बिहार बोर्ड — कक्षा 12 : गृह विज्ञान
अध्याय 8 : वस्त्र एवं परिधान का देखभाल और रख-रखाव
KK MAHTO — Founder & Educator, Apni Kaksha
📑 विषय-सूची (Contents)
- परिचय एवं मूल अवधारणाएँ
- वस्त्रों की देखभाल का महत्व
- वस्त्रों की देखभाल के चरण
- धुलाई (Laundry) — परिभाषा एवं महत्व
- जल (Water) — प्रकार एवं वस्त्र धुलाई में महत्व
- साबुन एवं अपमार्जक (Soap & Detergent)
- ब्लीच (Bleach) — प्रकार एवं उपयोग
- स्टार्च (Starch) — प्रकार एवं उपयोग
- ब्लू (Blue) एवं अन्य सहायक पदार्थ
- धुलाई के उपकरण एवं सामग्री
- धुलाई की विधियाँ (हाथ से एवं मशीन से)
- धुलाई की प्रक्रिया — चरणबद्ध विवरण
- दाग (Stains) — प्रकार एवं पहचान
- दाग छुड़ाने की विधियाँ एवं सिद्धांत
- विभिन्न प्रकार के दागों के उपचार
- सुखाने की विधियाँ (Drying Methods)
- इस्त्री एवं प्रेसिंग (Ironing & Pressing)
- तह लगाना एवं भंडारण (Folding & Storage)
- कीट एवं कीड़ों से सुरक्षा
- विशेष वस्त्रों की देखभाल (ऊन, रेशम, सिंथेटिक, जरी)
- ड्राई क्लीनिंग (Dry Cleaning)
- वस्त्रों के केयर लेबल (Care Labels)
- चमड़े एवं फर की देखभाल
- महत्वपूर्ण तथ्य एवं परिभाषाएँ
- महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)
1. परिचय एवं मूल अवधारणाएँ
वस्त्र एवं परिधान मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। वस्त्रों को खरीदना, पहनना एवं उनकी देखभाल करना — यह सब जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। वस्त्रों की उचित देखभाल से उनकी आयु बढ़ती है, वे लंबे समय तक नए जैसे दिखते हैं और उनकी सुंदरता एवं उपयोगिता बनी रहती है।
इस अध्याय में हम वस्त्रों की देखभाल एवं रख-रखाव की विभिन्न विधियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे — जैसे धुलाई, दाग छुड़ाना, सुखाना, इस्त्री करना, तह लगाना, भंडारण, कीटों से सुरक्षा, विशेष वस्त्रों की देखभाल तथा ड्राई क्लीनिंग आदि।
📖 परिभाषा — वस्त्रों की देखभाल (Care of Clothes)
वस्त्रों की देखभाल से तात्पर्य उन सभी उपायों एवं प्रक्रियाओं से है जो वस्त्रों को स्वच्छ, सुंदर, टिकाऊ एवं उपयोगी बनाए रखने के लिए किए जाते हैं। इसमें धुलाई, दाग छुड़ाना, सुखाना, इस्त्री करना, भंडारण एवं कीटों से सुरक्षा शामिल है।
📖 परिभाषा — रख-रखाव (Maintenance)
रख-रखाव से तात्पर्य वस्त्रों को लंबे समय तक सुरक्षित एवं उपयोगी बनाए रखने की प्रक्रिया से है। इसमें वस्त्रों की नियमित सफाई, मरम्मत, भंडारण एवं सुरक्षा शामिल है।
📌 इस अध्याय का केंद्रीय प्रश्न
वस्त्रों की देखभाल क्यों आवश्यक है? धुलाई की विभिन्न विधियाँ कौन-सी हैं? दाग कितने प्रकार के होते हैं और उन्हें कैसे छुड़ाया जाता है? कठोर जल से धुलाई पर क्या प्रभाव पड़ता है? विभिन्न प्रकार के वस्त्रों की देखभाल कैसे की जाए? ड्राई क्लीनिंग क्या है? केयर लेबल क्या बताते हैं?
2. वस्त्रों की देखभाल का महत्व
देखभाल के लाभ एवं महत्व
- आयु में वृद्धि — उचित देखभाल से वस्त्र लंबे समय तक चलते हैं।
- सुंदरता बनी रहती है — वस्त्र नए जैसे दिखते हैं।
- आर्थिक बचत — बार-बार नए वस्त्र नहीं खरीदने पड़ते।
- स्वास्थ्य की रक्षा — स्वच्छ वस्त्र रोगों से बचाते हैं।
- सामाजिक प्रतिष्ठा — स्वच्छ एवं सुंदर वस्त्र व्यक्तित्व को निखारते हैं।
- आत्मविश्वास — अच्छे वस्त्र आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।
- रंग एवं बुनावट की रक्षा — रंग एवं बुनावट बनी रहती है।
- संक्रमण से बचाव — स्वच्छ वस्त्र संक्रमण से बचाते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण — कम वस्त्र खरीदने से संसाधनों की बचत।
- पारिवारिक बजट — परिवार के बजट पर कम भार।
3. वस्त्रों की देखभाल के चरण
देखभाल के प्रमुख चरण
| क्र.सं. | चरण | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | छँटाई (Sorting) | वस्त्रों को रंग, कपड़े एवं गंदगी के अनुसार अलग करना |
| 2 | भिगोना (Soaking) | वस्त्रों को पानी में भिगोना |
| 3 | दाग छुड़ाना (Stain Removal) | दागों का उपचार करना |
| 4 | धुलाई (Washing) | साबुन/डिटर्जेंट से धोना |
| 5 | अच्छी तरह धोना (Rinsing) | साबुन पूरी तरह हटाना |
| 6 | निचोड़ना (Wringing) | अतिरिक्त पानी निकालना |
| 7 | सुखाना (Drying) | वस्त्रों को सुखाना |
| 8 | इस्त्री (Ironing) | प्रेस करना |
| 9 | तह एवं भंडारण | तह लगाकर सुरक्षित रखना |
4. धुलाई (Laundry) — परिभाषा एवं महत्व
📖 परिभाषा — धुलाई (Laundry)
धुलाई वह प्रक्रिया है जिसमें वस्त्रों से धूल, मैल, तेल, चिकनाई एवं दाग-धब्बे को जल, साबुन एवं यांत्रिक क्रिया की सहायता से हटाया जाता है।
धुलाई का महत्व
- वस्त्रों की स्वच्छता बनी रहती है।
- वस्त्रों की आयु बढ़ती है।
- रोगों एवं संक्रमण से बचाव होता है।
- वस्त्रों की सुंदरता बनी रहती है।
- वस्त्रों से दुर्गंध दूर होती है।
- त्वचा संबंधी रोगों से बचाव।
- वस्त्रों का रंग एवं चमक बनी रहती है।
धुलाई के लिए आवश्यक तत्व
- जल (Water) — वस्त्रों को भिगोने एवं धोने के लिए।
- साबुन/अपमार्जक — मैल हटाने के लिए।
- यांत्रिक क्रिया — हाथ या मशीन से रगड़ना।
- तापमान — उचित तापमान।
- समय — पर्याप्त समय।
5. जल (Water) — प्रकार एवं वस्त्र धुलाई में महत्व
📖 परिभाषा — कठोर जल (Hard Water)
कठोर जल वह जल है जिसमें कैल्शियम एवं मैग्नीशियम के लवण घुले हुए होते हैं। इससे साबुन का झाग कम बनता है और वस्त्रों पर साबुन का अवशेष रह जाता है।
📖 परिभाषा — मृदु जल (Soft Water)
मृदु जल वह जल है जिसमें कैल्शियम एवं मैग्नीशियम के लवण नहीं या बहुत कम मात्रा में होते हैं। इसमें साबुन अच्छा झाग बनाता है और वस्त्र साफ हो जाते हैं।
जल के प्रकार
| प्रकार | विशेषता | धुलाई में प्रभाव |
|---|---|---|
| वर्षा का जल | मृदु जल | सर्वोत्तम — साबुन अच्छा झाग |
| नदी का जल | सामान्यतः मृदु | अच्छा |
| कुआँ का जल | कठोर जल | साबुन का झाग कम |
| नल का जल | मध्यम कठोरता | सामान्य |
| समुद्र का जल | अत्यंत कठोर | धुलाई के लिए अनुपयुक्त |
कठोर जल की समस्या एवं समाधान
- समस्या — साबुन का झाग कम बनता है, अधिक साबुन लगता है, वस्त्रों पर साबुन का अवशेष रह जाता है।
- समाधान — सिंथेटिक डिटर्जेंट का प्रयोग करें, जल को उबालकर ठंडा करें, वाशिंग सोडा मिलाएँ।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
कठोर जल में सिंथेटिक डिटर्जेंट का प्रयोग अधिक उपयुक्त होता है, क्योंकि यह कठोर जल में भी अच्छा झाग बनाता है। जबकि साबुन कठोर जल में अविलेय पदार्थ बनाता है, जो वस्त्रों पर जम जाता है।
6. साबुन एवं अपमार्जक (Soap & Detergent)
📖 परिभाषा — साबुन (Soap)
साबुन वसा या तेल एवं क्षार (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) की अभिक्रिया से बनने वाला पदार्थ है, जो जल में घुलकर झाग बनाता है और मैल को हटाता है।
📖 परिभाषा — अपमार्जक / डिटर्जेंट (Detergent)
अपमार्जक एक सिंथेटिक रासायनिक पदार्थ है, जो कठोर जल में भी अच्छा झाग बनाता है और मैल को प्रभावी ढंग से हटाता है।
साबुन एवं अपमार्जक में अंतर
| आधार | साबुन | अपमार्जक (डिटर्जेंट) |
|---|---|---|
| स्रोत | प्राकृतिक (वसा + क्षार) | सिंथेटिक (पेट्रोलियम से) |
| कठोर जल में | झाग कम, अवशेष रहता है | अच्छा झाग बनता है |
| मृदु जल में | अच्छा काम करता है | अच्छा काम करता है |
| त्वचा पर | सौम्य | कठोर प्रभाव |
| जैव-अपघटन | हाँ, अपघटित हो जाता है | हानिकारक प्रभाव |
| लागत | कम | अधिक |
साबुन के प्रकार
- आर्द्र साबुन — मुलायम साबुन, ठंडे पानी में उपयोग।
- शुष्क साबुन — कठोर साबुन, अधिक मैल के लिए।
- टॉयलेट साबुन — त्वचा के लिए सौम्य।
- लॉन्ड्री साबुन — कपड़ों के लिए विशेष।
- पाउडर साबुन — धुलाई में आसान।
- फ्लेक्स साबुन — ऊनी वस्त्रों के लिए।
अपमार्जक के प्रकार
- अनायनिक डिटर्जेंट — सामान्य धुलाई के लिए।
- कैटायनिक डिटर्जेंट — रोगाणुनाशक एवं स्थिरविद्युतरोधी।
- एम्फोटेरिक डिटर्जेंट — उभय गुण वाले।
- नॉन-आयनिक डिटर्जेंट — तेल एवं वसा हटाने के लिए।
7. ब्लीच (Bleach) — प्रकार एवं उपयोग
📖 परिभाषा — ब्लीच (Bleach)
ब्लीच वह रासायनिक पदार्थ है जो वस्त्रों से रंग हटाने, दाग छुड़ाने एवं कीटाणु नष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।
ब्लीच के प्रकार
| प्रकार | उदाहरण | उपयोग |
|---|---|---|
| ऑक्सीकारक ब्लीच | हाइड्रोजन पेरोक्साइड, बोरेक्स, सोडियम पेरबोरेट | रंगीन एवं सफेद वस्त्रों के लिए |
| अपचायक ब्लीच | सोडियम हाइड्रोसल्फाइट | सीमित उपयोग |
| क्लोरीन ब्लीच | ब्लीचिंग पाउडर, सोडियम हाइपोक्लोराइट | केवल सफेद सूती वस्त्रों के लिए |
ब्लीच का उपयोग करते समय सावधानियाँ
- ब्लीच को सीधे वस्त्र पर न डालें।
- रंगीन वस्त्रों पर क्लोरीन ब्लीच का प्रयोग न करें।
- ऊनी एवं रेशमी वस्त्रों पर क्लोरीन ब्लीच न लगाएँ।
- ब्लीच की मात्रा निर्देशानुसार ही रखें।
- ब्लीच लगाने के बाद वस्त्र को अच्छी तरह धोएँ।
- ब्लीच का उपयोग हवादार स्थान पर करें।
- बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
8. स्टार्च (Starch) — प्रकार एवं उपयोग
📖 परिभाषा — स्टार्च (Starch)
स्टार्च वह पदार्थ है जो वस्त्रों को कड़ापन, चमक एवं नयापन प्रदान करता है। यह मुख्यतः सूती एवं लिनन वस्त्रों पर लगाया जाता है।
स्टार्च के प्रकार
- प्राकृतिक स्टार्च — आलू, चावल, गेहूँ, मक्का से बनाया जाता है।
- सिंथेटिक स्टार्च — रासायनिक रूप से तैयार, अधिक चमकदार।
- तरल स्टार्च — तैयार स्टार्च, स्प्रे के रूप में।
स्टार्च के लाभ
- वस्त्रों को कड़ापन एवं नयापन देता है।
- वस्त्रों पर चमक आती है।
- धूल एवं मैल कम लगती है।
- वस्त्र जल्दी गंदे नहीं होते।
- इस्त्री करने में आसानी होती है।
- वस्त्रों की आयु बढ़ती है।
स्टार्च लगाते समय सावधानियाँ
- स्टार्च अधिक गाढ़ा न हो।
- रंगीन वस्त्रों पर हल्का स्टार्च लगाएँ।
- ऊनी एवं रेशमी वस्त्रों पर स्टार्च न लगाएँ।
- स्टार्च को अच्छी तरह घोलें।
- स्टार्च लगाने के बाद वस्त्र को सुखाएँ।
9. ब्लू (Blue) एवं अन्य सहायक पदार्थ
ब्लू (Blue)
- ब्लू एक नीला रंग का पदार्थ है जो सफेद वस्त्रों में हल्का नीला रंग देता है।
- इससे सफेद वस्त्र अधिक सफेद एवं चमकदार दिखते हैं।
- ब्लू को पानी में घोलकर अंतिम बार धुलाई में उपयोग किया जाता है।
अन्य सहायक पदार्थ
| पदार्थ | उपयोग |
|---|---|
| बोरेक्स | जल को मृदु बनाना एवं कीटाणुनाशक |
| वाशिंग सोडा | जल मृदु करना एवं मैल हटाना |
| अमोनिया | दाग छुड़ाना एवं चमक बढ़ाना |
| विनेगर (सिरका) | रंग बनाए रखना एवं दुर्गंध हटाना |
| ग्लिसरीन | दाग छुड़ाना एवं मुलायम बनाना |
| नैप्थलीन बॉल | कीटों से सुरक्षा |
| फॉर्मेल्डिहाइड | कीटाणुनाशक |
| ऑक्सैलिक एसिड | लोहे के दाग छुड़ाना |
10. धुलाई के उपकरण एवं सामग्री
धुलाई के उपकरण
- टब एवं बाल्टी — वस्त्र भिगोने एवं धोने के लिए।
- ब्रश — कॉलर एवं कफ साफ करने के लिए।
- वॉशिंग बोर्ड — रगड़कर धोने के लिए।
- वॉशिंग मशीन — स्वचालित धुलाई के लिए।
- बर्तन — स्टार्च एवं ब्लू बनाने के लिए।
- कपड़ा सुखाने का स्टैंड — वस्त्र सुखाने के लिए।
- क्लिप एवं हैंगर — वस्त्र लटकाने के लिए।
- इस्त्री — वस्त्र प्रेस करने के लिए।
- इस्त्री बोर्ड — इस्त्री करने के लिए।
- मापने का कप — डिटर्जेंट मापने के लिए।
धुलाई की सामग्री
- साबुन / डिटर्जेंट
- ब्लीच
- स्टार्च
- ब्लू
- दाग छुड़ाने वाले रसायन
- पानी
11. धुलाई की विधियाँ (हाथ से एवं मशीन से)
(क) हाथ से धुलाई (Hand Washing)
- छँटाई — वस्त्रों को रंग एवं कपड़े के अनुसार अलग करें।
- भिगोना — वस्त्रों को 15-30 मिनट तक पानी में भिगोएँ।
- साबुन लगाना — वस्त्रों पर साबुन या डिटर्जेंट लगाएँ।
- रगड़ना — कॉलर, कफ एवं गंदे हिस्सों को हल्के हाथ से रगड़ें।
- धोना — साबुन के घोल में वस्त्रों को धोएँ।
- अच्छी तरह धोना — साफ पानी से साबुन पूरी तरह हटाएँ।
- निचोड़ना — अतिरिक्त पानी निकालें।
(ख) मशीन से धुलाई (Machine Washing)
- वस्त्र छाँटना — रंग एवं कपड़े के अनुसार अलग करें।
- मशीन में डालना — वस्त्रों को मशीन में डालें।
- डिटर्जेंट डालना — निर्देशानुसार डिटर्जेंट डालें।
- प्रोग्राम चुनना — कपड़े के अनुसार प्रोग्राम चुनें।
- धुलाई — मशीन स्वयं धुलाई करती है।
- निचोड़ना — मशीन पानी निकाल देती है।
हाथ एवं मशीन धुलाई में अंतर
| आधार | हाथ से धुलाई | मशीन से धुलाई |
|---|---|---|
| समय | अधिक समय लगता है | कम समय |
| श्रम | अधिक श्रम | कम श्रम |
| पानी | अधिक पानी | कम पानी |
| वस्त्रों की सुरक्षा | अच्छी | कुछ वस्त्र खराब हो सकते हैं |
| लागत | कम | अधिक (बिजली) |
| उपयुक्त | नाजुक वस्त्रों के लिए | सामान्य वस्त्रों के लिए |
12. धुलाई की प्रक्रिया — चरणबद्ध विवरण
चरण 1 — छँटाई (Sorting)
- रंग के अनुसार — सफेद, हल्के रंग, गहरे रंग।
- कपड़े के अनुसार — सूती, ऊनी, रेशमी, सिंथेटिक।
- गंदगी के अनुसार — हल्की, मध्यम, अधिक गंदी।
- उपयोग के अनुसार — बिस्तर, पहनने के वस्त्र, रसोई के कपड़े।
चरण 2 — भिगोना (Soaking)
- वस्त्रों को 15-30 मिनट तक पानी में भिगोएँ।
- अधिक गंदे वस्त्रों को अधिक समय तक भिगोएँ।
- रंगीन वस्त्रों को अधिक समय तक न भिगोएँ।
- ठंडे या गुनगुने पानी का प्रयोग करें।
चरण 3 — दाग छुड़ाना (Stain Removal)
- दाग को पहचानें और उचित विधि से छुड़ाएँ।
- दाग छुड़ाने के बाद वस्त्र धोएँ।
चरण 4 — धुलाई (Washing)
- साबुन या डिटर्जेंट का घोल बनाएँ।
- वस्त्रों को घोल में डालकर धोएँ।
- कॉलर एवं कफ को ब्रश से साफ करें।
- अधिक गंदे हिस्सों को अधिक ध्यान से धोएँ।
चरण 5 — अच्छी तरह धोना (Rinsing)
- साफ पानी में वस्त्रों को 2-3 बार धोएँ।
- साबुन पूरी तरह हटा दें।
- अंतिम बार में ब्लू का उपयोग करें (सफेद वस्त्रों के लिए)।
चरण 6 — निचोड़ना (Wringing)
- वस्त्रों को हल्के हाथ से निचोड़ें।
- अधिक जोर से न निचोड़ें।
- नाजुक वस्त्रों को निचोड़ने के बजाय तौलिये पर रखकर दबाएँ।
13. दाग (Stains) — प्रकार एवं पहचान
📖 परिभाषा — दाग (Stain)
दाग वह अवांछित पदार्थ है जो वस्त्रों पर लग जाता है और उसकी सुंदरता को खराब करता है। दाग विभिन्न पदार्थों से लग सकते हैं — जैसे तेल, चाय, कॉफी, रक्त, स्याही, फल आदि।
दाग के प्रकार
| प्रकार | उदाहरण | विशेषता |
|---|---|---|
| वसायुक्त दाग | तेल, घी, मक्खन, सॉस | तेल के दाग, चिकनाई युक्त |
| प्रोटीन युक्त दाग | रक्त, दूध, अंडा, पसीना | प्रोटीन युक्त, पानी में घुलनशील |
| टैनिन युक्त दाग | चाय, कॉफी, कोको, फल | रंगीन दाग |
| रंग युक्त दाग | स्याही, पेन, पेंट, डाई | रंगीन एवं स्थायी |
| मिलावट युक्त दाग | मिट्टी, कीचड़, धूल | धूल युक्त |
| रासायनिक दाग | अम्ल, क्षार, लोहे का जंग | वस्त्र को नुकसान |
14. दाग छुड़ाने की विधियाँ एवं सिद्धांत
दाग छुड़ाने के सिद्धांत
- जल में घुलनशील दाग — पानी से छुड़ाएँ।
- वसा में घुलनशील दाग — सॉल्वेंट (बेंजीन, टर्पेन्टाइन) से छुड़ाएँ।
- प्रोटीन युक्त दाग — एंजाइम युक्त डिटर्जेंट से छुड़ाएँ।
- अम्लीय दाग — क्षार से छुड़ाएँ।
- क्षारीय दाग — अम्ल से छुड़ाएँ।
दाग छुड़ाने की सावधानियाँ
- दाग को तुरंत छुड़ाने का प्रयास करें।
- दाग छुड़ाने से पहले उसकी प्रकृति पहचानें।
- वस्त्र के कोने पर पहले परीक्षण करें।
- दाग के चारों ओर से केंद्र की ओर छुड़ाएँ।
- गर्म पानी का उपयोग सावधानी से करें।
- रगड़ने से बचें, इससे दाग फैल सकता है।
- रसायनों का उपयोग सावधानी से करें।
15. विभिन्न प्रकार के दागों के उपचार
दाग छुड़ाने की विधियाँ
| दाग | उपचार |
|---|---|
| चाय / कॉफी | गर्म पानी एवं बोरेक्स का घोल लगाएँ, फिर धोएँ |
| तेल / घी | बेंजीन या टर्पेन्टाइन लगाएँ, फिर डिटर्जेंट से धोएँ |
| रक्त | ठंडे पानी में भिगोएँ, एंजाइम युक्त डिटर्जेंट लगाएँ |
| स्याही | दूध में भिगोएँ, फिर नींबू का रस लगाएँ |
| फल का रस | नमक लगाएँ, फिर गर्म पानी से धोएँ |
| दूध / अंडा | ठंडे पानी में धोएँ, एंजाइम डिटर्जेंट लगाएँ |
| पसीना | विनेगर लगाएँ, फिर धोएँ |
| लोहे का जंग | ऑक्सैलिक एसिड लगाएँ, फिर धोएँ |
| च्यूइंग गम | बर्फ लगाएँ, फिर हटाएँ |
| स्याही (बॉल पेन) | अल्कोहल या नेल पॉलिश रिमूवर लगाएँ |
| लिपस्टिक | पेट्रोलियम जेली लगाएँ, फिर धोएँ |
| मिट्टी / कीचड़ | सूखने दें, फिर ब्रश से हटाएँ |
| कॉफी | ग्लिसरीन लगाएँ, फिर धोएँ |
| चॉकलेट | ठंडे पानी में धोएँ, फिर डिटर्जेंट लगाएँ |
| रंग (डाई) | अल्कोहल या विनेगर लगाएँ |
💡 उदाहरण
यदि सफेद कुर्ते पर चाय गिर जाए, तो तुरंत गर्म पानी एवं बोरेक्स का घोल लगाएँ। इसके बाद डिटर्जेंट से धोएँ। दाग पूरी तरह छूट जाएगा। यदि रक्त का दाग लगा हो, तो कभी गर्म पानी का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे दाग स्थायी हो जाता है। ठंडे पानी एवं एंजाइम डिटर्जेंट का प्रयोग करें।
16. सुखाने की विधियाँ (Drying Methods)
सुखाने की विधियाँ
- धूप में सुखाना — वस्त्रों को धूप में सुखाना। रंगीन वस्त्रों को उलटा करके सुखाएँ।
- छाया में सुखाना — रेशमी एवं ऊनी वस्त्रों के लिए उपयुक्त।
- हवा में सुखाना — हवादार स्थान में सुखाना।
- सुखाने की मशीन — ड्रायर में सुखाना।
- तौलिये पर सुखाना — नाजुक वस्त्रों के लिए।
- लटकाकर सुखाना — हैंगर पर लटकाकर।
- समतल सतह पर सुखाना — स्वेटर आदि के लिए।
सुखाने में सावधानियाँ
- रंगीन वस्त्रों को सीधी धूप में न सुखाएँ।
- ऊनी वस्त्रों को लटकाकर न सुखाएँ।
- रेशमी वस्त्रों को छाया में सुखाएँ।
- वस्त्रों को अधिक समय तक धूप में न रखें।
- वस्त्रों को सीधा न लटकाएँ।
- सुखाने के बाद ही इस्त्री करें।
17. इस्त्री एवं प्रेसिंग (Ironing & Pressing)
📖 परिभाषा — इस्त्री (Ironing)
इस्त्री वह प्रक्रिया है जिसमें गर्म लोहे की सहायता से वस्त्रों को सीधा एवं चिकना किया जाता है।
इस्त्री के लाभ
- वस्त्र सीधे एवं चिकने हो जाते हैं।
- वस्त्रों में नयापन आता है।
- व्यक्तित्व में निखार आता है।
- वस्त्र अच्छे लगते हैं।
- आत्मविश्वास बढ़ता है।
- वस्त्रों की सुंदरता बढ़ती है।
विभिन्न वस्त्रों के लिए इस्त्री का तापमान
| वस्त्र | तापमान | सावधानी |
|---|---|---|
| सूती (Cotton) | उच्च (200°C) | नमी के साथ इस्त्री करें |
| लिनन (Linen) | उच्च (230°C) | नमी के साथ इस्त्री करें |
| ऊनी (Wool) | मध्यम (150°C) | कपड़े के ऊपर से इस्त्री करें |
| रेशम (Silk) | निम्न (120°C) | उलटा करके इस्त्री करें |
| सिंथेटिक | निम्न (110°C) | कम तापमान पर इस्त्री करें |
| नायलॉन | निम्न (100°C) | कपड़े के ऊपर से इस्त्री करें |
| पॉलिएस्टर | मध्यम (150°C) | सूखे वस्त्र पर इस्त्री करें |
इस्त्री करते समय सावधानियाँ
- वस्त्र के केयर लेबल को पढ़ें।
- वस्त्र के कोने पर पहले परीक्षण करें।
- उचित तापमान का प्रयोग करें।
- वस्त्र को पूरी तरह सुखाएँ।
- वस्त्र को सीधा रखकर इस्त्री करें।
- गीले वस्त्र को इस्त्री करें (सूती के लिए)।
- रेशमी एवं ऊनी वस्त्रों को कपड़े के ऊपर से इस्त्री करें।
- इस्त्री करने के बाद वस्त्र को तुरंत तह न लगाएँ।
18. तह लगाना एवं भंडारण (Folding & Storage)
तह लगाने की विधि
- वस्त्रों को पूरी तरह सुखाएँ।
- इस्त्री करने के बाद वस्त्रों को ठंडा होने दें।
- वस्त्रों को सीधा करके तह लगाएँ।
- भारी वस्त्र नीचे, हल्के वस्त्र ऊपर रखें।
- नाजुक वस्त्रों को अलग रखें।
- वस्त्रों को इस प्रकार तह लगाएँ कि डिज़ाइन दिखाई दे।
भंडारण की विधियाँ
- अलमारी में — वस्त्रों को अलमारी में तह लगाकर रखें।
- हैंगर पर — कोट, शर्ट, साड़ी आदि लटकाएँ।
- ड्रॉवर में — छोटे वस्त्रों को ड्रॉवर में रखें।
- सूटकेस में — यात्रा के लिए।
- एयरटाइट बैग में — मौसमी वस्त्रों के लिए।
भंडारण में सावधानियाँ
- वस्त्रों को पूरी तरह सुखाकर ही रखें।
- अलमारी में नमी न होने दें।
- अलमारी को समय-समय पर साफ करें।
- नैप्थलीन बॉल का उपयोग करें।
- वस्त्रों को धूप में सुखाएँ।
- भारी वस्त्र ऊपर न रखें।
- रंगीन एवं सफेद वस्त्रों को अलग रखें।
19. कीट एवं कीड़ों से सुरक्षा
वस्त्रों को नुकसान पहुँचाने वाले कीट
| कीट | नुकसान | सुरक्षा |
|---|---|---|
| पतंगा (Moth) | ऊनी वस्त्रों को खाता है | नैप्थलीन बॉल, धूप |
| चींटी | वस्त्रों में छेद | साफ-सुथरा रखें |
| दीमक | वस्त्रों को खाती है | लकड़ी से दूर रखें |
| मकड़ी | जाले एवं गंदगी | नियमित सफाई |
| चूहा | वस्त्रों को कुतरता है | सुरक्षित भंडारण |
कीटों से सुरक्षा के उपाय
- वस्त्रों को साफ रखें।
- नैप्थलीन बॉल का उपयोग करें।
- वस्त्रों को धूप में सुखाएँ।
- अलमारी को साफ रखें।
- नीम की पत्तियाँ रखें।
- लैवेंडर या सूखे फूल रखें।
- वस्त्रों को एयरटाइट बैग में रखें।
- अलमारी में कीटनाशक का उपयोग करें।
20. विशेष वस्त्रों की देखभाल (ऊन, रेशम, सिंथेटिक, जरी)
(क) ऊनी वस्त्रों की देखभाल
- ठंडे पानी में धोएँ।
- हल्के साबुन का उपयोग करें।
- रगड़ें नहीं, हल्के हाथ से दबाएँ।
- निचोड़ें नहीं, तौलिये पर दबाएँ।
- छाया में समतल सतह पर सुखाएँ।
- कपड़े के ऊपर से इस्त्री करें।
- नैप्थलीन बॉल के साथ रखें।
(ख) रेशमी वस्त्रों की देखभाल
- ठंडे या गुनगुने पानी में धोएँ।
- सौम्य डिटर्जेंट का उपयोग करें।
- रगड़ें नहीं, हल्के हाथ से धोएँ।
- छाया में सुखाएँ।
- उलटा करके इस्त्री करें।
- धूप में न सुखाएँ।
- सूखी जगह पर रखें।
(ग) सिंथेटिक वस्त्रों की देखभाल
- सामान्य तापमान पर धोएँ।
- डिटर्जेंट का उपयोग करें।
- अधिक गर्म पानी का उपयोग न करें।
- हल्के हाथ से निचोड़ें।
- छाया में सुखाएँ।
- कम तापमान पर इस्त्री करें।
- सीधी धूप में न सुखाएँ।
(घ) जरी एवं ज़रदोज़ी वस्त्रों की देखभाल
- ड्राई क्लीनिंग कराएँ।
- हल्के हाथ से धोएँ।
- रगड़ें नहीं।
- छाया में सुखाएँ।
- उलटा करके इस्त्री करें।
- नैप्थलीन बॉल के साथ रखें।
- अलग थैली में रखें।
(ङ) लिनन वस्त्रों की देखभाल
- सामान्य तापमान पर धोएँ।
- डिटर्जेंट का उपयोग करें।
- नमी के साथ इस्त्री करें।
- उच्च तापमान पर इस्त्री करें।
- धूप में सुखाएँ।
21. ड्राई क्लीनिंग (Dry Cleaning)
📖 परिभाषा — ड्राई क्लीनिंग
ड्राई क्लीनिंग वह प्रक्रिया है जिसमें वस्त्रों को जल के बिना, कार्बनिक सॉल्वेंट की सहायता से साफ किया जाता है। इसका उपयोग उन वस्त्रों के लिए किया जाता है जो पानी से खराब हो सकते हैं।
ड्राई क्लीनिंग के लिए उपयुक्त वस्त्र
- ऊनी वस्त्र (कोट, सूट, स्वेटर)
- रेशमी वस्त्र (साड़ी, शर्ट)
- जरी एवं ज़रदोज़ी वस्त्र
- चमड़े की वस्तुएँ
- फर एवं ऊन के वस्त्र
- नाजुक कढ़ाई वाले वस्त्र
ड्राई क्लीनिंग में प्रयुक्त सॉल्वेंट
| सॉल्वेंट | उपयोग |
|---|---|
| पेट्रोलियम सॉल्वेंट | सामान्य ड्राई क्लीनिंग |
| पर्क्लोरोएथिलीन | व्यावसायिक ड्राई क्लीनिंग |
| बेंजीन | तेल एवं वसा हटाने के लिए |
| टर्पेन्टाइन | दाग छुड़ाने के लिए |
ड्राई क्लीनिंग की प्रक्रिया
- वस्त्रों की छँटाई।
- दाग छुड़ाना।
- सॉल्वेंट में धुलाई।
- सॉल्वेंट निकालना।
- सुखाना।
- इस्त्री करना।
- पैकिंग।
22. वस्त्रों के केयर लेबल (Care Labels)
📖 परिभाषा — केयर लेबल
केयर लेबल वे प्रतीक एवं निर्देश हैं जो वस्त्रों पर लगे होते हैं और यह बताते हैं कि वस्त्र की देखभाल किस प्रकार की जाए — धुलाई, ब्लीच, सुखाना, इस्त्री एवं ड्राई क्लीनिंग।
केयर लेबल के प्रतीक
| प्रतीक | अर्थ |
|---|---|
| टब | धुलाई के निर्देश |
| टब + हाथ | हाथ से धोएँ |
| टब + तापमान | धुलाई का तापमान |
| त्रिभुज | ब्लीच के निर्देश |
| वर्ग + वृत्त | ड्रायर के निर्देश |
| इस्त्री | इस्त्री के निर्देश |
| वृत्त | ड्राई क्लीनिंग |
| क्रॉस | मना है |
केयर लेबल का महत्व
- वस्त्र की सही देखभाल की जानकारी।
- वस्त्रों को नुकसान से बचाव।
- वस्त्रों की आयु बढ़ती है।
- गलत धुलाई से बचाव।
- उपभोक्ता को सही जानकारी।
- वस्त्रों की गुणवत्ता बनी रहती है।
23. चमड़े एवं फर की देखभाल
चमड़े की वस्तुओं की देखभाल
- चमड़े को पानी से बचाएँ।
- गीले चमड़े को छाया में सुखाएँ।
- चमड़े पर पॉलिश या क्रीम लगाएँ।
- चमड़े को सूखी जगह पर रखें।
- चमड़े पर धूल न जमने दें।
- चमड़े को मोड़कर न रखें।
- चमड़े की वस्तुओं को हैंगर पर लटकाएँ।
- समय-समय पर ड्राई क्लीनिंग कराएँ।
फर की वस्तुओं की देखभाल
- फर को नमी से बचाएँ।
- फर को धूप में न सुखाएँ।
- फर को हवादार स्थान पर रखें।
- फर को ब्रश से साफ करें।
- फर को विशेष थैली में रखें।
- फर को समय-समय पर हिलाएँ।
- फर की ड्राई क्लीनिंग कराएँ।
- फर को नैप्थलीन बॉल से बचाएँ।
24. महत्वपूर्ण तथ्य एवं परिभाषाएँ
एक पंक्ति में परिभाषाएँ
- वस्त्रों की देखभाल — वस्त्रों को स्वच्छ, सुंदर एवं टिकाऊ बनाए रखना।
- धुलाई — जल, साबुन एवं यांत्रिक क्रिया से मैल हटाना।
- कठोर जल — कैल्शियम एवं मैग्नीशियम के लवण युक्त जल।
- मृदु जल — कैल्शियम एवं मैग्नीशियम रहित जल।
- साबुन — वसा एवं क्षार से बना पदार्थ।
- डिटर्जेंट — सिंथेटिक अपमार्जक।
- ब्लीच — रंग हटाने वाला रासायनिक पदार्थ।
- स्टार्च — वस्त्रों को कड़ापन देने वाला पदार्थ।
- दाग — वस्त्रों पर लगा अवांछित पदार्थ।
- ड्राई क्लीनिंग — जल के बिना सॉल्वेंट से सफाई।
- केयर लेबल — वस्त्रों की देखभाल के निर्देश।
- इस्त्री — गर्म लोहे से वस्त्र सीधा करना।
⭐ अति महत्वपूर्ण तथ्य (याद रखें)
- धुलाई के लिए सर्वोत्तम जल — वर्षा का जल (मृदु जल)।
- कठोर जल में — डिटर्जेंट का प्रयोग करें।
- रक्त का दाग — ठंडे पानी में धोएँ।
- चाय का दाग — बोरेक्स का घोल।
- लोहे का जंग — ऑक्सैलिक एसिड।
- ऊनी वस्त्र — ठंडे पानी में धोएँ।
- रेशमी वस्त्र — छाया में सुखाएँ।
- सूती वस्त्र — उच्च तापमान पर इस्त्री।
- सिंथेटिक — निम्न तापमान पर इस्त्री।
- नैप्थलीन बॉल — कीटों से सुरक्षा।
- ड्राई क्लीनिंग — जल के बिना सफाई।
- केयर लेबल — देखभाल के निर्देश।
25. महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा के लिए)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)
- धुलाई क्या है? (जल, साबुन एवं यांत्रिक क्रिया से मैल हटाना)
- कठोर जल क्या है? (कैल्शियम एवं मैग्नीशियम लवण युक्त जल)
- साबुन एवं डिटर्जेंट में मुख्य अंतर क्या है? (साबुन प्राकृतिक, डिटर्जेंट सिंथेटिक)
- रक्त के दाग को किस पानी में धोएँ? (ठंडे पानी में)
- ब्लीच क्या है? (रंग हटाने वाला रासायनिक पदार्थ)
- स्टार्च का क्या उपयोग है? (वस्त्रों को कड़ापन एवं चमक देना)
- ड्राई क्लीनिंग क्या है? (जल के बिना सॉल्वेंट से सफाई)
- केयर लेबल क्या बताता है? (वस्त्रों की देखभाल के निर्देश)
- ऊनी वस्त्रों को किस पानी में धोएँ? (ठंडे पानी में)
- कीटों से सुरक्षा के लिए क्या उपयोग करें? (नैप्थलीन बॉल)
लघु उत्तरीय प्रश्न (2–3 अंक)
- वस्त्रों की देखभाल का महत्व बताइए।
- धुलाई के प्रमुख चरणों के नाम बताइए।
- कठोर जल एवं मृदु जल में अंतर बताइए।
- साबुन एवं डिटर्जेंट में अंतर स्पष्ट करें।
- ब्लीच के प्रकार बताइए।
- स्टार्च के लाभ बताइए।
- दाग के प्रकार बताइए।
- दाग छुड़ाने के सिद्धांत बताइए।
- सुखाने की विधियाँ बताइए।
- इस्त्री करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखें?
- विभिन्न वस्त्रों के लिए इस्त्री का तापमान बताइए।
- भंडारण में सावधानियाँ बताइए।
- कीटों से सुरक्षा के उपाय बताइए।
- ड्राई क्लीनिंग के लिए उपयुक्त वस्त्र बताइए।
- केयर लेबल का महत्व बताइए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
- वस्त्रों की देखभाल के महत्व एवं चरणों की विवेचना करें।
- धुलाई की प्रक्रिया का चरणबद्ध वर्णन करें।
- कठोर जल एवं मृदु जल का वस्त्र धुलाई पर प्रभाव स्पष्ट करें।
- साबुन एवं अपमार्जक की तुलना करें।
- ब्लीच एवं स्टार्च के प्रकार एवं उपयोग की व्याख्या करें।
- दाग के प्रकार एवं दाग छुड़ाने की विधियों की विवेचना करें।
- विभिन्न प्रकार के दागों के उपचार बताइए।
- सुखाने एवं इस्त्री करने की विधियों का वर्णन करें।
- तह लगाने एवं भंडारण की विधियों की व्याख्या करें।
- विशेष वस्त्रों (ऊन, रेशम, सिंथेटिक) की देखभाल की विवेचना करें।
- ड्राई क्लीनिंग की प्रक्रिया एवं महत्व स्पष्ट करें।
- केयर लेबल के प्रतीकों एवं महत्व की व्याख्या करें।
- चमड़े एवं फर की देखभाल के उपाय बताइए।
दीर्घ निबंधात्मक प्रश्न (8–10 अंक)
- “वस्त्रों की उचित देखभाल एवं रख-रखाव से उनकी आयु बढ़ती है तथा आर्थिक बचत होती है” — इस कथन की विवेचना करें।
- धुलाई की विभिन्न विधियों एवं प्रक्रिया की विस्तृत विवेचना करें।
- दाग छुड़ाने की विभिन्न विधियों एवं विभिन्न दागों के उपचार की विस्तृत व्याख्या करें।
- विशेष वस्त्रों की देखभाल एवं ड्राई क्लीनिंग की तुलनात्मक विवेचना करें।
⭐ परीक्षा टिप्स
- धुलाई, दाग, ब्लीच, स्टार्च एवं ड्राई क्लीनिंग की परिभाषाएँ अच्छी तरह याद करें।
- दाग छुड़ाने की विधियों को सारणी बनाकर लिखें।
- विभिन्न वस्त्रों के इस्त्री तापमान को याद करें।
- केयर लेबल के प्रतीकों को याद करें।
- कठोर जल एवं मृदु जल के प्रभाव पर विशेष ध्यान दें।
- तुलनात्मक प्रश्नों में सारणी बनाकर उत्तर लिखें — अंक अधिक मिलते हैं।
- उत्तर में तथ्य एवं उदाहरण अवश्य लिखें।
