BSEB 12th Political Science Book 1 – 5 Marks VVI Questions | APNI KAKSHA

अध्याय 1 — शीत युद्ध का दौर

The Cold War Era

Q1शीत युद्ध क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताओं का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2019, 2022

शीत युद्ध से तात्पर्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद उत्पन्न उस स्थायी शत्रुता से है जिसमें दोनों महाशक्तियों ने प्रत्यक्ष सैन्य युद्ध नहीं किया, परंतु राजनीतिक, आर्थिक, वैचारिक और सैन्य स्तर पर निरंतर प्रतिस्पर्धा की। यह दौर 1945 से 1991 तक लगभग 46 वर्षों तक चला और विश्व राजनीति को दो ध्रुवों में विभाजित कर दिया।

शीत युद्ध की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • वैचारिक प्रतिस्पर्धा: अमेरिका के नेतृत्व में पूँजीवादी लोकतंत्र तथा सोवियत संघ के नेतृत्व में साम्यवादी व्यवस्था के बीच विचारधारात्मक टकराव।
  • सैन्य गुटबंदी: पश्चिमी देशों ने 1949 में नाटो और पूर्वी देशों ने 1955 में वारसा संधि बनाकर सैन्य गठबंधन किए।
  • शस्त्रों की दौड़: दोनों महाशक्तियों ने परमाणु और अन्य आधुनिक हथियारों का भंडार बढ़ाया।
  • प्रचार युद्ध: रेडियो, अखबार और सांस्कृतिक माध्यमों से एक-दूसरे के विरुद्ध प्रचार।
  • गुटनिरपेक्ष देशों का उदय: भारत जैसे देशों ने दोनों गुटों से अलग रहकर तीसरा रास्ता अपनाया।

शीत युद्ध का अंत 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ हुआ और विश्व राजनीति में एकध्रुवीय व्यवस्था की शुरुआत हुई।

Word Count: 168 words
Q2गुटनिरपेक्ष आंदोलन के उद्देश्यों और महत्व का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2023

गुटनिरपेक्ष आंदोलन उन नव स्वतंत्र राष्ट्रों का संगठन था जिन्होंने शीत युद्ध में किसी भी महाशक्ति के सैन्य गुट में शामिल होने से इनकार किया। इसकी स्थापना 1961 में बेलग्रेड सम्मेलन में हुई जिसमें जवाहरलाल नेहरू, मार्शल टीटो, नासिर और सुकर्णो प्रमुख नेता थे।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे —

  • स्वतंत्र विदेश नीति: सदस्य देशों को किसी सैन्य गुट से बंधे बिना स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार।
  • विश्व शांति: युद्ध और परमाणु संघर्ष को रोककर वैश्विक शांति स्थापित करना।
  • उपनिवेशवाद का अंत: एशिया-अफ्रीका के उपनिवेशी देशों को स्वतंत्रता दिलाना।
  • आर्थिक विकास: विकासशील देशों के आर्थिक विकास के लिए सहयोग।
  • संसाधनों की समानता: विश्व संसाधनों में समान अधिकार की माँग।

इस आंदोलन का महत्व इस बात में है कि इसने तीसरे विश्व के देशों को एक मंच पर लाकर वैश्विक निर्णयों में भागीदारी दिलाई और नए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की माँग को मजबूत किया।

Word Count: 158 words
Q3शीत युद्ध के दौर में भारत की विदेश नीति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2021, 2023

शीत युद्ध के दौरान भारत ने ऐसी विदेश नीति अपनाई जो न तो अमेरिकी गुट का पक्ष लेती थी और न सोवियत गुट का। भारत की इस नीति का मुख्य आधार गुटनिरपेक्षता, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और राष्ट्रीय हित की रक्षा था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस नीति की नींव रखी।

भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार थीं —

  • गुटनिरपेक्षता: किसी सैन्य गुट में शामिल न होकर स्वतंत्र निर्णय लेना।
  • पंचशील सिद्धांत: 1954 में चीन के साथ पाँच सिद्धांतों पर सहमति — संप्रभुता, अनाक्रमण, हस्तक्षेप न करना, समानता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व।
  • उपनिवेशवाद का विरोध: एशिया-अफ्रीका के देशों की स्वतंत्रता का समर्थन।
  • विश्व शांति: परमाणु निरस्त्रीकरण और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर बल।
  • आर्थिक सहयोग: विकासशील देशों के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग।

इस नीति ने भारत को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया और स्वतंत्रता बनाए रखने में सहायता की।

Word Count: 152 words
Q4क्यूबा संकट क्या था? इसके प्रभावों का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2022

क्यूबा संकट 1962 में उस समय उत्पन्न हुआ जब सोवियत संघ ने क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कीं। इसका कारण यह था कि अमेरिका ने तुर्की में सोवियत संघ के निकट मिसाइलें लगाई थीं और क्यूबा की क्रांति के बाद फिडेल कास्त्रो सोवियत समर्थक बन गए थे। अमेरिका ने क्यूबा की नाकाबंदी की और परमाणु युद्ध का खतरा गहरा गया।

इस संकट के प्रमुख प्रभाव इस प्रकार थे —

  • परमाणु युद्ध का भय: विश्व पहली बार परमाणु विनाश के कगार पर पहुँचा।
  • तनाव में कमी: दोनों महाशक्तियों ने हॉटलाइन स्थापित की।
  • परमाणु परीक्षण संधि: 1963 में आंशिक परमाणु परीक्षण संधि हुई।
  • शीत युद्ध की गंभीरता: विश्व को एहसास हुआ कि महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा विनाशकारी हो सकती है।
  • संवाद की आवश्यकता: संकट प्रबंधन और बातचीत का महत्व स्थापित हुआ।

इस संकट ने दिखाया कि परमाणु युद्ध में कोई विजेता नहीं हो सकता।

Word Count: 148 words

अध्याय 2 — दो ध्रुवीयता का अंत

The End of Bipolarity

Q1सोवियत संघ के विघटन के कारणों का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2019, 2022

सोवियत संघ का विघटन 1991 में हुआ और इसके साथ शीत युद्ध का अंत हो गया। इस विघटन के पीछे आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय कारणों का जटिल मिश्रण था। सोवियत व्यवस्था अपनी आंतरिक कमजोरियों को दूर करने में विफल रही।

विघटन के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे —

  • आर्थिक कमजोरी: योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था उत्पादकता और नवाचार में पिछड़ गई, जिससे जनता का जीवन स्तर गिरा।
  • भ्रष्टाचार: शासन और प्रशासन में व्यापक भ्रष्टाचार ने व्यवस्था को कमजोर किया।
  • गोर्बाचेव की सुधार नीतियाँ: ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका ने खुलापन तो बढ़ाया पर व्यवस्था को नियंत्रित नहीं रख सका।
  • राष्ट्रवादी भावनाएँ: विभिन्न गणराज्यों में स्वतंत्रता की भावना उभरी।
  • सैन्य प्रतिस्पर्धा का बोझ: अमेरिका के साथ हथियारों की दौड़ ने अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला।

इस प्रकार सोवियत संघ का विघटन कई आंतरिक और बाहरी कारणों का परिणाम था।

Word Count: 145 words
Q2शॉक थेरेपी क्या थी? इसके परिणामों का वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2021, 2023

शॉक थेरेपी सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस में अपनाई गई तेज आर्थिक सुधार नीति थी। इसमें समाजवादी योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था को अचानक बाजार अर्थव्यवस्था में बदल दिया गया। मूल्य नियंत्रण हटा दिए गए, निजीकरण को बढ़ावा दिया गया और व्यापार खोल दिया गया। यह नीति विश्व बैंक और आईएमएफ के सुझाव पर अपनाई गई।

शॉक थेरेपी के प्रमुख परिणाम इस प्रकार थे —

  • आर्थिक संकट: उत्पादन गिरा और कीमतें आसमान छूने लगीं।
  • गरीबी में वृद्धि: बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए।
  • असमानता: कुछ लोगों ने तेजी से संपत्ति अर्जित की जबकि अधिकांश पिछड़ गए।
  • सामाजिक असंतोष: बेरोजगारी और महँगाई से जनता में असंतोष बढ़ा।
  • अस्थिरता: राजनीतिक अस्थिरता और अपराध में वृद्धि हुई।

इस प्रकार शॉक थेरेपी ने रूस को बाजार अर्थव्यवस्था की ओर तो बढ़ाया, परंतु जनता को भारी कठिनाइयाँ दीं।

Word Count: 142 words
Q3सोवियत संघ के विघटन का विश्व राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2023

सोवियत संघ का विघटन 20वीं सदी की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक था। इसने विश्व राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया। शीत युद्ध का अंत हुआ और दो ध्रुवीय विश्व व्यवस्था समाप्त हो गई।

विश्व राजनीति पर इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार थे —

  • शीत युद्ध का अंत: 1945 से चल रही महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा समाप्त हुई।
  • एकध्रुवीय व्यवस्था: अमेरिका एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा।
  • नए देशों का उदय: सोवियत संघ से 15 स्वतंत्र गणराज्य बने।
  • नाटो का विस्तार: पूर्वी यूरोप के देश नाटो में शामिल हुए।
  • साम्यवाद का पतन: विश्व में समाजवादी व्यवस्था कमजोर पड़ी।
  • वैश्वीकरण को बल: बाजार अर्थव्यवस्था और उदारीकरण को बढ़ावा मिला।

इस प्रकार सोवियत संघ के विघटन ने विश्व राजनीति में नए युग की शुरुआत की।

Word Count: 140 words
Q4भारत और रूस के संबंधों का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

भारत और सोवियत संघ के संबंध स्वतंत्रता के बाद से ही मैत्रीपूर्ण रहे। 1971 में दोनों देशों के बीच मैत्री संधि हुई जिसने भारत को सुरक्षा और कूटनीतिक समर्थन दिया। सोवियत संघ के विघटन के बाद भी भारत और रूस के संबंध बने रहे और रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुए।

भारत-रूस संबंधों की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • रक्षा सहयोग: रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार है और हथियारों की आपूर्ति करता है।
  • ऊर्जा सहयोग: तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा में सहयोग।
  • व्यापार: द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ रहा है।
  • राजनीतिक समर्थन: संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन।
  • सांस्कृतिक संबंध: दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान।

इस प्रकार भारत और रूस के संबंध समय की परीक्षा में खरे उतरे हैं।

Word Count: 143 words

अध्याय 3 — समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व

US Hegemony in World Politics

Q1अमेरिकी वर्चस्व की प्रमुख विशेषताओं का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2023

शीत युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका विश्व की एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा। इस स्थिति को अमेरिकी वर्चस्व या अमेरिकी प्रभुत्व कहा जाता है। यह वर्चस्व केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी फैला हुआ है।

अमेरिकी वर्चस्व की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • सैन्य शक्ति: अमेरिका का सैन्य बजट विश्व में सबसे अधिक है और उसके पास सबसे आधुनिक हथियार प्रणाली है।
  • आर्थिक प्रभुत्व: अमेरिकी अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी है और डॉलर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की मुख्य मुद्रा है।
  • तकनीकी बढ़त: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और शोध में अमेरिका अग्रणी है।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: हॉलीवुड, फास्ट फूड, संगीत और सोशल मीडिया के माध्यम से अमेरिकी संस्कृति का वैश्विक प्रसार।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में प्रभाव: संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और आईएमएफ में अमेरिका की निर्णायक भूमिका।

इस प्रकार अमेरिकी वर्चस्व बहुआयामी है और विश्व राजनीति को गहराई से प्रभावित करता है।

Word Count: 148 words
Q211 सितंबर 2001 की घटना का क्या महत्व है? विस्तार से बताएँ।
🆕 Fresh VVI Question

11 सितंबर 2001 को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर अल-कायदा के आतंकवादियों ने विमानों से हमला किया। इस हमले में लगभग तीन हजार लोग मारे गए। इस घटना ने विश्व राजनीति को पूरी तरह बदल दिया और आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध की शुरुआत हुई।

इस घटना के प्रमुख महत्व इस प्रकार हैं —

  • आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध: अमेरिका ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक अभियान की घोषणा की।
  • अफगानिस्तान पर आक्रमण: 2001 में अमेरिका ने तालिबान और अल-कायदा के विरुद्ध अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई की।
  • इराक युद्ध: 2003 में अमेरिका ने इराक पर आक्रमण किया।
  • सुरक्षा नीतियों में बदलाव: विश्व के अनेक देशों ने आतंकवाद विरोधी कानून बनाए।
  • अमेरिकी वर्चस्व: इस घटना ने अमेरिका की सैन्य शक्ति और वर्चस्व को और स्पष्ट किया।

इस प्रकार 11 सितंबर की घटना 21वीं सदी की सबसे निर्णायक घटनाओं में से एक मानी जाती है।

Word Count: 148 words
Q3अमेरिकी वर्चस्व के विरोध के कारणों का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

अमेरिकी वर्चस्व के विरोध के अनेक कारण हैं। अनेक देश अमेरिका की नीतियों को अपनी संप्रभुता, स्वतंत्रता और हितों के लिए खतरा मानते हैं। यह विरोध विश्व के विभिन्न हिस्सों में देखा जा सकता है।

अमेरिकी वर्चस्व के विरोध के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं —

  • एकपक्षीयता: अमेरिका कई बार संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना एकपक्षीय निर्णय लेता है।
  • इराक युद्ध: 2003 में इराक पर आक्रमण को अनेक देशों ने अवैध माना।
  • हस्तक्षेप की नीति: अन्य देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप का विरोध।
  • सैन्य उपस्थिति: विश्व के कई हिस्सों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की उपस्थिति।
  • आर्थिक वर्चस्व: अमेरिकी कंपनियों और डॉलर के प्रभुत्व का विरोध।
  • सांस्कृतिक प्रभुत्व: अमेरिकी संस्कृति के प्रसार से स्थानीय संस्कृतियों पर प्रभाव।

इस प्रकार अमेरिकी वर्चस्व का विरोध विभिन्न राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों से होता है।

Word Count: 140 words
Q4अमेरिकी वर्चस्व का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा? विस्तार से बताएँ।
🆕 Fresh VVI Question

शीत युद्ध के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत ने अमेरिका के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध बढ़ाए। 2005 में दोनों देशों के बीच असैनिक परमाणु समझौता हुआ। आज भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार हैं।

अमेरिकी वर्चस्व का भारत पर प्रभाव इस प्रकार रहा है —

  • आर्थिक सहयोग: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग।
  • रणनीतिक साझेदारी: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, क्वाड में भागीदारी।
  • परमाणु समझौता: 2005 का समझौता भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण था।
  • निवेश: अमेरिकी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ा।
  • चुनौतियाँ: अमेरिका के साथ संबंध बढ़ाने के साथ भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति भी बनाए रखी।

इस प्रकार अमेरिकी वर्चस्व ने भारत के विकास और विदेश नीति को दोनों दिशाओं में प्रभावित किया है।

Word Count: 148 words

अध्याय 4 — सत्ता के वैकल्पिक केंद्र

Alternative Centres of Power

Q1यूरोपीय संघ की मुख्य विशेषताओं का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2022

यूरोपीय संघ यूरोप के देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। इसकी स्थापना 1993 में मास्ट्रिच संधि द्वारा हुई। इसका उद्देश्य यूरोपीय देशों में आर्थिक एकीकरण, राजनीतिक सहयोग और शांति स्थापित करना था। आज इसमें 27 सदस्य देश हैं और यह विश्व का सबसे बड़ा आर्थिक समूह है।

यूरोपीय संघ की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • साझा बाजार: सदस्य देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी और श्रमिकों की स्वतंत्र आवाजाही।
  • एकल मुद्रा: यूरो 2002 से प्रचलन में आई और अधिकांश सदस्य देशों की मुद्रा बनी।
  • साझा संसद और न्यायालय: यूरोपीय संसद और यूरोपीय न्यायालय के माध्यम से साझा शासन।
  • आर्थिक शक्ति: यूरोपीय संघ विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
  • सामान्य नागरिकता: सदस्य देशों के नागरिकों को यूरोपीय नागरिकता प्राप्त है।
  • शांति और स्थिरता: यूरोप में लंबे समय से शांति बनाए रखने में सफल।

इस प्रकार यूरोपीय संघ विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र के रूप में उभरा है।

Word Count: 148 words
Q2आसियान के उद्देश्यों और उपलब्धियों का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) की स्थापना 1967 में बैंकॉक घोषणापत्र द्वारा हुई। इसके संस्थापक सदस्य इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड थे। आज इसमें 10 सदस्य देश हैं। इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।

आसियान के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं —

  • क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देना।
  • सदस्य देशों के बीच शांति और स्थिरता बनाए रखना।
  • सांस्कृतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना।
  • बाहरी शक्तियों के प्रभाव को संतुलित करना।

आसियान की प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं —

  • क्षेत्रीय सहयोग: दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक सहयोग बढ़ा।
  • आसियान क्षेत्रीय मंच: बड़ी शक्तियों के साथ संवाद का मंच बना।
  • शांति: क्षेत्र में बड़े संघर्ष नहीं हुए।
  • आर्थिक विकास: सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं में तेज वृद्धि हुई।

इस प्रकार आसियान दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति और विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ बना।

Word Count: 148 words
Q3चीन के आर्थिक विकास का क्या महत्व है? विस्तार से बताएँ।
🆕 Fresh VVI Question

चीन ने 1978 में देंग श्याओपिंग के नेतृत्व में आर्थिक सुधार शुरू किए। इन सुधारों ने चीन को विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया। चीन का आर्थिक विकास विश्व इतिहास में सबसे तेज विकास दरों में से एक माना जाता है। इसने वैश्विक शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित किया है।

चीन के आर्थिक विकास का महत्व इस प्रकार है —

  • वैश्विक आर्थिक शक्ति: चीन विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है।
  • विनिर्माण केंद्र: चीन विश्व की फैक्ट्री बन गया है और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण है।
  • शक्ति संतुलन में बदलाव: चीन का उदय अमेरिकी वर्चस्व के लिए चुनौती बना।
  • एशिया में प्रभाव: चीन ने एशिया में अपना राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ाया।
  • बेल्ट एंड रोड: चीन ने बुनियादी ढाँचे के विकास के माध्यम से वैश्विक प्रभाव बढ़ाया।
  • सैन्य आधुनिकीकरण: आर्थिक शक्ति के साथ सैन्य शक्ति भी बढ़ी।

इस प्रकार चीन का आर्थिक विकास 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।

Word Count: 147 words
Q4ब्रिक्स का क्या महत्व है? इसकी उपलब्धियों का वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई और 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसे ब्रिक्स कहा गया। इसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के हितों की रक्षा और वैश्विक शासन में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।

ब्रिक्स का महत्व इस प्रकार है —

  • आर्थिक शक्ति: ब्रिक्स देश विश्व की जीडीपी में महत्वपूर्ण हिस्सा रखते हैं।
  • विकासशील देशों की आवाज: यह वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज उठाता है।
  • वैकल्पिक वित्तीय संस्थान: न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना।
  • बहुध्रुवीयता: यह विश्व में बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देता है।
  • सहयोग: सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग।

ब्रिक्स की प्रमुख उपलब्धियों में न्यू डेवलपमेंट बैंक और कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट की स्थापना शामिल है।

इस प्रकार ब्रिक्स वैश्विक शासन में एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र के रूप में उभरा है।

Word Count: 141 words

अध्याय 5 — समकालीन दक्षिण एशिया

Contemporary South Asia

Q1सार्क के उद्देश्यों और असफलता के कारणों का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2023

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की स्थापना 1985 में ढाका में हुई। इसके सदस्य देश भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान हैं। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

सार्क के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं —

  • क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाना।
  • सदस्य देशों के बीच शांति और स्थिरता स्थापित करना।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देना।
  • गरीबी, अशिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का सामूहिक समाधान।

सार्क की असफलता के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं —

  • भारत-पाकिस्तान तनाव: दोनों देशों के बीच कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे।
  • आपसी अविश्वास: सदस्य देशों के बीच विश्वास की कमी।
  • राजनीतिक अस्थिरता: कई सदस्य देशों में अस्थिरता।
  • सीमा विवाद: विभिन्न देशों के बीच सीमा विवाद।
  • आर्थिक असमानता: सदस्य देशों के बीच आर्थिक असमानता।

इस प्रकार सार्क अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सीमित सफलता ही पा सका है।

Word Count: 148 words
Q2भारत और पाकिस्तान के संबंधों में मुख्य समस्याओं का वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कई गंभीर समस्याएँ हैं जो दोनों देशों के बीच स्थायी शत्रुता का कारण बनी हुई हैं। इन समस्याओं के कारण दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग की प्रक्रिया बाधित होती रही है। दोनों देशों ने 1947 के बाद से कई युद्ध लड़े हैं।

भारत-पाकिस्तान संबंधों की मुख्य समस्याएँ इस प्रकार हैं —

  • कश्मीर विवाद: जम्मू-कश्मीर पर दोनों देशों का दावा। यह संबंधों की सबसे बड़ी समस्या है।
  • सीमा पार आतंकवाद: पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
  • जल विवाद: सिंधु जल संधि पर तनाव और जल बँटवारे की समस्या।
  • सियाचिन विवाद: सियाचिन ग्लेशियर पर दोनों देशों का दावा।
  • व्यापार और संपर्क: व्यापार और जनसंपर्क में कमी।
  • परमाणु प्रतिस्पर्धा: दोनों देशों के परमाणु परीक्षण से तनाव बढ़ा।

इस प्रकार भारत-पाकिस्तान संबंधों में कश्मीर, आतंकवाद और जल विवाद प्रमुख समस्याएँ हैं।

Word Count: 148 words
Q3भारत-बांग्लादेश संबंधों की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

1971 में बांग्लादेश के जन्म के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सहयोग और तनाव दोनों रहे हैं। बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक संबंध हैं। हाल के वर्षों में संबंधों में सुधार हुआ है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • आर्थिक सहयोग: भारत बांग्लादेश को विकास सहायता और ऋण देता है।
  • भूमि सीमा समझौता: 2015 में ऐतिहासिक भूमि सीमा समझौता हुआ।
  • व्यापार: दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है।
  • परिवहन संपर्क: रेल, सड़क और जलमार्ग संपर्क बढ़ा।
  • ऊर्जा सहयोग: बिजली आपूर्ति में सहयोग।
  • चुनौतियाँ: सीमा पार घुसपैठ और सीमा विवाद।

इस प्रकार भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सहयोग बढ़ रहा है, परंतु कुछ चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं।

Word Count: 141 words
Q4दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग के लिए क्या उपाय आवश्यक हैं? विस्तार से बताएँ।
🆕 Fresh VVI Question

दक्षिण एशिया में शांति और सहयोग की स्थापना के लिए अनेक उपाय आवश्यक हैं। यह क्षेत्र विश्व की लगभग एक-चौथाई जनसंख्या का घर है, परंतु यहाँ गरीबी, अशिक्षा और संघर्ष की समस्याएँ बनी हुई हैं। क्षेत्रीय सहयोग के बिना इन समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

शांति और सहयोग के लिए आवश्यक उपाय इस प्रकार हैं —

  • आपसी विश्वास: सदस्य देशों के बीच विश्वास और भरोसा बढ़ाना।
  • आतंकवाद का मुकाबला: सामूहिक रूप से आतंकवाद का मुकाबला करना।
  • आर्थिक एकीकरण: मुक्त व्यापार क्षेत्र और आर्थिक सहयोग बढ़ाना।
  • जनसंपर्क: जनता और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाना।
  • सार्क को मजबूत करना: क्षेत्रीय संगठन को सशक्त बनाना।
  • विवादों का शांतिपूर्ण समाधान: बातचीत के माध्यम से विवाद हल करना।
  • विकास सहयोग: गरीबी उन्मूलन और विकास में सहयोग।

इस प्रकार दक्षिण एशिया में शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

Word Count: 142 words

अध्याय 6 — अंतर्राष्ट्रीय संगठन

International Organisations

Q1संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य उद्देश्यों का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2022

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुई। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है। इसका गठन विश्व में शांति और सुरक्षा स्थापित करने तथा देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया। आज इसमें 193 सदस्य देश हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं —

  • विश्व शांति और सुरक्षा: अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों को रोकना और शांति बनाए रखना।
  • मैत्रीपूर्ण संबंध: देशों के बीच समानता के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंध बढ़ाना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय समस्याओं का समाधान।
  • मानवाधिकार: मानवाधिकारों और मूल स्वतंत्रताओं का संरक्षण।
  • अंतर्राष्ट्रीय कानून: अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान और पालन।
  • निरस्त्रीकरण: हथियारों की दौड़ को रोकना।

इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व शांति और सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण संगठन है।

Word Count: 148 words
Q2संयुक्त राष्ट्र संघ की असफलताओं का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व शांति और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, परंतु इसकी कई असफलताएँ भी रही हैं। शीत युद्ध के दौरान और उसके बाद भी संयुक्त राष्ट्र कई अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों को रोकने में विफल रहा। इसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख असफलताएँ इस प्रकार हैं —

  • वीटो शक्ति: सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति के कारण कई निर्णय नहीं हो पाते।
  • इराक युद्ध: 2003 में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना इराक पर आक्रमण किया।
  • सीरिया संकट: सीरिया में गृहयुद्ध रोकने में विफलता।
  • कश्मीर मुद्दा: कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान विवाद का समाधान नहीं हो सका।
  • परमाणु निरस्त्रीकरण: परमाणु हथियारों की दौड़ रोकने में असफलता।
  • सुधार में विफलता: सुरक्षा परिषद में सुधार नहीं हो सका।

इस प्रकार इन असफलताओं के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते रहे हैं।

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Q3अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यों का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में हुई और यह 1945 से कार्यरत है। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में है। इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग बढ़ाना, विनिमय दरों की स्थिरता बनाए रखना और सदस्य देशों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

IMF के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं —

  • मौद्रिक सहयोग: अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग और सलाह।
  • विनिमय दर स्थिरता: विनिमय दरों की स्थिरता बनाए रखना।
  • ऋण प्रदान करना: भुगतान संतुलन की समस्या वाले देशों को ऋण।
  • तकनीकी सहायता: सदस्य देशों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण।
  • निगरानी: सदस्य देशों की आर्थिक नीतियों की निगरानी।
  • वैश्विक आर्थिक स्थिरता: आर्थिक संकटों में सहायता।

IMF ने कई आर्थिक संकटों में सदस्य देशों को सहायता दी है, परंतु इसकी शर्तों की आलोचना भी होती रही है।

Word Count: 141 words
Q4संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार की आवश्यकता क्यों है? विस्तार से बताएँ।
🆕 Fresh VVI Question

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 1945 में हुई थी और तब से विश्व में अनेक परिवर्तन हुए हैं। सदस्य देशों की संख्या 51 से बढ़कर 193 हो गई है। सुरक्षा परिषद की संरचना अभी भी पुरानी है जिसमें केवल पाँच स्थायी सदस्य हैं। इसलिए सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार की आवश्यकता के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं —

  • प्रतिनिधित्व: सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना।
  • वीटो शक्ति: वीटो शक्ति में सुधार या सीमित करना।
  • नए सदस्य: भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान जैसे देशों को स्थायी सदस्यता।
  • प्रभावशीलता: निर्णय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना।
  • आर्थिक सुधार: आर्थिक और सामाजिक परिषद को मजबूत करना।
  • शांति अभियान: शांति स्थापना अभियानों में सुधार।

इस प्रकार 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ में व्यापक सुधार आवश्यक है।

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अध्याय 7 — समकालीन विश्व में सुरक्षा

Security in the Contemporary World

Q1पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा में अंतर स्पष्ट करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2022, 2024

सुरक्षा की अवधारणा को दो प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है — पारंपरिक सुरक्षा और गैर-पारंपरिक सुरक्षा। शीत युद्ध के दौरान पारंपरिक सुरक्षा को ही मुख्य माना जाता था, परंतु शीत युद्ध के बाद गैर-पारंपरिक सुरक्षा का महत्व बढ़ गया है।

पारंपरिक सुरक्षा की विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • यह सैन्य खतरों से संबंधित है।
  • इसमें युद्ध, आक्रमण और सैन्य शक्ति का प्रयोग शामिल है।
  • मुख्य ध्यान राज्य की सीमाओं और सैन्य क्षमता पर होता है।
  • सैन्य गठबंधन और हथियारों की दौड़ इसका हिस्सा है।

गैर-पारंपरिक सुरक्षा की विशेषताएँ इस प्रकार हैं —

  • इसमें आतंकवाद, मानव तस्करी, रोग और पर्यावरणीय समस्याएँ शामिल हैं।
  • यह साइबर अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और जलवायु परिवर्तन को भी सम्मिलित करती है।
  • यह राज्य के साथ-साथ व्यक्ति की सुरक्षा पर भी केंद्रित है।
  • इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

इस प्रकार दोनों प्रकार की सुरक्षा आज समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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Q2आतंकवाद क्या है? यह सुरक्षा के लिए कैसे खतरा है?
🆕 Fresh VVI Question

आतंकवाद का अर्थ है राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए हिंसा और डर का सुनियोजित प्रयोग। आतंकवादी निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाकर समाज में भय उत्पन्न करते हैं। यह आज विश्व की सबसे गंभीर सुरक्षा समस्याओं में से एक है। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद से प्रभावित रहा है।

आतंकवाद सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कारणों से खतरा है —

  • जनहानि: आतंकवादी हमलों में सैकड़ों निर्दोष लोग मारे जाते हैं।
  • आर्थिक नुकसान: आतंकवाद से निवेश, पर्यटन और व्यापार प्रभावित होते हैं।
  • सामाजिक अस्थिरता: सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक असंतोष बढ़ता है।
  • राजनीतिक अस्थिरता: सरकारों पर दबाव बढ़ता है और नीतियों में बदलाव आता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंध: देशों के बीच तनाव बढ़ता है।
  • मानवाधिकार: सुरक्षा के नाम पर नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित होती हैं।

इस प्रकार आतंकवाद वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर और बहुआयामी खतरा है।

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Q3मानव सुरक्षा का क्या अर्थ है? इसके आयामों का वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

मानव सुरक्षा का अर्थ है व्यक्ति की सुरक्षा — उसका जीवन, स्वास्थ्य, भोजन, आवास, रोजगार और सम्मान। यह पारंपरिक सैन्य सुरक्षा से आगे जाकर व्यक्ति को केंद्र में रखती है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 1994 में मानव सुरक्षा की अवधारणा प्रस्तुत की।

मानव सुरक्षा के प्रमुख आयाम इस प्रकार हैं —

  • आर्थिक सुरक्षा: न्यूनतम आय और रोजगार की गारंटी।
  • खाद्य सुरक्षा: सभी के लिए पर्याप्त भोजन की उपलब्धता।
  • स्वास्थ्य सुरक्षा: बीमारियों से रक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ।
  • पर्यावरण सुरक्षा: प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा।
  • व्यक्तिगत सुरक्षा: हिंसा, अपराध और युद्ध से सुरक्षा।
  • समुदायिक सुरक्षा: सांस्कृतिक पहचान की रक्षा।
  • राजनीतिक सुरक्षा: मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता।

इस प्रकार मानव सुरक्षा व्यक्ति के समग्र कल्याण को सुनिश्चित करने की अवधारणा है।

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Q4शीत युद्ध के बाद सुरक्षा की अवधारणा में क्या बदलाव आया?
🆕 Fresh VVI Question

शीत युद्ध के दौरान सुरक्षा का अर्थ मुख्यतः सैन्य सुरक्षा से लिया जाता था। दो महाशक्तियों के बीच हथियारों की दौड़ और सैन्य गठबंधन सुरक्षा के केंद्र में थे। परंतु 1991 में सोवियत संघ के विघटन और शीत युद्ध की समाप्ति के बाद सुरक्षा की अवधारणा में व्यापक बदलाव आया।

सुरक्षा की अवधारणा में आए प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं —

  • सैन्य केंद्रितता में कमी: केवल सैन्य शक्ति को सुरक्षा का आधार मानना बंद हुआ।
  • गैर-पारंपरिक खतरे: आतंकवाद, साइबर अपराध, रोग और पर्यावरणीय समस्याएँ सुरक्षा के एजेंडे में आईं।
  • मानव सुरक्षा: व्यक्ति की सुरक्षा को महत्व मिला।
  • आंतरिक सुरक्षा: आंतरिक संघर्ष और उग्रवाद पर ध्यान बढ़ा।
  • सहयोगात्मक सुरक्षा: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से सुरक्षा की अवधारणा।
  • मानवाधिकार: मानवाधिकारों की सुरक्षा को सुरक्षा का हिस्सा माना गया।

इस प्रकार शीत युद्ध के बाद सुरक्षा की परिभाषा अधिक व्यापक और बहुआयामी हो गई।

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अध्याय 8 — पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

Environment and Natural Resources

Q1पर्यावरण संरक्षण क्यों आवश्यक है? विस्तार से बताएँ।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2023

पर्यावरण संरक्षण आज विश्व की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है। प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनका अत्यधिक दोहन हो रहा है। प्रदूषण, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता का ह्रास मानव अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं।

पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं —

  • प्राकृतिक संसाधनों की सीमा: कोयला, तेल और खनिज सीमित हैं।
  • जलवायु परिवर्तन: ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र स्तर में वृद्धि।
  • प्रदूषण: वायु, जल और भूमि प्रदूषण से स्वास्थ्य पर प्रभाव।
  • जैव विविधता: अनेक प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं।
  • भावी पीढ़ी: आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन बचाना।
  • मानव स्वास्थ्य: स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन का आधार है।
  • आर्थिक स्थिरता: कृषि, पर्यटन और मत्स्यपालन पर्यावरण पर निर्भर हैं।

इस प्रकार पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन और पृथ्वी के भविष्य के लिए अनिवार्य है।

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Q2ग्लोबल कॉमन्स क्या है? इसके संरक्षण की आवश्यकता क्यों है?
🆕 Fresh VVI Question

ग्लोबल कॉमन्स वे संसाधन और क्षेत्र हैं जो किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते और जिनका उपयोग सभी देशों के लिए खुला है। इन्हें सामूहिक संपदा या अंतर्राष्ट्रीय साझा संसाधन भी कहा जाता है। इनके संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

ग्लोबल कॉमन्स के प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं —

  • वायुमंडल: पृथ्वी का वायुमंडल सभी देशों का साझा है।
  • समुद्र: खुले समुद्र और उनके संसाधन सभी के लिए खुले हैं।
  • अंटार्कटिका: यह महाद्वीप शोध और शांतिपूर्ण उपयोग के लिए आरक्षित है।
  • बाहरी अंतरिक्ष: उपग्रह कक्षाएँ और अंतरिक्ष संसाधन।
  • जैव विविधता: विश्व की जैव विविधता साझा विरासत है।

ग्लोबल कॉमन्स के संरक्षण की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि इनका अत्यधिक और असंयमित उपयोग हो रहा है। वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसें बढ़ रही हैं, समुद्र प्रदूषित हो रहे हैं और अंतरिक्ष में कचरा बढ़ रहा है। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो मानव सभ्यता संकट में पड़ सकती है।

इस प्रकार ग्लोबल कॉमन्स की रक्षा के लिए सामूहिक और अंतर्राष्ट्रीय प्रयास आवश्यक हैं।

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Q3क्योटो प्रोटोकॉल क्या है? इसके उद्देश्यों और महत्व का वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

क्योटो प्रोटोकॉल एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संधि है जो 1997 में जापान के क्योटो शहर में हुई। यह जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के अंतर्गत आता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है जो वैश्विक तापमान वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं।

क्योटो प्रोटोकॉल के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं —

  • उत्सर्जन में कटौती: विकसित देशों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य।
  • सामान्य भार: विकसित और विकासशील देशों के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियाँ।
  • वित्तीय सहायता: विकासशील देशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता।
  • कार्बन क्रेडिट: उत्सर्जन व्यापार की व्यवस्था।

इस प्रोटोकॉल का महत्व यह है कि यह जलवायु परिवर्तन से निपटने का पहला व्यापक अंतर्राष्ट्रीय प्रयास था। इसने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के लिए वैश्विक ढाँचा प्रदान किया। भारत ने भी इस पर हस्ताक्षर किए और अपने उत्सर्जन को सीमित रखने का प्रयास किया।

इस प्रकार क्योटो प्रोटोकॉल जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

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Q4जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारणों और प्रभावों का वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्या है। इसका अर्थ है पृथ्वी के जलवायु में दीर्घकालिक परिवर्तन जो मुख्यतः मानवीय गतिविधियों के कारण हो रहा है। इसके कारण पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है।

जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं —

  • ग्रीनहाउस गैसें: कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन।
  • जीवाश्म ईंधन: कोयला, तेल और गैस का अत्यधिक उपयोग।
  • वनों की कटाई: वनों के विनाश से कार्बन अवशोषण कम हुआ।
  • औद्योगिकीकरण: उद्योगों से प्रदूषण।
  • कृषि: रासायनिक उर्वरक और पशुपालन से गैसें।

इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं —

  • तापमान में वृद्धि और गर्मी की लहरें।
  • समुद्र स्तर में वृद्धि और तटीय क्षेत्रों में बाढ़।
  • अनियमित वर्षा और सूखा।
  • ग्लेशियरों का पिघलना।
  • कृषि उत्पादकता में कमी।
  • जैव विविधता का ह्रास।

इस प्रकार जलवायु परिवर्तन मानव जीवन और पृथ्वी के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।

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अध्याय 9 — वैश्वीकरण

Globalisation

Q1वैश्वीकरण क्या है? इसके प्रमुख कारणों का विस्तार से वर्णन करें।
🗓️ BSEB PYQ — Asked in: 2020, 2022

वैश्वीकरण का अर्थ है विश्व के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का तेजी से बढ़ना। इससे राष्ट्रीय सीमाओं का महत्व कम होता है और विश्व एक वैश्विक गाँव में बदल जाता है। यह 1990 के दशक से विशेष रूप से तेज हुआ है।

वैश्वीकरण के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं —

  • तकनीकी विकास: संचार और परिवहन तकनीक में क्रांति।
  • सूचना प्रौद्योगिकी: इंटरनेट और मोबाइल क्रांति।
  • व्यापार उदारीकरण: व्यापार बाधाओं और शुल्कों में कमी।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: MNCs का वैश्विक विस्तार।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठन: WTO, IMF और विश्व बैंक की भूमिका।
  • पूँजी की गतिशीलता: विदेशी निवेश में वृद्धि।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: मीडिया और फिल्मों से सांस्कृतिक संपर्क।

इस प्रकार वैश्वीकरण अनेक आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक कारणों का परिणाम है।

Word Count: 145 words
Q2वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभावों का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

वैश्वीकरण ने विश्व की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। इसने राष्ट्र-राज्य की संप्रभुता, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की भूमिका और वैश्विक शासन की अवधारणा को बदल दिया है। आज अनेक मुद्दे राष्ट्रीय सीमाओं से परे होकर वैश्विक स्तर पर तय होते हैं।

वैश्वीकरण के प्रमुख राजनीतिक प्रभाव इस प्रकार हैं —

  • संप्रभुता पर चुनौती: राष्ट्र-राज्यों की संप्रभुता पर अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और बाजार का दबाव बढ़ा।
  • अंतर्राष्ट्रीय संगठन: WTO, IMF और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका बढ़ी।
  • लोकतंत्र का प्रसार: लोकतंत्र और मानवाधिकार की भावना बढ़ी।
  • नागरिक समाज: गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज की भागीदारी बढ़ी।
  • वैश्विक शासन: जलवायु, आतंकवाद और व्यापार जैसे मुद्दों पर वैश्विक निर्णय।
  • क्षेत्रीय संगठन: यूरोपीय संघ, आसियान जैसे संगठनों का उदय।

इस प्रकार वैश्वीकरण ने राजनीति को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे वैश्विक स्तर पर पहुँचा दिया है।

Word Count: 148 words
Q3वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

वैश्वीकरण का सबसे अधिक प्रभाव आर्थिक क्षेत्र पर पड़ा है। इसने विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ दिया है। व्यापार, निवेश, पूँजी और श्रम की गतिशीलता बढ़ी है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार हुआ है और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित हुई हैं।

वैश्वीकरण के प्रमुख आर्थिक प्रभाव इस प्रकार हैं —

  • विदेशी निवेश: विकासशील देशों में FDI में वृद्धि हुई।
  • व्यापार में वृद्धि: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कई गुना बढ़ा।
  • रोजगार: सेवा क्षेत्र और IT में नए रोजगार के अवसर बने।
  • तकनीकी हस्तांतरण: विकासशील देशों को नई तकनीक मिली।
  • बाजार का विस्तार: उपभोक्ताओं को विविध वस्तुएँ उपलब्ध हुईं।
  • प्रतिस्पर्धा: स्थानीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
  • असमानता: अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ी।
  • शोषण: श्रमिकों के अधिकारों का हनन हुआ।

इस प्रकार वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हैं।

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Q4वैश्वीकरण के विरोध के कारणों का विस्तार से वर्णन करें।
🆕 Fresh VVI Question

वैश्वीकरण के विरोध के अनेक कारण हैं। विश्व के विभिन्न हिस्सों में वैश्वीकरण विरोधी आंदोलन हुए हैं। श्रमिक संगठन, पर्यावरणविद, किसान और स्थानीय उद्योग वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभावों से चिंतित हैं। इनका मानना है कि वैश्वीकरण से आम जनता को लाभ नहीं मिल रहा।

वैश्वीकरण के विरोध के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं —

  • असमानता: अमीर और गरीब देशों तथा वर्गों के बीच असमानता बढ़ी।
  • शोषण: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ श्रमिकों का शोषण करती हैं।
  • स्थानीय उद्योग: स्थानीय उद्योग और कारीगर प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गए।
  • पर्यावरण: औद्योगिकीकरण से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ा।
  • सांस्कृतिक प्रभुत्व: पश्चिमी संस्कृति का प्रसार और स्थानीय संस्कृतियों पर प्रभाव।
  • कृषि: किसानों पर बाजार और बीज कंपनियों का दबाव।
  • आर्थिक अस्थिरता: वैश्विक आर्थिक संकट का प्रभाव।
  • श्रम अधिकार: श्रमिकों के अधिकारों का हनन।

इस प्रकार वैश्वीकरण के विरोध के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारण हैं।

Word Count: 148 words

© APNI KAKSHA — BSEB Class 12 Political Science Book 1 | 5 Marks VVI Questions

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