बिहार बोर्ड — कक्षा 12 : राजनीति विज्ञान
अध्याय 9 : भारतीय राजनीति : नए बदलाव
KK MAHTO — Founder & Educator, Apni Kaksha
📑 विषय-सूची (Contents)
- परिचय एवं पृष्ठभूमि
- 1989 का लोकसभा चुनाव — कांग्रेस प्रणाली का अंत
- राष्ट्रीय मोर्चा सरकार एवं वी.पी. सिंह
- मंडल आयोग एवं ओबीसी आरक्षण
- कमंडल — राम जन्मभूमि आंदोलन
- बाबरी मस्जिद विध्वंस (1992)
- 1991 का आर्थिक उदारीकरण (LPG)
- नरसिंह राव सरकार (1991–1996)
- गठबंधन युग का प्रारंभ (1996–1999)
- भाजपा का उदय एवं अटल बिहारी वाजपेयी
- राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार
- संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार
- नरेंद्र मोदी एवं 2014 का चुनाव
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका
- गठबंधन राजनीति की विशेषताएँ
- नई आर्थिक नीतियों का प्रभाव
- भारतीय राजनीति में नए मुद्दे
- महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं तथ्य
- महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)
1. परिचय एवं पृष्ठभूमि
1989 का वर्ष भारतीय राजनीति का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस वर्ष के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा और केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। इसके बाद भारतीय राजनीति में अनेक नए बदलाव आए — गठबंधन राजनीति, मंडल एवं कमंडल, आर्थिक उदारीकरण, भाजपा का उदय एवं क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका।
इस अध्याय में हम 1989 के बाद भारतीय राजनीति में आए इन्हीं नए बदलावों का अध्ययन करेंगे। यह काल भारतीय लोकतंत्र के लिए अनेक चुनौतियाँ लेकर आया, परंतु साथ ही नई संभावनाएँ भी प्रदान कीं।
📌 इस अध्याय का केंद्रीय प्रश्न
1989 के बाद भारतीय राजनीति में कौन-कौन से बड़े बदलाव हुए? मंडल एवं कमंडल ने किस प्रकार राजनीति को बदल दिया? आर्थिक उदारीकरण का राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा? गठबंधन युग में भारतीय लोकतंत्र ने किस प्रकार कार्य किया?
2. 1989 का लोकसभा चुनाव — कांग्रेस प्रणाली का अंत
पृष्ठभूमि
- 1984 के चुनाव में कांग्रेस को 414 सीटें मिली थीं।
- परंतु 1980 के दशक के उत्तरार्ध में कांग्रेस की लोकप्रियता घटने लगी।
- भ्रष्टाचार के आरोप (बोफोर्स कांड, 1987)।
- पंजाब में उग्रवाद एवं कश्मीर में अस्थिरता।
- महँगाई एवं बेरोजगारी।
- मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का मुद्दा।
- अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन।
- विपक्षी दलों का एकजुट होना।
1989 के चुनाव परिणाम
| दल | लोकसभा सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 197 |
| जनता दल | 143 |
| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) | 85 |
| CPI(M) | 33 |
| CPI | 12 |
| अन्य | 19 |
1989 के चुनाव का महत्व
- कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
- केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
- गठबंधन राजनीति का युग शुरू हुआ।
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी।
- भाजपा 85 सीटों के साथ तीसरी बड़ी पार्टी बनी।
- कांग्रेस प्रणाली का अंत हो गया।
💡 उदाहरण
1989 के चुनाव में कांग्रेस को 197 सीटें मिलीं, जबकि 1984 में उसे 414 सीटें मिली थीं। यह भारी गिरावट दर्शाती है कि जनता का विश्वास कांग्रेस से उठ गया था। इसके बाद केंद्र में वी.पी. सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार बनी।
3. राष्ट्रीय मोर्चा सरकार एवं वी.पी. सिंह
राष्ट्रीय मोर्चा सरकार का गठन
- 1989 के चुनाव के बाद वी.पी. सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार बनी।
- इसमें जनता दल, भाजपा, वामपंथी दल एवं कुछ क्षेत्रीय दल शामिल थे।
- भाजपा ने बाहर से समर्थन दिया।
- वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री बने।
- यह सरकार अल्पमत में थी, परंतु बहुमत का समर्थन प्राप्त था।
वी.पी. सिंह सरकार की नीतियाँ
- मंडल आयोग की सिफारिशें लागू — ओबीसी को 27% आरक्षण।
- भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई — पूर्व सरकारों की जाँच।
- किसानों के लिए कर्ज़ माफी — कृषि संकट से निपटने के लिए।
- पंजाब एवं कश्मीर में शांति — संवाद की कोशिश।
- राम जन्मभूमि मुद्दे पर संतुलन — भाजपा के दबाव में।
सरकार का पतन
- 1990 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन तेज हुआ।
- भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया।
- वी.पी. सिंह सरकार अल्पमत में आ गई।
- नवंबर 1990 में सरकार गिर गई।
- इसके बाद चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
वी.पी. सिंह सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करके ओबीसी को 27% आरक्षण दिया। इससे भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय का नया युग शुरू हुआ। परंतु इसी के साथ कमंडल (मंदिर आंदोलन) भी तेज हुआ, जिससे सरकार गिर गई।
4. मंडल आयोग एवं ओबीसी आरक्षण
📖 परिभाषा — मंडल आयोग
मंडल आयोग की स्थापना 1979 में हुई थी। इसके अध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल थे। आयोग का उद्देश्य सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBCs) की स्थिति का अध्ययन करना एवं उनके लिए आरक्षण की सिफारिश करना था।
मंडल आयोग की सिफारिशें
- ओबीसी को केंद्र सरकार की नौकरियों में 27% आरक्षण।
- आरक्षण को 50% की सीमा के भीतर रखना।
- सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान।
- ओबीसी के विकास के लिए विशेष कार्यक्रम।
- आरक्षण का लाभ उन वर्गों को जो वास्तव में पिछड़े हैं।
मंडल आयोग की सिफारिशों का क्रियान्वयन
- 1980 में आयोग ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।
- 1990 में वी.पी. सिंह सरकार ने इसे लागू किया।
- इससे देश में व्यापक आंदोलन एवं विरोध हुआ।
- कुछ छात्रों ने आत्मदाह किया।
- सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर हुई।
- 1992 में सर्वोच्च न्यायालय ने आरक्षण को वैध ठहराया।
- परंतु “क्रीमी लेयर” (आर्थिक रूप से संपन्न) को बाहर रखने का आदेश दिया।
मंडल आयोग का महत्व
- ओबीसी को राजनीतिक एवं सामाजिक पहचान मिली।
- सामाजिक न्याय का नया युग शुरू हुआ।
- पिछड़ी जातियों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी।
- अनेक क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ (जैसे सपा, बसपा, राजद)।
- जाति आधारित राजनीति को बल मिला।
- सामाजिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
💡 उदाहरण
1990 में जब वी.पी. सिंह सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कीं, तो देशभर में इसका विरोध हुआ। दिल्ली में छात्रों ने आत्मदाह किए। परंतु इससे ओबीसी वर्ग को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण मिला, जिससे सामाजिक न्याय को बल मिला।
5. कमंडल — राम जन्मभूमि आंदोलन
📖 परिभाषा — कमंडल
“कमंडल” शब्द का प्रयोग राम जन्मभूमि आंदोलन एवं हिंदुत्व की राजनीति के लिए किया जाता है। यह मंडल आयोग के विरोध में हिंदू धार्मिक भावनाओं को भड़काने की राजनीति थी। भाजपा एवं विश्व हिंदू परिषद ने इसका नेतृत्व किया।
पृष्ठभूमि
- अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पुराना था।
- 1980 के दशक में विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन तेज किया।
- 1984 में राम मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास हुआ।
- 1989 में अयोध्या में शिलान्यास समारोह हुआ।
- भाजपा ने इसे अपना मुख्य मुद्दा बनाया।
- 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा शुरू की।
- 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ।
राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रभाव
- भाजपा की लोकप्रियता बढ़ी।
- हिंदुत्व की राजनीति को बल मिला।
- सांप्रदायिक तनाव बढ़ा।
- 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ।
- देश में सांप्रदायिक दंगे भड़के।
- भाजपा 1996 में सबसे बड़ी पार्टी बनी।
- 1998 में भाजपा के नेतृत्व में NDA सरकार बनी।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
मंडल एवं कमंडल ने भारतीय राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। मंडल ने पिछड़ी जातियों को राजनीतिक शक्ति दी, तो कमंडल ने हिंदुत्व को। इन दोनों ने मिलकर कांग्रेस के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया और गठबंधन युग की शुरुआत की।
6. बाबरी मस्जिद विध्वंस (1992)
घटना
- 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ।
- विश्व हिंदू परिषद एवं भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मस्जिद गिरा दी।
- यह भारतीय लोकतंत्र एवं धर्मनिरपेक्षता पर प्रहार था।
- देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़के।
- मुंबई, भोपाल, हैदराबाद आदि में हिंसा हुई।
- केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मोर्चा सरकार को बर्खास्त किया।
- नरसिंह राव सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाया।
परिणाम
- भारतीय राजनीति में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ा।
- भाजपा की राष्ट्रीय उपस्थिति मजबूत हुई।
- धर्मनिरपेक्षता पर बहस शुरू हुई।
- मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ी।
- 1990 के दशक में भाजपा ने अपनी स्थिति मजबूत की।
- आगे चलकर 2019 में राम मंदिर निर्माण का निर्णय हुआ।
💡 उदाहरण
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराया गया। इसके बाद मुंबई में भीषण दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। यह घटना भारतीय राजनीति का सबसे विवादास्पद अध्याय है।
7. 1991 का आर्थिक उदारीकरण (LPG)
पृष्ठभूमि
- 1991 में भारत गंभीर भुगतान संतुलन संकट में फँस गया।
- विदेशी मुद्रा भंडार घटकर मात्र 2 सप्ताह के आयात जितना रह गया।
- खाड़ी युद्ध (1990–91) के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं।
- राजनीतिक अस्थिरता एवं राजकोषीय घाटा।
- भारत को IMF से सहायता लेनी पड़ी।
- नरसिंह राव सरकार ने आर्थिक सुधार शुरू किए।
नई आर्थिक नीति (LPG)
| शब्द | अर्थ | मुख्य कदम |
|---|---|---|
| उदारीकरण (Liberalization) | सरकारी नियंत्रण में कमी | लाइसेंस राज समाप्त, निजी क्षेत्र को छूट |
| निजीकरण (Privatization) | सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में देना | विनिवेश, सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका घटी |
| वैश्वीकरण (Globalization) | विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ाव | विदेशी निवेश, आयात शुल्क में कमी |
आर्थिक उदारीकरण के प्रभाव
- विदेशी निवेश एवं तकनीक का आगमन हुआ।
- सेवा क्षेत्र (IT, बैंकिंग, संचार) में तेज वृद्धि हुई।
- उत्पादों की गुणवत्ता एवं विविधता बढ़ी।
- आर्थिक वृद्धि दर बढ़ी।
- परंतु कृषि एवं छोटे उद्योगों की उपेक्षा हुई।
- आर्थिक असमानता बढ़ी।
- सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका घटी।
- मध्यम वर्ग का उदय हुआ।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया। इन सुधारों के कारण भारत आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। परंतु इनका लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचा।
8. नरसिंह राव सरकार (1991–1996)
सरकार का गठन
- 1991 के चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी।
- नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने।
- यह अल्पमत सरकार थी।
- राव ने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया।
- मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कीं।
- बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ा।
प्रमुख उपलब्धियाँ
- आर्थिक उदारीकरण (LPG) की शुरुआत।
- मंडल आयोग की सिफारिशें लागू।
- पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा (73वाँ एवं 74वाँ संशोधन)।
- शिक्षा का अधिकार प्राथमिक स्तर पर।
- पंजाब एवं कश्मीर में शांति के प्रयास।
- विदेश नीति में सक्रियता।
चुनौतियाँ
- बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद दंगे।
- मुंबई बम धमाके (1993)।
- आर्थिक सुधारों का विरोध।
- भाजपा का बढ़ता प्रभाव।
- राजनीतिक अस्थिरता।
- 1996 के चुनाव में कांग्रेस की हार।
💡 उदाहरण
1992 में नरसिंह राव सरकार ने 73वाँ एवं 74वाँ संविधान संशोधन करके पंचायती राज एवं नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया। इससे स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिली।
9. गठबंधन युग का प्रारंभ (1996–1999)
1996 का लोकसभा चुनाव
- 1996 के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी (161 सीटें)।
- परंतु बहुमत नहीं मिला।
- अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 दिन की सरकार बनाई।
- बहुमत सिद्ध न कर पाने के कारण सरकार गिर गई।
- इसके बाद संयुक्त मोर्चा सरकार बनी।
- एच.डी. देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने।
- 1997 में इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने।
1998 का लोकसभा चुनाव
- 1998 के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी।
- अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में NDA सरकार बनी।
- यह गठबंधन सरकार थी।
- इसमें भाजपा एवं क्षेत्रीय दल शामिल थे।
- 1999 में यह सरकार गिर गई।
1999 का लोकसभा चुनाव
- 1999 के चुनाव में NDA को बहुमत मिला।
- अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।
- यह सरकार 2004 तक चली।
- यह पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी जिसने पूरा कार्यकाल पूरा किया।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
1996 से 1999 तक भारत में तीन लोकसभा चुनाव हुए। इस अवधि में राजनीतिक अस्थिरता रही। परंतु 1999 के बाद NDA सरकार ने स्थिरता प्रदान की। इससे गठबंधन राजनीति को मजबूती मिली।
10. भाजपा का उदय एवं अटल बिहारी वाजपेयी
भाजपा का उदय
- भाजपा की स्थापना 1980 में हुई।
- 1984 में केवल 2 सीटें मिलीं।
- 1989 में 85 सीटें मिलीं।
- 1996 में 161 सीटें मिलीं।
- 1998 में 182 सीटें मिलीं।
- 1999 में 182 सीटें मिलीं।
- 2014 में 282 सीटें मिलीं।
भाजपा के उदय के कारण
- हिंदुत्व की राजनीति।
- राम जन्मभूमि आंदोलन।
- कांग्रेस की कमजोरी।
- गठबंधन राजनीति।
- क्षेत्रीय दलों का समर्थन।
- मजबूत संगठन।
- अटल बिहारी वाजपेयी का नेतृत्व।
- आर्थिक सुधारों का समर्थन।
अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान
- 1996, 1998, 1999 में प्रधानमंत्री।
- गठबंधन सरकार को सफलतापूर्वक चलाया।
- आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया।
- पोखरण-II परमाणु परीक्षण (1998)।
- लाहौर शिखर सम्मेलन (1999)।
- अग्नि मिसाइल परीक्षण।
- स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना।
- सर्व शिक्षा अभियान।
💡 उदाहरण
1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया। इससे भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना। इसके बाद भारत ने “नो फर्स्ट यूज” की नीति अपनाई।
11. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार
NDA का गठन
- 1998 में भाजपा के नेतृत्व में NDA का गठन हुआ।
- इसमें भाजपा, शिवसेना, अकाली दल, TDP, DMK आदि शामिल थे।
- अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।
- यह गठबंधन 2004 तक सत्ता में रहा।
- यह पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी जिसने पूरा कार्यकाल पूरा किया।
NDA सरकार की उपलब्धियाँ
- आर्थिक विकास दर में वृद्धि।
- पोखरण-II परमाणु परीक्षण (1998)।
- स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना।
- सर्व शिक्षा अभियान।
- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (2005)।
- सूचना का अधिकार अधिनियम (2005)।
- कश्मीर में शांति के प्रयास।
- विदेश नीति में सक्रियता।
NDA सरकार की विफलताएँ
- गुजरात दंगे (2002)।
- सांप्रदायिक तनाव।
- कृषि संकट।
- बेरोजगारी।
- 2004 के चुनाव में हार।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
NDA सरकार ने 1999 से 2004 तक शासन किया। इस अवधि में भारत ने आर्थिक विकास में तेजी दर्ज की। परंतु 2002 के गुजरात दंगों ने सरकार की छवि खराब की।
12. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार
2004 का लोकसभा चुनाव
- 2004 के चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी।
- कांग्रेस के नेतृत्व में UPA का गठन हुआ।
- मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
- यह सरकार 2004 से 2014 तक चली।
- इसमें कांग्रेस, NCP, DMK, RJD, LJP आदि शामिल थे।
UPA सरकार की उपलब्धियाँ
- आर्थिक विकास दर में वृद्धि।
- मनरेगा (2005) — ग्रामीण रोजगार गारंटी।
- सूचना का अधिकार अधिनियम (2005)।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (2009)।
- भारत-अमेरिका परमाणु समझौता (2008)।
- खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013)।
- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन।
- स्वास्थ्य एवं शिक्षा में वृद्धि।
UPA सरकार की विफलताएँ
- भ्रष्टाचार के आरोप (2जी, कॉमनवेल्थ)।
- महँगाई।
- आर्थिक सुस्ती।
- निर्णय लेने में देरी।
- 2014 के चुनाव में हार।
💡 उदाहरण
2005 में UPA सरकार ने मनरेगा लागू किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी मिली। इसने लाखों गरीब परिवारों को सहारा दिया। यह UPA सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी।
13. नरेंद्र मोदी एवं 2014 का चुनाव
2014 का लोकसभा चुनाव
- 2014 के चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला।
- भाजपा को 282 सीटें मिलीं।
- नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।
- यह 1984 के बाद किसी एक पार्टी को मिला सबसे बड़ा बहुमत था।
- NDA को कुल 336 सीटें मिलीं।
- कांग्रेस को केवल 44 सीटें मिलीं।
2014 के चुनाव के कारण
- UPA सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी लहर।
- नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता।
- मजबूत नेतृत्व की मांग।
- आर्थिक विकास का मुद्दा।
- रोजगार की आशा।
- भाजपा का मजबूत संगठन।
- सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग।
- युवाओं एवं मध्यम वर्ग का समर्थन।
मोदी सरकार की नीतियाँ
- मेक इन इंडिया।
- डिजिटल इंडिया।
- स्वच्छ भारत अभियान।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।
- जन धन योजना।
- उज्ज्वला योजना।
- आयुष्मान भारत।
- वस्तु एवं सेवा कर (GST)।
- अनुच्छेद 370 की समाप्ति (2019)।
- तीन तलाक पर रोक।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
2014 के चुनाव में भाजपा को 282 सीटें मिलीं। यह 1984 के बाद किसी एक पार्टी को मिला सबसे बड़ा बहुमत था। नरेंद्र मोदी ने विकास एवं मजबूत नेतृत्व का नारा दिया।
14. क्षेत्रीय दलों की भूमिका
क्षेत्रीय दलों का उदय
- 1967 के बाद क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ।
- तमिलनाडु में DMK, AIADMK।
- पंजाब में अकाली दल।
- उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा।
- बिहार में राजद, जदयू।
- आंध्र प्रदेश में TDP।
- महाराष्ट्र में शिवसेना।
- पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस।
क्षेत्रीय दलों की भूमिका
- क्षेत्रीय हितों की रक्षा।
- संस्कृति एवं भाषा को बढ़ावा।
- केंद्र पर दबाव।
- गठबंधन राजनीति में भागीदारी।
- विकास पर बल।
- राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना।
- संघवाद को मजबूत करना।
- जनता की आवाज उठाना।
क्षेत्रीय दलों का महत्व
- राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय हितों को शामिल करते हैं।
- संघवाद को मजबूत करते हैं।
- लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधित्वात्मक बनाते हैं।
- जनता की समस्याओं को सदन में उठाते हैं।
- केंद्र सरकार पर दबाव डालते हैं।
- क्षेत्रीय विकास में सहायक होते हैं।
💡 उदाहरण
1996 के बाद से भारत में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ। क्षेत्रीय दलों की भूमिका केंद्र में निर्णायक हो गई। तमिलनाडु के DMK एवं AIADMK, बिहार के RJD एवं JDU जैसे दलों ने केंद्र सरकारों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
15. गठबंधन राजनीति की विशेषताएँ
गठबंधन राजनीति की विशेषताएँ
- किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं।
- अनेक दलों का मिलकर सरकार बनाना।
- क्षेत्रीय दलों की महत्वपूर्ण भूमिका।
- साझा न्यूनतम कार्यक्रम।
- सहमति से निर्णय।
- अस्थिरता की संभावना।
- समन्वय एवं सहयोग की आवश्यकता।
- राजनीतिक समझौते।
गठबंधन राजनीति के लाभ
- अधिक प्रतिनिधित्व।
- क्षेत्रीय हितों की रक्षा।
- सत्ता का विकेंद्रीकरण।
- सहमति से निर्णय।
- संघवाद को मजबूती।
- लोकतंत्र की गहराई।
गठबंधन राजनीति की सीमाएँ
- अस्थिरता।
- निर्णय लेने में देरी।
- साझा कार्यक्रम की कमी।
- दलों के स्वार्थ।
- भ्रष्टाचार।
- जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति में कठिनाई।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
1989 के बाद भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ। 1996 से 1999 तक तीन चुनाव हुए। 1999 से 2004 तक NDA सरकार चली। 2004 से 2014 तक UPA सरकार। 2014 से NDA सरकार। गठबंधन राजनीति ने भारतीय लोकतंत्र को नई दिशा दी।
16. नई आर्थिक नीतियों का प्रभाव
आर्थिक नीतियों के प्रभाव
- आर्थिक वृद्धि दर में वृद्धि।
- सेवा क्षेत्र का विकास।
- विदेशी निवेश में वृद्धि।
- तकनीकी आधुनिकीकरण।
- मध्यम वर्ग का उदय।
- शहरीकरण में वृद्धि।
- गरीबी में कमी।
- परंतु असमानता में वृद्धि।
- कृषि की उपेक्षा।
- छोटे उद्योगों की समस्या।
आर्थिक नीतियों की चुनौतियाँ
- गरीबी एवं बेरोजगारी।
- कृषि संकट।
- क्षेत्रीय असंतुलन।
- सामाजिक असमानता।
- पर्यावरणीय समस्याएँ।
- वैश्विक मंदी का प्रभाव।
💡 उदाहरण
1991 के बाद भारत की आर्थिक वृद्धि दर तेज हुई। IT एवं सेवा क्षेत्र में भारत ने विश्व में अपनी पहचान बनाई। परंतु कृषि क्षेत्र की उपेक्षा हुई, जिससे किसानों की स्थिति खराब हुई।
17. भारतीय राजनीति में नए मुद्दे
नए मुद्दे
- सामाजिक न्याय — मंडल आयोग, ओबीसी आरक्षण।
- धर्मनिरपेक्षता — राम जन्मभूमि, बाबरी मस्जिद।
- आर्थिक उदारीकरण — LPG सुधार।
- गठबंधन राजनीति — क्षेत्रीय दलों का उभार।
- भ्रष्टाचार — लोकपाल, RTI।
- महिला आरक्षण — 2023 में पारित।
- पर्यावरण — जलवायु परिवर्तन।
- आतंकवाद — सीमा पार आतंकवाद।
- कश्मीर — अनुच्छेद 370 की समाप्ति।
- विकास — मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया।
नए मुद्दों का प्रभाव
- जाति आधारित राजनीति का उभार।
- धार्मिक ध्रुवीकरण।
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका।
- मध्यम वर्ग की भागीदारी।
- सोशल मीडिया का प्रभाव।
- युवाओं की राजनीति में भागीदारी।
⭐ महत्वपूर्ण निष्कर्ष
1989 के बाद भारतीय राजनीति में जो बदलाव आए, उन्होंने लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधित्वात्मक एवं समावेशी बनाया। मंडल ने सामाजिक न्याय को बल दिया, कमंडल ने हिंदुत्व को, आर्थिक उदारीकरण ने विकास को, और गठबंधन राजनीति ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को मंच दिया। ये सभी बदलाव भारतीय लोकतंत्र की जीवनी शक्ति के प्रतीक हैं।
18. महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं तथ्य
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1979 | मंडल आयोग की स्थापना |
| 1980 | भाजपा की स्थापना; मंडल आयोग की रिपोर्ट |
| 1984 | कांग्रेस को 414 सीटें; इंदिरा गांधी की हत्या |
| 1989 | लोकसभा चुनाव; कांग्रेस की हार; राष्ट्रीय मोर्चा सरकार |
| 1990 | मंडल आयोग की सिफारिशें लागू; रथयात्रा; वी.पी. सिंह सरकार का पतन |
| 1991 | आर्थिक उदारीकरण (LPG); नरसिंह राव प्रधानमंत्री |
| 1992 | बाबरी मस्जिद विध्वंस |
| 1993 | मुंबई बम धमाके |
| 1996 | लोकसभा चुनाव; भाजपा सबसे बड़ी पार्टी; संयुक्त मोर्चा सरकार |
| 1998 | लोकसभा चुनाव; NDA सरकार; पोखरण-II परमाणु परीक्षण |
| 1999 | लोकसभा चुनाव; NDA सरकार; कारगिल युद्ध |
| 2004 | लोकसभा चुनाव; UPA सरकार; मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री |
| 2005 | मनरेगा; सूचना का अधिकार अधिनियम |
| 2008 | भारत-अमेरिका परमाणु समझौता |
| 2009 | शिक्षा का अधिकार अधिनियम |
| 2013 | खाद्य सुरक्षा अधिनियम |
| 2014 | लोकसभा चुनाव; भाजपा को 282 सीटें; नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री |
| 2019 | अनुच्छेद 370 की समाप्ति; भाजपा को 303 सीटें |
| 2023 | महिला आरक्षण विधेयक पारित |
⭐ अति महत्वपूर्ण तथ्य (याद रखें)
- मंडल आयोग की स्थापना — 1979
- मंडल आयोग की सिफारिशें लागू — 1990
- बाबरी मस्जिद विध्वंस — 6 दिसंबर 1992
- आर्थिक उदारीकरण — 1991
- पोखरण-II — 1998
- NDA सरकार — 1998–2004
- UPA सरकार — 2004–2014
- नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री — 2014
- अनुच्छेद 370 की समाप्ति — 2019
- महिला आरक्षण — 2023
19. महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
- मंडल आयोग की स्थापना कब हुई? (1979)
- मंडल आयोग के अध्यक्ष कौन थे? (बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल)
- मंडल आयोग की सिफारिशें कब लागू हुईं? (1990)
- बाबरी मस्जिद विध्वंस कब हुआ? (1992)
- आर्थिक उदारीकरण कब शुरू हुआ? (1991)
- पोखरण-II परमाणु परीक्षण कब हुआ? (1998)
- NDA सरकार कब बनी? (1998)
- UPA सरकार कब बनी? (2004)
- नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री कब बने? (2014)
- अनुच्छेद 370 कब समाप्त हुआ? (2019)
लघु उत्तरीय प्रश्न (2–3 अंक)
- 1989 के चुनाव का क्या महत्व था?
- मंडल आयोग की मुख्य सिफारिशें क्या थीं?
- कमंडल से आप क्या समझते हैं?
- बाबरी मस्जिद विध्वंस के परिणाम बताइए।
- आर्थिक उदारीकरण के प्रभाव बताइए।
- गठबंधन राजनीति की विशेषताएँ बताइए।
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
- NDA एवं UPA सरकार की तुलना करें।
- नरेंद्र मोदी सरकार की प्रमुख नीतियाँ बताइए।
- भारतीय राजनीति में नए मुद्दे कौन-कौन से हैं?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
- 1989 के बाद भारतीय राजनीति में आए बदलावों की विवेचना करें।
- मंडल आयोग एवं ओबीसी आरक्षण की विस्तृत व्याख्या करें।
- राम जन्मभूमि आंदोलन एवं बाबरी मस्जिद विध्वंस का वर्णन करें।
- 1991 के आर्थिक उदारीकरण के कारणों एवं प्रभावों का मूल्यांकन करें।
- गठबंधन युग (1996–1999) की राजनीतिक घटनाओं की विवेचना करें।
- भाजपा के उदय एवं अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का वर्णन करें।
- NDA एवं UPA सरकारों की उपलब्धियों एवं विफलताओं की विवेचना करें।
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका एवं गठबंधन राजनीति की व्याख्या करें।
दीर्घ निबंधात्मक प्रश्न (8–10 अंक)
- “1989 के बाद भारतीय राजनीति में नए बदलाव आए” — इस कथन की विवेचना करें।
- मंडल एवं कमंडल की राजनीति की तुलनात्मक विवेचना करें।
- 1991 के आर्थिक सुधारों एवं गठबंधन राजनीति का भारतीय लोकतंत्र पर प्रभाव का मूल्यांकन करें।
- भारतीय राजनीति में भाजपा के उदय एवं विकास की विवेचना करें।
- गठबंधन युग में भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता एवं चुनौतियों की समीक्षा करें।
⭐ परीक्षा टिप्स
- तिथियों (1979, 1989, 1990, 1991, 1992, 1998, 2004, 2014, 2019) को अच्छी तरह याद करें।
- “मंडल”, “कमंडल”, “आर्थिक उदारीकरण”, “गठबंधन राजनीति” एवं “भाजपा का उदय” से हर वर्ष प्रश्न आते हैं।
- उत्तर में तथ्य एवं उदाहरण अवश्य लिखें।
- सारणी बनाकर उत्तर लिखने से अंक अधिक मिलते हैं।
- NDA एवं UPA सरकारों की तुलना करके समझें।
- क्षेत्रीय दलों की भूमिका को स्पष्ट करें।
