कक्षा 12 भूगोल – अध्याय 5: भू-संसाधन तथा कृषि

भूमि पृथ्वी की सतह का वह भाग है जिस पर मानव निवास करता है और विभिन्न आर्थिक क्रियाएँ करता है। भूमि एक सीमित और अनिवार्य संसाधन है। भारत में भूमि का उपयोग विभिन्न प्रकार से किया जाता है – कृषि, वन, चारागाह, निर्माण, उद्योग आदि। कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।

इस अध्याय में हम भू-संसाधनों के प्रकार, भूमि उपयोग, भूमि क्षरण, कृषि के प्रकार, फसलों के मौसम, प्रमुख फसलें, कृषि विकास और भारतीय कृषि की समस्याओं का अध्ययन करेंगे।

इस अध्याय का शीर्षक “भू-संसाधन तथा कृषि” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय भूमि संसाधनों और कृषि के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।

1. भू-संसाधन (Land Resources)

1.1 भूमि का अर्थ एवं महत्व

भूमि पृथ्वी की सतह का वह भाग है जिसका उपयोग मनुष्य विभिन्न आर्थिक क्रियाओं के लिए करता है। भूमि मानव जीवन का आधार है। यह कृषि, वन, चारागाह, निर्माण, उद्योग, परिवहन आदि के लिए आवश्यक है।

1.2 भूमि के प्रकार

  • कृषि योग्य भूमि – जिस पर फसलें उगाई जाती हैं।
  • वन भूमि – जिस पर वन होते हैं।
  • चारागाह भूमि – जिस पर पशु चराए जाते हैं।
  • बंजर भूमि – जो कृषि के लिए अनुपयुक्त है।
  • गैर-कृषि उपयोग की भूमि – निर्माण, सड़क, उद्योग आदि के लिए।

1.3 भारत में भूमि उपयोग का वर्गीकरण

भारत में भूमि उपयोग को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:

  • वन – वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली भूमि।
  • गैर-कृषि उपयोग की भूमि – भवन, सड़क, रेल, उद्योग आदि।
  • बंजर भूमि – जो कृषि के लिए अनुपयुक्त है।
  • कृषि योग्य बंजर भूमि – जो कृषि योग्य है लेकिन उपयोग में नहीं है।
  • चारागाह एवं अन्य – पशु चराने की भूमि।
  • वर्तमान परती – जो एक वर्ष से कम समय के लिए खाली है।
  • अन्य परती – जो एक से पाँच वर्ष तक खाली है।
  • शुद्ध बोया गया क्षेत्र – जिस पर फसलें बोई जाती हैं।

1.4 भूमि क्षरण (Land Degradation)

भूमि क्षरण का तात्पर्य भूमि की उत्पादकता में कमी से है। यह मानवीय और प्राकृतिक कारकों के कारण होता है।

भूमि क्षरण के कारण

  • वनों की कटाई
  • अति चराई
  • अति सिंचाई
  • रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग
  • जल-कटाव
  • पवन-कटाव
  • लवणीकरण
  • जलभराव

भूमि क्षरण के प्रभाव

  • कृषि उत्पादकता में कमी
  • मरुस्थलीकरण
  • जल स्रोतों का सूखना
  • जैव विविधता की हानि
  • खाद्य सुरक्षा को खतरा

1.5 भूमि संरक्षण के उपाय

  • वृक्षारोपण
  • समोच्च रेखा जुताई
  • सीढ़ीदार खेती
  • पट्टीदार खेती
  • वायुरोधक पेटियाँ
  • जैविक खेती
  • जल संग्रहण
  • चराई पर नियंत्रण
◆ ◆ ◆

2. कृषि (Agriculture)

2.1 कृषि का अर्थ एवं महत्व

कृषि वह क्रिया है जिसमें मनुष्य भूमि पर फसलें उगाता है और पशुओं को पालता है। कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भारत की लगभग आधी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।

2.2 भारतीय कृषि की विशेषताएँ

  • कृषि मानसून पर निर्भर है।
  • छोटे और बिखरे हुए जोत हैं।
  • कृषि में अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
  • उत्पादन कम होता है।
  • तकनीकी ज्ञान का अभाव है।
  • निर्वाह कृषि अधिक है।

2.3 कृषि के प्रकार

निर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture)

इसमें किसान अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के लिए फसल उगाता है। इसमें बाजार के लिए उत्पादन नहीं होता।

वाणिज्यिक कृषि (Commercial Agriculture)

इसमें किसान बाजार के लिए फसल उगाता है। इसमें लाभ कमाना मुख्य उद्देश्य होता है।

स्थानांतरणशील कृषि (Shifting Agriculture)

इसमें किसान वनों को जलाकर भूमि साफ करता है और कुछ वर्षों तक खेती करता है। फिर वह दूसरे स्थान पर चला जाता है। इसे भारत में ‘झूम’ कहा जाता है।

गहन कृषि (Intensive Agriculture)

इसमें कम भूमि पर अधिक श्रम और पूँजी लगाकर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है।

मिश्रित कृषि (Mixed Farming)

इसमें फसल उत्पादन और पशुपालन दोनों किए जाते हैं।

रोपण कृषि (Plantation Agriculture)

इसमें एक ही फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। जैसे चाय, कॉफी, रबड़।

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3. फसलों के मौसम (Cropping Seasons)

3.1 खरीफ फसलें (Kharif Crops)

खरीफ फसलें मानसून के मौसम में बोई जाती हैं। इन्हें जून-जुलाई में बोया जाता है और अक्टूबर-नवंबर में काटा जाता है। इन फसलों को अधिक जल की आवश्यकता होती है।

  • धान
  • मक्का
  • ज्वार
  • बाजरा
  • अरहर
  • मूंग
  • कपास
  • जूट
  • मूंगफली

3.2 रबी फसलें (Rabi Crops)

रबी फसलें सर्दियों के मौसम में बोई जाती हैं। इन्हें अक्टूबर-नवंबर में बोया जाता है और मार्च-अप्रैल में काटा जाता है। इन्हें कम जल की आवश्यकता होती है।

  • गेहूँ
  • जौ
  • चना
  • मटर
  • मसूर
  • सरसों
  • अलसी

3.3 जायद फसलें (Zaid Crops)

जायद फसलें गर्मियों के मौसम में बोई जाती हैं। इन्हें मार्च-अप्रैल में बोया जाता है और जून-जुलाई में काटा जाता है।

  • तरबूज
  • खरबूज
  • ककड़ी
  • सब्जियाँ
  • चारा फसलें
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4. प्रमुख फसलें (Major Crops)

4.1 धान (Rice)

  • धान भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है।
  • यह खरीफ फसल है।
  • इसके लिए अधिक जल और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश, बिहार।

4.2 गेहूँ (Wheat)

  • गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है।
  • यह रबी फसल है।
  • इसके लिए समशीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान।

4.3 मक्का (Maize)

  • यह खरीफ फसल है।
  • इसका उपयोग भोजन और पशु आहार दोनों के लिए किया जाता है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश।

4.4 दालें (Pulses)

  • भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश है।
  • प्रमुख दालें: अरहर, मूंग, उड़द, चना, मसूर।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश।

4.5 तिलहन (Oilseeds)

  • प्रमुख तिलहन: सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र।

4.6 कपास (Cotton)

  • यह एक नकदी फसल है।
  • इसका उपयोग कपड़ा उद्योग में किया जाता है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान।

4.7 गन्ना (Sugarcane)

  • यह एक नकदी फसल है।
  • इससे चीनी, गुड़ और शराब बनाई जाती है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु।

4.8 चाय (Tea)

  • यह एक रोपण फसल है।
  • इसके लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल।

4.9 कॉफी (Coffee)

  • यह एक रोपण फसल है।
  • प्रमुख उत्पादक राज्य: कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु।
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5. कृषि विकास (Agricultural Development)

5.1 हरित क्रांति (Green Revolution)

हरित क्रांति 1960 के दशक में शुरू हुई। इसका उद्देश्य खाद्य उत्पादन बढ़ाना था। इसमें उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई का उपयोग किया गया।

हरित क्रांति के लाभ

  • खाद्य उत्पादन में वृद्धि
  • खाद्य सुरक्षा
  • किसानों की आय में वृद्धि
  • ग्रामीण विकास

हरित क्रांति की हानियाँ

  • क्षेत्रीय असमानता
  • भूमि क्षरण
  • जल प्रदूषण
  • जैव विविधता की हानि
  • किसानों पर कर्ज

5.2 श्वेत क्रांति (White Revolution)

श्वेत क्रांति का संबंध दूध उत्पादन से है। इसके कारण भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया। इसे ‘ऑपरेशन फ्लड’ के नाम से भी जाना जाता है।

5.3 नीली क्रांति (Blue Revolution)

नीली क्रांति का संबंध मत्स्य उत्पादन से है। इसके कारण मछली उत्पादन में वृद्धि हुई।

5.4 पीली क्रांति (Yellow Revolution)

पीली क्रांति का संबंध तिलहन उत्पादन से है।

5.5 जैविक खेती (Organic Farming)

जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। इसमें जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।

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6. भारतीय कृषि की समस्याएँ

  • भूमि विभाजन – छोटे और बिखरे हुए जोत।
  • मानसून पर निर्भरता – अनिश्चित वर्षा।
  • सिंचाई सुविधाओं का अभाव – केवल कुछ क्षेत्रों में सिंचाई।
  • तकनीकी ज्ञान का अभाव – पुरानी तकनीक।
  • वित्तीय समस्याएँ – कर्ज और ब्याज।
  • बाजार की समस्या – उचित मूल्य नहीं मिलना।
  • भंडारण की समस्या – उचित भंडारण सुविधाओं का अभाव।
  • परिवहन की समस्या – ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं का अभाव।
  • जलवायु परिवर्तन – अनियमित मौसम।
  • कीट और रोग – फसलों को नुकसान।
◆ ◆ ◆

7. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • भूमि उपयोग – भूमि का विभिन्न प्रकार से उपयोग
  • भूमि क्षरण – भूमि की उत्पादकता में कमी
  • खरीफ फसलें – मानसून के मौसम में बोई जाने वाली फसलें
  • रबी फसलें – सर्दियों के मौसम में बोई जाने वाली फसलें
  • जायद फसलें – गर्मियों के मौसम में बोई जाने वाली फसलें
  • नकदी फसलें – बाजार में बेचने के लिए उगाई जाने वाली फसलें
  • हरित क्रांति – खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि में तकनीकी सुधार
  • जैविक खेती – रासायनिक उर्वरकों के बिना खेती
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8. महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत में कृषि योग्य भूमि का प्रतिशत लगभग 50% है।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक देश है।
  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल और गेहूँ उत्पादक देश है।
  • हरित क्रांति 1960 के दशक में शुरू हुई।
  • श्वेत क्रांति को ‘ऑपरेशन फ्लड’ कहा जाता है।
  • भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।
  • धान खरीफ फसल है।
  • गेहूँ रबी फसल है।
  • भारत की लगभग आधी जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  • भूमि क्षरण भारत की एक गंभीर समस्या है।
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9. निष्कर्ष

अध्याय 5 “भू-संसाधन तथा कृषि” भूमि संसाधनों और कृषि के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:

  • भू-संसाधन – भूमि एक सीमित और अनिवार्य संसाधन है।
  • भूमि उपयोग – भारत में भूमि का उपयोग विभिन्न प्रकार से किया जाता है।
  • भूमि क्षरण – यह भूमि की उत्पादकता में कमी है।
  • कृषि – यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
  • फसलों के मौसम – खरीफ, रबी और जायद।
  • हरित क्रांति – इसने खाद्य उत्पादन में वृद्धि की।
  • कृषि की समस्याएँ – छोटे जोत, मानसून पर निर्भरता, तकनीकी ज्ञान का अभाव।

इस अध्याय का महत्व:

  • यह भू-संसाधनों और कृषि की मूल अवधारणाओं को समझाता है।
  • यह भारतीय कृषि की विशेषताओं और समस्याओं को स्पष्ट करता है।
  • यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह कृषि विकास और खाद्य सुरक्षा की अवधारणाओं को समझने में सहायक है।
  • यह भूगोल के अन्य अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।

इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।

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