कक्षा 12 इतिहास – अध्याय 9: शासक और इतिवृत्त (मुग़ल दरबार – लगभग सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी)
सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा और शक्तिशाली साम्राज्य था। मुगल दरबार अपनी भव्यता, समृद्धि और सांस्कृतिक विविधता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध था। मुगल शासकों ने अपने शासनकाल की घटनाओं को लिखित रूप में दर्ज कराने की परंपरा शुरू की, जिसे ‘इतिवृत्त’ कहा जाता है। ये इतिवृत्त मुगल दरबार, शासन, संस्कृति और समाज को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
इस अध्याय में हम मुगल दरबार की संरचना, इतिवृत्तों का महत्व, मुगल शासकों की शासन पद्धति, दरबारी संस्कृति, कला और वास्तुकला का विस्तृत अध्ययन करेंगे। मुगल दरबार केवल एक राजनीतिक केंद्र नहीं था, बल्कि यह सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों का भी केंद्र था।
इस अध्याय का शीर्षक “शासक और इतिवृत्त” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय मुगल शासकों और उनके दरबार में लिखे गए इतिवृत्तों के माध्यम से मुगल काल के इतिहास का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।
1. इतिवृत्त – अर्थ एवं महत्व
1.1 इतिवृत्त का अर्थ
इतिवृत्त का तात्पर्य उन लिखित अभिलेखों से है जिनमें शासकों के शासनकाल की घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन होता है। मुगल काल में दरबारी इतिहासकारों ने सम्राटों के जीवन, विजयों, प्रशासन और नीतियों का विस्तृत वर्णन किया। इन्हें ‘इतिवृत्त’ या ‘क्रॉनिकल्स’ कहा जाता है।
1.2 इतिवृत्तों का महत्व
- ये मुगल काल के इतिहास के प्रमुख स्रोत हैं।
- इनसे मुगल शासकों की नीतियों का पता चलता है।
- इनसे दरबारी संस्कृति की जानकारी मिलती है।
- इनसे प्रशासनिक व्यवस्था का पता चलता है।
- इनसे सामाजिक और आर्थिक स्थितियों का ज्ञान होता है।
1.3 इतिवृत्तों की सीमाएँ
- ये अधिकतर दरबारी इतिहासकारों द्वारा लिखे गए थे।
- इनमें शासकों की प्रशंसा अधिक होती थी।
- आम जनता की स्थिति का कम वर्णन मिलता है।
- कुछ घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया।
- इनमें लेखक के पूर्वाग्रह झलकते हैं।
2. मुगल वंश के प्रमुख शासक
2.1 बाबर (1526-1530 ईस्वी)
- बाबर मुगल साम्राज्य का संस्थापक था।
- उसका जन्म 1483 ईस्वी में फरगना में हुआ।
- उसने 1526 ईस्वी में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को पराजित किया।
- उसने 1527 ईस्वी में खानवा के युद्ध में राणा सांगा को पराजित किया।
- उसने 1529 ईस्वी में घाघरा के युद्ध में अफगानों को पराजित किया।
- उसने ‘बाबरनामा’ नामक आत्मकथा लिखी।
- उसकी मृत्यु 1530 ईस्वी में आगरा में हुई।
2.2 हुमायूँ (1530-1540, 1555-1556 ईस्वी)
- हुमायूँ बाबर का पुत्र था।
- उसे 1540 ईस्वी में शेरशाह सूरी ने पराजित किया।
- वह 15 वर्ष तक निर्वासन में रहा।
- उसने 1555 ईस्वी में दिल्ली पर पुनः अधिकार किया।
- उसकी मृत्यु 1556 ईस्वी में हुई।
2.3 अकबर (1556-1605 ईस्वी)
- अकबर मुगल वंश का सबसे महान शासक था।
- उसका जन्म 1542 ईस्वी में अमरकोट में हुआ।
- उसका राज्याभिषेक 1556 ईस्वी में हुआ।
- उसने 1556 ईस्वी में पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू को पराजित किया।
- उसने 1568 ईस्वी में चित्तौड़गढ़ पर विजय प्राप्त की।
- उसने 1576 ईस्वी में हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप को पराजित किया।
- उसने ‘दीन-ए-इलाही’ धर्म चलाया।
- उसने जजिया कर हटाया।
- उसने ‘इबादत खाना’ बनवाया।
- उसके दरबार में नवरत्न थे।
- उसकी मृत्यु 1605 ईस्वी में हुई।
2.4 जहाँगीर (1605-1627 ईस्वी)
- जहाँगीर अकबर का पुत्र था।
- उसका वास्तविक नाम सलीम था।
- उसने ‘नूरजहाँ’ से विवाह किया।
- उसने अपनी आत्मकथा ‘तुज़ुक-ए-जहाँगीरी’ लिखी।
- उसके काल में चित्रकला का विकास हुआ।
- उसने सिक्खों के पाँचवें गुरु अर्जुन देव को मृत्युदंड दिया।
2.5 शाहजहाँ (1628-1658 ईस्वी)
- शाहजहाँ जहाँगीर का पुत्र था।
- उसे ‘शाहजहाँ’ अर्थात ‘संसार का राजा’ कहा जाता था।
- उसने ताजमहल, लाल किला, जामा मस्जिद बनवाई।
- उसने मुमताज महल से विवाह किया।
- उसके काल को मुगल कला का स्वर्ण युग कहा जाता है।
- उसे उसके पुत्र औरंगजेब ने कैद कर लिया।
2.6 औरंगजेब (1658-1707 ईस्वी)
- औरंगजेब शाहजहाँ का पुत्र था।
- उसे ‘आलमगीर’ अर्थात ‘विश्व विजेता’ कहा जाता था।
- उसने जजिया कर पुनः लगाया।
- उसके काल में मुगल साम्राज्य सबसे बड़ा था।
- उसने सिक्खों के नौवें गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड दिया।
- उसने मराठों के विरुद्ध युद्ध किए।
- उसकी मृत्यु 1707 ईस्वी में हुई।
3. मुगल दरबार
3.1 दरबार की संरचना
- मुगल दरबार साम्राज्य का केंद्र था।
- दरबार में सम्राट सर्वोच्च था।
- दरबार में मंत्री, सेनापति, अधिकारी होते थे।
- दरबार में विदेशी राजदूत भी आते थे।
- दरबार में कलाकार, संगीतकार, कवि होते थे।
3.2 दरबार की गतिविधियाँ
- सम्राट का दरबार में आना।
- दरबारियों का सम्राट को प्रणाम करना।
- महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा।
- नियुक्तियाँ और पुरस्कार।
- संगीत और नृत्य के कार्यक्रम।
- विदेशी राजदूतों से मुलाकात।
3.3 दरबारी शिष्टाचार
- सम्राट को ‘जहाँपनाह’ कहा जाता था।
- दरबार में सिजदा और पैबोस की प्रथा थी।
- सम्राट के सामने हाथ बाँधकर खड़े होना।
- सम्राट के आदेशों का पालन करना।
4. मुगल प्रशासन
4.1 केंद्रीय प्रशासन
- सम्राट सर्वोच्च शासक था।
- सम्राट को वज़ीर सलाह देता था।
- वज़ीर वित्त विभाग का प्रमुख था।
- मीर बख्शी सेना का प्रमुख था।
- सद्र-उस-सुदूर धार्मिक मामलों का प्रमुख था।
- मीर-ए-आतिश तोपखाने का प्रमुख था।
4.2 प्रांतीय प्रशासन
- साम्राज्य को सूबों में विभाजित किया गया था।
- प्रत्येक सूबे का प्रमुख सूबेदार होता था।
- सूबों को सरकारों में विभाजित किया गया था।
- सरकारों को परगनों में विभाजित किया गया था।
- परगनों में गाँव आते थे।
4.3 मनसबदारी व्यवस्था
- अकबर ने मनसबदारी व्यवस्था शुरू की।
- मनसबदार को ‘जात’ और ‘सवार’ का दर्जा मिलता था।
- जात से पद और वेतन तय होता था।
- सवार से घुड़सवार सैनिकों की संख्या तय होती थी।
- मनसबदार को जागीर मिलती थी।
4.4 जागीरदारी व्यवस्था
- मनसबदारों को जागीर दी जाती थी।
- जागीरदार को भूमि राजस्व वसूलने का अधिकार था।
- जागीरदार राजस्व का कुछ भाग अपने पास रखता था।
- जागीरदार को सैनिक रखने होते थे।
5. मुगल काल की कला और संस्कृति
5.1 चित्रकला
- मुगल काल में चित्रकला का विकास हुआ।
- अकबर के काल में चित्रकला को बढ़ावा मिला।
- जहाँगीर स्वयं चित्रकार था।
- मुगल चित्रकला में प्रकृति, दरबार, युद्ध के दृश्य बनाए जाते थे।
- प्रमुख चित्रकार – मीर सैयद अली, अब्दुल हमीद, बसावन, दसवंत।
5.2 संगीत
- मुगल दरबार में संगीत को संरक्षण मिला।
- तानसेन अकबर के दरबार के प्रमुख संगीतकार थे।
- बैजू बावरा भी प्रसिद्ध संगीतकार थे।
- ध्रुपद गायन शैली का विकास हुआ।
5.3 साहित्य
- मुगल काल में साहित्य का विकास हुआ।
- संस्कृत, फारसी, हिंदी, उर्दू में रचनाएँ हुईं।
- अबुल फजल ने ‘अकबरनामा’ लिखा।
- बदायूनी ने ‘मुंतखब-उत-तवारीख’ लिखा।
- तुलसीदास ने ‘रामचरितमानस’ लिखा।
- सूरदास ने ‘सूरसागर’ लिखा।
5.4 वास्तुकला
- मुगल काल में वास्तुकला का विकास हुआ।
- अकबर ने फतेहपुर सीकरी, आगरा किला, लाल किला बनवाया।
- शाहजहाँ ने ताजमहल, जामा मस्जिद, लाल किला बनवाया।
- ताजमहल विश्व का सात आश्चर्यों में से एक है।
- मुगल वास्तुकला में संगमरमर का अधिक प्रयोग हुआ।
6. प्रमुख इतिवृत्त और उनके लेखक
6.1 बाबरनामा
- लेखक – बाबर।
- भाषा – तुर्की।
- यह बाबर की आत्मकथा है।
- इसमें बाबर के जीवन, विजयों और भारत के वर्णन मिलते हैं।
6.2 हुमायूँनामा
- लेखिका – गुलबदन बेगम।
- भाषा – फारसी।
- यह हुमायूँ की बहन द्वारा लिखी गई।
- इसमें हुमायूँ के जीवन का वर्णन है।
6.3 अकबरनामा
- लेखक – अबुल फजल।
- भाषा – फारसी।
- यह अकबर के शासनकाल का विस्तृत वर्णन है।
- इसमें तीन भाग हैं।
- इसमें अकबर की विजयों और प्रशासन का वर्णन है।
6.4 आइन-ए-अकबरी
- लेखक – अबुल फजल।
- यह अकबर के प्रशासन, अर्थव्यवस्था, समाज का वर्णन है।
- इसमें मनसबदारी व्यवस्था का वर्णन है।
- इसमें भूमि राजस्व व्यवस्था का वर्णन है।
6.5 तुज़ुक-ए-जहाँगीरी
- लेखक – जहाँगीर।
- यह जहाँगीर की आत्मकथा है।
- इसमें जहाँगीर के जीवन और शासन का वर्णन है।
6.6 बादशाहनामा
- लेखक – अब्दुल हमीद लाहौरी।
- यह शाहजहाँ के शासनकाल का वर्णन है।
6.7 आलमगीरनामा
- लेखक – मुहम्मद काजिम।
- यह औरंगजेब के शासनकाल का वर्णन है।
7. अकबर के नवरत्न
अकबर के दरबार में नौ प्रसिद्ध व्यक्ति थे, जिन्हें ‘नवरत्न’ कहा जाता था:
- बीरबल – अकबर का प्रिय मंत्री और सलाहकार।
- तानसेन – प्रसिद्ध संगीतकार।
- अबुल फजल – इतिहासकार और अकबरनामा के लेखक।
- फैजी – कवि और अबुल फजल के भाई।
- राजा टोडरमल – वित्त मंत्री।
- राजा मानसिंह – सेनापति।
- अब्दुर रहीम खानखाना – कवि और सेनापति।
- मुल्ला दो प्याजा – सलाहकार।
- हकीम हुमाम – चिकित्सक।
8. मुगल काल की प्रमुख इमारतें
8.1 ताजमहल
- शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया।
- यह आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है।
- यह विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है।
- इसका निर्माण 1631-1653 ईस्वी के बीच हुआ।
- यह सफेद संगमरमर से बना है।
8.2 लाल किला
- शाहजहाँ ने दिल्ली में बनवाया।
- यह लाल बलुआ पत्थर से बना है।
- यह मुगल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
8.3 फतेहपुर सीकरी
- अकबर ने बनवाया।
- यह आगरा के पास स्थित है।
- यहाँ बुलंद दरवाजा, पंच महल, जामा मस्जिद हैं।
8.4 जामा मस्जिद
- शाहजहाँ ने दिल्ली में बनवाई।
- यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है।
9. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- इतिवृत्त – शासकों के शासनकाल की घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन।
- मनसबदारी – अकबर द्वारा शुरू की गई पद और वेतन व्यवस्था।
- जागीर – मनसबदार को दी जाने वाली भूमि।
- जात – मनसबदार का पद और वेतन।
- सवार – मनसबदार के घुड़सवार सैनिक।
- वज़ीर – मुगल साम्राज्य का प्रधानमंत्री।
- सूबेदार – प्रांत का शासक।
- दीन-ए-इलाही – अकबर द्वारा चलाया गया धर्म।
- इबादत खाना – अकबर द्वारा बनवाया गया धार्मिक चर्चा का स्थान।
- जजिया – गैर-मुस्लिमों पर लगाया जाने वाला कर।
10. महत्वपूर्ण तथ्य
- बाबर ने 1526 ईस्वी में मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
- पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ईस्वी में हुआ।
- अकबर का राज्याभिषेक 1556 ईस्वी में हुआ।
- अकबर ने जजिया कर हटाया।
- अकबर ने दीन-ए-इलाही चलाया।
- अकबर के दरबार में नवरत्न थे।
- तानसेन अकबर के दरबार के प्रमुख संगीतकार थे।
- अबुल फजल ने अकबरनामा लिखा।
- गुलबदन बेगम ने हुमायूँनामा लिखा।
- ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया।
- ताजमहल विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है।
- औरंगजेब ने जजिया कर पुनः लगाया।
11. निष्कर्ष
अध्याय 9 “शासक और इतिवृत्त” मुगल दरबार, शासकों और इतिवृत्तों के माध्यम से मुगल काल के इतिहास का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:
- इतिवृत्त – ये मुगल काल के इतिहास के प्रमुख स्रोत हैं।
- मुगल शासक – बाबर, हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगजेब।
- मुगल दरबार – यह साम्राज्य का केंद्र था।
- मनसबदारी व्यवस्था – अकबर द्वारा शुरू की गई।
- कला और संस्कृति – चित्रकला, संगीत, साहित्य, वास्तुकला।
- प्रमुख इतिवृत्त – बाबरनामा, अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी।
- अकबर के नवरत्न – बीरबल, तानसेन, अबुल फजल आदि।
इस अध्याय का महत्व:
- यह मुगल काल के इतिहास को समझाता है।
- यह इतिवृत्तों को स्रोत के रूप में समझने में सहायक है।
- यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह मुगल कला और संस्कृति को समझने में सहायक है।
- यह आगे के अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।
इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।
