कक्षा 12 राजनीति विज्ञान – अध्याय 4: भारत के विदेश संबंध | KK MAHTO

बिहार बोर्ड — कक्षा 12 : राजनीति विज्ञान

अध्याय 4 : भारत के विदेश संबंध

KK MAHTO — Founder & Educator, Apni Kaksha

📑 विषय-सूची (Contents)

  1. परिचय एवं विदेश नीति की अवधारणा
  2. विदेश नीति के निर्धारक तत्व
  3. भारत की विदेश नीति के उद्देश्य एवं सिद्धांत
  4. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM)
  5. पंचशील के सिद्धांत
  6. भारत-पाकिस्तान संबंध
  7. भारत-चीन संबंध
  8. भारत-अमेरिका संबंध
  9. भारत-रूस संबंध
  10. भारत एवं उसके पड़ोसी देश
  11. भारत की परमाणु नीति
  12. आतंकवाद एवं भारत
  13. संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका
  14. क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन (SAARC, BRICS, G20 आदि)
  15. महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं तथ्य
  16. महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)

1. परिचय एवं विदेश नीति की अवधारणा

किसी भी देश की उन्नति एवं सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि वह अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंध बनाए रखे। विदेशी देशों के साथ संबंधों को नियंत्रित करने वाली नीति को ही विदेश नीति कहा जाता है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति का निर्माण किया, जिसका मार्गदर्शन जवाहरलाल नेहरू ने किया।

📖 परिभाषा — विदेश नीति (Foreign Policy) विदेश नीति से तात्पर्य उन सिद्धांतों, निर्णयों एवं कार्यों के समूह से है, जिनके आधार पर कोई राष्ट्र अन्य राष्ट्रों एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ अपने संबंधों का संचालन करता है। यह राष्ट्रीय हित की प्राप्ति का साधन है।
📖 परिभाषा — राष्ट्रीय हित (National Interest) राष्ट्रीय हित वे उद्देश्य एवं मूल्य होते हैं, जिनकी प्राप्ति एवं रक्षा किसी राष्ट्र के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है — जैसे सुरक्षा, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, आर्थिक विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा।

भारतीय विदेश नीति का स्वरूप

  • भारत की विदेश नीति शांति, सहयोग एवं सहअस्तित्व पर आधारित है।
  • यह स्वतंत्र एवं स्वायत्त निर्णय लेने पर बल देती है।
  • भारत किसी भी शक्ति गुट का सदस्य नहीं बना।
  • भारत ने गुटनिरपेक्षता को अपनी विदेश नीति का आधार बनाया।
  • भारत विकासशील देशों का समर्थन करता है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य भारतीय विदेश नीति के जनक जवाहरलाल नेहरू माने जाते हैं। उन्होंने 1946 में ही घोषणा कर दी थी कि भारत शक्ति गुटों से दूर रहते हुए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगा।

2. विदेश नीति के निर्धारक तत्व

किसी भी देश की विदेश नीति अनेक तत्वों से प्रभावित होती है। भारत की विदेश नीति भी निम्नलिखित तत्वों से निर्धारित होती है —

(क) आंतरिक तत्व

  1. भौगोलिक स्थिति — भारत का विशाल आकार एवं रणनीतिक स्थिति।
  2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि — ब्रिटिश शासन एवं स्वतंत्रता संग्राम का अनुभव।
  3. राष्ट्रीय हित — सुरक्षा, संप्रभुता एवं आर्थिक विकास।
  4. अर्थव्यवस्था — आर्थिक विकास एवं विदेशी निवेश की आवश्यकता।
  5. राजनीतिक व्यवस्था — लोकतांत्रिक मूल्य एवं संसदीय व्यवस्था।
  6. जनमत — जनता की राय एवं सार्वजनिक दबाव।
  7. नेतृत्व — नेहरू, शास्त्री, इंदिरा गांधी आदि का दृष्टिकोण।
  8. सैन्य शक्ति — रक्षा क्षमता एवं परमाणु शक्ति।

(ख) बाहरी तत्व

  1. अंतर्राष्ट्रीय परिवेश — शीत युद्ध, गुटनिरपेक्षता, वैश्वीकरण।
  2. पड़ोसी देशों की नीतियाँ — पाकिस्तान, चीन, नेपाल आदि।
  3. महाशक्तियों का रुख — अमेरिका, रूस, चीन।
  4. संयुक्त राष्ट्र एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन — UN, SAARC, BRICS आदि।
  5. आतंकवाद एवं सीमा विवाद — पाकिस्तान एवं चीन से संबंध।
  6. वैश्विक आर्थिक व्यवस्था — WTO, IMF, विश्व बैंक।

(ग) भारत की विदेश नीति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

तत्व प्रभाव
भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर में केंद्रीय स्थिति, पड़ोसी देशों से सीमाएँ
ऐतिहासिक अनुभव उपनिवेशवाद का विरोध, स्वतंत्रता संग्राम की विरासत
आर्थिक आवश्यकता विदेशी निवेश, तकनीक, ऊर्जा संसाधन
सुरक्षा चुनौतियाँ आतंकवाद, सीमा विवाद, परमाणु खतरा
वैचारिक आधार लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, अहिंसा

3. भारत की विदेश नीति के उद्देश्य एवं सिद्धांत

उद्देश्य (Objectives)

  1. राष्ट्रीय हित की रक्षा — देश की संप्रभुता, अखंडता एवं सुरक्षा।
  2. आर्थिक विकास — विदेशी निवेश, तकनीक एवं व्यापार को बढ़ावा।
  3. विश्व शांति — युद्ध एवं संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान।
  4. गुटनिरपेक्षता — शक्ति गुटों से दूर रहना।
  5. निरस्त्रीकरण — परमाणु हथियारों की होड़ को रोकना।
  6. उपनिवेशवाद एवं साम्राज्यवाद का विरोध — विकासशील देशों का समर्थन।
  7. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग — संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य संगठनों में सक्रिय भागीदारी।
  8. वैश्विक प्रतिष्ठा — विश्व में भारत की छवि एवं सम्मान।
  9. आतंकवाद का उन्मूलन — सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग।
  10. ऊर्जा सुरक्षा — तेल एवं गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना।

सिद्धांत (Principles)

  1. पंचशील — शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पाँच सिद्धांत।
  2. गुटनिरपेक्षता — किसी सैन्य गुट में शामिल न होना।
  3. शांतिपूर्ण सहअस्तित्व — सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध।
  4. संप्रभुता एवं समानता — सभी राष्ट्रों की समानता का सम्मान।
  5. आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना — अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं।
  6. विवादों का शांतिपूर्ण समाधान — बल प्रयोग का विरोध।
  7. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग — वैश्विक समस्याओं में सहयोग।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु भारत की विदेश नीति का मुख्य आधार “राष्ट्रीय हित” है, परंतु इसमें नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों का भी समावेश है। यही भारतीय विदेश नीति की विशेषता है।

4. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM)

📖 परिभाषा — गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) गुटनिरपेक्षता वह नीति है जिसमें कोई राष्ट्र किसी भी सैन्य गुट (जैसे NATO या वारसा संधि) में शामिल नहीं होता और स्वतंत्र रूप से अपनी विदेश नीति का निर्माण करता है। यह “तटस्थता” नहीं है, बल्कि स्वतंत्र निर्णय की नीति है।
📌 गुटनिरपेक्षता एवं तटस्थता में अंतर तटस्थता (Neutrality) — युद्ध के समय किसी पक्ष का न होना।
गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) — शांतिकाल में भी किसी सैन्य गुट का सदस्य न होना एवं स्वतंत्र निर्णय लेना। गुटनिरपेक्ष देश युद्ध में किसी भी पक्ष का समर्थन कर सकता है, यदि उसके राष्ट्रीय हित में हो।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की पृष्ठभूमि

  • द्वितीय विश्व युद्ध (1939–45) के बाद विश्व दो शक्ति गुटों में बँट गया —
  • पूँजीवादी गुट — अमेरिका के नेतृत्व में (NATO)।
  • समाजवादी गुट — सोवियत संघ के नेतृत्व में (वारसा संधि)।
  • इस दौर को “शीत युद्ध” कहा जाता है।
  • नव स्वतंत्र राष्ट्रों ने इस द्विध्रुवीय व्यवस्था से दूर रहने का निर्णय लिया।
  • इसी विचारधारा से गुटनिरपेक्ष आंदोलन का जन्म हुआ।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक

नेता देश
जवाहरलाल नेहरू भारत
जोसिप ब्रोज टीटो यूगोस्लाविया
गमाल अब्दुल नासिर मिस्र
सुकर्णो इंडोनेशिया
क्वामे एनक्रूमा घाना

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के प्रमुख सम्मेलन

सम्मेलन वर्ष स्थान
प्रथम1961बेलग्रेड (यूगोस्लाविया)
द्वितीय1964काहिरा (मिस्र)
तृतीय1970लुसाका (जाम्बिया)
चतुर्थ1973अल्जीयर्स (अल्जीरिया)
सप्तम1983नई दिल्ली (भारत)
अठारहवाँ2019बाकू (अजरबैजान)
💡 उदाहरण भारत ने 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय सोवियत संघ के साथ मैत्री संधि की, जबकि वह गुटनिरपेक्ष था। इससे स्पष्ट है कि गुटनिरपेक्षता का अर्थ अंधी तटस्थता नहीं, बल्कि स्वतंत्र निर्णय है।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की उपलब्धियाँ

  • शीत युद्ध के दौरान तीसरी दुनिया के देशों को स्वतंत्र मंच प्रदान किया।
  • उपनिवेशवाद एवं साम्राज्यवाद के विरुद्ध आवाज उठाई।
  • निरस्त्रीकरण एवं शांति के प्रयासों को बल दिया।
  • विकासशील देशों के आर्थिक हितों की रक्षा की।
  • रंगभेद (Apartheid) के विरुद्ध संघर्ष में सहयोग किया।
  • नए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO) की माँग को बल दिया।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की आलोचनाएँ

  • शीत युद्ध के बाद इसकी प्रासंगिकता पर प्रश्न उठे।
  • कुछ देशों ने इसका उपयोग केवल सत्ता बनाए रखने के लिए किया।
  • आंदोलन में आंतरिक मतभेद एवं एकता की कमी।
  • कुछ सदस्य देशों ने गुटों से संबंध बनाए रखे।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु शीत युद्ध की समाप्ति (1991) के बाद भी गुटनिरपेक्ष आंदोलन प्रासंगिक है, क्योंकि आज भी विकासशील देशों को आर्थिक शोषण, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन एवं असमानता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

5. पंचशील के सिद्धांत

📖 परिभाषा — पंचशील (Panchsheel) पंचशील शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पाँच सिद्धांत हैं, जिन्हें 29 अप्रैल 1954 को भारत एवं चीन के बीच एक समझौते के रूप में स्वीकार किया गया। ये सिद्धांत भारतीय विदेश नीति का आधार हैं।

पंचशील के पाँच सिद्धांत

  1. एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता का सम्मान — किसी देश की सीमा एवं स्वतंत्रता का आदर।
  2. आक्रमण न करना — किसी भी देश पर सैन्य आक्रमण न करना।
  3. आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना — अन्य देशों के आंतरिक मामलों में दखल न देना।
  4. समानता एवं पारस्परिक लाभ — सभी देशों के साथ समान व्यवहार एवं आपसी लाभ।
  5. शांतिपूर्ण सहअस्तित्व — शांति एवं सहयोग के साथ रहना।

पंचशील का महत्व

  • यह भारतीय विदेश नीति का आधार स्तंभ है।
  • इसने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में नैतिकता एवं शांति का संदेश दिया।
  • विकासशील देशों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया।
  • यह संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के अनुरूप है।
  • आज भी भारत की विदेश नीति में इसका प्रभाव दिखता है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य पंचशील समझौते पर भारत की ओर से जवाहरलाल नेहरू एवं चीन की ओर से चाउ एन लाई ने हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता 29 अप्रैल 1954 को हुआ था।

6. भारत-पाकिस्तान संबंध

भारत एवं पाकिस्तान के संबंध स्वतंत्रता के समय से ही तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच अनेक मुद्दे विवाद का कारण बने रहे हैं।

विवाद के प्रमुख मुद्दे

  1. कश्मीर का मुद्दा — 1947 में कश्मीर का भारत में विलय, परंतु पाकिस्तान का दावा।
  2. सीमा विवाद — LOC (नियंत्रण रेखा) एवं अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तनाव।
  3. आतंकवाद — पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद।
  4. सिंधु जल संधि (1960) — नदियों के पानी का बँटवारा।
  5. सियाचिन विवाद — सियाचिन ग्लेशियर पर दावा।
  6. बांग्लादेश का मुद्दा (1971) — पूर्वी पाकिस्तान का स्वतंत्र राष्ट्र बनना।
  7. परमाणु परीक्षण — 1998 में दोनों देशों के परमाणु परीक्षण।

भारत-पाक युद्ध

युद्ध वर्ष परिणाम
प्रथम युद्ध 1947–48 कश्मीर का विभाजन, LOC का निर्माण
द्वितीय युद्ध 1965 ताशकंद समझौता (1966)
तृतीय युद्ध 1971 बांग्लादेश का जन्म, शिमला समझौता (1972)
कारगिल युद्ध 1999 भारत की विजय, पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय किरकिरी

महत्वपूर्ण समझौते

  • ताशकंद समझौता (1966) — लाल बहादुर शास्त्री एवं अयूब खान के बीच।
  • शिमला समझौता (1972) — इंदिरा गांधी एवं जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच।
  • सिंधु जल संधि (1960) — विश्व बैंक की मध्यस्थता में।
  • लाहौर शिखर सम्मेलन (1999) — अटल बिहारी वाजपेयी एवं नवाज शरीफ।
  • आगरा शिखर सम्मेलन (2001) — वाजपेयी एवं मुशर्रफ।
💡 उदाहरण 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरा। इस युद्ध के बाद 1972 में शिमला समझौता हुआ, जिसमें दोनों देशों ने द्विपक्षीय मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का संकल्प लिया।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु भारत ने सदैव पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण संबंधों की इच्छा जताई है, परंतु पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद एवं सीमा पर उकसावे की नीति के कारण संबंधों में तनाव बना रहता है।

7. भारत-चीन संबंध

भारत एवं चीन के संबंध प्राचीन काल से रहे हैं, परंतु आधुनिक समय में इनमें उतार-चढ़ाव आते रहे हैं।

संबंधों के प्रमुख पहलू

  1. पंचशील समझौता (1954) — शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांत।
  2. सीमा विवाद — अक्साई चिन एवं अरुणाचल प्रदेश (दक्षिण तिब्बत) पर विवाद।
  3. भारत-चीन युद्ध (1962) — भारत की पराजय, संबंधों में तनाव।
  4. राजनीतिक संबंधों में सुधार — 1976 में राजदूतों की नियुक्ति।
  5. आर्थिक सहयोग — व्यापार एवं निवेश में वृद्धि।
  6. सीमा वार्ता — विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी।
  7. BRICS एवं SCO में सहयोग — बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम।

विवाद के मुद्दे

  • अक्साई चिन — चीन द्वारा अवैध कब्जा।
  • अरुणाचल प्रदेश — चीन इसे “दक्षिण तिब्बत” कहता है।
  • दोकलम विवाद (2017) — भूटान के पास सीमा विवाद।
  • गलवान घाटी संघर्ष (2020) — भारतीय सैनिकों की शहादत।
  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) — भारत का विरोध।
  • व्यापार असंतुलन — भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भारत ने अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत ने चीन के साथ व्यापार एवं निवेश पर भी पुनर्विचार किया।

8. भारत-अमेरिका संबंध

शीत युद्ध के दौरान भारत एवं अमेरिका के संबंध सामान्य रहे, परंतु 1991 के बाद इनमें तेजी आई।

संबंधों के प्रमुख क्षेत्र

  1. आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग — व्यापार एवं निवेश में वृद्धि।
  2. रक्षा सहयोग — रक्षा सौदे एवं संयुक्त अभ्यास।
  3. परमाणु सहयोग — 2008 का भारत-अमेरिका परमाणु समझौता।
  4. आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग — सूचना एवं खुफिया जानकारी साझा करना।
  5. प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष — ISRO एवं NASA के बीच सहयोग।
  6. शिक्षा एवं संस्कृति — छात्रों एवं शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान।

चुनौतियाँ

  • अमेरिका-पाकिस्तान संबंध।
  • अमेरिका-चीन संबंध एवं भारत की स्थिति।
  • व्यापारिक विवाद एवं टैरिफ।
  • ईरान एवं रूस से भारत के संबंध।
  • अमेरिका का अफगानिस्तान से withdrawal।
💡 उदाहरण 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु व्यापार में भाग लेने की अनुमति मिली, जबकि भारत ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। यह भारतीय कूटनीति की बड़ी सफलता थी।

9. भारत-रूस संबंध

भारत एवं रूस (पूर्व सोवियत संघ) के संबंध ऐतिहासिक एवं मैत्रीपूर्ण रहे हैं।

संबंधों के प्रमुख पहलू

  1. मैत्री संधि (1971) — भारत-सोवियत मैत्री एवं सहयोग संधि।
  2. रक्षा सहयोग — भारत की सैन्य आपूर्ति का बड़ा हिस्सा रूस से।
  3. परमाणु सहयोग — कुडनकुलम परमाणु संयंत्र।
  4. ऊर्जा सहयोग — तेल एवं गैस के क्षेत्र में।
  5. अंतरिक्ष सहयोग — ISRO एवं रूस के बीच।
  6. व्यापार एवं निवेश — द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि।
  7. BRICS, SCO एवं G20 — बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग।

भारत-रूस संबंधों की विशेषताएँ

  • यह संबंध “विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी” के रूप में जाने जाते हैं।
  • रूस ने हमेशा भारत की संप्रभुता एवं अखंडता का समर्थन किया है।
  • कश्मीर मुद्दे पर रूस का रुख भारत के पक्ष में रहा है।
  • रक्षा क्षेत्र में भारत की रूस पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है।
  • रूस भारत का “विश्वसनीय मित्र” माना जाता है।

10. भारत एवं उसके पड़ोसी देश

(क) भारत-नेपाल संबंध

  • 1950 की भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि।
  • खुली सीमा एवं नागरिकों की आवाजाही।
  • व्यापार, जल संसाधन एवं ऊर्जा में सहयोग।
  • चुनौतियाँ — सीमा विवाद (कालापानी), मधेशी मुद्दा, चीन का प्रभाव।

(ख) भारत-बांग्लादेश संबंध

  • 1971 में भारत ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता में सहयोग किया।
  • 2015 में भूमि सीमा समझौता।
  • व्यापार एवं कनेक्टिविटी में सहयोग।
  • चुनौतियाँ — अवैध प्रवासन, तीस्ता नदी जल बँटवारा, सीमा पर हिंसा।

(ग) भारत-श्रीलंका संबंध

  • सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंध।
  • 1987 का भारत-श्रीलंका समझौता।
  • चुनौतियाँ — तमिल मुद्दा, मछुआरों का विवाद, चीन का प्रभाव।

(घ) भारत-भूटान संबंध

  • 1949 की भारत-भूटान मैत्री संधि।
  • भूटान भारत का विश्वसनीय मित्र।
  • चुनौती — चीन का दबाव, दोकलम विवाद।

(ङ) भारत-म्यांमार संबंध

  • सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंध।
  • व्यापार एवं कनेक्टिविटी में सहयोग।
  • चुनौती — रोहिंग्या संकट, सैन्य शासन।

(च) भारत-अफगानिस्तान संबंध

  • ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध।
  • विकास सहयोग एवं पुनर्निर्माण में भारत की भूमिका।
  • चुनौती — तालिबान का शासन, आतंकवाद।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु भारत की पड़ोसी नीति का आधार “पड़ोसी प्रथम” (Neighbourhood First) है। भारत अपने पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंध चाहता है, परंतु सीमा विवाद एवं आतंकवाद जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

11. भारत की परमाणु नीति

परमाणु नीति के सिद्धांत

  1. शांतिपूर्ण उपयोग — परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांतिपूर्ण कार्यों के लिए।
  2. न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध — परमाणु हथियार केवल आत्मरक्षा के लिए।
  3. प्रथम प्रयोग नहीं (No First Use) — भारत परमाणु हथियार का पहले प्रयोग नहीं करेगा।
  4. परमाणु निरस्त्रीकरण — वैश्विक निरस्त्रीकरण का समर्थन।
  5. NPT पर हस्ताक्षर नहीं — भारत ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए।
  6. CTBT पर हस्ताक्षर नहीं — भारत ने CTBT पर भी हस्ताक्षर नहीं किए।

परमाणु परीक्षण

परीक्षण वर्ष स्थान
प्रथम परीक्षण (स्माइलिंग बुद्धा)1974पोखरण (राजस्थान)
द्वितीय परीक्षण (शक्ति)1998पोखरण (राजस्थान)
📌 महत्वपूर्ण तथ्य 1974 के परीक्षण को “स्माइलिंग बुद्धा” कहा जाता है। 1998 के परीक्षण के बाद भारत ने स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित किया। इसके बाद भारत ने “नो फर्स्ट यूज” की नीति अपनाई।

12. आतंकवाद एवं भारत

📖 परिभाषा — आतंकवाद (Terrorism) आतंकवाद से तात्पर्य उस हिंसात्मक गतिविधि से है, जिसमें राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निर्दोष नागरिकों पर आक्रमण किया जाता है, भय का वातावरण बनाया जाता है एवं सरकार को झुकाने का प्रयास किया जाता है।

भारत में आतंकवाद के प्रमुख कारण

  1. पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद।
  2. जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद।
  3. सीमा पार से घुसपैठ।
  4. नक्सलवाद एवं वामपंथी उग्रवाद।
  5. उत्तर-पूर्व में उग्रवाद।
  6. धार्मिक एवं सांप्रदायिक तनाव।
  7. गरीबी एवं बेरोजगारी।

प्रमुख आतंकी घटनाएँ

घटना वर्ष स्थान
मुंबई आतंकी हमला1993मुंबई
संसद पर हमला2001नई दिल्ली
अक्षरधाम मंदिर हमला2002अहमदाबाद
मुंबई आतंकी हमला (26/11)2008मुंबई
पठानकोट हमला2016पंजाब
पुलवामा हमला2019जम्मू-कश्मीर

भारत की आतंकवाद विरोधी नीति

  • आतंकवाद के विरुद्ध सख्त कानून (UAPA, POTA, TADA)।
  • सीमा पर सुरक्षा बलों की तैनाती।
  • खुफिया तंत्र का सुदृढ़ीकरण।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
  • आतंकवाद को राजनीतिक समस्या मानने से इंकार।
  • सर्जिकल स्ट्राइक (2016) एवं एयर स्ट्राइक (2019)।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु भारत आतंकवाद को मानवता के विरुद्ध अपराध मानता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक आतंकवाद विरोधी सम्मेलन (CCIT) का प्रस्ताव रखा है।

13. संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र में भारत का योगदान

  1. शांति स्थापना अभियान — भारत ने अनेक UN शांति मिशनों में भाग लिया।
  2. निरस्त्रीकरण — भारत ने निरस्त्रीकरण के प्रयासों का समर्थन किया।
  3. विकासशील देशों का समर्थन — भारत विकासशील देशों की आवाज उठाता है।
  4. मानवाधिकार — भारत ने मानवाधिकार की रक्षा पर बल दिया।
  5. आतंकवाद विरोधी — भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहयोग की माँग की।
  6. जलवायु परिवर्तन — भारत ने पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई।
  7. सतत विकास लक्ष्य (SDG) — भारत ने SDG को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत का स्थायी सदस्यता का दावा

  • भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
  • भारत की जनसंख्या विश्व में सर्वाधिक है।
  • भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है।
  • भारत ने शांति स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है।
  • भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है।
  • भारत ने UNSC में सुधार की माँग की है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की माँग की है। भारत का तर्क है कि वर्तमान UNSC 1945 की परिस्थितियों को दर्शाता है, जिसमें सुधार आवश्यक है।

14. क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन

(क) दक्षेस / सार्क (SAARC)

📖 परिभाषा दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका (बांग्लादेश) में की गई। इसका उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • सदस्य देश (8) — भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव, अफगानिस्तान।
  • मुख्यालय — काठमांडू (नेपाल)।
  • चुनौतियाँ — भारत-पाक तनाव, आतंकवाद, सीमा विवाद।

(ख) ब्रिक्स (BRICS)

  • स्थापना — 2006 (BRIC), 2010 में दक्षिण अफ्रीका शामिल होने पर BRICS।
  • सदस्य — ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका।
  • उद्देश्य — आर्थिक सहयोग, विकासशील देशों की आवाज।
  • महत्व — विश्व की 40% जनसंख्या एवं 25% GDP का प्रतिनिधित्व।

(ग) जी-20 (G20)

  • स्थापना — 1999।
  • सदस्य — विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ।
  • भारत की अध्यक्षता — 2023 में भारत ने G20 की अध्यक्षता की।
  • उद्देश्य — वैश्विक आर्थिक सहयोग एवं स्थिरता।

(घ) शंघाई सहयोग संगठन (SCO)

  • स्थापना — 2001।
  • सदस्य — चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, मध्य एशियाई देश।
  • भारत — 2017 में सदस्य बना।
  • उद्देश्य — सुरक्षा, आर्थिक सहयोग एवं आतंकवाद विरोध।

(ङ) अन्य महत्वपूर्ण संगठन

संगठन स्थापना मुख्यालय उद्देश्य
संयुक्त राष्ट्र (UN) 1945 न्यूयॉर्क विश्व शांति एवं सुरक्षा
विश्व व्यापार संगठन (WTO) 1995 जिनेवा वैश्विक व्यापार नियम
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) 1945 वाशिंगटन डी.सी. वित्तीय स्थिरता
विश्व बैंक 1944 वाशिंगटन डी.सी. विकास सहयोग
एशियाई विकास बैंक (ADB) 1966 मनीला एशिया में विकास

15. महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं तथ्य

वर्ष घटना
1946नेहरू का विदेश नीति पर वक्तव्य
1947भारत-पाक युद्ध (प्रथम)
1949भारत-भूटान मैत्री संधि
1950भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि
1954पंचशील समझौता (भारत-चीन)
1960सिंधु जल संधि
1961प्रथम गुटनिरपेक्ष सम्मेलन (बेलग्रेड)
1962भारत-चीन युद्ध
1965भारत-पाक युद्ध (द्वितीय)
1966ताशकंद समझौता
1971भारत-सोवियत मैत्री संधि; भारत-पाक युद्ध (तृतीय); बांग्लादेश का जन्म
1972शिमला समझौता
1974प्रथम परमाणु परीक्षण (पोखरण)
1985सार्क (SAARC) की स्थापना
1987भारत-श्रीलंका समझौता
1998द्वितीय परमाणु परीक्षण (पोखरण)
1999कारगिल युद्ध; लाहौर शिखर सम्मेलन
2001आगरा शिखर सम्मेलन
2006BRICS की स्थापना (BRIC)
2008भारत-अमेरिका परमाणु समझौता
2015भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता
2016सर्जिकल स्ट्राइक
2017भारत SCO का सदस्य बना; दोकलम विवाद
2019बालाकोट एयर स्ट्राइक; पुलवामा हमला
2020गलवान घाटी संघर्ष
2023भारत की G20 अध्यक्षता
⭐ अति महत्वपूर्ण तथ्य (याद रखें)
  • भारतीय विदेश नीति के जनक — जवाहरलाल नेहरू
  • गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक — नेहरू, टीटो, नासिर, सुकर्णो, एनक्रूमा
  • पंचशील समझौता — 29 अप्रैल 1954
  • प्रथम परमाणु परीक्षण — 1974 (स्माइलिंग बुद्धा)
  • द्वितीय परमाणु परीक्षण — 1998 (शक्ति)
  • सार्क की स्थापना — 8 दिसंबर 1985
  • भारत-अमेरिका परमाणु समझौता — 2008
  • शिमला समझौता — 1972
  • ताशकंद समझौता — 1966
  • गलवान घाटी संघर्ष — 2020

16. महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)

  1. भारतीय विदेश नीति के जनक कौन हैं? (जवाहरलाल नेहरू)
  2. गुटनिरपेक्ष आंदोलन का प्रथम सम्मेलन कब हुआ? (1961, बेलग्रेड)
  3. पंचशील समझौता कब हुआ? (1954)
  4. भारत-चीन युद्ध कब हुआ? (1962)
  5. बांग्लादेश का जन्म कब हुआ? (1971)
  6. शिमला समझौता कब हुआ? (1972)
  7. प्रथम परमाणु परीक्षण कब हुआ? (1974)
  8. सार्क की स्थापना कब हुई? (1985)
  9. भारत-अमेरिका परमाणु समझौता कब हुआ? (2008)
  10. भारत ने G20 की अध्यक्षता कब की? (2023)

लघु उत्तरीय प्रश्न (2–3 अंक)

  1. विदेश नीति से आप क्या समझते हैं?
  2. विदेश नीति के निर्धारक तत्वों का वर्णन करें।
  3. गुटनिरपेक्षता क्या है? इसकी विशेषताएँ बताइए।
  4. पंचशील के पाँच सिद्धांत बताइए।
  5. भारत-पाक संबंधों में तनाव के कारण बताइए।
  6. भारत-चीन संबंधों में विवाद के मुद्दे बताइए।
  7. भारत की परमाणु नीति की विशेषताएँ बताइए।
  8. सार्क एवं ब्रिक्स में अंतर स्पष्ट करें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

  1. भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों की विवेचना करें।
  2. गुटनिरपेक्ष आंदोलन की उपलब्धियों एवं सीमाओं का मूल्यांकन करें।
  3. भारत-पाकिस्तान संबंधों की विवेचना करें।
  4. भारत-चीन संबंधों में उतार-चढ़ाव के कारणों को स्पष्ट करें।
  5. भारत-अमेरिका एवं भारत-रूस संबंधों की तुलना करें।
  6. भारत की परमाणु नीति एवं आतंकवाद विरोधी नीति की व्याख्या करें।
  7. संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका एवं स्थायी सदस्यता के दावे का वर्णन करें।

दीर्घ निबंधात्मक प्रश्न (8–10 अंक)

  1. भारत की विदेश नीति की मुख्य विशेषताओं एवं उपलब्धियों का मूल्यांकन करें।
  2. शीत युद्ध के बाद भारत की विदेश नीति में आए परिवर्तनों की विवेचना करें।
  3. “भारत की विदेश नीति शांति, सहयोग एवं गुटनिरपेक्षता पर आधारित है” — इस कथन की समीक्षा करें।
  4. भारत की पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की विवेचना करें।
⭐ परीक्षा टिप्स
  • तिथियों (1954, 1962, 1971, 1972, 1974, 1985, 1998, 2008) को अच्छी तरह याद करें।
  • तुलनात्मक प्रश्नों में सारणी बनाकर उत्तर लिखें — अंक अधिक मिलते हैं।
  • “गुटनिरपेक्षता”, “पंचशील”, “भारत-पाक संबंध”, “भारत-चीन संबंध” एवं “परमाणु नीति” से हर वर्ष प्रश्न आते हैं।
  • उत्तर में तथ्य एवं उदाहरण अवश्य लिखें।
  • विदेश नीति के उद्देश्यों को बिंदुवार लिखें — इससे उत्तर स्पष्ट एवं प्रभावी बनता है।
KK MAHTO
Founder & Educator — Apni Kaksha
📚 कक्षा 12 राजनीति विज्ञान | अध्याय 4 : भारत के विदेश संबंध
पढ़ते रहिए, बढ़ते रहिए — आपकी सफलता ही हमारी पहचान है।
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