कक्षा 12 राजनीति विज्ञान – अध्याय 7: समकालीन विश्व में सुरक्षा
सुरक्षा किसी भी राष्ट्र की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। परंपरागत रूप से सुरक्षा का तात्पर्य सैन्य खतरों से रक्षा करना था। लेकिन समकालीन विश्व में सुरक्षा की अवधारणा व्यापक हो गई है। अब इसमें आतंकवाद, मानवाधिकार, पर्यावरण, स्वास्थ्य, प्रवास और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। इस अध्याय में हम सुरक्षा की परंपरागत और गैर-परंपरागत अवधारणाओं, भारत की सुरक्षा चिंताओं तथा सहयोगात्मक सुरक्षा का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
शीत युद्ध की समाप्ति के बाद विश्व में सुरक्षा की प्रकृति में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। अब सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित करती है। इस अध्याय में हम इन सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
इस अध्याय का शीर्षक “समकालीन विश्व में सुरक्षा” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय आधुनिक विश्व में सुरक्षा की बदलती अवधारणा तथा विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।
1. सुरक्षा का अर्थ एवं परिभाषा
1.1 सुरक्षा क्या है?
सुरक्षा का तात्पर्य उन खतरों से बचाव से है जो किसी राष्ट्र या समाज की स्वतंत्रता, संप्रभुता और अस्तित्व को चुनौती देते हैं। सुरक्षा एक बहुआयामी अवधारणा है जिसमें सैन्य, आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय पहलू शामिल हैं।
1.2 सुरक्षा के प्रकार
- परंपरागत सुरक्षा – सैन्य खतरे, युद्ध, आक्रमण।
- गैर-परंपरागत सुरक्षा – आतंकवाद, मानवाधिकार, पर्यावरण, स्वास्थ्य, प्रवास।
- राष्ट्रीय सुरक्षा – किसी राष्ट्र की सुरक्षा।
- मानवीय सुरक्षा – व्यक्ति की सुरक्षा।
- सहयोगात्मक सुरक्षा – देशों के बीच सहयोग से सुरक्षा।
1.3 सुरक्षा की विशेषताएँ
- सुरक्षा बहुआयामी है।
- यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर होती है।
- यह समय और परिस्थिति के साथ बदलती है।
- यह सैन्य और गैर-सैन्य दोनों खतरों से जुड़ी है।
- यह व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों को प्रभावित करती है।
2. परंपरागत सुरक्षा की अवधारणा
2.1 परंपरागत सुरक्षा का अर्थ
परंपरागत सुरक्षा का तात्पर्य सैन्य खतरों से रक्षा करने से है। इसमें युद्ध, आक्रमण, सीमा विवाद, सैन्य गठबंधन, हथियारों की दौड़ आदि शामिल हैं। परंपरागत सुरक्षा का केंद्र बिंदु राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा है।
2.2 परंपरागत सुरक्षा के प्रमुख पहलू
- सैन्य खतरे – किसी देश द्वारा दूसरे देश पर आक्रमण।
- युद्ध – देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष।
- सैन्य गठबंधन – नाटो, वारसा संधि जैसे गठबंधन।
- हथियारों की दौड़ – परमाणु और पारंपरिक हथियारों का निर्माण।
- आतंकवाद – आतंकवादी हमले।
- शक्ति संतुलन – देशों के बीच शक्ति का संतुलन।
2.3 परंपरागत सुरक्षा की नीतियाँ
- निरोध (Deterrence) – शत्रु को हमला करने से रोकना।
- रक्षा (Defence) – अपने देश की रक्षा करना।
- संतुलन (Balance of Power) – शक्ति का संतुलन बनाए रखना।
- गठबंधन (Alliance) – अन्य देशों के साथ मिलकर सुरक्षा।
3. गैर-परंपरागत सुरक्षा की अवधारणा
3.1 गैर-परंपरागत सुरक्षा का अर्थ
गैर-परंपरागत सुरक्षा का तात्पर्य उन खतरों से है जो सैन्य नहीं हैं, लेकिन राष्ट्र और समाज की सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। इनमें आतंकवाद, मानवाधिकार उल्लंघन, पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, महामारियाँ, अवैध प्रवास, साइबर अपराध आदि शामिल हैं।
3.2 गैर-परंपरागत सुरक्षा के प्रमुख पहलू
- आतंकवाद – आतंकवादी हमले और उग्रवाद।
- मानवाधिकार – मानवाधिकारों का उल्लंघन।
- पर्यावरण – प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन।
- स्वास्थ्य – महामारियाँ, संक्रामक रोग।
- प्रवास – अवैध प्रवास, शरणार्थी संकट।
- साइबर सुरक्षा – साइबर अपराध, हैकिंग।
- ऊर्जा सुरक्षा – ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा।
- खाद्य सुरक्षा – खाद्यान्न की उपलब्धता।
- जल सुरक्षा – जल संसाधनों की सुरक्षा।
3.3 गैर-परंपरागत सुरक्षा की विशेषताएँ
- ये खतरे सैन्य नहीं होते।
- ये सीमाओं से परे होते हैं।
- ये व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को प्रभावित करते हैं।
- इनका समाधान सहयोग से संभव है।
- ये दीर्घकालिक होते हैं।
4. आतंकवाद
4.1 आतंकवाद का अर्थ
आतंकवाद का तात्पर्य राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए हिंसा और डर का प्रयोग करने से है। आतंकवादी नागरिकों पर हमला करते हैं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हैं और समाज में भय फैलाते हैं।
4.2 आतंकवाद के कारण
- राजनीतिक अस्थिरता।
- आर्थिक असमानता।
- धार्मिक उग्रवाद।
- जातीय और राष्ट्रीयता संघर्ष।
- सामाजिक अन्याय।
- राज्य प्रायोजित आतंकवाद।
- गरीबी और बेरोजगारी।
4.3 आतंकवाद के प्रभाव
- नागरिकों की मृत्यु।
- सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान।
- सामाजिक भय और अस्थिरता।
- आर्थिक नुकसान।
- पर्यटन पर प्रभाव।
- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव।
- मानवाधिकारों का हनन।
4.4 आतंकवाद के विरुद्ध उपाय
- सैन्य कार्रवाई।
- खुफिया जानकारी।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
- आतंकवादियों के वित्तीय स्रोतों को रोकना।
- कानूनी कार्रवाई।
- सामाजिक और आर्थिक विकास।
- जन जागरूकता।
5. मानवाधिकार और सुरक्षा
5.1 मानवाधिकार का अर्थ
मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को जन्म से ही प्राप्त होते हैं। ये अधिकार जाति, धर्म, लिंग, भाषा या राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव के बिना सभी को प्राप्त हैं।
5.2 मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा
- 10 दिसंबर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) अपनाई।
- इसमें 30 अनुच्छेद हैं।
- यह मानवाधिकारों का अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेज है।
- 10 दिसंबर को ‘मानवाधिकार दिवस’ मनाया जाता है।
- भारत ने भी इस घोषणा का समर्थन किया।
5.3 मानवाधिकारों के प्रकार
- नागरिक और राजनीतिक अधिकार – जीवन, स्वतंत्रता, समानता, अभिव्यक्ति।
- आर्थिक और सामाजिक अधिकार – शिक्षा, स्वास्थ्य, काम, आवास।
- सामूहिक अधिकार – विकास, पर्यावरण, शांति।
5.4 मानवाधिकारों की चुनौतियाँ
- सरकारी दमन।
- आतंकवाद।
- गरीबी और असमानता।
- सशस्त्र संघर्ष।
- भेदभाव।
- महामारियाँ।
6. पर्यावरण और सुरक्षा
6.1 पर्यावरणीय सुरक्षा का अर्थ
पर्यावरणीय सुरक्षा का तात्पर्य पर्यावरणीय खतरों से बचाव से है। इसमें जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि, जल संकट आदि शामिल हैं।
6.2 पर्यावरणीय खतरे
- जलवायु परिवर्तन – ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन।
- प्रदूषण – वायु, जल और भूमि प्रदूषण।
- वनों की कटाई – वन क्षेत्र में कमी।
- जैव विविधता की हानि – प्रजातियों का विलुप्त होना।
- जल संकट – स्वच्छ जल की कमी।
- मरुस्थलीकरण – उपजाऊ भूमि का मरुस्थल में बदलना।
- ओजोन परत का क्षरण – ओजोन परत में छेद।
6.3 पर्यावरणीय सुरक्षा के उपाय
- अंतर्राष्ट्रीय समझौते – पेरिस समझौता, क्योटो प्रोटोकॉल।
- नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग।
- वृक्षारोपण।
- प्रदूषण नियंत्रण।
- जन जागरूकता।
- सतत विकास।
7. स्वास्थ्य और सुरक्षा
7.1 स्वास्थ्य सुरक्षा का अर्थ
स्वास्थ्य सुरक्षा का तात्पर्य महामारियों और संक्रामक रोगों से बचाव से है। कोविड-19 महामारी ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य एक वैश्विक सुरक्षा मुद्दा है।
7.2 प्रमुख महामारियाँ
- कोविड-19 (2019-2023)।
- एचआईवी/एड्स।
- स्वाइन फ्लू।
- इबोला।
- जीका वायरस।
7.3 स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय
- टीकाकरण।
- स्वास्थ्य सेवाओं का विकास।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
- WHO की भूमिका।
- जन जागरूकता।
8. प्रवास और सुरक्षा
8.1 प्रवास का अर्थ
प्रवास का तात्पर्य लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने से है। अवैध प्रवास और शरणार्थी संकट सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
8.2 प्रवास के कारण
- आर्थिक अवसर।
- राजनीतिक अस्थिरता।
- युद्ध और संघर्ष।
- प्राकृतिक आपदाएँ।
- धार्मिक उत्पीड़न।
- जलवायु परिवर्तन।
8.3 प्रवास के प्रभाव
- शरणार्थी संकट।
- सामाजिक तनाव।
- आर्थिक बोझ।
- राजनीतिक अस्थिरता।
- मानवाधिकारों का हनन।
9. साइबर सुरक्षा
9.1 साइबर सुरक्षा का अर्थ
साइबर सुरक्षा का तात्पर्य कंप्यूटर, नेटवर्क और डिजिटल डेटा की सुरक्षा से है। साइबर अपराध, हैकिंग, डेटा चोरी, साइबर आतंकवाद आदि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियाँ हैं।
9.2 साइबर खतरे
- हैकिंग।
- डेटा चोरी।
- साइबर आतंकवाद।
- फिशिंग।
- मैलवेयर।
- पहचान की चोरी।
9.3 साइबर सुरक्षा के उपाय
- मजबूत पासवर्ड।
- एंटीवायरस सॉफ्टवेयर।
- साइबर कानून।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
- जन जागरूकता।
- साइबर सुरक्षा एजेंसियाँ।
10. भारत की सुरक्षा चिंताएँ
10.1 सीमा विवाद
- पाकिस्तान के साथ कश्मीर विवाद।
- चीन के साथ सीमा विवाद।
- नेपाल के साथ कालापानी विवाद।
- बांग्लादेश के साथ सीमा समझौता (2015 में हल)।
10.2 आतंकवाद
- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद।
- पूर्वोत्तर में उग्रवाद।
- नक्सलवाद।
- 2001 में संसद पर हमला।
- 2008 में मुंबई हमला।
- 2016 में उरी हमला।
- 2019 में पुलवामा हमला।
10.3 अन्य सुरक्षा चिंताएँ
- परमाणु खतरा।
- ऊर्जा सुरक्षा।
- जल सुरक्षा।
- खाद्य सुरक्षा।
- साइबर सुरक्षा।
- पर्यावरणीय सुरक्षा।
- महामारियाँ।
11. सहयोगात्मक सुरक्षा
11.1 सहयोगात्मक सुरक्षा का अर्थ
सहयोगात्मक सुरक्षा का तात्पर्य देशों के बीच सहयोग के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित करने से है। यह पारंपरिक सैन्य गठबंधनों से भिन्न है। इसमें सभी देशों की साझा सुरक्षा पर जोर दिया जाता है।
11.2 सहयोगात्मक सुरक्षा की विशेषताएँ
- यह सभी देशों की साझा सुरक्षा पर जोर देती है।
- यह सैन्य और गैर-सैन्य दोनों खतरों का सामना करती है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है।
- यह शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देती है।
- यह संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका को महत्व देती है।
11.3 सहयोगात्मक सुरक्षा के उदाहरण
- संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन।
- आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहयोग।
- जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता।
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT)।
- जैविक हथियार संधि।
- रासायनिक हथियार संधि।
12. सुरक्षा की नई अवधारणा – मानवीय सुरक्षा
12.1 मानवीय सुरक्षा का अर्थ
मानवीय सुरक्षा का तात्पर्य व्यक्ति की सुरक्षा से है। यह राष्ट्र की सुरक्षा से भिन्न है। इसमें व्यक्ति की आर्थिक, खाद्य, स्वास्थ्य, पर्यावरण, व्यक्तिगत, सामुदायिक और राजनीतिक सुरक्षा शामिल है।
12.2 मानवीय सुरक्षा के सात तत्व
- आर्थिक सुरक्षा – आय और रोजगार की सुरक्षा।
- खाद्य सुरक्षा – भोजन की उपलब्धता।
- स्वास्थ्य सुरक्षा – स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच।
- पर्यावरण सुरक्षा – स्वच्छ पर्यावरण।
- व्यक्तिगत सुरक्षा – हिंसा से सुरक्षा।
- सामुदायिक सुरक्षा – संस्कृति की सुरक्षा।
- राजनीतिक सुरक्षा – मानवाधिकारों की सुरक्षा।
12.3 मानवीय सुरक्षा का महत्व
- यह व्यक्ति को केंद्र में रखती है।
- यह गरीबी और असमानता को कम करने पर जोर देती है।
- यह मानवाधिकारों की रक्षा करती है।
- यह सतत विकास को बढ़ावा देती है।
- यह वैश्विक सहयोग पर जोर देती है।
13. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- सुरक्षा – खतरों से बचाव।
- परंपरागत सुरक्षा – सैन्य खतरों से रक्षा।
- गैर-परंपरागत सुरक्षा – सैन्य खतरों के अलावा अन्य खतरे।
- आतंकवाद – राजनीतिक उद्देश्यों के लिए हिंसा और डर का प्रयोग।
- मानवाधिकार – वे अधिकार जो प्रत्येक व्यक्ति को जन्म से प्राप्त हैं।
- सहयोगात्मक सुरक्षा – देशों के बीच सहयोग से सुरक्षा।
- मानवीय सुरक्षा – व्यक्ति की सुरक्षा।
- साइबर सुरक्षा – कंप्यूटर और डिजिटल डेटा की सुरक्षा।
14. महत्वपूर्ण तथ्य
- 10 दिसंबर, 1948 को मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा अपनाई गई।
- 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है।
- 2001 में भारतीय संसद पर हमला हुआ।
- 2008 में मुंबई हमला हुआ।
- 2016 में उरी हमला हुआ।
- 2019 में पुलवामा हमला हुआ।
- कोविड-19 (2019-2023) एक वैश्विक महामारी थी।
- 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण किया।
- 2015 में भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता लागू हुआ।
- 2015 में पेरिस समझौता हुआ।
- 1997 में क्योटो प्रोटोकॉल हुआ।
- संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत सक्रिय भागीदार है।
15. निष्कर्ष
अध्याय 7 “समकालीन विश्व में सुरक्षा” आधुनिक विश्व में सुरक्षा की बदलती अवधारणा तथा विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:
- सुरक्षा का अर्थ – यह खतरों से बचाव है।
- परंपरागत सुरक्षा – सैन्य खतरे, युद्ध, गठबंधन।
- गैर-परंपरागत सुरक्षा – आतंकवाद, मानवाधिकार, पर्यावरण।
- आतंकवाद – यह एक वैश्विक चुनौती है।
- मानवाधिकार – मानवाधिकारों की रक्षा आवश्यक है।
- पर्यावरण सुरक्षा – जलवायु परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा है।
- सहयोगात्मक सुरक्षा – यह साझा सुरक्षा पर जोर देती है।
- मानवीय सुरक्षा – यह व्यक्ति को केंद्र में रखती है।
इस अध्याय का महत्व:
- यह सुरक्षा की बदलती अवधारणा को समझाता है।
- यह विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों को स्पष्ट करता है।
- यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह भारत की सुरक्षा नीति को समझने में सहायक है।
- यह आगे के अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।
इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।
