कक्षा 12 भूगोल – अध्याय 5: प्राथमिक क्रियाएँ

मानव की आर्थिक क्रियाओं को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है – प्राथमिक क्रियाएँ, द्वितीयक क्रियाएँ और तृतीयक क्रियाएँ। प्राथमिक क्रियाएँ वे क्रियाएँ हैं जो पृथ्वी से सीधे संसाधनों का उपयोग करके वस्तुओं का उत्पादन करती हैं। इन क्रियाओं में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, खनन और संग्रहण शामिल हैं।

प्राथमिक क्रियाएँ मानव सभ्यता की सबसे पुरानी आर्थिक क्रियाएँ हैं। ये क्रियाएँ प्राकृतिक संसाधनों पर सीधे निर्भर करती हैं। विश्व के अधिकांश विकासशील देशों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग प्राथमिक क्रियाओं में लगे हुए हैं।

इस अध्याय का शीर्षक “प्राथमिक क्रियाएँ” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय प्राथमिक क्रियाओं के विभिन्न प्रकारों – संग्रहण, पशुचारण, कृषि, खनन आदि का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।

1. आर्थिक क्रियाओं का वर्गीकरण

1.1 आर्थिक क्रियाएँ क्या हैं?

आर्थिक क्रियाएँ वे क्रियाएँ हैं जिनके द्वारा मनुष्य अपनी आजीविका कमाता है। इन क्रियाओं का उद्देश्य धन अर्जित करना तथा जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है।

1.2 आर्थिक क्रियाओं के प्रकार

  • प्राथमिक क्रियाएँ – कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, खनन, वानिकी।
  • द्वितीयक क्रियाएँ – विनिर्माण, प्रसंस्करण, निर्माण कार्य।
  • तृतीयक क्रियाएँ – व्यापार, परिवहन, संचार, सेवाएँ।
  • चतुर्थक क्रियाएँ – शोध, विकास, सूचना प्रौद्योगिकी।
  • पंचम क्रियाएँ – उच्च स्तरीय निर्णय, परामर्श, नीति निर्माण।
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2. प्राथमिक क्रियाएँ – परिचय

2.1 प्राथमिक क्रियाओं का अर्थ

प्राथमिक क्रियाएँ वे आर्थिक क्रियाएँ हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित हैं। इन क्रियाओं में पृथ्वी, जल, वनस्पति और खनिजों का उपयोग करके उत्पादन किया जाता है।

2.2 प्राथमिक क्रियाओं की विशेषताएँ

  • ये क्रियाएँ प्राकृतिक संसाधनों पर सीधे निर्भर करती हैं।
  • ये क्रियाएँ मानव सभ्यता की सबसे पुरानी क्रियाएँ हैं।
  • ये क्रियाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रचलित हैं।
  • विकासशील देशों में अधिकांश जनसंख्या इन क्रियाओं में लगी है।

2.3 प्राथमिक क्रियाओं के प्रकार

  • संग्रहण एवं शिकार – प्राकृतिक वस्तुओं का संग्रहण।
  • पशुचारण – पशुओं को पालना।
  • कृषि – फसलों का उत्पादन।
  • खनन – खनिजों का निष्कर्षण।
  • मत्स्य पालन – मछली पकड़ना और पालना।
  • वानिकी – वनों से उत्पाद प्राप्त करना।
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3. संग्रहण एवं शिकार (Gathering and Hunting)

3.1 संग्रहण एवं शिकार का अर्थ

संग्रहण एवं शिकार मानव की सबसे प्राचीन आर्थिक क्रिया है। इसमें मनुष्य प्राकृतिक रूप से उपलब्ध वनस्पतियों, फलों, जड़ों, मधु तथा जानवरों का शिकार करके अपनी आजीविका कमाता है।

3.2 संग्रहण एवं शिकार करने वाले समुदाय

विश्व के विभिन्न भागों में आज भी कुछ समुदाय संग्रहण एवं शिकार पर निर्भर हैं:

  • इन्यूइट – कनाडा के उत्तरी क्षेत्रों में।
  • पिग्मी – अफ्रीका के कांगो बेसिन में।
  • सेंटीनेलिस – अंडमान निकोबार द्वीप समूह में।
  • बुशमैन – कालाहारी मरुस्थल में।
  • जारवा – अंडमान में।

3.3 संग्रहण एवं शिकार की विशेषताएँ

  • ये लोग अस्थायी रूप से रहते हैं।
  • ये लोग भोजन के लिए पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर हैं।
  • इनकी जनसंख्या कम होती है।
  • आधुनिक समय में इनकी संख्या तेजी से घट रही है।
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4. पशुचारण (Pastoralism)

4.1 पशुचारण का अर्थ

पशुचारण वह आर्थिक क्रिया है जिसमें मनुष्य पशुओं को पालता है और उनसे दूध, मांस, ऊन, चमड़ा आदि प्राप्त करता है। यह कृषि के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिक क्रिया है।

4.2 पशुचारण के प्रकार

  • चलवासी पशुचारण (Nomadic Herding) – इसमें पशुपालक एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं। यह अफ्रीका, मध्य एशिया, उत्तरी कनाडा और भारत के कुछ भागों में प्रचलित है।
  • वाणिज्यिक पशुपालन (Commercial Livestock Rearing) – इसमें पशुपालन वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। यह ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अर्जेंटीना और अमेरिका में प्रचलित है।

4.3 चलवासी पशुचारण की विशेषताएँ

  • पशुपालक अपने पशुओं के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते हैं।
  • पशुओं की चराई के लिए चारागाहों की खोज में भ्रमण करते हैं।
  • यह क्रिया मुख्यतः शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में की जाती है।
  • भेड़, बकरी, ऊँट, याक, रेनडियर आदि पशु पाले जाते हैं।

4.4 विश्व के प्रमुख चलवासी पशुचारण क्षेत्र

  • उत्तरी अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप
  • मध्य एशिया और तिब्बत
  • उत्तरी कनाडा और अलास्का
  • ऑस्ट्रेलिया का मरुस्थलीय क्षेत्र
  • भारत में गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर

4.5 वाणिज्यिक पशुपालन की विशेषताएँ

  • यह वैज्ञानिक तरीकों से किया जाता है।
  • पशुओं की नस्ल सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
  • चारागाहों का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है।
  • यह मुख्यतः लाभ के उद्देश्य से किया जाता है।
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5. कृषि (Agriculture)

5.1 कृषि का अर्थ

कृषि वह आर्थिक क्रिया है जिसमें मनुष्य भूमि पर फसलें उगाता है और पशुओं को पालता है। कृषि मानव की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिक क्रिया है। यह विश्व की अधिकांश जनसंख्या की आजीविका का साधन है।

5.2 कृषि के प्रकार

कृषि को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:

  • निर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture) – इसमें किसान अपनी आवश्यकताओं के लिए फसल उगाता है।
  • वाणिज्यिक कृषि (Commercial Agriculture) – इसमें किसान बाजार के लिए फसल उगाता है।

5.3 निर्वाह कृषि के प्रकार

  • स्थानांतरणशील कृषि (Shifting Agriculture) – इसमें किसान वनों को जलाकर भूमि को साफ करता है और कुछ वर्षों तक खेती करता है। फिर वह दूसरे स्थान पर चला जाता है। यह अमेज़न बेसिन, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में प्रचलित है।
  • गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture) – इसमें कम भूमि पर अधिक श्रम और पूँजी लगाकर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है। यह मानसून एशिया में प्रचलित है।
  • आदिम निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Agriculture) – इसमें किसान आदिम औजारों का उपयोग करता है।

5.4 वाणिज्यिक कृषि के प्रकार

  • गहन वाणिज्यिक कृषि (Intensive Commercial Agriculture) – इसमें अधिक पूँजी और श्रम का उपयोग किया जाता है।
  • विस्तृत वाणिज्यिक कृषि (Extensive Commercial Agriculture) – इसमें बड़े पैमाने पर मशीनों का उपयोग किया जाता है। यह अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में प्रचलित है।
  • रोपण कृषि (Plantation Agriculture) – इसमें एक ही फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। यह चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला आदि के लिए की जाती है।
  • मिश्रित कृषि (Mixed Farming) – इसमें फसल उत्पादन और पशुपालन दोनों किए जाते हैं।
  • डेयरी कृषि (Dairy Farming) – इसमें दूध का उत्पादन मुख्य उद्देश्य होता है।
  • बाजार कृषि (Market Gardening) – इसमें सब्जियों, फलों और फूलों की खेती की जाती है।

5.5 स्थानांतरणशील कृषि के विभिन्न नाम

  • झूम – पूर्वोत्तर भारत में
  • मिल्पा – मेक्सिको में
  • रोका – ब्राजील में
  • लदांग – दक्षिण-पूर्व एशिया में
  • चेना – श्रीलंका में
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6. कृषि के प्रमुख क्षेत्र

6.1 गहन निर्वाह चावल प्रधान कृषि

यह मानसून एशिया के घनी जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है। इसमें चावल मुख्य फसल है। यह पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रचलित है।

6.2 स्थानांतरणशील कृषि क्षेत्र

यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में की जाती है। इसमें वनों को जलाकर खेती की जाती है। यह अमेज़न बेसिन, कांगो बेसिन, दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रचलित है।

6.3 विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि

यह समशीतोष्ण घास के मैदानों में की जाती है। इसमें गेहूँ मुख्य फसल है। यह उत्तरी अमेरिका, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन में प्रचलित है।

6.4 मिश्रित कृषि क्षेत्र

यह यूरोप, उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भागों और एशिया के कुछ भागों में प्रचलित है। इसमें फसल उत्पादन के साथ पशुपालन भी किया जाता है।

6.5 डेयरी कृषि क्षेत्र

यह यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में प्रचलित है। इसमें दूध और दुग्ध उत्पादों का उत्पादन किया जाता है।

6.6 रोपण कृषि क्षेत्र

यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में की जाती है। इसमें चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना, केला आदि उगाए जाते हैं। यह मलेशिया, इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका, ब्राजील में प्रचलित है।

6.7 भूमध्यसागरीय कृषि

यह भूमध्य सागर के आसपास के क्षेत्रों में की जाती है। इसमें जैतून, अंगूर, संतरा, नींबू आदि उगाए जाते हैं।

6.8 बाजार कृषि एवं बागवानी

यह शहरों के आसपास की जाती है। इसमें सब्जियाँ, फल और फूल उगाए जाते हैं।

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7. खनन (Mining)

7.1 खनन का अर्थ

खनन वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी की सतह से खनिजों को निकाला जाता है। खनन एक प्राथमिक क्रिया है क्योंकि इसमें प्राकृतिक संसाधनों का सीधे निष्कर्षण किया जाता है।

7.2 खनन के प्रकार

  • सतही खनन (Surface Mining) – इसमें पृथ्वी की सतह से खनिज निकाले जाते हैं।
  • भूमिगत खनन (Underground Mining) – इसमें पृथ्वी के नीचे से खनिज निकाले जाते हैं।

7.3 खनन के कारक

  • खनिज की उपलब्धता
  • खनिज की गुणवत्ता
  • खनन की लागत
  • परिवहन की सुविधा
  • बाजार की माँग
  • तकनीकी विकास

7.4 खनन के प्रभाव

  • आर्थिक विकास में योगदान
  • रोजगार के अवसर
  • पर्यावरण प्रदूषण
  • भूमि क्षरण
  • स्वास्थ्य समस्याएँ
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8. मत्स्य पालन (Fishing)

8.1 मत्स्य पालन का अर्थ

मत्स्य पालन वह क्रिया है जिसमें मछलियों को पकड़ा जाता है और उन्हें पाला जाता है। यह एक प्राथमिक क्रिया है।

8.2 मत्स्य पालन के प्रकार

  • समुद्री मत्स्य पालन – समुद्र में मछली पकड़ना।
  • अंतर्देशीय मत्स्य पालन – नदियों, झीलों, तालाबों में मछली पकड़ना।
  • जलकृषि (Aquaculture) – कृत्रिम तरीके से मछली पालन।

8.3 मत्स्य पालन के क्षेत्र

  • उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र
  • उत्तर-पूर्वी अटलांटिक क्षेत्र
  • दक्षिण-पूर्वी प्रशांत क्षेत्र
  • भारत में केरल, गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
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9. वानिकी (Forestry)

9.1 वानिकी का अर्थ

वानिकी वह क्रिया है जिसमें वनों से लकड़ी, गोंद, रबड़, औषधियाँ आदि प्राप्त की जाती हैं। यह भी एक प्राथमिक क्रिया है।

9.2 वानिकी के प्रकार

  • वाणिज्यिक वानिकी – लकड़ी और अन्य उत्पादों के व्यापार के लिए।
  • सामाजिक वानिकी – सामुदायिक आवश्यकताओं के लिए।
  • कृषि वानिकी – कृषि के साथ वृक्षारोपण।
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10. प्राथमिक क्रियाओं के समक्ष चुनौतियाँ

10.1 कृषि की चुनौतियाँ

  • भूमि विभाजन और छोटे जोत
  • जलवायु परिवर्तन
  • मिट्टी का क्षरण
  • कीट और रोग
  • बाजार की अस्थिरता

10.2 पशुपालन की चुनौतियाँ

  • चारागाहों की कमी
  • पशु रोग
  • नस्ल सुधार की कमी

10.3 खनन की चुनौतियाँ

  • पर्यावरण प्रदूषण
  • श्रमिकों की सुरक्षा
  • संसाधनों की कमी
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11. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • प्राथमिक क्रियाएँ – वे आर्थिक क्रियाएँ जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित हैं
  • संग्रहण – प्राकृतिक वस्तुओं का संग्रहण
  • पशुचारण – पशुओं को पालना
  • स्थानांतरणशील कृषि – वनों को जलाकर की जाने वाली खेती
  • रोपण कृषि – एक ही फसल बड़े पैमाने पर उगाना
  • मिश्रित कृषि – फसल उत्पादन और पशुपालन दोनों
  • जलकृषि – कृत्रिम तरीके से मछली पालन
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12. महत्वपूर्ण तथ्य

  • प्राथमिक क्रियाएँ मानव सभ्यता की सबसे पुरानी क्रियाएँ हैं।
  • संग्रहण एवं शिकार सबसे प्राचीन आर्थिक क्रिया है।
  • कृषि विश्व की अधिकांश जनसंख्या की आजीविका का साधन है।
  • स्थानांतरणशील कृषि को भारत में झूम कहा जाता है।
  • रोपण कृषि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में की जाती है।
  • डेयरी कृषि यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में प्रचलित है।
  • विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि समशीतोष्ण घास के मैदानों में की जाती है।
  • खनन एक गैर-नवीकरणीय संसाधन पर आधारित क्रिया है।
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13. निष्कर्ष

अध्याय 5 “प्राथमिक क्रियाएँ” प्राथमिक क्रियाओं के विभिन्न प्रकारों – संग्रहण, पशुचारण, कृषि, खनन, मत्स्य पालन और वानिकी – का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:

  • प्राथमिक क्रियाएँ – ये प्राकृतिक संसाधनों पर सीधे आधारित होती हैं।
  • संग्रहण एवं शिकार – यह मानव की सबसे प्राचीन आर्थिक क्रिया है।
  • पशुचारण – यह चलवासी और वाणिज्यिक दोनों रूपों में किया जाता है।
  • कृषि – यह निर्वाह और वाणिज्यिक दोनों प्रकार की होती है।
  • खनन – यह खनिज संसाधनों के निष्कर्षण की क्रिया है।
  • प्राथमिक क्रियाओं की चुनौतियाँ – पर्यावरण प्रदूषण, संसाधनों की कमी, जलवायु परिवर्तन आदि।

इस अध्याय का महत्व:

  • यह आर्थिक भूगोल की मूल अवधारणाओं को समझाता है।
  • यह कृषि और उसके प्रकारों को स्पष्ट करता है।
  • यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में कृषि प्रणालियों को समझने में सहायक है।
  • यह भूगोल के अन्य अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।

इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।

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