि उसे आर्थिक व सामाजिक रूप से भी मजबूत बनाना था। उस समय देश की स्थिति अत्यंत दयनीय थी —
अंग्रेजों ने भारत को “लूट का देश” बनाकर छोड़ा था।
देश की लगभग 70% जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी, परंतु कृषि उत्पादकता बहुत कम थी।
औद्योगिक विकास अत्यंत पिछड़ा हुआ था।
गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, अशिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की भयावह कमी थी।
1947 के विभाजन से अर्थव्यवस्था और टूट गई — अनाज उत्पादन वाले क्षेत्र पाकिस्तान में चले गए।
1947–48 में रियासतों के विलय और 1948 में हैदराबाद के विलय जैसी समस्याएँ भी थीं।
इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए भारतीय नेतृत्व ने “नियोजित विकास” (Planned Development) का मार्ग अपनाया। भारत ने सोवियत संघ के नियोजन मॉडल से प्रेरणा ली, परंतु उसे भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढाला।
📌 याद रखें
भारत ने नियोजन को स्वेच्छा से अपनाया — यह लोकतांत्रिक नियोजन था, न कि सोवियत संघ जैसा सर्वाधिकारवादी (Authoritarian) नियोजन।
2. विकास की अवधारणा
📖 परिभाषा — विकास (Development)
विकास वह प्रक्रिया है जिसमें किसी देश की आर्थिक क्षमता, सामाजिक स्थिति तथा जीवन-स्तर में सतत एवं सकारात्मक सुधार होता है। विकास केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है, बल्कि उसमें सामाजिक न्याय, समानता एवं मानव कल्याण भी सम्मिलित है।
विकास के विभिन्न आयाम
आर्थिक विकास — राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय एवं उत्पादन में वृद्धि।
सामाजिक विकास — शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता एवं सामाजिक न्याय।
मानवीय विकास — जीवन-प्रत्याशा, साक्षरता दर, जीवन-स्तर में सुधार।
राजनीतिक विकास — लोकतंत्र, भागीदारी, अधिकार एवं स्वतंत्रता।
सतत विकास — पर्यावरण की रक्षा करते हुए विकास।
विकास एवं वृद्धि में अंतर
आधार
आर्थिक वृद्धि (Growth)
विकास (Development)
अर्थ
उत्पादन एवं आय में मात्रात्मक वृद्धि
गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों सुधार
दायरा
सीमित (केवल आर्थिक)
व्यापक (आर्थिक + सामाजिक + राजनीतिक)
उद्देश्य
आय बढ़ाना
जीवन-स्तर एवं कल्याण बढ़ाना
उदाहरण
GDP में 7% वृद्धि
GDP वृद्धि + गरीबी में कमी + साक्षरता में वृद्धि
💡 उदाहरण
यदि किसी देश का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) बढ़ता है, परंतु धन केवल कुछ अमीरों के पास जमा होता है और गरीब और गरीब होते जाते हैं — तो यह केवल आर्थिक वृद्धि है, विकास नहीं। वास्तविक विकास तब होता है जब वृद्धि का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे।
विकास पर विभिन्न दृष्टिकोण
उद्योगपति का दृष्टिकोण — अधिक उत्पादन, अधिक लाभ, कम सरकारी हस्तक्षेप।
किसान का दृष्टिकोण — सिंचाई, बीज, खाद, उचित मूल्य एवं कर्ज़ माफी।
श्रमिक का दृष्टिकोण — रोजगार, उचित मजदूरी एवं काम की सुरक्षा।
आदिवासी का दृष्टिकोण — जंगल, भूमि एवं संस्कृति की रक्षा।
महिलाओं का दृष्टिकोण — शिक्षा, समानता एवं सुरक्षा।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु
विकास की अवधारणा सापेक्ष (Relative) होती है। एक ही नीति किसी वर्ग के लिए विकास हो सकती है और किसी अन्य वर्ग के लिए विनाश। इसलिए विकास एक राजनीतिक प्रश्न है — यह तय करना कि किसका विकास होगा, कैसे होगा और कितनी कीमत पर होगा।
3. नियोजन क्या है? नियोजित विकास की आवश्यकता
📖 परिभाषा — नियोजन (Planning)
नियोजन का अर्थ है — देश के उपलब्ध संसाधनों का पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों एवं प्राथमिकताओं के आधार पर व्यवस्थित, वैज्ञानिक एवं नियंत्रित उपयोग करना, जिससे निर्धारित अवधि में अधिकतम सामाजिक एवं आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
📖 परिभाषा — नियोजित विकास
नियोजित विकास से तात्पर्य उस विकास प्रक्रिया से है जिसमें सरकार योजनाएँ बनाकर, लक्ष्य निर्धारित करके तथा संसाधनों का आवंटन करके देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ाती है।
भारत में नियोजन की आवश्यकता क्यों?
गरीबी एवं बेरोजगारी का उन्मूलन — बाजार अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकता था।
संसाधनों का सीमित होना — पूँजी, तकनीक एवं कुशल श्रमिकों की कमी।
तेजी से औद्योगीकरण — कृषि पर निर्भरता कम करने के लिए।
सामाजिक न्याय — समाज के कमजोर वर्गों का उत्थान।
आत्मनिर्भरता — विदेशी सहायता पर निर्भरता कम करना।
क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना — पिछड़े क्षेत्रों का विकास।
बाजार की विफलता — बाजार केवल लाभ देखता है, जनकल्याण नहीं।
राष्ट्रीय सुरक्षा — रक्षा उद्योगों की स्थापना हेतु।
नियोजन के प्रकार
प्रकार
विशेषता
उदाहरण
लोकतांत्रिक नियोजन
जनता की सहमति एवं भागीदारी से, बलपूर्वक नहीं
भारत
सर्वाधिकारवादी नियोजन
सरकार का पूर्ण नियंत्रण, जनता की राय नहीं
पूर्व सोवियत संघ
केंद्रीकृत नियोजन
समस्त निर्णय केंद्र सरकार द्वारा
चीन (पूर्व में)
विकेंद्रीकृत नियोजन
स्थानीय स्तर पर निर्णय
पंचायती राज व्यवस्था
4. नियोजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में नियोजन का विचार स्वतंत्रता से पूर्व ही उठने लगा था। स्वतंत्रता से पहले कई योजनाएँ बनाई गईं, जो आगे चलकर भारतीय नियोजन की नींव बनीं।
(क) राष्ट्रीय नियोजन समिति (1938)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा गठित।
अध्यक्ष — जवाहरलाल नेहरू
सदस्य — मेघनाद साहा, जयप्रकाश नारायण, नरेंद्र देव आदि।
उद्देश्य — स्वतंत्र भारत के लिए आर्थिक नियोजन की रूपरेखा तैयार करना।
इसने भारी उद्योगों एवं कृषि दोनों पर जोर दिया।
(ख) बॉम्बे प्लान (1944)
तैयार किया — 8 प्रमुख उद्योगपतियों ने (जे.आर.डी. टाटा, जी.डी. बिड़ला, पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास, कस्तूरभाई लालभाई, अर्देशिर दलाल, ए.डी. श्रॉफ, जॉन मथाई आदि)।
इस योजना का उद्देश्य — भारी एवं आधारभूत उद्योगों का विकास।
इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी पर बल दिया गया, परंतु राज्य का नियंत्रण भी स्वीकार किया गया।
यह पूँजीवादी मॉडल की ओर झुकी हुई योजना थी।
इस योजना का भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना पर स्पष्ट प्रभाव पड़ा।
💡 उदाहरण
बॉम्बे प्लान यह दर्शाता है कि भारतीय पूँजीपति वर्ग स्वतंत्रता से पहले ही यह समझ चुका था कि स्वतंत्र भारत में उद्योगों के विकास के लिए राज्य का सहयोग आवश्यक होगा।
(ग) गांधीवादी योजना (1944)
प्रस्तुत किया — श्रीमन नारायण अग्रवाल ने।
आधार — महात्मा गांधी के विचार (ग्राम स्वराज, स्वदेशी, खादी)।
मुख्य बल — कृषि एवं ग्रामीण कुटीर उद्योगों पर।
भारी उद्योगों का विरोध; श्रम-प्रधान तकनीक पर जोर।
आत्मनिर्भर गाँवों की कल्पना।
विकेंद्रीकृत उत्पादन प्रणाली पर बल।
(घ) जनता की योजना / पीपुल्स प्लान (1945)
प्रस्तुत किया — एम. एन. राय (मानवेंद्र नाथ राय) ने।
आधार — समाजवादी विचारधारा।
मुख्य बल — कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों पर।
भूमि सुधार एवं सामाजिक-आर्थिक समानता पर जोर।
सार्वजनिक क्षेत्र एवं समाजवादी आर्थिक व्यवस्था की वकालत।
(ङ) योजना आयोग की स्थापना (1950)
स्वतंत्रता के बाद 15 मार्च 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव द्वारा योजना आयोग की स्थापना की गई।
⭐ तुलनात्मक सारणी — स्वतंत्रता-पूर्व योजनाएँ
योजना
वर्ष
प्रस्तुतकर्ता
मुख्य जोर
राष्ट्रीय नियोजन समिति
1938
जवाहरलाल नेहरू
भारी उद्योग + कृषि
बॉम्बे प्लान
1944
8 उद्योगपति
भारी एवं आधारभूत उद्योग
गांधीवादी योजना
1944
श्रीमन नारायण अग्रवाल
कृषि + कुटीर उद्योग
जनता की योजना
1945
एम. एन. राय
समाजवाद + भूमि सुधार
योजना आयोग
1950
भारत सरकार
संपूर्ण नियोजित विकास
5. योजना आयोग तथा राष्ट्रीय विकास परिषद्
(क) योजना आयोग (Planning Commission)
📖 परिभाषा
योजना आयोग भारत सरकार का एक गैर-संवैधानिक एवं गैर-सांविधिक सलाहकार निकाय था, जिसका गठन 15 मार्च 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव द्वारा किया गया था। इसका मुख्य कार्य देश की पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना एवं संसाधनों का आवंटन करना था।
मुख्य विशेषताएँ
अध्यक्ष — प्रधानमंत्री (पदेन)। प्रथम अध्यक्ष — जवाहरलाल नेहरू।
उपाध्यक्ष — प्रथम उपाध्यक्ष गुलजारीलाल नंदा।
अन्य सदस्य — कुछ केंद्रीय मंत्री तथा विशेषज्ञ।
यह एक सलाहकार निकाय था, कार्यकारी निकाय नहीं।
इसकी सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं थीं।
2015 में इसे समाप्त करके नीति आयोग बना दिया गया।
कार्य एवं शक्तियाँ
देश के संसाधनों का आकलन करना।
पंचवर्षीय योजनाओं का प्रारूप तैयार करना।
योजनाओं की प्राथमिकताएँ निर्धारित करना।
राज्यों को वित्तीय संसाधन आवंटित करने की सिफारिश करना।
योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना।
विकास की दिशा एवं रणनीति तय करना।
📌 तथ्यात्मक जानकारी
योजना आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष गुलजारीलाल नंदा थे। स्वतंत्रता के बाद योजना आयोग का गठन करते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि यह संसद के प्रति उत्तरदायी न हो, ताकि योजना निर्माण में विशेषज्ञता एवं निरंतरता बनी रहे।
(ख) राष्ट्रीय विकास परिषद् (National Development Council)
📖 परिभाषा
राष्ट्रीय विकास परिषद् की स्थापना 6 अगस्त 1952 को की गई। यह योजना आयोग की सिफारिशों पर विचार करने तथा राज्यों के सहयोग से राष्ट्रीय योजना को अंतिम रूप देने वाली संस्था है।
गठन
अध्यक्ष — प्रधानमंत्री
सभी राज्यों के मुख्यमंत्री
सभी केंद्रीय मंत्री
योजना आयोग के सदस्य (सहभागी के रूप में)
कार्य
राष्ट्रीय योजना को अंतिम रूप देना।
योजना के क्रियान्वयन में सहयोग एवं समन्वय स्थापित करना।
राज्यों एवं केंद्र के बीच विचार-विमर्श का मंच प्रदान करना।
समय-समय पर योजनाओं की समीक्षा करना।
योजना आयोग एवं NDC की तुलना
आधार
योजना आयोग
राष्ट्रीय विकास परिषद्
स्थापना
15 मार्च 1950
6 अगस्त 1952
अध्यक्ष
प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री
सदस्य
मंत्री एवं विशेषज्ञ
सभी मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री
स्वरूप
गैर-संवैधानिक, सलाहकारी
गैर-संवैधानिक, सलाहकारी
मुख्य कार्य
योजना बनाना
योजना को अंतिम स्वरूप देना
6. मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल
📖 परिभाषा — मिश्रित अर्थव्यवस्था
मिश्रित अर्थव्यवस्था वह व्यवस्था है जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) तथा निजी क्षेत्र (Private Sector) दोनों साथ-साथ कार्य करते हैं तथा सरकार अर्थव्यवस्था के नियमन एवं नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था क्यों अपनाई गई?
भारत ने न तो पूर्ण पूँजीवाद अपनाया और न पूर्ण समाजवाद।
निजी क्षेत्र को लाभ कमाने की स्वतंत्रता दी गई, परंतु जनहित में सरकारी नियंत्रण भी रखा गया।
भारी उद्योग, रक्षा, बैंकिंग, रेलवे जैसे क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में रखे गए।
उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन निजी क्षेत्र को सौंपा गया।
💡 उदाहरण
भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ जैसे भिलाई स्टील प्लांट, BHEL, SAIL, भारतीय रेलवे सरकार के अधीन हैं, जबकि टाटा, बिड़ला, रिलायंस जैसी कंपनियाँ निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। दोनों मिलकर भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था का निर्माण करती हैं।
मिश्रित अर्थव्यवस्था के लाभ
सार्वजनिक क्षेत्र सामाजिक कल्याण का ध्यान रखता है।
निजी क्षेत्र दक्षता एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है।
रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
समाजवाद एवं पूँजीवाद के दोषों से बचाव होता है।
मिश्रित अर्थव्यवस्था की सीमाएँ
नौकरशाही एवं लालफीताशाही।
सार्वजनिक क्षेत्र में घाटा एवं अकुशलता।
भ्रष्टाचार एवं देरी।
निजी क्षेत्र का एकाधिकार।
7. पंचवर्षीय योजनाएँ (प्रथम से बारहवीं तक)
भारत में नियोजित विकास का मुख्य साधन पंचवर्षीय योजनाएँ थीं। प्रथम पंचवर्षीय योजना 1951 में लागू हुई। इसका आधार सोवियत संघ का मॉडल था, परंतु भारत ने इसे लोकतांत्रिक ढंग से लागू किया।
लक्ष्य वृद्धि दर — 2.1% ; प्राप्त वृद्धि दर — 3.6% (लक्ष्य से अधिक)
यह योजना सफल मानी जाती है।
इस योजना के अंत तक देश में खाद्यान्न की स्थिति में सुधार हुआ।
(2) द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956–1961)
आधार — महालनोबिस मॉडल (प्रो. पी.सी. महालनोबिस द्वारा तैयार)
मुख्य जोर — भारी एवं आधारभूत उद्योगों का विकास
इस योजना का उद्देश्य — तेजी से औद्योगीकरण
भिलाई (1955), राउरकेला (1957), दुर्गापुर (1960) में इस्पात संयंत्र स्थापित किए गए।
लक्ष्य वृद्धि दर — 4.5% ; प्राप्त वृद्धि दर — 4.27%
यह योजना सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण थी।
📖 महालनोबिस मॉडल
प्रो. पी.सी. महालनोबिस द्वारा तैयार यह मॉडल द्वितीय पंचवर्षीय योजना का आधार था। इस मॉडल में इस बात पर बल दिया गया कि देश के विकास के लिए भारी उद्योगों (भार उद्योग) में निवेश आवश्यक है, क्योंकि इससे दीर्घकाल में उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन भी बढ़ेगा। यह एक दीर्घकालीन विकास रणनीति थी।
(3) तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961–1966)
मुख्य जोर — कृषि एवं उद्योग दोनों का संतुलित विकास; आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था।
लक्ष्य वृद्धि दर — 5.6% ; प्राप्त वृद्धि दर — 2.4%
1962 का चीन-भारत युद्ध एवं 1965 का पाकिस्तान युद्ध।
1965–66 में भयंकर सूखा पड़ा।
विदेशी सहायता पर निर्भरता बढ़ी।
यह योजना असफल रही।
रुपये का अवमूल्यन (1966) करना पड़ा।
📌 योजना अवकाश (Plan Holiday) — 1966–1969
तृतीय योजना की विफलता, युद्ध, सूखा एवं विदेशी मुद्रा संकट के कारण तीन वर्षों तक कोई नई पंचवर्षीय योजना नहीं बनाई गई। इस अवधि को “योजना अवकाश” कहा जाता है। इस दौरान वार्षिक योजनाएँ चलाई गईं।
(4) चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (1969–1974)
मुख्य नारा — “गरीबी हटाओ” (गरीबी उन्मूलन एवं आत्मनिर्भरता)
आधार — गाडगिल फार्मूला
लक्ष्य वृद्धि दर — 5.7% ; प्राप्त वृद्धि दर — 3.3%
समाज के कमजोर वर्गों के जीवन-स्तर में सुधार पर बल।
1971 का भारत-पाक युद्ध एवं बांग्लादेश का जन्म।
1973 का तेल संकट एवं महँगाई।
यह योजना भी अपने लक्ष्य में सफल नहीं रही।
(5) पंचम पंचवर्षीय योजना (1974–1979)
मुख्य जोर — गरीबी उन्मूलन एवं आत्मनिर्भरता।
न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम (Minimum Needs Programme) शुरू किया गया।
लक्ष्य वृद्धि दर — 4.4% ; प्राप्त वृद्धि दर — 4.8%
रोजगार, गरीबी उन्मूलन, कृषि उत्पादन एवं न्याय पर बल।
1978 में जनता सरकार ने इसे एक वर्ष पूर्व ही समाप्त कर दिया।
(6) छठी पंचवर्षीय योजना (1980–1985)
मुख्य जोर — आर्थिक उदारीकरण, गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार।
लक्ष्य वृद्धि दर — 5.2% ; प्राप्त वृद्धि दर — 5.7%
IRDP (Integrated Rural Development Programme) एवं NREP जैसे कार्यक्रम शुरू हुए।
इस योजना में तकनीकी आधुनिकीकरण पर भी बल दिया गया।
(7) सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985–1990)
मुख्य जोर — रोजगार सृजन, उत्पादकता एवं खाद्यान्न उत्पादन।
“जवाहर रोजगार योजना” (1989) शुरू हुई।
लक्ष्य वृद्धि दर — 5.0% ; प्राप्त वृद्धि दर — 6.0%
सामाजिक न्याय एवं आधुनिकीकरण पर बल।
यह योजना सफल मानी जाती है।
(8) आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992–1997)
1990–92 के राजनीतिक अस्थिरता के कारण देर से शुरू हुई।
मुख्य जोर — मानव संसाधन विकास, रोजगार, जनसंख्या नियंत्रण।
आर्थिक सुधारों (1991) का प्रभाव स्पष्ट दिखा।
लक्ष्य वृद्धि दर — 5.6% ; प्राप्त वृद्धि दर — 6.8%
यह सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है।
(9) नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997–2002)
मुख्य जोर — सामाजिक न्याय एवं समता, गरीबी में कमी।
लक्ष्य वृद्धि दर — 6.5% ; प्राप्त वृद्धि दर — 5.4%
कृषि एवं ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर व्यय बढ़ाने की सिफारिश।
(10) दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002–2007)
लक्ष्य वृद्धि दर — 8.0% ; प्राप्त वृद्धि दर — 7.6%
2007 तक गरीबी 5% कम करने का लक्ष्य।
साक्षरता दर 75% करने का लक्ष्य।
सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (2005) जैसे कार्यक्रम।
(11) ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007–2012)
मुख्य जोर — “तीव्रतर एवं अधिक समावेशी विकास” (Faster and More Inclusive Growth)।
लक्ष्य वृद्धि दर — 9.0% ; प्राप्त वृद्धि दर — 8.0%
कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं पर्यावरण पर बल।
(12) बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012–2017)
मुख्य जोर — “तीव्रतर, अधिक समावेशी एवं धारणीय विकास”।
लक्ष्य वृद्धि दर — 8.0%
यह भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी।
इसके बाद 2015 में योजना आयोग की जगह नीति आयोग का गठन किया गया।
⭐ पंचवर्षीय योजनाओं की सारणी (संक्षेप में)
योजना
अवधि
मुख्य जोर
लक्ष्य / प्राप्ति
प्रथम
1951–56
कृषि एवं सिंचाई
2.1% / 3.6%
द्वितीय
1956–61
भारी उद्योग (महालनोबिस मॉडल)
4.5% / 4.27%
तृतीय
1961–66
कृषि + उद्योग (असफल)
5.6% / 2.4%
योजना अवकाश
1966–69
वार्षिक योजनाएँ
—
चतुर्थ
1969–74
गरीबी हटाओ
5.7% / 3.3%
पंचम
1974–79
गरीबी उन्मूलन + आत्मनिर्भरता
4.4% / 4.8%
षष्ठम्
1980–85
आर्थिक उदारीकरण
5.2% / 5.7%
सप्तम
1985–90
रोजगार + उत्पादकता
5.0% / 6.0%
अष्टम
1992–97
मानव संसाधन विकास
5.6% / 6.8%
नवम
1997–2002
सामाजिक न्याय एवं समता
6.5% / 5.4%
दशम
2002–07
गरीबी 5% कम करना
8.0% / 7.6%
एकादश
2007–12
समावेशी विकास
9.0% / 8.0%
द्वादश
2012–17
धारणीय विकास
8.0% / —
8. कृषि एवं भूमि सुधार
स्वतंत्रता के समय भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित थी। लगभग 70% जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी, परंतु कृषि उत्पादकता अत्यंत कम थी। इसका मुख्य कारण था — सामंती भूमि व्यवस्था (जमींदारी प्रथा)।
भूमि सुधार के प्रमुख कदम
जमींदारी उन्मूलन — जमींदारी प्रथा को समाप्त किया गया और भूमि के वास्तविक काश्तकारों को भूमि का अधिकार दिया गया।
काश्तकारी सुधार — काश्तकारों को भूमि पर सुरक्षित अधिकार एवं उचित लगान की व्यवस्था।
भूमि की अधिकतम सीमा (Land Ceiling) — एक व्यक्ति के पास अधिकतम भूमि रखने की सीमा निर्धारित की गई। अतिरिक्त भूमि सरकार द्वारा लेकर भूमिहीनों में बाँटी गई।
चकबंदी (Consolidation of Holdings) — किसानों की बिखरी हुई भूमि को एक स्थान पर एकत्रित किया गया।
सहकारी खेती को प्रोत्साहन — सामूहिक खेती को बढ़ावा।
💡 उदाहरण
केरल एवं पश्चिम बंगाल में भूमि सुधार सबसे सफल रहे, क्योंकि वहाँ राजनीतिक इच्छाशक्ति एवं किसान आंदोलन मजबूत थे। इसके विपरीत बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में भूमि सुधार अपेक्षाकृत कमजोर रहे।
भूमि सुधार की सफलताएँ एवं असफलताएँ
सफलताएँ
असफलताएँ
जमींदारी प्रथा समाप्त हुई
भूमि सुधार कानूनों का क्रियान्वयन कमजोर रहा
बड़े किसानों का प्रभाव कम हुआ
अधिकांश राज्यों में अधिकतम सीमा कानून प्रभावी नहीं हुए
कुछ किसानों को भूमि का अधिकार मिला
जमींदारों ने भूमि को रिश्तेदारों के नाम पर कर दिया
कृषि में सुधार की शुरुआत हुई
भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ
9. हरित क्रांति (Green Revolution)
📖 परिभाषा — हरित क्रांति
हरित क्रांति से तात्पर्य कृषि उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि से है, जो उन्नत किस्म के बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई सुविधाओं एवं आधुनिक तकनीक के प्रयोग द्वारा संभव हुई। भारत में यह 1966–67 से प्रारंभ हुई।
हरित क्रांति की पृष्ठभूमि
1965–66 में भारत में भयंकर सूखा पड़ा।
भारत को अमेरिका से PL-480 के तहत खाद्यान्न आयात करना पड़ा।
इस स्थिति ने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन को हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।
भारत में नॉर्मन बोरलॉग (नोबेल विजेता) ने भी सहयोग दिया।
हरित क्रांति की मुख्य विशेषताएँ
उच्च उत्पादकता वाले बीजों (HYV Seeds) का प्रयोग।
रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग।
सिंचाई सुविधाओं का विस्तार।
ट्रैक्टर एवं आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग।
कृषि शिक्षा एवं प्रशिक्षण का विस्तार।
सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था।
हरित क्रांति के लाभ
खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि (विशेषकर गेहूँ में)।
भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना।
खाद्यान्न आयात लगभग समाप्त हो गया।
किसानों की आय में वृद्धि।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े।
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिला।
हरित क्रांति की सीमाएँ एवं आलोचनाएँ
इसका लाभ मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित रहा।
पूर्वी भारत (बिहार, बंगाल, ओडिशा) में इसका प्रभाव कम रहा।
बड़े किसानों को अधिक लाभ मिला, छोटे किसान पीछे रह गए।
भूमि एवं जल संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ।
मिट्टी की उर्वरता घटी एवं जल स्तर गिरा।
क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ा।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु
हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न संकट से बाहर निकाला, परंतु इसने कृषि में क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानता को भी जन्म दिया। इसलिए इसे “आधी सफलता” कहा जा सकता है।
10. औद्योगिक विकास एवं सार्वजनिक क्षेत्र
भारत ने औद्योगिक विकास के लिए सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector) को प्राथमिकता दी। इसका उद्देश्य था — देश में भारी उद्योगों की स्थापना, आत्मनिर्भरता एवं रोजगार सृजन।
औद्योगिक नीति संकल्प (Industrial Policy Resolution)
1948 का औद्योगिक नीति संकल्प — मिश्रित अर्थव्यवस्था की दिशा में पहला कदम।
1956 का औद्योगिक नीति संकल्प — इसे “भारतीय उद्योग का मैग्ना कार्टा” कहा जाता है।
1956 की औद्योगिक नीति के प्रमुख बिंदु
उद्योग ‘A’ — जिन पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण (रक्षा, परमाणु ऊर्जा, रेलवे, बैंकिंग, बीमा)।
उद्योग ‘B’ — जिनमें सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र दोनों भाग ले सकते हैं (कोयला, इस्पात, विमानन, खनिज तेल)।
उद्योग ‘C’ — शेष उद्योग निजी क्षेत्र के लिए।
प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम
भिलाई इस्पात संयंत्र (1955) — छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्य प्रदेश)
राउरकेला इस्पात संयंत्र (1957) — ओडिशा
दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (1960) — पश्चिम बंगाल
बोकारो इस्पात संयंत्र — झारखंड
BHEL, ONGC, SAIL, GAIL, IOC जैसे उपक्रम
📌 तथ्यात्मक जानकारी
भिलाई, राउरकेला एवं दुर्गापुर इस्पात संयंत्रों की स्थापना में क्रमशः सोवियत संघ, जर्मनी एवं ब्रिटेन का सहयोग प्राप्त हुआ। इन्हें “भारत के आधुनिक मंदिर” कहा गया।
लाइसेंस राज (Licence Raj)
📖 परिभाषा
लाइसेंस राज से तात्पर्य उस व्यवस्था से है जिसमें किसी भी नए उद्योग की स्थापना, उत्पादन का विस्तार या नई वस्तु के निर्माण के लिए सरकार से लाइसेंस (अनुमति) लेना अनिवार्य था।
इसका उद्देश्य — निजी क्षेत्र पर नियंत्रण एवं संसाधनों का नियोजित उपयोग।
आलोचना — इससे नौकरशाही, भ्रष्टाचार एवं देरी बढ़ी।
1991 के बाद इसमें भारी छूट दी गई।
11. व्यापार नीति — आयात प्रतिस्थापन
📖 परिभाषा — आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution)
आयात प्रतिस्थापन वह नीति है जिसमें विदेशों से आने वाली वस्तुओं के आयात को कम करके उन वस्तुओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाता है, जिससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत हो एवं आत्मनिर्भरता बढ़े।
मुख्य विशेषताएँ
विदेशी वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क (Tariff) लगाना।
घरेलू उद्योगों को संरक्षण (Protection) देना।
विदेशी निवेश पर प्रतिबंध एवं नियंत्रण।
घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देना।
आयात लाइसेंस प्रणाली लागू करना।
लाभ
घरेलू उद्योगों को विकास का अवसर मिला।
विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
आत्मनिर्भरता बढ़ी।
औद्योगिक आधार मजबूत हुआ।
हानियाँ
भारतीय उद्योग प्रतिस्पर्धा से वंचित रह गए।
उत्पादों की गुणवत्ता घटी।
उपभोक्ताओं को ऊँची कीमत चुकानी पड़ी।
तकनीकी पिछड़ापन बढ़ा।
नौकरशाही एवं भ्रष्टाचार में वृद्धि।
12. योजना की उपलब्धियाँ एवं कमियाँ
उपलब्धियाँ (Achievements)
कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि हुई एवं भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना।
भारी उद्योगों का विशाल आधार तैयार हुआ।
विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में प्रगति हुई।
शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ।
सिंचाई सुविधाओं का विकास हुआ।
जीवन-प्रत्याशा (Life Expectancy) में वृद्धि हुई।
रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।
राष्ट्रीय आय में वृद्धि हुई।
कमियाँ (Failures)
गरीबी उन्मूलन में अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
बेरोजगारी की समस्या बनी रही।
धन एवं आय की असमानता बढ़ी।
क्षेत्रीय असंतुलन गहरा हुआ।
कृषि में निवेश की उपेक्षा हुई।
सार्वजनिक उपक्रमों में घाटा एवं अकुशलता बढ़ी।
जनसंख्या वृद्धि ने योजनाओं के लाभ को कम कर दिया।
नौकरशाही एवं भ्रष्टाचार ने योजनाओं को कमजोर बनाया।
⭐ महत्वपूर्ण निष्कर्ष
भारतीय नियोजन ने मिश्रित परिणाम दिए। एक ओर जहाँ इसने देश को कृषि एवं उद्योग में आत्मनिर्भर बनाया, वहीं दूसरी ओर गरीबी, असमानता एवं बेरोजगारी जैसी समस्याएँ पूरी तरह हल नहीं हो सकीं। इसका मुख्य कारण था — नीति निर्माण की सीमाएँ एवं क्रियान्वयन की कमजोरियाँ।
13. 1991 का उदारीकरण (LPG)
पृष्ठभूमि
1990–91 में भारत गंभीर भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payment Crisis) में फँस गया।
विदेशी मुद्रा भंडार घटकर मात्र 2 सप्ताह के आयात जितना रह गया।
खाड़ी युद्ध (1990–91) के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं एवं प्रेषण रुक गया।
राजनीतिक अस्थिरता एवं राजकोषीय घाटा बढ़ा।
भारत को IMF से सहायता लेनी पड़ी।
नई आर्थिक नीति (1991) — LPG
शब्द
अर्थ
मुख्य कदम
उदारीकरण (Liberalization)
सरकारी नियंत्रण में कमी
लाइसेंस राज समाप्त, निजी क्षेत्र को छूट
निजीकरण (Privatization)
सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में देना
विनिवेश (Disinvestment), सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका घटी
वैश्वीकरण (Globalization)
विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ाव
विदेशी निवेश (FDI), आयात शुल्क में कमी, विदेशी कंपनियों का प्रवेश
उदारीकरण के प्रभाव
विदेशी निवेश एवं तकनीक का आगमन हुआ।
सेवा क्षेत्र (IT, बैंकिंग, संचार) में तेज वृद्धि हुई।
उत्पादों की गुणवत्ता एवं विविधता बढ़ी।
आर्थिक वृद्धि दर बढ़ी।
परंतु कृषि एवं छोटे उद्योगों की उपेक्षा हुई।
आर्थिक असमानता बढ़ी।
सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका घटी।
14. नीति आयोग (NITI Aayog)
📖 परिभाषा
नीति आयोग (National Institution for Transforming India) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर की गई। यह भारत सरकार का एक नीति-निर्माण एवं सलाहकार थिंक टैंक है।
मुख्य विशेषताएँ
अध्यक्ष — प्रधानमंत्री
उपाध्यक्ष — प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त (प्रथम उपाध्यक्ष — अरविंद पनगढ़िया)
CEO — भारत सरकार द्वारा नियुक्त
सभी राज्यों के मुख्यमंत्री एवं उप-राज्यपाल इसके Governing Council के सदस्य हैं।
योजना आयोग एवं नीति आयोग में अंतर
आधार
योजना आयोग
नीति आयोग
स्थापना
1950
2015
स्वरूप
योजना बनाने वाला निकाय
थिंक टैंक / सलाहकार
संसाधन आवंटन
हाँ, राज्यों को धन आवंटित करता था
नहीं, केवल सलाह देता है
दृष्टिकोण
ऊपर से नीचे (Top-down)
नीचे से ऊपर (Bottom-up)
सहकारी संघवाद
सीमित
अधिक बल
15. महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं तथ्य
वर्ष
घटना
1938
राष्ट्रीय नियोजन समिति का गठन (अध्यक्ष — जवाहरलाल नेहरू)
1944
बॉम्बे प्लान एवं गांधीवादी योजना
1945
जनता की योजना (एम.एन. राय)
15 मार्च 1950
योजना आयोग की स्थापना
1951–56
प्रथम पंचवर्षीय योजना
6 अगस्त 1952
राष्ट्रीय विकास परिषद् की स्थापना
1956
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल) एवं औद्योगिक नीति संकल्प
1961–66
तृतीय पंचवर्षीय योजना (असफल)
1966
रुपये का अवमूल्यन
1966–69
योजना अवकाश
1966–67
हरित क्रांति का प्रारंभ
1969–74
चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (“गरीबी हटाओ”)
1974–79
पंचम पंचवर्षीय योजना
1980–85
षष्ठम् पंचवर्षीय योजना
1991
आर्थिक उदारीकरण (LPG) एवं भुगतान संतुलन संकट
1992–97
अष्टम पंचवर्षीय योजना
2007–12
एकादश पंचवर्षीय योजना
2012–17
द्वादश पंचवर्षीय योजना (अंतिम)
1 जनवरी 2015
नीति आयोग की स्थापना
⭐ अति महत्वपूर्ण तथ्य (याद रखें)
योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष — जवाहरलाल नेहरू
योजना आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष — गुलजारीलाल नंदा
द्वितीय योजना के जनक — पी.सी. महालनोबिस
हरित क्रांति के जनक (भारत) — एम.एस. स्वामीनाथन
हरित क्रांति के जनक (विश्व) — नॉर्मन बोरलॉग
1956 की औद्योगिक नीति को कहा जाता है — भारतीय उद्योग का मैग्ना कार्टा
भिलाई, राउरकेला एवं दुर्गापुर इस्पात संयंत्र — भारत के आधुनिक मंदिर
नीति आयोग की स्थापना — 1 जनवरी 2015
16. महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
योजना आयोग की स्थापना कब हुई? (15 मार्च 1950)
योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे? (जवाहरलाल नेहरू)
बॉम्बे प्लान कब प्रस्तुत हुआ? (1944)
जनता की योजना किसने प्रस्तुत की? (एम.एन. राय)
गांधीवादी योजना के प्रस्तुतकर्ता कौन थे? (श्रीमन नारायण अग्रवाल)
महालनोबिस मॉडल किस योजना का आधार था? (द्वितीय पंचवर्षीय योजना)
राष्ट्रीय विकास परिषद् की स्थापना कब हुई? (6 अगस्त 1952)
नीति आयोग की स्थापना कब हुई? (1 जनवरी 2015)
“गरीबी हटाओ” का नारा किस योजना में दिया गया? (चतुर्थ पंचवर्षीय योजना)
योजना अवकाश की अवधि क्या थी? (1966–69)
लघु उत्तरीय प्रश्न (2–3 अंक)
नियोजन से आप क्या समझते हैं?
बॉम्बे प्लान एवं गांधीवादी योजना में अंतर स्पष्ट करें।
योजना आयोग के कार्यों का वर्णन करें।
मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है?
हरित क्रांति से आप क्या समझते हैं?
लाइसेंस राज क्या था?
आयात प्रतिस्थापन नीति के लाभ एवं हानियाँ बताएँ।
योजना आयोग एवं नीति आयोग में अंतर बताएँ।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
भारत में नियोजित विकास की आवश्यकता एवं उद्देश्यों की विवेचना करें।
भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की सफलताओं एवं असफलताओं का मूल्यांकन करें।
भूमि सुधार के प्रयासों का वर्णन करें तथा बताएँ कि ये क्यों सीमित सफल रहे।
हरित क्रांति के लाभ एवं सीमाओं की व्याख्या करें।
1991 के आर्थिक उदारीकरण के कारणों एवं प्रभावों का वर्णन करें।
“नियोजित विकास की राजनीति” में नेहरू की भूमिका का मूल्यांकन करें।
दीर्घ निबंधात्मक प्रश्न (8–10 अंक)
स्वतंत्रता के बाद भारत में अपनाए गए नियोजित विकास के मॉडल की विस्तृत विवेचना करें।
भारत में नियोजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, योजना आयोग की भूमिका एवं पंचवर्षीय योजनाओं का मूल्यांकन करें।
“भारत में नियोजित विकास ने मिश्रित परिणाम दिए” — इस कथन की समीक्षा करें।
⭐ परीक्षा टिप्स
तिथियों एवं नामों को अच्छी तरह याद करें — वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में अधिक पूछे जाते हैं।
तुलनात्मक प्रश्नों (जैसे योजना आयोग बनाम नीति आयोग) में सारणी बनाकर लिखें — अंक अधिक मिलते हैं।
“महालनोबिस मॉडल”, “हरित क्रांति”, “भूमि सुधार” तीनों टॉपिक्स से हर वर्ष प्रश्न आते हैं।
उत्तर में उदाहरण अवश्य लिखें — इससे उत्तर प्रभावी बनता है।