BSEB Class 12 Political Science
भाग 2: स्वतंत्र भारत में राजनीति
Repeated 2 Marks PYQ — Questions & Answers
Bihar Board | Board Exam 2026अध्याय 1 — राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ
Challenges of Nation Building
स्वतंत्रता के समय भारत के सामने तीन चुनौतियाँ थीं: एकता और अखंडता बनाए रखना, लोकतंत्र की स्थापना और आर्थिक विकास। इन चुनौतियों का सामना करना राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक था।
Word Count: 40 wordsविभाजन के समय सबसे बड़ी समस्या शरणार्थियों का पुनर्वास थी। लाखों लोगों को सीमा पार करनी पड़ी। संपत्ति का बँटवारा और सांप्रदायिक हिंसा ने स्थिति गंभीर बनाई।
Word Count: 39 wordsसरदार वल्लभभाई पटेल ने रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कूटनीति और सैन्य बल से 562 रियासतों को भारत में मिलाया। उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है।
Word Count: 44 wordsहैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय से इनकार किया। सितंबर 1948 में सेना द्वारा ऑपरेशन पोलो चलाया गया। इसके बाद हैदराबाद का भारत में विलय हो गया।
Word Count: 40 wordsभाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन इसलिए आवश्यक था क्योंकि विभिन्न भाषाओं के लोगों को अपनी पहचान और प्रशासनिक सुविधा चाहिए थी। इससे राष्ट्रीय एकता को बल मिला।
Word Count: 41 wordsराज्य पुनर्गठन आयोग का गठन 1953 में हुआ। इसकी अध्यक्षता फजल अली ने की। इसने 1955 में भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की सिफारिश की।
Word Count: 39 wordsविभाजन का भारत की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा। सांप्रदायिकता की समस्या उभरी। शरणार्थियों के पुनर्वास की चुनौती बनी। धर्म के आधार पर राजनीति को बल मिला और अस्थिरता बढ़ी।
Word Count: 42 wordsभारत के विभाजन के मुख्य कारण थे: सांप्रदायिकता, मुस्लिम लीग की दो राष्ट्र की माँग और अंग्रेजों की भारत छोड़ो नीति। राजनीतिक अस्थिरता और आपसी अविश्वास ने विभाजन को अनिवार्य बनाया।
Word Count: 42 wordsजम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने 1947 में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान के हमले के बाद भारत ने सैन्य सहायता दी। इस प्रकार जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना।
Word Count: 42 wordsराष्ट्र निर्माण में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इसने स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न वर्गों को जोड़ा। आजादी के बाद इसने लोकतांत्रिक व्यवस्था और एकीकरण में नेतृत्व किया। इसने संविधान निर्माण में योगदान दिया।
Word Count: 42 wordsअध्याय 2 — एक दल के प्रभुत्व का दौर
Era of One-Party Dominance
एक दल के प्रभुत्व का दौर 1952 से 1967 तक रहा। इस अवधि में कांग्रेस पार्टी ने लगातार चुनाव जीते। इसके पीछे संगठन, नेतृत्व और जनसमर्थन मुख्य कारण थे। विपक्ष कमजोर था।
Word Count: 42 wordsकांग्रेस के प्रभुत्व के मुख्य कारण थे: स्वतंत्रता आंदोलन में इसका नेतृत्व, मजबूत संगठन और विभिन्न वर्गों का समर्थन। कुशल नेतृत्व और लोकप्रिय कार्यक्रमों ने इसे जनता से जोड़ा।
Word Count: 42 wordsपहले आम चुनाव 1952 में हुए। इसका महत्व था कि इसने भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता सिद्ध की। सार्वभौम वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव हुए। इसने विश्व में भारत का सम्मान बढ़ाया।
Word Count: 42 wordsकांग्रेस प्रणाली का अर्थ है वह राजनीतिक व्यवस्था जिसमें कांग्रेस केंद्र और राज्यों में सत्ता में रहती थी। इसमें विपक्ष भी कांग्रेस के भीतर या उसके इर्द-गिर्द काम करता था। यह अद्वितीय प्रणाली थी।
Word Count: 42 words1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस को लोकसभा की 489 सीटों में से 364 सीटें मिलीं। इसने लगभग 45 प्रतिशत मत प्राप्त किए। यह प्रचंड बहुमत था जिसने कांग्रेस की प्रभुता स्थापित की।
Word Count: 44 wordsकांग्रेस के भीतर गुटों की राजनीति का अर्थ था कि पार्टी के अंदर विभिन्न नेताओं के समूह थे। ये गुट सत्ता और प्रभाव के लिए प्रतिस्पर्धा करते थे। इससे पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बना रहा।
Word Count: 43 wordsसमाजवादी पार्टी का गठन 1952 में हुआ। यह कांग्रेस से अलग होकर बनी। इसका उद्देश्य समाजवादी विचारधारा को बढ़ावा देना और कांग्रेस की नीतियों का विरोध करना था। जयप्रकाश नारायण इसके प्रमुख नेता थे।
Word Count: 43 wordsभारतीय जनसंघ की स्थापना 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की। यह हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा पर आधारित थी। इसने कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष नीतियों का विरोध किया। यह भाजपा का पूर्ववर्ती संगठन है।
Word Count: 44 wordsकम्युनिस्ट पार्टी का विभाजन 1964 में हुआ। इसका कारण था सोवियत संघ और चीन के बीच वैचारिक मतभेद। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) अलग हो गई। इससे वामपंथी आंदोलन कमजोर हुआ।
Word Count: 42 words1967 के चुनाव को ‘कांग्रेस विरोधी लहर’ का चुनाव कहा जाता है। इस चुनाव में कांग्रेस को कई राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं। इससे एक दल के प्रभुत्व का दौर समाप्त होने लगा।
Word Count: 44 wordsअध्याय 3 — नियोजित विकास की राजनीति
Politics of Planned Development
योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई। इसका उद्देश्य देश के आर्थिक विकास की योजना बनाना था। इसने पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण किया। प्रधानमंत्री इसका अध्यक्ष होता था।
Word Count: 41 wordsभारत में पहली पंचवर्षीय योजना 1951 से 1956 तक चली। इसका मुख्य ध्यान कृषि और सिंचाई पर था। इस योजना ने खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में सफलता प्राप्त की। इसे सफल योजना माना जाता है।
Word Count: 42 wordsमहालनोबिस मॉडल भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना का आधार था। इसमें भारी उद्योगों पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य तेज औद्योगिकीकरण था। पी.सी. महालनोबिस ने इस मॉडल को तैयार किया।
Word Count: 42 wordsनियोजन का अर्थ है संसाधनों का पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार उपयोग। इसमें लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। इससे विकास की दिशा तय होती है। भारत में नियोजन से आर्थिक और सामाजिक विकास का प्रयास किया गया।
Word Count: 42 wordsभारत में कृषि सुधार के प्रमुख उपाय थे: जमींदारी उन्मूलन, भूमि सीलिंग और काश्तकारों को अधिकार। इन सुधारों का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना और सामाजिक न्याय स्थापित करना था। लेकिन कई राज्यों में सुधार सीमित रहे।
Word Count: 44 wordsहरित क्रांति का महत्व था कि इसने खाद्यान्न उत्पादन में तेज वृद्धि की। भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना। उच्च उपज किस्मों और सिंचाई का प्रयोग हुआ। इससे किसानों की आय बढ़ी और गरीबी कम हुई।
Word Count: 42 wordsभारत में औद्योगिक नीति का उद्देश्य तेज औद्योगिक विकास करना था। सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई। भारी उद्योगों की स्थापना पर जोर दिया गया। इससे रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला।
Word Count: 42 wordsद्वितीय पंचवर्षीय योजना 1956 से 1961 तक चली। इसकी मुख्य विशेषता भारी उद्योगों पर जोर था। महालनोबिस मॉडल पर आधारित यह योजना औद्योगिकीकरण पर केंद्रित थी। लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सके।
Word Count: 40 wordsनियोजित विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका सीमित थी। शुरू में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई। बाद में निजी क्षेत्र को भी अनुमति मिली। मिश्रित अर्थव्यवस्था में दोनों क्षेत्र साथ चले।
Word Count: 42 wordsपंचवर्षीय योजनाओं की सफलताएँ: कृषि और उद्योग में विकास, आधारभूत संरचना और शिक्षा में प्रगति। असफलताएँ: गरीबी और बेरोजगारी में कमी नहीं आई, असमानता बढ़ी और कई लक्ष्य पूरे नहीं हो सके।
Word Count: 42 wordsअध्याय 4 — भारत के विदेश संबंध
India’s External Relations
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उद्देश्य शीत युद्ध में किसी भी महाशक्ति का पक्ष न लेना था। इसने नव स्वतंत्र देशों को स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने का अवसर दिया। इससे विश्व शांति और सहयोग को बढ़ावा मिला।
Word Count: 42 wordsभारत की विदेश नीति के मुख्य सिद्धांत हैं: गुटनिरपेक्षता, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, राष्ट्रीय हित की रक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग। पंचशील के सिद्धांत भी इसके आधार हैं। भारत विश्व शांति का समर्थक है।
Word Count: 42 wordsपंचशील के पाँच सिद्धांत थे: एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान, अनाक्रमण, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व। ये 1954 में भारत-चीन के बीच तय हुए।
Word Count: 42 words1962 के भारत-चीन युद्ध में भारत को हार का सामना करना पड़ा। चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर कब्जा किया। इससे भारत की सुरक्षा नीति में बदलाव आया। भारत ने सैन्य तैयारी बढ़ाई।
Word Count: 42 words1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को हराया। इससे बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारत की सैन्य शक्ति और कूटनीतिक क्षमता विश्व में स्थापित हुई। शिमला समझौता 1972 में हुआ।
Word Count: 39 wordsशिमला समझौता 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ। इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस पर हस्ताक्षर किए। इसने युद्ध के बाद शांति और स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ाया।
Word Count: 40 wordsभारत और सोवियत संघ के संबंध मैत्रीपूर्ण थे। 1971 में दोनों के बीच मैत्री संधि हुई। सोवियत संघ ने 1971 के युद्ध में भारत का समर्थन किया। दोनों के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ा।
Word Count: 42 wordsभारत की परमाणु नीति शांतिपूर्ण उपयोग पर आधारित रही है। भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में किया। 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण किए। भारत ने ‘नो फर्स्ट यूज़’ की नीति अपनाई।
Word Count: 42 wordsभारत और अमेरिका के संबंधों में शीत युद्ध के बाद सुधार आया। 2005 में असैनिक परमाणु समझौता हुआ। आर्थिक और रक्षा सहयोग बढ़ा। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी विकसित हुई।
Word Count: 40 wordsनेहरू ने भारत की विदेश नीति की नींव रखी। उन्होंने गुटनिरपेक्षता और पंचशील के सिद्धांत दिए। उन्होंने एशियाई एकता और विश्व शांति पर बल दिया। उनके नेतृत्व में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाई।
Word Count: 42 wordsअध्याय 5 — कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना
Congress System: Challenges and Restoration
कांग्रेस प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ थीं: एक प्रभुत्वशाली पार्टी, भीतर गुटों की राजनीति और विपक्ष का सीमित होना। कांग्रेस ने विभिन्न वर्गों को अपने साथ जोड़ा। इसने लंबे समय तक सत्ता में रहकर राजनीतिक स्थिरता दी।
Word Count: 44 words1967 के चुनावों को ‘राजनीतिक भूकंप’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें कांग्रेस को कई राज्यों में भारी हार मिली। गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं। संयुक्त विधायक दल ने सरकारें बनाईं। इससे कांग्रेस का वर्चस्व कमजोर हुआ।
Word Count: 44 wordsकांग्रेस का विभाजन 1969 में हुआ। इसका कारण था इंदिरा गांधी और पुराने नेताओं के बीच मतभेद। राष्ट्रपति पद के चुनाव में विद्रोह के बाद विभाजन हुआ। इससे कांग्रेस दो गुटों में बँट गई।
Word Count: 43 words‘गरीबी हटाओ’ नीति 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने अपनाई। इसका उद्देश्य गरीबों का समर्थन प्राप्त करना था। इसके तहत गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रम चलाए गए। इससे कांग्रेस को भारी जनसमर्थन मिला।
Word Count: 44 words1971 के चुनाव में कांग्रेस को भारी जीत मिली। इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त किया। ‘गरीबी हटाओ’ नारे ने जनता को आकर्षित किया। इससे इंदिरा गांधी की स्थिति मजबूत हुई।
Word Count: 44 wordsकांग्रेस की पुनर्स्थापना 1971 के चुनाव के बाद हुई। इंदिरा गांधी ने पार्टी को मजबूत किया। ‘गरीबी हटाओ’ नीति और बांग्लादेश युद्ध की सफलता ने पार्टी को लोकप्रिय बनाया। इससे कांग्रेस फिर सत्ता में आई।
Word Count: 44 words1975 में आपातकाल इंदिरा गांधी ने लगाया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनके चुनाव को अवैध ठहराया था। विपक्षी आंदोलन और देश में अस्थिरता के कारण आपातकाल लगाया गया। इससे नागरिक अधिकारों पर रोक लगी।
Word Count: 44 wordsआपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए। प्रेस की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई। विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया। मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। इससे लोकतंत्र पर संकट आया।
Word Count: 43 words1977 के चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण आपातकाल के दौरान किए गए अत्याचार थे। जनता ने आपातकाल का विरोध किया। जनता पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा। इससे कांग्रेस को भारी हार मिली।
Word Count: 42 wordsजनता पार्टी की सरकार 1979 में गिर गई। इसका कारण आंतरिक मतभेद और गुटबंदी थी। मोरारजी देसाई के नेतृत्व में अस्थिरता बढ़ी। चरण सिंह ने सरकार बनाई लेकिन कांग्रेस के समर्थन वापस लेने से वह भी गिर गई।
Word Count: 44 wordsअध्याय 6 — लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
Crisis of Democratic Order
आपातकाल की घोषणा 25 जून 1975 को की गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध ठहराया। विपक्षी आंदोलन और अस्थिरता के कारण आपातकाल लगाया गया। इससे लोकतंत्र पर संकट आया।
Word Count: 44 wordsआपातकाल के दौरान अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 के अंतर्गत मौलिक अधिकार निलंबित किए गए। इनमें समानता, स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार शामिल थे। नागरिकों को अदालत जाने का अधिकार भी नहीं था।
Word Count: 43 wordsआपातकाल का भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा। जनता में असंतोष बढ़ा। 1977 में कांग्रेस की हार हुई। लोकतंत्र की रक्षा के लिए जन आंदोलन हुए। इससे जनता में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी।
Word Count: 41 wordsजनता पार्टी का गठन 1977 में हुआ। आपातकाल के बाद विपक्षी दलों ने मिलकर यह पार्टी बनाई। इसमें कांग्रेस (ओ), भारतीय जनसंघ, समाजवादी पार्टी आदि शामिल थे। इसने 1977 का चुनाव जीता।
Word Count: 42 wordsशाह आयोग का गठन 1977 में हुआ। इसका उद्देश्य आपातकाल के दौरान हुई अत्याचारों की जाँच करना था। जस्टिस शाह इसके अध्यक्ष थे। इसने 1978 में रिपोर्ट सौंपी। इसमें आपातकाल की निंदा की गई।
Word Count: 43 wordsआपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रभाव पड़ा। समाचार पत्रों को सरकारी सेंसरशिप के तहत काम करना पड़ा। कई पत्रकारों को जेल में डाला गया। विपक्षी विचारों को प्रकाशित नहीं किया गया। इससे लोकतंत्र कमजोर हुआ।
Word Count: 44 words1977 के चुनाव के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। इससे पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार केंद्र में आई। इसने आपातकाल के दौरान लगाए प्रतिबंधों को हटाया। लोकतांत्रिक स्वतंत्रताएँ बहाल हुईं।
Word Count: 43 wordsआपातकाल के दौरान नागरिकों के साथ दमनकारी व्यवहार किया गया। विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमा जेल में डाला गया। नागरिकों को अदालत जाने का अधिकार नहीं था। पुलिस को विशेष शक्तियाँ दी गईं।
Word Count: 42 wordsलोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट 1975-77 के आपातकाल के दौरान उत्पन्न हुआ। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएँ सीमित हो गईं। संसद की भूमिका कमजोर हुई। न्यायपालिका पर दबाव बढ़ा। इससे भारतीय लोकतंत्र की परीक्षा हुई।
Word Count: 42 wordsआपातकाल के बाद 1977 में चुनाव हुए। जनता पार्टी ने जीत हासिल की। नई सरकार ने नागरिक स्वतंत्रताएँ बहाल कीं। प्रेस की स्वतंत्रता लौटाई गई। मौलिक अधिकार फिर से लागू हुए। इससे लोकतंत्र की बहाली हुई।
Word Count: 42 wordsअध्याय 7 — जन आंदोलनों का उदय
Rise of Popular Movements
जन आंदोलन का अर्थ है जनता द्वारा किसी मुद्दे पर सामूहिक रूप से उठाया गया आंदोलन। यह सरकार की नीतियों के विरोध या माँगों की पूर्ति के लिए होता है। इसमें जनता की सक्रिय भागीदारी होती है।
Word Count: 42 wordsदलित पैंथर्स का गठन 1972 में हुआ। इसका उद्देश्य दलितों के अधिकारों की रक्षा करना था। इसने जातिगत भेदभाव और अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाई। नामदेव ढसाल, जे.वी. पवार और अरुण कांबले इसके संस्थापक थे।
Word Count: 44 wordsभारतीय किसान यूनियन का गठन 1980 के दशक में हुआ। इसका उद्देश्य किसानों की समस्याओं को उठाना था। इसने कृषि उत्पादों के उचित मूल्य और किसानों की आय बढ़ाने की माँग की। महेंद्र सिंह टिकैत इसके प्रमुख नेता थे।
Word Count: 44 wordsचिपको आंदोलन का उद्देश्य वनों की कटाई रोकना था। यह 1970 के दशक में उत्तराखंड में शुरू हुआ। महिलाओं ने पेड़ों को गले लगाकर कटाई रोकी। इससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा।
Word Count: 42 wordsनर्मदा बचाओ आंदोलन का नेतृत्व मेधा पाटकर ने किया। यह सरदार सरोवर बाँध के विरोध में चलाया गया। इसका उद्देश्य विस्थापित लोगों के पुनर्वास की माँग करना था। इसने बड़े बाँधों के प्रभावों पर सवाल उठाए।
Word Count: 44 wordsमहिला आंदोलन के प्रमुख मुद्दे रहे हैं: लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार, दहेज प्रथा का विरोध, घरेलू हिंसा के विरुद्ध कानून और राजनीतिक प्रतिनिधित्व। इसने महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए संघर्ष किया।
Word Count: 42 wordsपर्यावरण आंदोलन का महत्व यह है कि इसने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी। इसने वनों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरूकता बढ़ाई। इससे सरकारों को पर्यावरण नीतियाँ बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
Word Count: 44 wordsदलित आंदोलन का उद्देश्य दलितों के साथ होने वाले भेदभाव और अत्याचार को समाप्त करना था। इसने सामाजिक समानता और सम्मान की माँग की। इसने शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
Word Count: 42 wordsजन आंदोलनों का राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। इससे सरकारों को जनता की माँगों पर ध्यान देना पड़ा। कई नए कानून बने। जनता में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी। इससे लोकतंत्र और मजबूत हुआ।
Word Count: 40 wordsसूचना का अधिकार आंदोलन राजस्थान के मजदूर किसान शक्ति संगठन द्वारा शुरू हुआ। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना था। इसके परिणामस्वरूप 2005 में सूचना का अधिकार कानून बना। इससे नागरिकों को जानकारी का अधिकार मिला।
Word Count: 44 wordsअध्याय 8 — क्षेत्रीय आकांक्षाएँ
Regional Aspirations
क्षेत्रीय आकांक्षाओं का अर्थ है किसी क्षेत्र के लोगों की अपनी पहचान, भाषा, संस्कृति और विकास की माँगें। ये माँगें राजनीतिक, आर्थिक या सांस्कृतिक हो सकती हैं। इनका समाधान लोकतांत्रिक तरीके से किया जाता है।
Word Count: 42 wordsपंजाब में उग्रवाद का कारण अलग खालिस्तान की माँग थी। आनंदपुर साहिब प्रस्ताव और धार्मिक भावनाओं ने इसे बढ़ावा दिया। आतंकवाद से राज्य में हिंसा फैली। इससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
Word Count: 42 wordsआंध्र प्रदेश का गठन 1953 में हुआ। तेलुगु भाषी लोगों की माँग के कारण मद्रास से अलग करके आंध्र राज्य बनाया गया। पोट्टी श्रीरामुलु के आंदोलन और उनकी मृत्यु के बाद यह निर्णय लिया गया।
Word Count: 42 wordsतमिलनाडु में क्षेत्रीय आकांक्षाओं का परिणाम यह हुआ कि हिंदी विरोधी आंदोलन हुआ। द्रविड़ आंदोलन ने तमिल पहचान की रक्षा की। केंद्र सरकार ने तीन भाषा फार्मूले में बदलाव किया। तमिलनाडु में द्रविड़ दलों का प्रभुत्व स्थापित हुआ।
Word Count: 43 wordsनागालैंड राज्य का गठन 1963 में हुआ। नागा लोगों की अलग पहचान और स्वायत्तता की माँग के कारण यह राज्य बना। नागा आंदोलन ने हिंसा का रूप लिया। बाद में समझौते के बाद नागालैंड अलग राज्य बना।
Word Count: 44 wordsमिजोरम में उग्रवाद का कारण मिजो लोगों की स्वायत्तता की माँग थी। मिजो नेशनल फ्रंट ने 1966 में स्वतंत्रता की घोषणा की। इससे केंद्र सरकार के साथ संघर्ष हुआ। बाद में 1986 के समझौते के बाद मिजोरम राज्य बना।
Word Count: 44 wordsजम्मू-कश्मीर में अलगाववाद का कारण विशेष दर्जा और अलग पहचान की माँग थी। पाकिस्तान द्वारा उकसावे और सीमा पार आतंकवाद ने इसे बढ़ावा दिया। कुछ समूह अलग कश्मीर की माँग करते रहे। इससे राज्य में अस्थिरता बनी रही।
Word Count: 44 wordsपूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय समस्याएँ हैं: अलगाववाद, उग्रवाद, स्वायत्तता की माँग और अविकसितता। कई राज्यों में जातीय संघर्ष हुए। बांग्लादेश से घुसपैठ और सीमा विवाद भी समस्याएँ हैं। सरकार ने विशेष प्रावधानों से इनका समाधान खोजा।
Word Count: 44 wordsक्षेत्रीय दलों का उदय इसलिए हुआ क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट समस्याएँ और आकांक्षाएँ थीं। राष्ट्रीय दल इन मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं देते थे। क्षेत्रीय दलों ने स्थानीय हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाई। इससे भारतीय राजनीति में बहुलता आई।
Word Count: 44 wordsक्षेत्रीय आकांक्षाओं का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से किया गया। नए राज्यों का गठन किया गया। विशेष प्रावधान दिए गए। बातचीत और समझौतों से समस्याएँ हल की गईं। इससे राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय पहचान दोनों को सम्मान मिला।
Word Count: 44 wordsअध्याय 9 — भारतीय राजनीति: नए बदलाव
Recent Developments in Indian Politics
1989 के चुनाव के बाद केंद्र में गठबंधन सरकार बनी। कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला। राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार वी.पी. सिंह के नेतृत्व में बनी। इससे गठबंधन युग की शुरुआत हुई और राजनीति में नए बदलाव आए।
Word Count: 44 wordsमंडल आयोग की सिफारिशें 1980 में आईं। इसने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की। 1990 में वी.पी. सिंह सरकार ने इसे लागू किया। इससे सामाजिक न्याय की बहस शुरू हुई और राजनीति में बड़ा बदलाव आया।
Word Count: 44 wordsमंडल आयोग के कार्यान्वयन का प्रभाव यह पड़ा कि पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिला। इससे सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ा। पिछड़ी जातियों का राजनीतिक उत्थान हुआ। लेकिन इसका विरोध भी हुआ और आंदोलन हुए।
Word Count: 44 wordsबाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना 6 दिसंबर 1992 को हुई। अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित ढाँचे को गिरा दिया। इससे देश में सांप्रदायिक दंगे भड़के। इस घटना ने भारतीय राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
Word Count: 42 wordsगठबंधन राजनीति का अर्थ है विभिन्न दलों का मिलकर सरकार बनाना। 1989 के बाद भारत में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ। किसी एक दल को बहुमत न मिलने पर गठबंधन बनते हैं। इससे सहमति और समन्वय की राजनीति बढ़ी।
Word Count: 44 words1990 के दशक में गठबंधन सरकारें इसलिए बनीं क्योंकि किसी भी दल को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़ी। राष्ट्रीय दलों को सहयोगियों की जरूरत पड़ी। इससे गठबंधन राजनीति का युग शुरू हुआ।
Word Count: 44 wordsराष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बना गठबंधन है। यह 1998 में बना। इसमें कई क्षेत्रीय दल शामिल हुए। इसने केंद्र में सरकार बनाई। यह गठबंधन राजनीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Word Count: 43 wordsसंयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) कांग्रेस के नेतृत्व में बना गठबंधन था। यह 2004 में बना। इसमें कई दल शामिल हुए। इसने 2004 से 2014 तक केंद्र में सरकार चलाई। यह गठबंधन राजनीति का उदाहरण है।
Word Count: 42 wordsभारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ये क्षेत्रीय हितों की रक्षा करते हैं। गठबंधन सरकारों में इनकी भागीदारी बढ़ी है। ये राष्ट्रीय दलों के साथ मिलकर सरकार बनाते हैं। इससे संघीय व्यवस्था मजबूत हुई।
Word Count: 42 words1990 के बाद भारतीय राजनीति में कई बदलाव आए। गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ। क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़ी। पिछड़ा वर्ग और दलित राजनीति में सक्रिय हुए। आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाई गई। इससे राजनीति में बहुलता आई।
Word Count: 44 words