कक्षा 12 इतिहास – अध्याय 12: औपनिवेशिक शहर (नगरीकरण, नगर योजना तथा स्थापत्य)

औपनिवेशिक काल में भारतीय शहरों में अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। अंग्रेजों ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नए शहर बसाए और पुराने शहरों को पुनर्गठित किया। इन शहरों में नगर योजना, स्थापत्य कला तथा सामाजिक-आर्थिक संरचना में परिवर्तन हुए। औपनिवेशिक शहरों में मद्रास, कलकत्ता और बॉम्बे प्रमुख थे, जिन्हें ‘प्रेसीडेंसी टाउन’ कहा जाता था।

इस अध्याय में हम औपनिवेशिक काल के शहरों के विकास, नगर योजना, स्थापत्य कला तथा शहरी समाज में हुए परिवर्तनों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। यह अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि किस प्रकार औपनिवेशिक शासन ने भारतीय शहरी परिदृश्य को बदल दिया।

इस अध्याय का शीर्षक “औपनिवेशिक शहर” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय औपनिवेशिक काल में भारतीय शहरों के विकास, नगर योजना और स्थापत्य का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।

1. औपनिवेशिक शहरों का परिचय

1.1 औपनिवेशिक शहर क्या हैं?

औपनिवेशिक शहर वे शहर हैं जो यूरोपीय शासन के दौरान विकसित हुए या पुनर्गठित किए गए। ये शहर अंग्रेजों की व्यापारिक, प्रशासनिक और सैन्य आवश्यकताओं के अनुसार बनाए गए। इन शहरों में यूरोपीय और भारतीय तत्वों का मिश्रण देखने को मिलता है।

1.2 औपनिवेशिक शहरों के प्रकार

  • प्रेसीडेंसी टाउन – मद्रास, कलकत्ता, बॉम्बे।
  • सैन्य छावनी नगर – कानपुर, लखनऊ, मेरठ।
  • व्यापारिक नगर – सूरत, कालीकट, मसूलीपट्टनम।
  • औद्योगिक नगर – जमशेदपुर, कानपुर।
  • ग्रीष्मकालीन राजधानी – शिमला, मसूरी।
  • रेलवे नगर – जमालपुर, खड़गपुर।

1.3 औपनिवेशिक शहरों की विशेषताएँ

  • यूरोपीय और भारतीय क्षेत्रों का विभाजन।
  • व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र।
  • नई नगर योजना और स्थापत्य।
  • सामाजिक और आर्थिक विभाजन।
  • आधुनिक सुविधाओं का विकास।
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2. प्रमुख प्रेसीडेंसी शहर

2.1 मद्रास (चेन्नई)

  • मद्रास की स्थापना 1639 ईस्वी में हुई।
  • यह पूर्वी तट पर स्थित है।
  • यह अंग्रेजों का पहला प्रमुख केंद्र था।
  • यहाँ फोर्ट सेंट जॉर्ज बनाया गया।
  • यह दक्षिण भारत का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बना।
  • यहाँ ब्लैक टाउन और व्हाइट टाउन का विभाजन था।

2.2 कलकत्ता (कोलकाता)

  • कलकत्ता की स्थापना 1690 ईस्वी में हुई।
  • इसे जॉब चार्नॉक ने बसाया।
  • यह हुगली नदी के किनारे स्थित है।
  • 1772 ईस्वी में यह ब्रिटिश भारत की राजधानी बनी।
  • 1911 ईस्वी तक यह राजधानी रही।
  • यहाँ फोर्ट विलियम बनाया गया।
  • यहाँ ब्लैक टाउन और व्हाइट टाउन का विभाजन था।

2.3 बॉम्बे (मुंबई)

  • बॉम्बे की स्थापना 1661 ईस्वी में हुई।
  • यह सात द्वीपों से मिलकर बना था।
  • 1668 ईस्वी में यह ईस्ट इंडिया कंपनी को मिला।
  • यह पश्चिमी तट का प्रमुख बंदरगाह बना।
  • यहाँ कपड़ा उद्योग का विकास हुआ।
  • 19वीं शताब्दी में यह प्रमुख व्यापारिक केंद्र बना।
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3. नगर योजना

3.1 नगर योजना का अर्थ

नगर योजना का तात्पर्य शहरों के विकास की योजनाबद्ध व्यवस्था से है। इसमें सड़कों, भवनों, जलापूर्ति, जल निकासी आदि की व्यवस्था शामिल है। अंग्रेजों ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार शहरों की योजना बनाई।

3.2 नगर योजना की विशेषताएँ

  • यूरोपीय और भारतीय क्षेत्रों का विभाजन।
  • चौड़ी सड़कें और हवादार भवन।
  • सार्वजनिक स्थानों का निर्माण।
  • जलापूर्ति और जल निकासी की व्यवस्था।
  • सैन्य छावनियों की स्थापना।
  • प्रशासनिक भवनों का निर्माण।

3.3 ब्लैक टाउन और व्हाइट टाउन

  • व्हाइट टाउन – यूरोपीय लोगों का क्षेत्र।
  • इसमें बड़े बंगले, चौड़ी सड़कें, सार्वजनिक स्थान थे।
  • इसमें अच्छी जलापूर्ति और जल निकासी थी।
  • ब्लैक टाउन – भारतीय लोगों का क्षेत्र।
  • इसमें तंग गलियाँ, छोटे घर थे।
  • यहाँ सुविधाओं का अभाव था।
  • यह विभाजन नस्लीय भेदभाव को दर्शाता है।

3.4 सिविल लाइन्स

  • सिविल लाइन्स यूरोपीय लोगों के आवासीय क्षेत्र थे।
  • ये शहरों के बाहरी भाग में स्थित होते थे।
  • यहाँ चौड़ी सड़कें, बड़े बंगले थे।
  • यहाँ हरे-भरे बगीचे थे।
  • इन क्षेत्रों में अच्छी सुविधाएँ थीं।
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4. स्थापत्य कला

4.1 औपनिवेशिक स्थापत्य की विशेषताएँ

  • यूरोपीय और भारतीय शैलियों का मिश्रण।
  • गॉथिक, नियोक्लासिकल और इंडो-सारासेनिक शैलियाँ।
  • बड़े स्तंभ, मेहराब और गुंबद।
  • संगमरमर और पत्थर का प्रयोग।
  • प्रशासनिक और धार्मिक भवनों का निर्माण।

4.2 प्रमुख भवन शैलियाँ

नियोक्लासिकल शैली

  • यह यूनानी और रोमन शैली से प्रेरित थी।
  • इसमें स्तंभ, गुंबद और त्रिभुजाकार छतें थीं।
  • उदाहरण – टाउन हॉल, म्यूजियम।

गॉथिक शैली

  • इसमें ऊँची मीनारें, नुकीले मेहराब थे।
  • उदाहरण – चर्च, बॉम्बे हाई कोर्ट।

इंडो-सारासेनिक शैली

  • इसमें भारतीय और इस्लामी शैलियों का मिश्रण था।
  • उदाहरण – विक्टोरिया टर्मिनस, प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम।
  • यह शैली ‘हिंदू-सारासेनिक’ भी कहलाती है।

4.3 प्रमुख स्थापत्य

  • फोर्ट विलियम – कलकत्ता।
  • फोर्ट सेंट जॉर्ज – मद्रास।
  • बॉम्बे हाई कोर्ट – मुंबई।
  • विक्टोरिया टर्मिनस – मुंबई।
  • राष्ट्रपति भवन – दिल्ली।
  • विक्टोरिया मेमोरियल – कलकत्ता।
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5. नई राजधानी – नई दिल्ली

5.1 राजधानी का स्थानांतरण

  • 1911 ईस्वी में राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की गई।
  • 1912 ईस्वी में नई दिल्ली का निर्माण शुरू हुआ।
  • 1931 ईस्वी में नई दिल्ली का उद्घाटन हुआ।
  • इसका निर्माण एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने किया।

5.2 नई दिल्ली की योजना

  • नई दिल्ली की योजना वृत्ताकार और ज्यामितीय थी।
  • इसमें चौड़ी सड़कें, बड़े भवन थे।
  • राजपथ (अब कर्तव्य पथ) मुख्य सड़क थी।
  • राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, सचिवालय भवन बनाए गए।
  • इसमें इंडो-सारासेनिक शैली का प्रयोग हुआ।
  • यह योजना नस्लीय भेदभाव पर आधारित थी।

5.3 नई दिल्ली की विशेषताएँ

  • यूरोपीय और भारतीय क्षेत्रों का स्पष्ट विभाजन।
  • यूरोपीय क्षेत्र में बड़े बंगले।
  • भारतीय क्षेत्र में तंग गलियाँ।
  • यहाँ हरित क्षेत्र और बगीचे थे।
  • यह आधुनिक नगर योजना का उदाहरण था।
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6. शहरी समाज

6.1 शहरी समाज की संरचना

  • यूरोपीय वर्ग – अंग्रेज अधिकारी, व्यापारी।
  • एंग्लो-इंडियन – अंग्रेज और भारतीय मिश्रित।
  • भारतीय उच्च वर्ग – जमींदार, व्यापारी, पेशेवर।
  • भारतीय मध्यम वर्ग – कर्मचारी, शिक्षक।
  • श्रमिक वर्ग – मजदूर, कारीगर।

6.2 नए सामाजिक वर्ग

  • मध्यम वर्ग – शिक्षित भारतीयों का वर्ग।
  • इसमें वकील, डॉक्टर, शिक्षक, पत्रकार शामिल थे।
  • इस वर्ग ने राष्ट्रवादी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • श्रमिक वर्ग – कारखानों में काम करने वाले।
  • इनकी स्थिति दयनीय थी।

6.3 महिलाओं की स्थिति

  • शहरों में महिलाओं की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।
  • शिक्षित महिलाओं की संख्या बढ़ी।
  • कुछ महिलाओं ने पेशेवर कार्य किए।
  • महिलाओं ने राष्ट्रवादी आंदोलन में भाग लिया।
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7. शहरी समस्याएँ

7.1 आवास की समस्या

  • शहरों में आवास की कमी थी।
  • श्रमिक झुग्गी-झोपड़ियों में रहते थे।
  • भीड़भाड़ अधिक थी।
  • स्वच्छता का अभाव था।

7.2 जलापूर्ति और जल निकासी

  • शहरों में स्वच्छ जल की आपूर्ति अपर्याप्त थी।
  • जल निकासी की व्यवस्था खराब थी।
  • इससे बीमारियाँ फैलती थीं।
  • महामारी फैलने का खतरा रहता था।

7.3 यातायात की समस्या

  • शहरों में यातायात की भीड़भाड़ थी।
  • सड़कें संकरी थीं।
  • यातायात के साधन सीमित थे।

7.4 बीमारियाँ

  • शहरों में हैजा, प्लेग, मलेरिया आदि बीमारियाँ फैलती थीं।
  • 1896 में बॉम्बे में प्लेग महामारी फैली।
  • इससे हजारों लोग मारे गए।
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8. शहरी नियोजन के उपाय

8.1 नगर निगम

  • शहरों में नगर निगम की स्थापना की गई।
  • इसे जलापूर्ति, सफाई, रोशनी आदि का काम सौंपा गया।
  • नगर निगम ने शहरी विकास में योगदान दिया।

8.2 जलापूर्ति और जल निकासी

  • शहरों में पाइप से जल की आपूर्ति शुरू हुई।
  • भूमिगत जल निकासी की व्यवस्था की गई।
  • स्वच्छता पर ध्यान दिया गया।

8.3 अन्य सुविधाएँ

  • अस्पताल और स्कूल खोले गए।
  • बाजार और पार्क बनाए गए।
  • रेल और ट्राम चलाए गए।
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9. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • औपनिवेशिक शहर – यूरोपीय शासन के दौरान विकसित शहर।
  • प्रेसीडेंसी टाउन – मद्रास, कलकत्ता, बॉम्बे।
  • ब्लैक टाउन – भारतीयों का क्षेत्र।
  • व्हाइट टाउन – यूरोपीय लोगों का क्षेत्र।
  • सिविल लाइन्स – यूरोपीय आवासीय क्षेत्र।
  • इंडो-सारासेनिक – भारतीय और इस्लामी शैली का मिश्रण।
  • नियोक्लासिकल – यूनानी-रोमन शैली।
  • गॉथिक – ऊँची मीनारों वाली शैली।
  • नगर निगम – शहरी प्रशासन की संस्था।
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10. महत्वपूर्ण तथ्य

  • मद्रास की स्थापना 1639 ईस्वी में हुई।
  • कलकत्ता की स्थापना 1690 ईस्वी में हुई।
  • बॉम्बे 1661 ईस्वी में अंग्रेजों को मिला।
  • 1772 ईस्वी में कलकत्ता राजधानी बनी।
  • 1911 ईस्वी में राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की गई।
  • 1931 ईस्वी में नई दिल्ली का उद्घाटन हुआ।
  • एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने नई दिल्ली की योजना बनाई।
  • 1896 ईस्वी में बॉम्बे में प्लेग महामारी फैली।
  • विक्टोरिया टर्मिनस मुंबई में स्थित है।
  • बॉम्बे हाई कोर्ट गॉथिक शैली का उदाहरण है।
  • फोर्ट विलियम कलकत्ता में स्थित है।
  • फोर्ट सेंट जॉर्ज मद्रास में स्थित है।
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11. निष्कर्ष

अध्याय 12 “औपनिवेशिक शहर” औपनिवेशिक काल में भारतीय शहरों के विकास, नगर योजना और स्थापत्य का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:

  • औपनिवेशिक शहर – ये यूरोपीय शासन के दौरान विकसित हुए।
  • प्रेसीडेंसी टाउन – मद्रास, कलकत्ता, बॉम्बे।
  • नगर योजना – ब्लैक टाउन, व्हाइट टाउन, सिविल लाइन्स।
  • स्थापत्य कला – नियोक्लासिकल, गॉथिक, इंडो-सारासेनिक।
  • नई दिल्ली – 1911-1931 के बीच बनाई गई।
  • शहरी समाज – यूरोपीय, एंग्लो-इंडियन, भारतीय उच्च वर्ग।
  • शहरी समस्याएँ – आवास, जलापूर्ति, बीमारियाँ।

इस अध्याय का महत्व:

  • यह औपनिवेशिक शहरीकरण को समझाता है।
  • यह नगर योजना और स्थापत्य को स्पष्ट करता है।
  • यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह औपनिवेशिक प्रभाव को समझने में सहायक है।
  • यह आगे के अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।

इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।

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