कक्षा 12 भूगोल – अध्याय 2: विश्व जनसंख्या – वितरण, घनत्व और वृद्धि
विश्व की जनसंख्या का अध्ययन मानव भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस अध्याय में हम विश्व जनसंख्या के वितरण, घनत्व और वृद्धि का अध्ययन करेंगे। विश्व की जनसंख्या 2022 में लगभग 800 करोड़ (8 अरब) के आंकड़े को पार कर गई है। यह जनसंख्या पृथ्वी की सतह पर असमान रूप से वितरित है। कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या अत्यधिक घनी है, तो कुछ क्षेत्रों में यह बहुत विरल है।
इस अध्याय का शीर्षक “विश्व जनसंख्या – वितरण, घनत्व और वृद्धि” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय विश्व जनसंख्या के तीन प्रमुख पहलुओं – वितरण, घनत्व और वृद्धि का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।
1. विश्व जनसंख्या का परिचय
1.1 जनसंख्या का महत्व
जनसंख्या किसी भी देश का सबसे मूल्यवान संसाधन होती है। यह किसी देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को निर्धारित करती है। जनसंख्या के अध्ययन को जनसांख्यिकी (Demography) कहा जाता है।
1.2 विश्व जनसंख्या के आंकड़े
- विश्व की कुल जनसंख्या लगभग 800 करोड़ (8 अरब) है।
- विश्व की जनसंख्या प्रतिवर्ष लगभग 8 करोड़ से अधिक बढ़ रही है।
- विश्व की जनसंख्या का लगभग 60% भाग केवल 10 देशों में निवास करता है।
- चीन और भारत विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश हैं।
2. जनसंख्या वितरण (Population Distribution)
2.1 जनसंख्या वितरण का अर्थ
जनसंख्या वितरण का तात्पर्य पृथ्वी की सतह पर विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के बसाव के प्रतिरूप से है। यह वितरण अत्यंत असमान है। विश्व की लगभग 90% जनसंख्या उत्तरी गोलार्ध में निवास करती है।
2.2 जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है:
भौगोलिक कारक
- जल की उपलब्धता – जल मानव जीवन का आधार है। नदियों, झीलों और तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक घनी होती है।
- उच्चावच (भू-आकृति) – मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होती है, जबकि पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों में कम।
- जलवायु – समशीतोष्ण जलवायु में जनसंख्या अधिक होती है, जबकि अत्यधिक ठंडे या गर्म क्षेत्रों में कम।
- मिट्टी – उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में कृषि अधिक होती है, जिससे जनसंख्या घनी होती है।
आर्थिक कारक
- खनिज संसाधन – खनिज संपन्न क्षेत्रों में उद्योग विकसित होते हैं, जिससे जनसंख्या बढ़ती है।
- उद्योग – औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर अधिक होते हैं।
- शहरीकरण – शहरों में सुविधाएँ अधिक होती हैं।
- परिवहन – अच्छे परिवहन साधनों वाले क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होती है।
सामाजिक एवं राजनीतिक कारक
- धार्मिक स्थल – धार्मिक स्थलों के आसपास जनसंख्या अधिक होती है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य – बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ जनसंख्या को आकर्षित करती हैं।
- राजनीतिक स्थिरता – राजनीतिक स्थिरता वाले क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होती है।
- सरकारी नीतियाँ – सरकारी नीतियाँ जनसंख्या वितरण को प्रभावित करती हैं।
3. विश्व जनसंख्या के वितरण के प्रतिरूप
3.1 महाद्वीपों में जनसंख्या वितरण
विश्व की जनसंख्या महाद्वीपों में असमान रूप से वितरित है:
- एशिया – विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप (लगभग 60%)।
- अफ्रीका – दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप।
- यूरोप – तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप।
- उत्तरी अमेरिका – चौथा सबसे अधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप।
- दक्षिण अमेरिका – पाँचवाँ सबसे अधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप।
- ओशिनिया – कम जनसंख्या वाला महाद्वीप।
- अंटार्कटिका – यहाँ स्थायी जनसंख्या नहीं है।
3.2 विश्व के प्रमुख जनसंख्या केंद्र
विश्व में जनसंख्या के प्रमुख केंद्र निम्नलिखित हैं:
- पूर्वी एशिया – चीन, जापान, कोरिया
- दक्षिणी एशिया – भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश
- दक्षिण-पूर्वी एशिया – इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम
- यूरोप – पश्चिमी यूरोप के देश
- उत्तरी अमेरिका – पूर्वी तटीय क्षेत्र
4. जनसंख्या घनत्व (Population Density)
4.1 जनसंख्या घनत्व का अर्थ
जनसंख्या घनत्व से तात्पर्य प्रति इकाई क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या से है। इसे सामान्यतः प्रति वर्ग किलोमीटर व्यक्तियों की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है।
4.2 जनसंख्या घनत्व के प्रकार
- अंकगणितीय घनत्व (Arithmetic Density) – कुल जनसंख्या को कुल क्षेत्रफल से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
- कृषि घनत्व (Agricultural Density) – कुल कृषि जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
- शारीरिक घनत्व (Physiological Density) – कुल जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
4.3 जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक
- जल की उपलब्धता
- भू-आकृति और उच्चावच
- जलवायु की स्थिति
- मिट्टी की उपजाऊता
- खनिज और ऊर्जा संसाधन
- औद्योगिक विकास
- शहरीकरण और परिवहन
5. जनसंख्या वृद्धि (Population Growth)
5.1 जनसंख्या वृद्धि का अर्थ
जनसंख्या वृद्धि से तात्पर्य किसी क्षेत्र में एक निश्चित समय अवधि में जनसंख्या में होने वाली वृद्धि से है। यह वृद्धि जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास के अंतर से निर्धारित होती है।
5.2 जनसंख्या वृद्धि के घटक
- जन्म दर (Birth Rate) – प्रति हजार व्यक्तियों पर जीवित जन्मों की संख्या।
- मृत्यु दर (Death Rate) – प्रति हजार व्यक्तियों पर मृत्युओं की संख्या।
- प्रवास (Migration) – एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
5.3 जनसंख्या वृद्धि के प्रकार
- प्राकृतिक वृद्धि (Natural Growth) – जन्म दर और मृत्यु दर के अंतर से।
- वास्तविक वृद्धि (Actual Growth) – प्राकृतिक वृद्धि और प्रवास के अंतर से।
- धनात्मक वृद्धि (Positive Growth) – जब जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो।
- ऋणात्मक वृद्धि (Negative Growth) – जब मृत्यु दर जन्म दर से अधिक हो।
5.4 जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियाँ
विश्व जनसंख्या वृद्धि की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- 1800 से पहले विश्व जनसंख्या वृद्धि की गति धीमी थी।
- 1800 के बाद जनसंख्या वृद्धि में तेजी आई।
- 1950 के बाद जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि हुई।
- वर्तमान में विकासशील देशों में जनसंख्या वृद्धि अधिक है।
- विकसित देशों में जनसंख्या वृद्धि दर कम है।
6. जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धांत (Demographic Transition Theory)
6.1 सिद्धांत का अर्थ
जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धांत यह बताता है कि किस प्रकार किसी देश की जनसंख्या समय के साथ कैसे बदलती है। यह सिद्धांत तीन या चार चरणों में विभाजित है।
6.2 प्रथम चरण (उच्च स्थिरावस्था)
इस चरण में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों उच्च होती हैं। जनसंख्या वृद्धि धीमी होती है। यह चरण पिछड़े समाजों में देखा जाता है।
6.3 द्वितीय चरण (प्रारंभिक विस्तार)
इस चरण में मृत्यु दर कम होने लगती है, लेकिन जन्म दर अधिक रहती है। जनसंख्या तेजी से बढ़ती है। यह चरण विकासशील देशों में देखा जाता है।
6.4 तृतीय चरण (उत्तर विस्तार)
इस चरण में जन्म दर भी कम होने लगती है। जनसंख्या वृद्धि धीमी हो जाती है। यह चरण विकसित होते देशों में देखा जाता है।
6.5 चतुर्थ चरण (निम्न स्थिरावस्था)
इस चरण में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों कम होती हैं। जनसंख्या स्थिर हो जाती है। यह चरण विकसित देशों में देखा जाता है।
7. जनसंख्या दोगुनी होने का समय (Doubling Time)
7.1 परिभाषा
जनसंख्या दोगुनी होने का समय वह समय है जिसमें किसी क्षेत्र की जनसंख्या दोगुनी हो जाती है। यह वृद्धि दर पर निर्भर करता है।
7.2 महत्वपूर्ण तथ्य
- विकसित देशों में जनसंख्या दोगुनी होने का समय अधिक होता है।
- विकासशील देशों में जनसंख्या दोगुनी होने का समय कम होता है।
- विश्व जनसंख्या लगभग 40 वर्षों में दोगुनी हो रही है।
8. विश्व जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव
8.1 सकारात्मक प्रभाव
- अधिक श्रम शक्ति उपलब्ध होती है।
- बाजार का विस्तार होता है।
- नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलता है।
8.2 नकारात्मक प्रभाव
- संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
- बेरोजगारी और गरीबी बढ़ती है।
- पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है।
- आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव पड़ता है।
- खाद्य सुरक्षा की समस्या उत्पन्न होती है।
9. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- जनसंख्या वितरण – पृथ्वी की सतह पर विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के बसाव का प्रतिरूप
- जनसंख्या घनत्व – प्रति इकाई क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या
- अंकगणितीय घनत्व – कुल जनसंख्या को कुल क्षेत्रफल से विभाजित करना
- कृषि घनत्व – कुल कृषि जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करना
- शारीरिक घनत्व – कुल जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करना
- प्राकृतिक वृद्धि – जन्म दर और मृत्यु दर के अंतर से होने वाली वृद्धि
- जनसांख्यिकी संक्रमण – जनसंख्या के विकास की विभिन्न अवस्थाएँ
10. महत्वपूर्ण तथ्य
- विश्व की कुल जनसंख्या 2022 में 800 करोड़ के पार पहुँच गई।
- विश्व की 90% जनसंख्या उत्तरी गोलार्ध में रहती है।
- एशिया विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप है।
- अंटार्कटिका में कोई स्थायी जनसंख्या नहीं है।
- 1800 से पहले विश्व जनसंख्या वृद्धि धीमी थी।
- 1950 के बाद जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि हुई।
- वर्तमान में विकासशील देशों में जनसंख्या वृद्धि अधिक है।
11. निष्कर्ष
अध्याय 2 “विश्व जनसंख्या – वितरण, घनत्व और वृद्धि” विश्व जनसंख्या के तीन प्रमुख पहलुओं – वितरण, घनत्व और वृद्धि का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:
- जनसंख्या वितरण – विश्व की जनसंख्या असमान रूप से वितरित है।
- जनसंख्या घनत्व – यह प्रति इकाई क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
- जनसंख्या वृद्धि – यह जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास से निर्धारित होती है।
- जनसांख्यिकी संक्रमण सिद्धांत – यह जनसंख्या वृद्धि की विभिन्न अवस्थाओं को दर्शाता है।
- जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव – इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव हैं।
इस अध्याय का महत्व:
- यह विश्व जनसंख्या की मूल अवधारणाओं को समझाता है।
- यह जनसंख्या वितरण के कारकों को स्पष्ट करता है।
- यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह जनसांख्यिकी की अवधारणाओं को समझने में सहायक है।
- यह भूगोल के अन्य अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।
इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।
