अध्याय 1: प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन
सम्पूर्ण नोट्स • किरण आरेख • सूत्र • संख्यात्मक प्रश्न • बोर्ड परीक्षा फोकस
1. प्रकाश का परिचय
प्रकाश (Light) ऊर्जा का एक रूप है जिसकी सहायता से हम वस्तुओं को देख सकते हैं। प्रकाश स्वयं दिखाई नहीं देता, लेकिन जब यह किसी वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आँखों तक पहुँचता है, तब हम उस वस्तु को देख पाते हैं।
- प्रकाश सीधी रेखा में चलता है (Rectilinear Propagation of Light)।
- प्रकाश की चाल निर्वात में लगभग 3 × 10⁸ m/s होती है।
- प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग (Transverse Wave) है।
- प्रकाश न तो यांत्रिक तरंग है और न ही ध्वनि की तरह माध्यम की आवश्यकता होती है।
1.1 प्रकाश की किरण (Ray of Light)
प्रकाश के पथ की दिशा को दर्शाने वाली सीधी रेखा को प्रकाश की किरण कहते हैं।
1.2 प्रकाश की किरण-पुंज (Beam of Light)
अनेक किरणों के समूह को किरण-पुंज कहते हैं। किरण-पुंज तीन प्रकार के होते हैं:
- समानांतर किरण-पुंज: जब किरणें समानांतर चलती हैं (जैसे सूर्य से आने वाली किरणें)।
- अभिसारी किरण-पुंज: जब किरणें एक बिंदु पर मिलती हैं।
- अपसारी किरण-पुंज: जब किरणें एक बिंदु से फैलती हैं।
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प्रकाश की परिभाषा, चाल और किरण-पुंज के प्रकार बहुत महत्वपूर्ण हैं। Board year not verified। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में सीधे पूछे जाते हैं।
2. परावर्तन (Reflection)
परावर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश किसी चमकदार सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाता है।
- दर्पण में अपना चेहरा देखना।
- स्टील की थाली या चम्मच में प्रतिबिंब दिखना।
- पानी की सतह पर पेड़ों का प्रतिबिंब दिखना।
2.1 परावर्तन के प्रकार
| विशेषता | नियमित परावर्तन | अनियमित (विसरित) परावर्तन |
|---|---|---|
| सतह | चिकनी और समतल | खुरदरी और असमान |
| परावर्तित किरणें | समानांतर रहती हैं | विभिन्न दिशाओं में बिखर जाती हैं |
| प्रतिबिंब | स्पष्ट प्रतिबिंब बनता है | प्रतिबिंब नहीं बनता |
| उदाहरण | दर्पण, पॉलिश की सतह | दीवार, कागज़, कपड़ा |
3. परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)
चित्र: परावर्तन के नियम – आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)
प्रथम नियम
आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब सभी एक ही तल में होते हैं।
द्वितीय नियम
आपतन कोण (∠i) सदैव परावर्तन कोण (∠r) के बराबर होता है।
महत्वपूर्ण शब्दावली
- आपतित किरण: वह किरण जो दर्पण पर आपतित होती है।
- परावर्तित किरण: वह किरण जो दर्पण से परावर्तित होकर वापस आती है।
- अभिलंब: आपतन बिंदु पर दर्पण के लंबवत खींची गई रेखा।
- आपतन कोण (∠i): आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
- परावर्तन कोण (∠r): परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण।
4. समतल दर्पण (Plane Mirror)
समतल दर्पण वह दर्पण है जिसकी परावर्तक सतह समतल होती है।
प्रतिबिंब की विशेषताएँ
- आभासी (Virtual): प्रतिबिंब पर्दे पर नहीं लिया जा सकता।
- सीधा (Erect): प्रतिबिंब वस्तु की तरह सीधा होता है।
- समान आकार: प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
- पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion): प्रतिबिंब में बायाँ दायाँ और दायाँ बायाँ दिखाई देता है।
- वस्तु से दर्पण की दूरी = प्रतिबिंब से दर्पण की दूरी।
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समतल दर्पण के प्रतिबिंब की विशेषताएँ लघु उत्तरीय प्रश्नों में पूछी जाती हैं। Board year not verified।
5. गोलाकार दर्पण (Spherical Mirrors)
गोलाकार दर्पण वह दर्पण है जिसकी परावर्तक सतह किसी गोले के पृष्ठ का भाग होती है। ये दो प्रकार के होते हैं:
- अवतल दर्पण (Concave Mirror): परावर्तक सतह अंदर की ओर होती है।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror): परावर्तक सतह बाहर की ओर होती है।
6. अवतल दर्पण (Concave Mirror)
अवतल दर्पण का परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर धँसा होता है। यह अभिसारी दर्पण है क्योंकि यह समानांतर किरणों को एक बिंदु (फोकस) पर अभिसरित करता है।
- शेविंग दर्पण, दंत चिकित्सक का दर्पण, हेडलाइट, सोलर कुकर में उपयोग।
7. उत्तल दर्पण (Convex Mirror)
उत्तल दर्पण का परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है। यह अपसारी दर्पण है क्योंकि यह समानांतर किरणों को फैला देता है।
- वाहनों के रियर-व्यू मिरर, सुरक्षा दर्पण, सड़क दर्पण में उपयोग।
8. दर्पण के महत्वपूर्ण पद
चित्र: अवतल दर्पण के महत्वपूर्ण पद – P (ध्रुव), C (वक्रता केन्द्र), F (मुख्य फोकस)
| पद | प्रतीक | परिभाषा |
|---|---|---|
| ध्रुव | P | दर्पण के मध्य बिंदु को ध्रुव कहते हैं। |
| वक्रता केन्द्र | C | गोले का केंद्र जिसका भाग दर्पण है। |
| वक्रता त्रिज्या | R | ध्रुव से वक्रता केन्द्र की दूरी। |
| मुख्य अक्ष | — | ध्रुव और वक्रता केन्द्र से गुजरने वाली सीधी रेखा। |
| मुख्य फोकस | F | मुख्य अक्ष पर वह बिंदु जहाँ समानांतर किरणें मिलती हैं। |
| फोकस दूरी | f | ध्रुव से मुख्य फोकस की दूरी। |
| द्वारक | — | दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का व्यास। |
महत्वपूर्ण संबंध: R = 2f (वक्रता त्रिज्या = 2 × फोकस दूरी)
9. अवतल दर्पण के किरण आरेख (Concave Mirror Ray Diagrams)
अवतल दर्पण में विभिन्न स्थितियों पर प्रतिबिंब की रचना:
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की प्रकृति | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर | वास्तविक, उल्टा | अत्यंत छोटा |
| C से परे | C और F के बीच | वास्तविक, उल्टा | छोटा |
| C पर | C पर | वास्तविक, उल्टा | समान |
| C और F के बीच | C से परे | वास्तविक, उल्टा | बड़ा |
| F पर | अनंत पर | वास्तविक, उल्टा | अत्यंत बड़ा |
| F और P के बीच | दर्पण के पीछे | आभासी, सीधा | बड़ा |
उत्तल दर्पण के किरण आरेख (Convex Mirror Ray Diagrams)
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रकृति | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर (दर्पण के पीछे) | आभासी, सीधा | अत्यंत छोटा |
| किसी भी परिमित दूरी पर | F और P के बीच (दर्पण के पीछे) | आभासी, सीधा | छोटा |
10. दर्पण सूत्र (Mirror Formula)
कार्तीय चिह्न परिपाटी (Cartesian Sign Convention)
- सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव (P) से मापी जाती हैं।
- आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक (+) होती हैं।
- आपतित प्रकाश की विपरीत दिशा में मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक (−) होती हैं।
- वस्तु सदैव दर्पण के बाईं ओर होती है, इसलिए u सदैव ऋणात्मक होता है।
- अवतल दर्पण के लिए f ऋणात्मक, उत्तल दर्पण के लिए f धनात्मक होता है।
- वास्तविक प्रतिबिंब के लिए v ऋणात्मक, आभासी प्रतिबिंब के लिए v धनात्मक।
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चिह्न परिपाटी में गलती सबसे आम है। हमेशा याद रखें: u = − (हमेशा), अवतल दर्पण f = −, उत्तल दर्पण f = +। Board year not verified।
11. दर्पण का आवर्धन (Magnification of Mirror)
- m का धनात्मक होना: आभासी और सीधा प्रतिबिंब।
- m का ऋणात्मक होना: वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब।
- |m| > 1 → प्रतिबिंब बड़ा, |m| < 1 → प्रतिबिंब छोटा, |m| = 1 → समान आकार।
12. दर्पणों के उपयोग (Uses of Mirrors)
अवतल दर्पण के उपयोग
- शेविंग दर्पण: बड़ा और सीधा आभासी प्रतिबिंब बनाता है।
- दंत चिकित्सक का दर्पण: दाँतों का बड़ा प्रतिबिंब दिखाता है।
- हेडलाइट/सर्चलाइट: प्रकाश को समानांतर किरणों में केंद्रित करता है।
- सोलर कुकर: सूर्य की किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है।
उत्तल दर्पण के उपयोग
- रियर-व्यू मिरर: चौड़ा क्षेत्र दिखाता है और सीधा, छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
- सुरक्षा दर्पण: दुकानों में चोरी रोकने के लिए।
- सड़क दर्पण: मोड़ पर यातायात देखने के लिए।
13. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
अपवर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय अपने पथ से विचलित हो जाती है।
- पानी में रखी पेंसिल मुड़ी हुई दिखती है।
- पानी में सिक्का ऊपर उठा हुआ दिखता है।
- स्विमिंग पूल की गहराई कम दिखती है।
चित्र: विरल माध्यम से सघन माध्यम में अपवर्तन
14. अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction)
प्रथम नियम
आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब सभी एक ही तल में होते हैं।
द्वितीय नियम – स्नेल का नियम (Snell’s Law)
15. अपवर्तनांक (Refractive Index)
- अपवर्तनांक का कोई मात्रक नहीं होता (यह अनुपात है)।
- वायु का अपवर्तनांक ≈ 1.0003 (लगभग 1)।
- जल का अपवर्तनांक = 1.33, काँच का ≈ 1.5, हीरे का = 2.42।
- प्रकाशीय सघनता: अधिक अपवर्तनांक वाला माध्यम प्रकाशीय दृष्टि से सघन होता है।
16. विभिन्न माध्यमों में प्रकाश का व्यवहार
| स्थिति | प्रकाश का व्यवहार |
|---|---|
| विरल → सघन (हवा → काँच) | अभिलंब की ओर मुड़ता है (i > r) |
| सघन → विरल (काँच → हवा) | अभिलंब से दूर मुड़ता है (r > i) |
17. काँच की आयताकार पट्टी (Glass Slab)
जब प्रकाश किरण काँच की आयताकार पट्टी से गुजरती है, तो वह दो बार अपवर्तित होती है:
- पहली बार: वायु → काँच (अभिलंब की ओर मुड़ती है)
- दूसरी बार: काँच → वायु (अभिलंब से दूर मुड़ती है)
पार्श्विक विस्थापन (Lateral Displacement): आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच की लंबवत दूरी।
निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर होती है क्योंकि दोनों सतहों पर अपवर्तन के कोण बराबर और विपरीत होते हैं।
18. लेंस (Lens)
लेंस पारदर्शी अपवर्तनकारी माध्यम का वह टुकड़ा है जो दो सतहों से घिरा होता है और प्रकाश को अपवर्तित करता है।
- उत्तल लेंस (Convex Lens): मध्य भाग मोटा, किनारे पतले। अभिसारी लेंस।
- अवतल लेंस (Concave Lens): मध्य भाग पतला, किनारे मोटे। अपसारी लेंस।
19. उत्तल लेंस (Convex Lens)
उत्तल लेंस समानांतर किरणों को मुख्य फोकस पर अभिसरित करता है। इसे अभिसारी लेंस कहते हैं।
20. अवतल लेंस (Concave Lens)
अवतल लेंस समानांतर किरणों को मुख्य फोकस से अपसरित करता है। इसे अपसारी लेंस कहते हैं।
21. लेंस के महत्वपूर्ण पद
| पद | प्रतीक | परिभाषा |
|---|---|---|
| प्रकाशिक केन्द्र | O | लेंस के मध्य बिंदु से गुजरने वाली किरण बिना विचलित होए निकल जाती है। |
| मुख्य अक्ष | — | दोनों वक्रता केन्द्रों को मिलाने वाली सीधी रेखा। |
| मुख्य फोकस | F | मुख्य अक्ष पर वह बिंदु जहाँ समानांतर किरणें मिलती (या मिलती प्रतीत होती) हैं। |
| फोकस दूरी | f | प्रकाशिक केन्द्र से मुख्य फोकस की दूरी। |
| द्वारक | — | लेंस के प्रभावी व्यास। |
22. उत्तल लेंस के किरण आरेख (Convex Lens Ray Diagrams)
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रकृति | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F₂ पर | वास्तविक, उल्टा | अत्यंत छोटा |
| 2F₁ से परे | F₂ और 2F₂ के बीच | वास्तविक, उल्टा | छोटा |
| 2F₁ पर | 2F₂ पर | वास्तविक, उल्टा | समान |
| F₁ और 2F₁ के बीच | 2F₂ से परे | वास्तविक, उल्टा | बड़ा |
| F₁ पर | अनंत पर | वास्तविक, उल्टा | अत्यंत बड़ा |
| F₁ और O के बीच | उसी ओर (आभासी) | आभासी, सीधा | बड़ा |
अवतल लेंस के किरण आरेख
अवतल लेंस सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे वस्तु कहीं भी रखी हो।
23. लेंस सूत्र (Lens Formula)
चिह्न परिपाटी: दर्पण सूत्र की तरह ही, u सदैव ऋणात्मक, उत्तल लेंस f धनात्मक, अवतल लेंस f ऋणात्मक।
24. लेंस का आवर्धन (Magnification of Lens)
- m > 0 → आभासी, सीधा प्रतिबिंब
- m < 0 → वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब
25. लेंस की शक्ति (Power of Lens)
- उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक होती है।
- अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है।
- f = 1 m हो तो P = 1 D
- f = 50 cm = 0.5 m → P = 1/0.5 = +2 D (उत्तल लेंस)
26. संख्यात्मक प्रश्न (Numericals)
प्रश्न 1: दर्पण सूत्र
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 15 cm है। एक वस्तु दर्पण से 30 cm की दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात करें।
दिया है: f = −15 cm, u = −30 cm
सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u
प्रतिस्थापन: 1/(−15) = 1/v + 1/(−30)
गणना: 1/v = −1/15 + 1/30 = (−2 + 1)/30 = −1/30
उत्तर: v = −30 cm (प्रतिबिंब दर्पण से 30 cm दूर, वास्तविक और उल्टा)
प्रश्न 2: आवर्धन
उपरोक्त प्रश्न में आवर्धन ज्ञात करें।
सूत्र: m = −v/u = −(−30)/(−30) = −1
उत्तर: m = −1 (प्रतिबिंब वस्तु के समान आकार का, उल्टा)
प्रश्न 3: लेंस सूत्र
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 20 cm है। वस्तु लेंस से 30 cm पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात करें।
दिया है: f = +20 cm, u = −30 cm
सूत्र: 1/f = 1/v − 1/u
प्रतिस्थापन: 1/20 = 1/v − 1/(−30) = 1/v + 1/30
गणना: 1/v = 1/20 − 1/30 = (3−2)/60 = 1/60
उत्तर: v = +60 cm (प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 60 cm पर, वास्तविक और उल्टा)
प्रश्न 4: अपवर्तनांक
प्रकाश निर्वात से काँच में प्रवेश करता है। यदि काँच में प्रकाश की चाल 2 × 10⁸ m/s हो, तो काँच का अपवर्तनांक ज्ञात करें।
दिया है: c = 3 × 10⁸ m/s, v = 2 × 10⁸ m/s
सूत्र: n = c/v
गणना: n = (3 × 10⁸) / (2 × 10⁸) = 1.5
उत्तर: n = 1.5
प्रश्न 5: लेंस की शक्ति
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 50 cm है। इसकी शक्ति ज्ञात करें।
दिया है: f = 50 cm = 0.5 m
सूत्र: P = 1/f
गणना: P = 1/0.5 = +2 D
उत्तर: P = +2 डायोप्टर
🔥 BSEB बोर्ड परीक्षा फोकस
संख्यात्मक प्रश्नों में चिह्न परिपाटी का पालन अनिवार्य है। लगभग हर वर्ष दर्पण सूत्र या लेंस सूत्र पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। Board year not verified।
27. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| परावर्तन | प्रकाश का किसी सतह से टकराकर वापस लौटना। |
| नियमित परावर्तन | चिकनी सतह से परावर्तन जिसमें किरणें समानांतर रहती हैं। |
| अनियमित परावर्तन | खुरदरी सतह से परावर्तन जिसमें किरणें बिखर जाती हैं। |
| आपतित किरण | दर्पण पर आने वाली किरण। |
| परावर्तित किरण | दर्पण से लौटने वाली किरण। |
| अभिलंब | आपतन बिंदु पर सतह के लंबवत रेखा। |
| आपतन कोण | आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण। |
| परावर्तन कोण | परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण। |
| अवतल दर्पण | वह दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर हो। |
| उत्तल दर्पण | वह दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर हो। |
| ध्रुव | दर्पण का मध्य बिंदु। |
| वक्रता केन्द्र | गोले का केंद्र जिसका भाग दर्पण है। |
| वक्रता त्रिज्या | ध्रुव से वक्रता केन्द्र की दूरी। |
| मुख्य अक्ष | ध्रुव और वक्रता केन्द्र से गुजरने वाली रेखा। |
| मुख्य फोकस | मुख्य अक्ष पर वह बिंदु जहाँ समानांतर किरणें मिलती हैं। |
| फोकस दूरी | ध्रुव से मुख्य फोकस की दूरी। |
| आवर्धन | प्रतिबिंब के आकार और वस्तु के आकार का अनुपात। |
| अपवर्तन | प्रकाश का एक माध्यम से दूसरे में जाते समय मुड़ना। |
| अपवर्तनांक | निर्वात में प्रकाश की चाल और माध्यम में चाल का अनुपात। |
| प्रकाशीय सघनता | माध्यम की प्रकाश को अपवर्तित करने की क्षमता। |
| उत्तल लेंस | मध्य भाग मोटा, किनारे पतले वाला लेंस। |
| अवतल लेंस | मध्य भाग पतला, किनारे मोटे वाला लेंस। |
| प्रकाशिक केन्द्र | लेंस का मध्य बिंदु। |
| लेंस की शक्ति | फोकस दूरी का व्युत्क्रम (P = 1/f)। |
28. BSEB बोर्ड परीक्षा फोकस
- सबसे महत्वपूर्ण: दर्पण सूत्र, लेंस सूत्र, आवर्धन, अपवर्तनांक।
- महत्वपूर्ण परिभाषाएँ: परावर्तन, अपवर्तन, फोकस, वक्रता त्रिज्या।
- किरण आरेख: अवतल दर्पण और उत्तल लेंस के सभी स्थितियाँ।
- चिह्न परिपाटी: हमेशा u = −, अवतल दर्पण f = −, उत्तल दर्पण f = +।
- वस्तुनिष्ठ प्रश्न: प्रकाश की चाल, दर्पण के प्रकार, लेंस की शक्ति की इकाई।
29. सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)
❌ गलत: दर्पण सूत्र में u को धनात्मक लेना।
✅ सही: u सदैव ऋणात्मक होता है क्योंकि वस्तु आपतित प्रकाश की विपरीत दिशा में होती है।
❌ गलत: उत्तल दर्पण के लिए f ऋणात्मक लेना।
✅ सही: उत्तल दर्पण का f धनात्मक होता है।
❌ गलत: लेंस की शक्ति की इकाई सेंटीमीटर लिखना।
✅ सही: लेंस की शक्ति की इकाई डायोप्टर (D) है और f मीटर में होना चाहिए।
❌ गलत: आभासी और वास्तविक प्रतिबिंब में भ्रम।
✅ सही: आभासी प्रतिबिंब पर्दे पर नहीं बनता और सीधा होता है; वास्तविक प्रतिबिंब पर्दे पर बनता है और उल्टा होता है।
❌ गलत: अवतल और उत्तल दर्पण में भ्रम।
✅ सही: अवतल दर्पण अंदर धँसा (अभिसारी), उत्तल दर्पण बाहर उभरा (अपसारी)।
30. महत्वपूर्ण तुलना तालिकाएँ
अवतल vs उत्तल दर्पण
| विशेषता | अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण |
|---|---|---|
| परावर्तक सतह | अंदर की ओर | बाहर की ओर |
| प्रकार | अभिसारी | अपसारी |
| फोकस | वास्तविक | आभासी |
| प्रतिबिंब | वास्तविक/आभासी | सदैव आभासी |
| उपयोग | शेविंग, हेडलाइट | रियर-व्यू मिरर |
उत्तल vs अवतल लेंस
| विशेषता | उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|---|
| आकार | मध्य मोटा | मध्य पतला |
| प्रकार | अभिसारी | अपसारी |
| फोकस | वास्तविक | आभासी |
| शक्ति | धनात्मक | ऋणात्मक |
वास्तविक vs आभासी प्रतिबिंब
| विशेषता | वास्तविक प्रतिबिंब | आभासी प्रतिबिंब |
|---|---|---|
| पर्दे पर | बनता है | नहीं बनता |
| प्रकृति | उल्टा | सीधा |
| प्रकाश किरणें | वास्तव में मिलती हैं | मिलती प्रतीत होती हैं |
31. अध्याय सूत्र पत्रक (Chapter Formula Sheet)
| सूत्र | व्यंजक | प्रतीक अर्थ |
|---|---|---|
| दर्पण सूत्र | 1/f = 1/v + 1/u | f = फोकस दूरी, v = प्रतिबिंब दूरी, u = वस्तु दूरी |
| दर्पण आवर्धन | m = hᵢ/hₒ = −v/u | hᵢ = प्रतिबिंब ऊँचाई, hₒ = वस्तु ऊँचाई |
| अपवर्तनांक | n = c/v | c = निर्वात में चाल, v = माध्यम में चाल |
| स्नेल का नियम | sin i / sin r = n₂₁ | i = आपतन कोण, r = अपवर्तन कोण |
| लेंस सूत्र | 1/f = 1/v − 1/u | f = फोकस दूरी, v = प्रतिबिंब दूरी, u = वस्तु दूरी |
| लेंस आवर्धन | m = hᵢ/hₒ = v/u | hᵢ = प्रतिबिंब ऊँचाई, hₒ = वस्तु ऊँचाई |
| लेंस की शक्ति | P = 1/f (m) | इकाई: डायोप्टर (D) |
| वक्रता त्रिज्या | R = 2f | R = वक्रता त्रिज्या, f = फोकस दूरी |
32. त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
🔑 मुख्य परिभाषाएँ
- परावर्तन: प्रकाश का वापस लौटना। ∠i = ∠r
- अपवर्तन: प्रकाश का मुड़ना। sin i / sin r = n
- अवतल दर्पण: अभिसारी, f ऋणात्मक।
- उत्तल दर्पण: अपसारी, f धनात्मक।
- उत्तल लेंस: अभिसारी, P धनात्मक।
- अवतल लेंस: अपसारी, P ऋणात्मक।
📐 महत्वपूर्ण सूत्र
- दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u
- लेंस सूत्र: 1/f = 1/v − 1/u
- आवर्धन (दर्पण): m = −v/u
- आवर्धन (लेंस): m = v/u
- शक्ति: P = 1/f
⚠️ चिह्न परिपाटी
- u = सदैव ऋणात्मक
- अवतल दर्पण: f = ऋणात्मक
- उत्तल दर्पण: f = धनात्मक
- उत्तल लेंस: f = धनात्मक
- अवतल लेंस: f = ऋणात्मक
🎯 परीक्षा के लिए याद रखें
- प्रकाश की चाल निर्वात में = 3 × 10⁸ m/s
- R = 2f
- लेंस की शक्ति की इकाई = डायोप्टर
- वास्तविक प्रतिबिंब उल्टा, आभासी सीधा
