कक्षा 12 राजनीति विज्ञान – अध्याय 5: समकालीन दक्षिण एशिया

दक्षिण एशिया विश्व के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान शामिल हैं। यह क्षेत्र विविधता, संघर्ष और सहयोग का क्षेत्र रहा है। शीत युद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। इस अध्याय में हम दक्षिण एशिया के देशों के बीच संबंधों, सहयोग तथा संघर्षों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

दक्षिण एशिया की विशेषता यह है कि यहाँ के देशों में लोकतंत्र, विकास, सुरक्षा तथा क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है और उसकी भूमिका निर्णायक है।

इस अध्याय का शीर्षक “समकालीन दक्षिण एशिया” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय दक्षिण एशिया के देशों के बीच संबंधों, सहयोग तथा संघर्षों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।

1. दक्षिण एशिया का परिचय

1.1 दक्षिण एशिया का भौगोलिक विस्तार

  • दक्षिण एशिया में 8 देश शामिल हैं – भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान।
  • यह क्षेत्र हिमालय से हिंद महासागर तक फैला हुआ है।
  • इसकी जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 25% है।
  • यह क्षेत्र विश्व के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है।
  • दक्षिण एशिया में विविध संस्कृतियाँ, भाषाएँ और धर्म हैं।

1.2 दक्षिण एशिया की विशेषताएँ

  • यह क्षेत्र सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक विविधता से भरा है।
  • यहाँ के देशों में गरीबी और असमानता की समस्या है।
  • यह क्षेत्र राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित रहा है।
  • भारत-पाकिस्तान संबंध इस क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित करते हैं।
  • यह क्षेत्र आतंकवाद से भी प्रभावित है।
  • यहाँ लोकतंत्र का विकास असमान रहा है।

1.3 दक्षिण एशिया के देशों का परिचय

  • भारत – क्षेत्र का सबसे बड़ा देश, विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र।
  • पाकिस्तान – भारत का पड़ोसी देश, 1947 में विभाजन के बाद बना।
  • बांग्लादेश – 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्र हुआ।
  • नेपाल – हिमालयी देश, भारत और चीन के बीच स्थित।
  • भूटान – हिमालयी देश, भारत का मित्र।
  • श्रीलंका – द्वीप देश, गृहयुद्ध से प्रभावित।
  • मालदीव – छोटा द्वीप देश।
  • अफगानिस्तान – युद्धग्रस्त देश, 2007 में SAARC में शामिल।
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2. सार्क (SAARC)

2.1 सार्क की स्थापना

  • सार्क की स्थापना 8 दिसंबर, 1985 को ढाका (बांग्लादेश) में हुई।
  • इसका पूरा नाम – साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन।
  • संस्थापक सदस्य – भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव।
  • 2007 में अफगानिस्तान भी सार्क में शामिल हुआ।
  • सार्क का मुख्यालय काठमांडू (नेपाल) में है।

2.2 सार्क के उद्देश्य

  • क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
  • आर्थिक विकास को गति देना।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना।
  • सामूहिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
  • आपसी विश्वास और समझ बढ़ाना।
  • आतंकवाद और उग्रवाद का मुकाबला करना।
  • गरीबी उन्मूलन।

2.3 सार्क की उपलब्धियाँ

  • सार्क शिखर सम्मेलनों का नियमित आयोजन।
  • साफ्टा (SAFTA) की स्थापना – दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र।
  • क्षेत्रीय सहयोग में वृद्धि।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
  • आर्थिक सहयोग में प्रगति।

2.4 सार्क की चुनौतियाँ

  • भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण सहयोग बाधित।
  • सदस्य देशों के बीच आपसी अविश्वास।
  • सीमा विवाद।
  • आतंकवाद की समस्या।
  • आर्थिक असमानता।
  • राजनीतिक अस्थिरता।
  • संगठनात्मक कमजोरी।
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3. भारत-पाकिस्तान संबंध

3.1 विभाजन और कश्मीर समस्या

  • 1947 में भारत का विभाजन हुआ।
  • कश्मीर का मुद्दा भारत-पाकिस्तान के बीच मुख्य विवाद है।
  • 1947-48 में पहला भारत-पाक युद्ध हुआ।
  • 1949 में युद्धविराम रेखा (LOC) बनी।
  • 1965 में दूसरा भारत-पाक युद्ध हुआ।
  • 1966 में ताशकंद समझौता हुआ।
  • 1971 में तीसरा भारत-पाक युद्ध हुआ।
  • 1972 में शिमला समझौता हुआ।

3.2 परमाणु परीक्षण और तनाव

  • 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया।
  • इसके बाद पाकिस्तान ने भी परीक्षण किया।
  • 1999 में कारगिल युद्ध हुआ।
  • 2001 में भारतीय संसद पर हमला हुआ।
  • 2008 में मुंबई हमला हुआ।
  • 2016 में उरी हमला हुआ।
  • 2019 में पुलवामा हमला हुआ।

3.3 सहयोग के प्रयास

  • 1988 में भारत-पाक के बीच अनुकूल संबंधों की शुरुआत।
  • 1999 में लाहौर बस यात्रा।
  • 2001 में आगरा शिखर सम्मेलन।
  • 2004 में संयुक्त बयान।
  • 2015 में नवाज शरीफ की भारत यात्रा।
  • व्यापार और जनसंपर्क बढ़ाने के प्रयास।
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4. भारत-बांग्लादेश संबंध

4.1 ऐतिहासिक संबंध

  • 1971 में भारत ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1972 में भारत-बांग्लादेश मैत्री संधि हुई।
  • 1974 में भूमि सीमा समझौता हुआ।
  • 2015 में भूमि सीमा समझौता लागू हुआ।

4.2 प्रमुख मुद्दे

  • तीस्ता जल विवाद – नदी जल के बँटवारे का मुद्दा।
  • अवैध प्रवास – बांग्लादेश से भारत में अवैध प्रवास।
  • सीमा विवाद – कुछ सीमा क्षेत्रों पर विवाद।
  • व्यापार असंतुलन – व्यापार में असंतुलन।
  • आतंकवाद – आतंकवादियों के शरण की समस्या।

4.3 सहयोग के क्षेत्र

  • व्यापार और निवेश।
  • परिवहन और संपर्क।
  • ऊर्जा सहयोग।
  • जल संसाधन प्रबंधन।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
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5. भारत-नेपाल संबंध

5.1 ऐतिहासिक संबंध

  • भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा है।
  • 1950 में भारत-नेपाल शांति और मैत्री संधि हुई।
  • नेपाल भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी है।
  • दोनों देशों के बीच जनसंपर्क अधिक है।

5.2 प्रमुख मुद्दे

  • सीमा विवाद – कालापानी और सुस्ता क्षेत्र।
  • जल विवाद – नदी जल के बँटवारे का मुद्दा।
  • व्यापार असंतुलन – व्यापार में असंतुलन।
  • चीन का प्रभाव – नेपाल पर चीन का बढ़ता प्रभाव।

5.3 सहयोग के क्षेत्र

  • जल विद्युत परियोजनाएँ।
  • व्यापार और निवेश।
  • परिवहन और संपर्क।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य।
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6. भारत-श्रीलंका संबंध

6.1 ऐतिहासिक संबंध

  • भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं।
  • श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यकों की समस्या रही है।
  • 1987 में भारत-श्रीलंका समझौता हुआ।
  • भारत ने श्रीलंका में शांति सेना भेजी।

6.2 प्रमुख मुद्दे

  • तमिल समस्या – श्रीलंकाई तमिलों की स्थिति।
  • मछुआरों का मुद्दा – मछुआरों की गिरफ्तारी।
  • चीन का प्रभाव – श्रीलंका पर चीन का बढ़ता प्रभाव।
  • कच्चातीवू द्वीप – इस द्वीप पर विवाद।

6.3 सहयोग के क्षेत्र

  • व्यापार और निवेश।
  • विकास सहयोग।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
  • रक्षा सहयोग।
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7. भारत-भूटान संबंध

  • भारत और भूटान के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
  • 1949 में भारत-भूटान मैत्री संधि हुई।
  • 2007 में संशोधित संधि हुई।
  • भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • भारत भूटान को आर्थिक सहायता देता है।
  • जल विद्युत परियोजनाओं में सहयोग।
  • चीन के साथ भूटान का सीमा विवाद।
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8. भारत-मालदीव संबंध

  • भारत और मालदीव के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
  • 1988 में भारत ने मालदीव की सहायता की।
  • भारत मालदीव को आर्थिक सहायता देता है।
  • रक्षा सहयोग में वृद्धि।
  • चीन के बढ़ते प्रभाव की चिंता।
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9. दक्षिण एशिया में लोकतंत्र

9.1 लोकतंत्र की स्थिति

  • भारत – विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र।
  • पाकिस्तान – सैन्य शासन और लोकतंत्र के बीच उतार-चढ़ाव।
  • बांग्लादेश – लोकतंत्र में प्रगति।
  • नेपाल – राजतंत्र से गणतंत्र की ओर।
  • श्रीलंका – लोकतंत्र में स्थिरता।
  • भूटान – राजतंत्र से लोकतंत्र की ओर।
  • मालदीव – लोकतंत्र में प्रगति।

9.2 लोकतंत्र की चुनौतियाँ

  • सैन्य हस्तक्षेप।
  • राजनीतिक अस्थिरता।
  • भ्रष्टाचार।
  • मानवाधिकारों का हनन।
  • चुनावी धांधली।
  • आतंकवाद।
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10. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • सार्क – दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन।
  • साफ्टा – दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र।
  • LOC – नियंत्रण रेखा, भारत-पाक के बीच।
  • LAC – वास्तविक नियंत्रण रेखा, भारत-चीन के बीच।
  • तमिल समस्या – श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यकों की समस्या।
  • कालापानी – भारत-नेपाल सीमा विवाद क्षेत्र।
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11. महत्वपूर्ण तथ्य

  • सार्क की स्थापना 1985 में ढाका में हुई।
  • सार्क का मुख्यालय काठमांडू में है।
  • 2007 में अफगानिस्तान सार्क में शामिल हुआ।
  • 1971 में बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ।
  • 1972 में शिमला समझौता हुआ।
  • 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण किया।
  • 1999 में कारगिल युद्ध हुआ।
  • 2008 में मुंबई हमला हुआ।
  • 2015 में भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता लागू हुआ।
  • 2019 में पुलवामा हमला हुआ।
  • भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश है।
  • दक्षिण एशिया की जनसंख्या विश्व की 25% है।
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12. निष्कर्ष

अध्याय 5 “समकालीन दक्षिण एशिया” दक्षिण एशिया के देशों के बीच संबंधों, सहयोग तथा संघर्षों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:

  • दक्षिण एशिया का परिचय – इस क्षेत्र में 8 देश शामिल हैं।
  • सार्क – यह क्षेत्रीय सहयोग का संगठन है।
  • भारत-पाकिस्तान संबंध – कश्मीर विवाद मुख्य मुद्दा है।
  • भारत-बांग्लादेश संबंध – सहयोग और विवाद दोनों हैं।
  • भारत-नेपाल संबंध – खुली सीमा और सहयोग।
  • भारत-श्रीलंका संबंध – तमिल समस्या मुख्य मुद्दा है।
  • लोकतंत्र – दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का विकास असमान है।

इस अध्याय का महत्व:

  • यह दक्षिण एशिया के देशों के बीच संबंधों को समझाता है।
  • यह क्षेत्रीय सहयोग की चुनौतियों को स्पष्ट करता है।
  • यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह भारत की पड़ोसी नीति को समझने में सहायक है।
  • यह आगे के अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।

इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।

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