कक्षा 12 राजनीति विज्ञान – अध्याय 4: सत्ता के वैकल्पिक केंद्र
शीत युद्ध की समाप्ति के बाद विश्व में अमेरिका की एकमात्र महाशक्ति के रूप में स्थापना हुई। हालाँकि, समय के साथ विश्व में अनेक नए शक्ति केंद्रों का उदय हुआ, जिन्होंने अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती दी। इन शक्ति केंद्रों को ‘सत्ता के वैकल्पिक केंद्र’ कहा जाता है। इनमें यूरोपीय संघ (EU), आसियान (ASEAN), चीन, जापान, ब्रिक्स (BRICS) आदि प्रमुख हैं।
इस अध्याय में हम इन वैकल्पिक शक्ति केंद्रों के उदय, विकास, उनकी विशेषताओं तथा विश्व राजनीति में उनकी भूमिका का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय समकालीन विश्व व्यवस्था को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अध्याय का शीर्षक “सत्ता के वैकल्पिक केंद्र” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय उन शक्ति केंद्रों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है जो अमेरिकी वर्चस्व के विकल्प के रूप में उभरे हैं।
1. यूरोपीय संघ (European Union – EU)
1.1 यूरोपीय संघ का उदय
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के देशों ने आर्थिक और राजनीतिक सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाए।
- 1951 में यूरोपीय कोल एंड स्टील कम्युनिटी (ECSC) की स्थापना हुई।
- 1957 में रोम की संधि द्वारा यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) की स्थापना हुई।
- 1992 में मास्ट्रिच संधि द्वारा यूरोपीय संघ (EU) की स्थापना हुई।
- यह संधि 1993 में लागू हुई।
- यूरोपीय संघ का मुख्यालय ब्रसेल्स (बेल्जियम) में है।
1.2 यूरोपीय संघ की विशेषताएँ
- यह एक आर्थिक और राजनीतिक संघ है।
- सदस्य देशों के बीच स्वतंत्र व्यापार और आवागमन है।
- यूरो को सामान्य मुद्रा के रूप में अपनाया गया।
- यूरोपीय संसद, यूरोपीय आयोग और यूरोपीय न्यायालय जैसी संस्थाएँ हैं।
- यह विश्व का सबसे बड़ा आर्थिक समूह है।
- यूरोपीय संघ का GDP विश्व में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है।
1.3 यूरोपीय संघ की उपलब्धियाँ
- यूरोप में शांति और स्थिरता स्थापित हुई।
- आर्थिक सहयोग से विकास हुआ।
- सदस्य देशों के बीच आवागमन आसान हुआ।
- मानवाधिकारों और लोकतंत्र को बढ़ावा मिला।
- पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया गया।
1.4 यूरोपीय संघ की चुनौतियाँ
- सदस्य देशों के बीच आर्थिक असमानता।
- 2015 में शरणार्थी संकट।
- ब्रेक्सिट (2016) – ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से बाहर निकलना।
- रूस के साथ तनाव।
- आतंकवाद की समस्या।
- सदस्य देशों में राष्ट्रवाद का उदय।
2. आसियान (ASEAN)
2.1 आसियान की स्थापना
- आसियान की स्थापना 8 अगस्त, 1967 को हुई।
- इसका पूरा नाम – एसोसिएशन ऑफ साउथ-ईस्ट एशियन नेशंस।
- संस्थापक सदस्य – इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड।
- इसका मुख्यालय जकार्ता (इंडोनेशिया) में है।
- आसियान का उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक और राजनीतिक सहयोग था।
2.2 आसियान के सदस्य देश
- ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम।
- कुल 10 सदस्य देश हैं।
2.3 आसियान की विशेषताएँ
- आसियान एक आर्थिक और सांस्कृतिक संगठन है।
- यह शांति और सहयोग को बढ़ावा देता है।
- आसियान ने आर्थिक एकीकरण की दिशा में प्रगति की।
- 2003 में आसियान समुदाय की स्थापना का निर्णय लिया गया।
- 2007 में आसियान चार्टर अपनाया गया।
2.4 आसियान के तीन स्तंभ
- आसियान सुरक्षा समुदाय – सुरक्षा सहयोग।
- आसियान आर्थिक समुदाय – आर्थिक एकीकरण।
- आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय – सांस्कृतिक सहयोग।
2.5 आसियान की उपलब्धियाँ
- दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति स्थापित हुई।
- आर्थिक विकास हुआ।
- क्षेत्रीय सहयोग बढ़ा।
- आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) की स्थापना हुई।
- पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई।
3. चीन का उदय
3.1 चीन का आर्थिक विकास
- 1949 में चीनी क्रांति के बाद पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई।
- 1978 में डेंग शियाओपिंग ने आर्थिक सुधार शुरू किए।
- चीन ने बाजार अर्थव्यवस्था के तत्वों को अपनाया।
- चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।
- चीन विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक देश है।
- चीन ने गरीबी उन्मूलन में उल्लेखनीय प्रगति की।
3.2 चीन की सैन्य शक्ति
- चीन का सैन्य बजट विश्व में दूसरे स्थान पर है।
- चीन के पास परमाणु हथियार हैं।
- चीन ने अपनी नौसेना और वायुसेना को आधुनिक बनाया।
- चीन अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी आगे बढ़ा।
3.3 चीन की विदेश नीति
- चीन शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांत में विश्वास करता है।
- चीन ने अनेक देशों के साथ व्यापारिक संबंध बनाए।
- चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) चला रहा है।
- चीन शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) का सदस्य है।
- चीन ब्रिक्स का भी सदस्य है।
3.4 चीन की चुनौतियाँ
- ताइवान का मुद्दा।
- मानवाधिकारों पर आलोचना।
- अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव।
- भारत के साथ सीमा विवाद।
- दक्षिण चीन सागर में विवाद।
- आंतरिक असमानता।
4. जापान
4.1 जापान का आर्थिक विकास
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने तेज आर्थिक विकास किया।
- जापान विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- जापान तकनीकी नवाचार में अग्रणी है।
- टोयोटा, सोनी, पैनासोनिक जैसी कंपनियाँ जापानी हैं।
- जापान का जीवन स्तर विश्व में सबसे ऊँचा है।
4.2 जापान की विदेश नीति
- जापान अमेरिका का मित्र देश है।
- जापान की विदेश नीति आर्थिक हितों पर केंद्रित है।
- जापान ने सैन्य शक्ति पर सीमाएँ लगाई हैं।
- जापान संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थायी सदस्यता चाहता है।
4.3 जापान की चुनौतियाँ
- जनसंख्या की वृद्धि दर कम होना।
- वृद्ध जनसंख्या।
- चीन के साथ तनाव।
- आर्थिक मंदी।
- प्राकृतिक आपदाएँ।
5. ब्रिक्स (BRICS)
5.1 ब्रिक्स की स्थापना
- ब्रिक्स का पूरा नाम – ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका।
- 2006 में BRIC (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) का गठन हुआ।
- 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने पर BRICS बना।
- ब्रिक्स का उद्देश्य विकासशील देशों का सहयोग है।
- ब्रिक्स विश्व की 40% जनसंख्या और 25% GDP का प्रतिनिधित्व करता है।
5.2 ब्रिक्स के उद्देश्य
- आर्थिक सहयोग बढ़ाना।
- विकासशील देशों की आवाज़ उठाना।
- अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार।
- वैश्विक शासन में भागीदारी।
- सतत विकास।
5.3 ब्रिक्स की उपलब्धियाँ
- नई विकास बैंक (NDB) की स्थापना।
- आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) का गठन।
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों का आयोजन।
- व्यापार और निवेश में वृद्धि।
- वैश्विक मामलों में प्रभाव बढ़ा।
5.4 ब्रिक्स की चुनौतियाँ
- सदस्य देशों के बीच मतभेद।
- चीन-भारत तनाव।
- आर्थिक असमानता।
- संगठनात्मक कमजोरी।
- पश्चिमी देशों का विरोध।
6. रूस
6.1 रूस का पुनरुत्थान
- सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस आर्थिक संकट में था।
- व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में रूस ने पुनरुत्थान किया।
- रूस ने अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाई।
- रूस ऊर्जा संसाधनों में समृद्ध है।
- रूस विश्व का प्रमुख तेल और गैस निर्यातक है।
6.2 रूस की विदेश नीति
- रूस अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देता है।
- रूस चीन के साथ मिलकर काम कर रहा है।
- रूस SCO और BRICS का सदस्य है।
- रूस ने क्रीमिया पर अधिकार किया।
- रूस यूक्रेन के साथ युद्ध में है।
7. भारत की स्थिति
7.1 भारत का उदय
- भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- भारत की जनसंख्या विश्व में सबसे अधिक है।
- भारत परमाणु शक्ति है।
- भारत की सैन्य शक्ति विश्व में चौथे स्थान पर है।
- भारत सूचना प्रौद्योगिकी में अग्रणी है।
7.2 भारत की विदेश नीति
- भारत गुटनिरपेक्षता में विश्वास करता है।
- भारत सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है।
- भारत BRICS, SCO, G20 का सदस्य है।
- भारत संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार चाहता है।
- भारत स्थायी सदस्यता का दावा करता है।
8. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- यूरोपीय संघ – यूरोप के देशों का आर्थिक और राजनीतिक संघ।
- आसियान – दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन।
- ब्रिक्स – ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका का समूह।
- ब्रेक्सिट – ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से बाहर निकलना।
- SCO – शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन।
- BRI – बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, चीन की परियोजना।
- NDB – नई विकास बैंक, ब्रिक्स द्वारा स्थापित।
9. महत्वपूर्ण तथ्य
- यूरोपीय संघ की स्थापना 1992 में मास्ट्रिच संधि द्वारा हुई।
- आसियान की स्थापना 1967 में हुई।
- आसियान का मुख्यालय जकार्ता में है।
- चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- जापान विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- BRICS की स्थापना 2006 में हुई।
- दक्षिण अफ्रीका 2010 में BRICS में शामिल हुआ।
- रूस विश्व का प्रमुख तेल और गैस निर्यातक है।
- भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- भारत परमाणु शक्ति है।
- ब्रेक्सिट 2016 में हुआ।
- विश्व बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है।
10. निष्कर्ष
अध्याय 4 “सत्ता के वैकल्पिक केंद्र” शीत युद्ध के बाद उभरे नए शक्ति केंद्रों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:
- यूरोपीय संघ – यह एक आर्थिक और राजनीतिक संघ है।
- आसियान – यह दक्षिण-पूर्व एशिया का क्षेत्रीय संगठन है।
- चीन का उदय – चीन आर्थिक और सैन्य शक्ति में बढ़ा।
- जापान – जापान आर्थिक शक्ति है।
- ब्रिक्स – यह विकासशील देशों का समूह है।
- रूस – रूस का पुनरुत्थान हुआ।
- भारत – भारत उभरती हुई शक्ति है।
- बहुध्रुवीयता – विश्व बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रहा है।
इस अध्याय का महत्व:
- यह समकालीन विश्व राजनीति को समझाता है।
- यह वैकल्पिक शक्ति केंद्रों को स्पष्ट करता है।
- यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह भारत की विदेश नीति को समझने में सहायक है।
- यह आगे के अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।
इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।
