शब्दरूप एवं धातुरूप – पूरा पाठ आसान हिंदी में
राम • फल • लता • मुनि • नदी • गुरु • पठ् धातु के सभी लकार
शून्य से शुरू — परिभाषा, रूप-सारणी, लकार, ट्रिक्स और परीक्षा प्रश्न
1 शब्दरूप क्या है? (बिल्कुल आसान भाषा में)
सीधे शब्दों में — एक ही शब्द का कारक और वचन के अनुसार बदलने वाला रूप = शब्दरूप।
उदाहरण:
रामः (कर्ता, एकवचन) रामम् (कर्म, एकवचन) रामेण (करण, एकवचन)
कुल मिलाकर 24 रूप बनते हैं (8 विभक्ति × 3 वचन)।
2 धातुरूप क्या है? (क्रिया के रूप)
सीधे शब्दों में — धातु में प्रत्यय लगाकर बनने वाले क्रिया के रूप = धातुरूप।
उदाहरण:
पठ् + ति = पठति (वह पढ़ता है) पठ् + सि = पठसि (तू पढ़ता है) पठ् + मि = पठामि (मैं पढ़ता हूँ)
प्रत्येक लकार में 9 रूप (3 पुरुष × 3 वचन) बनते हैं।
शब्दरूप → संज्ञा/सर्वनाम के रूप (रामः, रामम्…)
धातुरूप → क्रिया के रूप (पठति, पठसि…)
3 शब्दरूप के प्रकार (अंतिम स्वर के अनुसार)
| प्रकार | अंतिम स्वर | उदाहरण | लिंग |
|---|---|---|---|
| अकारांत | अ | राम, फल | पुल्लिंग, नपुंसक |
| आकारांत | आ | लता, कन्या | स्त्रीलिंग |
| इकारांत | इ | मुनि, कवि | पुल्लिंग |
| ईकारांत | ई | नदी, नगरी | स्त्रीलिंग |
| उकारांत | उ | गुरु, शत्रु | पुल्लिंग |
| ऊकारांत | ऊ | वधू, भू | स्त्रीलिंग |
| ऋकारांत | ऋ | पितृ, मातृ | पुल्लिंग/स्त्रीलिंग |
4 राम शब्द के रूप (अकारांत पुल्लिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन | कारक |
|---|---|---|---|---|
| प्रथमा | रामः | रामौ | रामाः | कर्ता |
| द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् | कर्म |
| तृतीया | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः | करण |
| चतुर्थी | रामाय | रामाभ्याम् | रामेभ्यः | संप्रदान |
| पंचमी | रामात् | रामाभ्याम् | रामेभ्यः | अपादान |
| षष्ठी | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् | संबंध |
| सप्तमी | रामे | रामयोः | रामेषु | अधिकरण |
| संबोधन | हे राम! | हे रामौ! | हे रामाः! | संबोधन |
प्रथमा: ः, औ, आः
द्वितीया: म्, औ, आन्
तृतीया: ेण, आभ्याम्, ऐः
5 फल शब्द के रूप (अकारांत नपुंसक)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | फलम् | फले | फलानि |
| द्वितीया | फलम् | फले | फलानि |
| तृतीया | फलेन | फलाभ्याम् | फलैः |
| चतुर्थी | फलाय | फलाभ्याम् | फलेभ्यः |
| पंचमी | फलात् | फलाभ्याम् | फलेभ्यः |
| षष्ठी | फलस्य | फलयोः | फलानाम् |
| सप्तमी | फले | फलयोः | फलेषु |
| संबोधन | हे फल! | हे फले! | हे फलानि! |
प्रथमा/द्वितीया: म्, े, आनि
6 लता शब्द के रूप (आकारांत स्त्रीलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | लता | लते | लताः |
| द्वितीया | लताम् | लते | लताः |
| तृतीया | लतया | लताभ्याम् | लताभिः |
| चतुर्थी | लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| पंचमी | लतायाः | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| षष्ठी | लतायाः | लतयोः | लतानाम् |
| सप्तमी | लतायाम् | लतयोः | लतासु |
| संबोधन | हे लते! | हे लते! | हे लताः! |
प्रथमा: आ, े, आः
द्वितीया: आम्, े, आः
7 मुनि शब्द के रूप (इकारांत पुल्लिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मुनिः | मुनी | मुनयः |
| द्वितीया | मुनिम् | मुनी | मुनीन् |
| तृतीया | मुनिना | मुनिभ्याम् | मुनिभिः |
| चतुर्थी | मुनये | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
| पंचमी | मुनेः | मुनिभ्याम् | मुनिभ्यः |
| षष्ठी | मुनेः | मुन्योः | मुनीनाम् |
| सप्तमी | मुनौ | मुन्योः | मुनिषु |
| संबोधन | हे मुने! | हे मुनी! | हे मुनयः! |
प्रथमा: ः, ी, अयः
8 नदी शब्द के रूप (ईकारांत स्त्रीलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | नदी | नद्यौ | नद्यः |
| द्वितीया | नदीम् | नद्यौ | नदीः |
| तृतीया | नद्या | नदीभ्याम् | नदीभिः |
| चतुर्थी | नद्यै | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| पंचमी | नद्याः | नदीभ्याम् | नदीभ्यः |
| षष्ठी | नद्याः | नद्योः | नदीनाम् |
| सप्तमी | नद्याम् | नद्योः | नदीषु |
| संबोधन | हे नदि! | हे नद्यौ! | हे नद्यः! |
प्रथमा: ी, यौ, यः
9 गुरु शब्द के रूप (उकारांत पुल्लिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गुरुः | गुरू | गुरवः |
| द्वितीया | गुरुम् | गुरू | गुरून् |
| तृतीया | गुरुणा | गुरुभ्याम् | गुरुभिः |
| चतुर्थी | गुरवे | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| पंचमी | गुरोः | गुरुभ्याम् | गुरुभ्यः |
| षष्ठी | गुरोः | गुर्वोः | गुरूणाम् |
| सप्तमी | गुरौ | गुर्वोः | गुरुषु |
| संबोधन | हे गुरो! | हे गुरू! | हे गुरवः! |
प्रथमा: ः, ऊ, अवः
10 धातुरूप – लट् लकार (वर्तमान काल)
लट् लकार = वर्तमान काल (Present Tense) — “पढ़ता है, पढ़ता हूँ” आदि।
पठ् धातु (परस्मैपद)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष (वह) | पठति | पठतः | पठन्ति |
| द्वितीय पुरुष (तू) | पठसि | पठथः | पठथ |
| तृतीय पुरुष (मैं) | पठामि | पठावः | पठामः |
लिख् धातु (आत्मनेपद)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | लिखते | लिखेते | लिखन्ते |
| द्वितीय पुरुष | लिखसे | लिखेथे | लिखध्वे |
| तृतीय पुरुष | लिखे | लिखावहे | लिखामहे |
प्रथम पुरुष: ति, तः, अन्ति
द्वितीय पुरुष: सि, थः, थ
तृतीय पुरुष: मि, वः, मः
प्रथम पुरुष: ते, ेते, न्ते
द्वितीय पुरुष: से, ेथे, ध्वे
तृतीय पुरुष: े, वहे, महे
11 धातुरूप – लृट् लकार (भविष्यत् काल)
लृट् लकार = भविष्यत् काल (Future Tense) — “पढ़ेगा, पढ़ूँगा” आदि।
पठ् धातु (परस्मैपद)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पठिष्यति | पठिष्यतः | पठिष्यन्ति |
| द्वितीय पुरुष | पठिष्यसि | पठिष्यथः | पठिष्यथ |
| तृतीय पुरुष | पठिष्यामि | पठिष्यावः | पठिष्यामः |
पठ् + इष्य + ति = पठिष्यति
12 धातुरूप – लङ् लकार (भूतकाल)
लङ् लकार = भूतकाल (Past Tense) — “पढ़ता था, पढ़ा” आदि।
पठ् धातु (परस्मैपद)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपठत् | अपठताम् | अपठन् |
| द्वितीय पुरुष | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| तृतीय पुरुष | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
अ + पठ् + अत् = अपठत्
13 धातुरूप – लोट् लकार (आज्ञार्थक)
लोट् लकार = आज्ञा, आदेश, अनुमति — “पढ़, पढ़ो, पढ़ना” आदि।
पठ् धातु (परस्मैपद)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पठतु | पठताम् | पठन्तु |
| द्वितीय पुरुष | पठ | पठतम् | पठत |
| तृतीय पुरुष | पठानि | पठाव | पठाम |
14 धातुरूप – विधिलिङ् लकार (विध्यर्थक)
विधिलिङ् लकार = चाहिए, उचित है, आदेश (विनम्र) — “पढ़ना चाहिए” आदि।
पठ् धातु (परस्मैपद)
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पठेत् | पठेताम् | पठेयुः |
| द्वितीय पुरुष | पठेः | पठेतम् | पठेत |
| तृतीय पुरुष | पठेयम् | पठेव | पठेम |
पठ् + े + त् = पठेत्
15 याद रखने की TRICKS / SHORTCUTS
अकारांत पुल्लिंग (राम): ः, औ, आः / म्, औ, आन् / ेण, आभ्याम्, ऐः
अकारांत नपुंसक (फल): म्, े, आनि (प्रथमा-द्वितीया समान)
आ, े, आः / आम्, े, आः / या, आभ्याम्, आभिः
ः, ी, अयः / म्, ी, ीन् / ना, भ्याम्, भिः
ी, यौ, यः / ीम्, यौ, ीः / या, ीभ्याम्, ीभिः
ः, ऊ, अवः / म्, ऊ, ऊन् / णा, भ्याम्, भिः
परस्मैपद: ति, तः, अन्ति / सि, थः, थ / मि, वः, मः
आत्मनेपद: ते, ेते, न्ते / से, ेथे, ध्वे / े, वहे, महे
लट् = वर्तमान (है/हूँ)
लृट् = भविष्यत् (होगा/हूँगा)
लङ् = भूत (था/हुआ)
लोट् = आज्ञा (कर/करो)
विधिलिङ् = चाहिए (करना चाहिए)
16 Common Mistakes (जहाँ बच्चे गलती करते हैं)
सुधार: पहले विभक्ति (कारक) तय करें, फिर वचन (एक/द्वि/बहु)।
सुधार: नपुंसक में प्रथमा और द्वितीया के रूप समान होते हैं (फलम्, फले, फलानि)।
सुधार: मुनि → मुन्योः, नदी → नद्याः (इ/ई के स्थान पर य् आता है)।
सुधार: परस्मैपद = ति, सि, मि; आत्मनेपद = ते, से, े।
सुधार: लट् (वर्तमान), लृट् (भविष्यत्), लङ् (भूत), लोट् (आज्ञा), विधिलिङ् (चाहिए) — इन्हें याद रखें।
सुधार: संस्कृत में प्रथम पुरुष = वह (ति), द्वितीय पुरुष = तू (सि), तृतीय पुरुष = मैं (मि)।
(यह हिंदी से उल्टा है — ध्यान रखें!)
17 BSEB Exam-Oriented Practice (उत्तर देखें पर क्लिक करें)
1. राम शब्द का प्रथमा विभक्ति, एकवचन क्या है?
2. राम शब्द का षष्ठी विभक्ति, बहुवचन क्या है?
3. फल शब्द का प्रथमा विभक्ति, बहुवचन क्या है?
4. लता शब्द का तृतीया विभक्ति, एकवचन क्या है?
5. मुनि शब्द का प्रथमा विभक्ति, बहुवचन क्या है?
6. नदी शब्द का सप्तमी विभक्ति, एकवचन क्या है?
7. गुरु शब्द का षष्ठी विभक्ति, बहुवचन क्या है?
8. पठ् धातु का लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन क्या है?
9. पठ् धातु का लट् लकार, तृतीय पुरुष, बहुवचन क्या है?
10. पठ् धातु का लृट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन क्या है?
11. पठ् धातु का लङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन क्या है?
12. पठ् धातु का लोट् लकार, द्वितीय पुरुष, एकवचन क्या है?
13. पठ् धातु का विधिलिङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन क्या है?
14. लिख् धातु का लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन क्या है? (आत्मनेपद)
15. “पठामि” में कौन-सा लकार, पुरुष और वचन है?
18 एक मिनट में Quick Revision
| शब्दरूप | प्रथमा एकवचन | विशेषता |
|---|---|---|
| राम (अकारांत पुल्लिंग) | रामः | ः, औ, आः |
| फल (अकारांत नपुंसक) | फलम् | प्रथमा-द्वितीया समान |
| लता (आकारांत स्त्रीलिंग) | लता | आ, े, आः |
| मुनि (इकारांत पुल्लिंग) | मुनिः | इ → य् |
| नदी (ईकारांत स्त्रीलिंग) | नदी | ई → य् |
| गुरु (उकारांत पुल्लिंग) | गुरुः | उ → व् |
| लकार | काल | उदाहरण (पठ्) |
|---|---|---|
| लट् | वर्तमान | पठति |
| लृट् | भविष्यत् | पठिष्यति |
| लङ् | भूत | अपठत् |
| लोट् | आज्ञा | पठतु |
| विधिलिङ् | चाहिए | पठेत् |
शब्दरूप = संज्ञा के रूप (विभक्ति + वचन)
धातुरूप = क्रिया के रूप (लकार + पुरुष + वचन)
दोनों में 24 और 9 का फर्क याद रखें — शब्दरूप में 24 रूप, धातुरूप में 9 रूप।
