कक्षा 12 भूगोल – अध्याय 1: जनसंख्या – वितरण, घनत्व, वृद्धि एवं संघटन
भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। जनसंख्या किसी भी देश का सबसे मूल्यवान संसाधन होती है। भारत की जनसंख्या का अध्ययन उसके वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन के माध्यम से किया जाता है। ये चारों पहलू भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
भारत में जनसंख्या का वितरण अत्यंत असमान है। कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या अत्यधिक घनी है, तो कुछ क्षेत्रों में यह बहुत विरल है। इसी प्रकार जनसंख्या की वृद्धि दर और संघटन भी विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न है।
इस अध्याय का शीर्षक “जनसंख्या – वितरण, घनत्व, वृद्धि एवं संघटन” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय भारत की जनसंख्या के इन चारों प्रमुख पहलुओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।
1. जनसंख्या वितरण (Population Distribution)
1.1 जनसंख्या वितरण का अर्थ
जनसंख्या वितरण का तात्पर्य किसी देश या क्षेत्र में लोगों के बसाव के प्रतिरूप से है। यह बताता है कि किसी क्षेत्र में कितने लोग रहते हैं और वे किस प्रकार फैले हुए हैं।
1.2 भारत में जनसंख्या का वितरण
भारत में जनसंख्या का वितरण अत्यंत असमान है। भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 76% भाग उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक और गुजरात में निवास करता है।
1.3 जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक
भारत में जनसंख्या के वितरण को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं:
भौगोलिक कारक
- जल की उपलब्धता – जल मानव जीवन का आधार है। नदियों, झीलों और तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक घनी होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जनसंख्या अधिक है क्योंकि यहाँ गंगा और उसकी सहायक नदियाँ बहती हैं।
- उच्चावच (भू-आकृति) – मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होती है, जबकि पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों में कम। उत्तर के मैदानी क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक घनी है।
- जलवायु – समशीतोष्ण जलवायु में जनसंख्या अधिक होती है, जबकि अत्यधिक ठंडे या गर्म क्षेत्रों में कम। राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में जनसंख्या कम है।
- मिट्टी – उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में कृषि अधिक होती है, जिससे जनसंख्या घनी होती है। गंगा के मैदानों की जलोढ़ मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है।
आर्थिक कारक
- खनिज संसाधन – खनिज संपन्न क्षेत्रों में उद्योग विकसित होते हैं, जिससे जनसंख्या बढ़ती है। झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में खनिज संपन्नता के कारण जनसंख्या बढ़ी।
- उद्योग – औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर अधिक होते हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु में उद्योगों के कारण जनसंख्या अधिक है।
- शहरीकरण – शहरों में सुविधाएँ अधिक होती हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों में जनसंख्या अधिक है।
- परिवहन – अच्छे परिवहन साधनों वाले क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होती है।
सामाजिक एवं राजनीतिक कारक
- धार्मिक स्थल – धार्मिक स्थलों के आसपास जनसंख्या अधिक होती है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य – बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ जनसंख्या को आकर्षित करती हैं।
- राजनीतिक स्थिरता – राजनीतिक स्थिरता वाले क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होती है।
- सरकारी नीतियाँ – सरकारी नीतियाँ जनसंख्या वितरण को प्रभावित करती हैं।
2. जनसंख्या घनत्व (Population Density)
2.1 जनसंख्या घनत्व का अर्थ
जनसंख्या घनत्व से तात्पर्य प्रति इकाई क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या से है। भारत में इसे प्रति वर्ग किलोमीटर व्यक्तियों की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है।
2.2 भारत में जनसंख्या घनत्व
- भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 2011 की जनगणना के अनुसार 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
- भारत में जनसंख्या घनत्व में व्यापक क्षेत्रीय भिन्नता पाई जाती है।
- सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य बिहार है (1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर)।
- सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश है (17 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर)।
- पश्चिम बंगाल (1028), केरल (860), उत्तर प्रदेश (829) में जनसंख्या घनत्व अधिक है।
2.3 जनसंख्या घनत्व के प्रकार
- अंकगणितीय घनत्व (Arithmetic Density) – कुल जनसंख्या को कुल क्षेत्रफल से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
- कृषि घनत्व (Agricultural Density) – कुल कृषि जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
- शारीरिक घनत्व (Physiological Density) – कुल जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
3. जनसंख्या वृद्धि (Population Growth)
3.1 जनसंख्या वृद्धि का अर्थ
जनसंख्या वृद्धि से तात्पर्य किसी क्षेत्र में एक निश्चित समय अवधि में जनसंख्या में होने वाली वृद्धि से है। यह वृद्धि जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास के अंतर से निर्धारित होती है।
3.2 जनसंख्या वृद्धि के प्रकार
- प्राकृतिक वृद्धि (Natural Growth) – जन्म दर और मृत्यु दर के अंतर से।
- वास्तविक वृद्धि (Actual Growth) – प्राकृतिक वृद्धि और प्रवास के अंतर से।
- धनात्मक वृद्धि (Positive Growth) – जब जन्म दर मृत्यु दर से अधिक हो।
- ऋणात्मक वृद्धि (Negative Growth) – जब मृत्यु दर जन्म दर से अधिक हो।
3.3 भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियाँ
भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- 1901 से 1921 की अवधि को ‘स्थिर प्रावस्था’ कहा जाता है क्योंकि इस अवधि में जनसंख्या वृद्धि बहुत धीमी थी।
- 1921 से 1951 की अवधि को ‘स्थिर वृद्धि प्रावस्था’ कहा जाता है।
- 1951 से 1981 की अवधि को ‘जनसंख्या विस्फोट’ की अवधि कहा जाता है। इस अवधि में जनसंख्या तेजी से बढ़ी।
- 1981 के बाद से जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है, लेकिन जनसंख्या अभी भी बढ़ रही है।
3.4 जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने वाले कारक
- जन्म दर (Birth Rate) – प्रति हजार व्यक्तियों पर जीवित जन्मों की संख्या।
- मृत्यु दर (Death Rate) – प्रति हजार व्यक्तियों पर मृत्युओं की संख्या।
- प्रवास (Migration) – एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
- शिक्षा – शिक्षा के प्रसार से जन्म दर में कमी आती है।
- स्वास्थ्य सुविधाएँ – बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से मृत्यु दर में कमी आती है।
- आर्थिक विकास – आर्थिक विकास से जनसंख्या वृद्धि दर प्रभावित होती है।
3.5 जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव
- अधिक श्रम शक्ति उपलब्ध होती है।
- बाजार का विस्तार होता है।
- नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलता है।
नकारात्मक प्रभाव
- संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
- बेरोजगारी और गरीबी बढ़ती है।
- पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है।
- आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव पड़ता है।
- खाद्य सुरक्षा की समस्या उत्पन्न होती है।
4. जनसंख्या संघटन (Population Composition)
4.1 जनसंख्या संघटन का अर्थ
जनसंख्या संघटन से तात्पर्य किसी क्षेत्र की जनसंख्या की संरचना एवं विशेषताओं से है। यह बताता है कि जनसंख्या में पुरुष और महिलाओं का अनुपात क्या है, विभिन्न आयु वर्गों में कितने लोग हैं, लोग किन व्यवसायों में लगे हैं, साक्षरता का स्तर क्या है, तथा धार्मिक एवं भाषाई विविधता कैसी है।
4.2 लिंग संघटन (Sex Composition)
लिंग संघटन से तात्पर्य किसी क्षेत्र की जनसंख्या में पुरुषों और महिलाओं के अनुपात से है। इसे लिंग अनुपात (Sex Ratio) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
लिंग अनुपात की परिभाषा
लिंग अनुपात का तात्पर्य प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या से है। भारत में इसे प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में व्यक्त किया जाता है।
भारत में लिंग अनुपात
- 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का लिंग अनुपात 943 है।
- केरल में लिंग अनुपात सबसे अधिक (1084) है।
- हरियाणा में लिंग अनुपात सबसे कम (879) है।
- भारत में लिंग अनुपात 1000 से कम है, जो चिंता का विषय है।
लिंग अनुपात को प्रभावित करने वाले कारक
- जन्म दर और मृत्यु दर – पुरुषों और महिलाओं की जन्म दर और मृत्यु दर में अंतर।
- प्रवास – पुरुषों का अधिक प्रवास लिंग अनुपात को प्रभावित करता है।
- सामाजिक कारण – लिंग भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या आदि।
- आर्थिक कारण – महिलाओं की कार्य में भागीदारी।
4.3 आयु संरचना (Age Structure)
आयु संरचना से तात्पर्य किसी क्षेत्र की जनसंख्या में विभिन्न आयु वर्गों के व्यक्तियों के अनुपात से है।
आयु वर्गों का वर्गीकरण
- 0-14 वर्ष – बाल आयु वर्ग (निर्भर जनसंख्या)।
- 15-59 वर्ष – कार्यशील आयु वर्ग (उत्पादक जनसंख्या)।
- 60 वर्ष से अधिक – वृद्ध आयु वर्ग (निर्भर जनसंख्या)।
आयु-लिंग पिरामिड
आयु-लिंग पिरामिड एक रेखाचित्र है जो किसी क्षेत्र की जनसंख्या की आयु और लिंग संरचना को दर्शाता है। इसमें क्षैतिज अक्ष पर जनसंख्या का प्रतिशत और ऊर्ध्वाधर अक्ष पर आयु वर्ग होते हैं।
निर्भरता अनुपात
निर्भरता अनुपात से तात्पर्य कार्यशील आयु वर्ग (15-59 वर्ष) के लोगों पर निर्भर जनसंख्या (0-14 वर्ष और 60+ वर्ष) के अनुपात से है। भारत में निर्भरता अनुपात अधिक है, जो आर्थिक विकास के लिए चुनौती है।
4.4 ग्रामीण-नगरीय संघटन (Rural-Urban Composition)
ग्रामीण-नगरीय संघटन से तात्पर्य किसी क्षेत्र की जनसंख्या में ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या के अनुपात से है।
- 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का 68.8% भाग ग्रामीण क्षेत्रों में और 31.2% भाग नगरीय क्षेत्रों में निवास करता है।
- भारत में नगरीय जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है।
- गोवा सबसे अधिक नगरीकृत राज्य है।
- हिमाचल प्रदेश सबसे कम नगरीकृत राज्य है।
4.5 साक्षरता (Literacy)
साक्षरता से तात्पर्य पढ़ने, लिखने और समझने की क्षमता से है। भारत में जनगणना के अनुसार, सात वर्ष और उससे अधिक आयु का व्यक्ति जो किसी भी भाषा को पढ़ और लिख सकता है, साक्षर कहलाता है।
- 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर 74.04% है।
- पुरुष साक्षरता दर 82.14% है।
- महिला साक्षरता दर 65.46% है।
- केरल में साक्षरता दर सबसे अधिक (94%) है।
- बिहार में साक्षरता दर सबसे कम (61.8%) है।
4.6 व्यावसायिक संघटन (Occupational Structure)
व्यावसायिक संघटन से तात्पर्य किसी क्षेत्र की जनसंख्या में विभिन्न व्यवसायों में लगे लोगों के अनुपात से है।
व्यवसायों का वर्गीकरण
- प्राथमिक व्यवसाय – कृषि, पशुपालन, मछली पालन, खनन, वानिकी।
- द्वितीयक व्यवसाय – विनिर्माण, विद्युत, गैस, जल आपूर्ति, निर्माण।
- तृतीयक व्यवसाय – व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य।
- चतुर्थक व्यवसाय – शोध, विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, परामर्श।
भारत में व्यावसायिक संघटन
- भारत में अभी भी प्राथमिक क्षेत्र में लगी जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है।
- भारत में तृतीयक क्षेत्र में वृद्धि हो रही है।
- भारत में द्वितीयक क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई है।
5. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- जनसंख्या वितरण – पृथ्वी की सतह पर विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के बसाव का प्रतिरूप
- जनसंख्या घनत्व – प्रति इकाई क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या
- अंकगणितीय घनत्व – कुल जनसंख्या को कुल क्षेत्रफल से विभाजित करना
- कृषि घनत्व – कुल कृषि जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करना
- शारीरिक घनत्व – कुल जनसंख्या को कुल कृषि योग्य भूमि से विभाजित करना
- प्राकृतिक वृद्धि – जन्म दर और मृत्यु दर के अंतर से होने वाली वृद्धि
- लिंग अनुपात – प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या
- निर्भरता अनुपात – कार्यशील आयु वर्ग पर निर्भर जनसंख्या का अनुपात
- साक्षरता दर – कुल जनसंख्या में साक्षर व्यक्तियों का प्रतिशत
6. महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है।
- भारत की कुल जनसंख्या का 76% भाग 10 राज्यों में निवास करता है।
- भारत का औसत जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
- बिहार में जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक (1106) है।
- अरुणाचल प्रदेश में जनसंख्या घनत्व सबसे कम (17) है।
- 1901 से 1921 की अवधि को ‘स्थिर प्रावस्था’ कहा जाता है।
- 1951 से 1981 की अवधि को ‘जनसंख्या विस्फोट’ की अवधि कहा जाता है।
- भारत का लिंग अनुपात 943 है।
- केरल में लिंग अनुपात सबसे अधिक (1084) है।
- हरियाणा में लिंग अनुपात सबसे कम (879) है।
- भारत की साक्षरता दर 74.04% है।
- केरल में साक्षरता दर सबसे अधिक (94%) है।
- बिहार में साक्षरता दर सबसे कम (61.8%) है।
- भारत की 68.8% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।
7. निष्कर्ष
अध्याय 1 “जनसंख्या – वितरण, घनत्व, वृद्धि एवं संघटन” भारत की जनसंख्या के चारों प्रमुख पहलुओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:
- जनसंख्या वितरण – भारत में जनसंख्या का वितरण अत्यंत असमान है।
- जनसंख्या घनत्व – यह प्रति इकाई क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या है।
- जनसंख्या वृद्धि – यह जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास से निर्धारित होती है।
- जनसंख्या संघटन – यह जनसंख्या की गुणात्मक विशेषताओं का अध्ययन है।
- लिंग संघटन – भारत में लिंग अनुपात 1000 से कम है।
- साक्षरता – भारत की साक्षरता दर में वृद्धि हुई है।
- व्यावसायिक संघटन – भारत में अभी भी प्राथमिक क्षेत्र में लगी जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है।
इस अध्याय का महत्व:
- यह भारत की जनसंख्या की मूल अवधारणाओं को समझाता है।
- यह जनसंख्या वितरण के कारकों को स्पष्ट करता है।
- यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह भारत की जनसांख्यिकी की अवधारणाओं को समझने में सहायक है।
- यह भूगोल के अन्य अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।
इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।
