कक्षा 12 भूगोल – अध्याय 6: जल संसाधन
जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यह मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका हुआ है, लेकिन इसका केवल 3% भाग ही ताजा जल है। इस ताजे जल का भी बड़ा हिस्सा बर्फ के रूप में ध्रुवीय क्षेत्रों में और भूमिगत जल के रूप में है। मानव के उपयोग के लिए उपलब्ध जल की मात्रा बहुत सीमित है।
भारत में जल संसाधनों का वितरण असमान है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होती है, तो कुछ क्षेत्र सूखे की समस्या से जूझते हैं। जल संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और प्रदूषण के कारण जल की कमी एक गंभीर समस्या बन गई है।
इस अध्याय का शीर्षक “जल संसाधन” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय भारत में जल संसाधनों के वितरण, उपयोग, संरक्षण तथा जल संबंधी समस्याओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।
1. जल संसाधनों का परिचय
1.1 जल संसाधन का अर्थ
जल संसाधन से तात्पर्य पृथ्वी पर उपलब्ध उन जल स्रोतों से है जिनका उपयोग मानव विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कर सकता है। इनमें नदियाँ, झीलें, तालाब, कुएँ, भूमिगत जल, वर्षा जल आदि शामिल हैं।
1.2 जल संसाधनों का महत्व
- जल जीवन का आधार है।
- यह कृषि के लिए आवश्यक है।
- यह उद्योगों के लिए आवश्यक है।
- यह विद्युत उत्पादन में सहायक है।
- यह परिवहन का साधन है।
- यह पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखता है।
- यह मनोरंजन और पर्यटन में सहायक है।
1.3 जल संसाधनों के प्रकार
- सतही जल (Surface Water) – नदियाँ, झीलें, तालाब, नहरें।
- भूमिगत जल (Groundwater) – कुएँ, बोरवेल, झरने।
- वर्षा जल (Rainwater) – वर्षा से प्राप्त जल।
2. भारत में जल संसाधन
2.1 भारत में जल की उपलब्धता
- भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 18% भाग निवास करता है।
- भारत के पास विश्व के कुल जल संसाधनों का केवल 4% भाग है।
- भारत में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता लगातार कम हो रही है।
- भारत में वर्षा का वितरण अत्यंत असमान है।
2.2 भारत में जल संसाधनों के स्रोत
नदियाँ
भारत में अनेक नदियाँ हैं जो जल का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इन्हें दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:
- हिमालयी नदियाँ – सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियाँ। ये सदाबहार नदियाँ हैं।
- प्रायद्वीपीय नदियाँ – गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती, महानदी। ये मौसमी नदियाँ हैं।
झीलें और तालाब
भारत में अनेक झीलें और तालाब हैं जो जल के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। जैसे – चिल्का झील, वूलर झील, सांभर झील, पिचोला झील।
भूमिगत जल
भारत में भूमिगत जल का उपयोग कुओं और बोरवेलों के माध्यम से किया जाता है। यह सिंचाई और पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है।
2.3 भारत में जल संसाधनों की समस्याएँ
- वर्षा का असमान वितरण
- भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन
- जल प्रदूषण
- जल संग्रहण क्षमता में कमी
- नदियों के बीच विवाद
- जलवायु परिवर्तन
3. जल की माँग एवं उपयोग
3.1 जल की माँग के क्षेत्र
- कृषि – सिंचाई के लिए सबसे अधिक जल का उपयोग।
- उद्योग – विनिर्माण प्रक्रियाओं में जल का उपयोग।
- घरेलू उपयोग – पीने, नहाने, कपड़े धोने आदि के लिए।
- विद्युत उत्पादन – जल विद्युत और ताप विद्युत संयंत्रों में।
- मनोरंजन – पर्यटन और मनोरंजन गतिविधियों में।
3.2 जल की माँग में वृद्धि के कारण
- जनसंख्या वृद्धि
- शहरीकरण
- औद्योगीकरण
- कृषि का विस्तार
- जीवन स्तर में सुधार
4. जल अभाव (Water Scarcity)
4.1 जल अभाव का अर्थ
जल अभाव से तात्पर्य जल की कमी से है। यह तब होता है जब किसी क्षेत्र में उपलब्ध जल की मात्रा माँग से कम हो जाती है।
4.2 जल अभाव के कारण
मात्रात्मक कारण
- वर्षा में कमी
- भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन
- जल संग्रहण क्षमता में कमी
- जल स्रोतों का सूखना
गुणात्मक कारण
- जल प्रदूषण
- औद्योगिक कचरा
- कृषि रसायन
- सीवेज
4.3 जल अभाव के प्रभाव
- कृषि उत्पादन में कमी
- पेयजल की समस्या
- उद्योगों पर प्रभाव
- विद्युत उत्पादन में कमी
- पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
- सामाजिक तनाव
5. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ
5.1 बहुउद्देशीय परियोजना का अर्थ
बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना वह परियोजना है जिसमें एक ही नदी घाटी में बाँध बनाकर अनेक उद्देश्यों की पूर्ति की जाती है। इन उद्देश्यों में सिंचाई, विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, नौवहन, मत्स्य पालन, पर्यटन आदि शामिल हैं।
5.2 बहुउद्देशीय परियोजनाओं के उद्देश्य
- सिंचाई – कृषि के लिए जल उपलब्ध कराना।
- विद्युत उत्पादन – जल विद्युत का उत्पादन।
- बाढ़ नियंत्रण – बाढ़ से बचाव।
- नौवहन – जल परिवहन को बढ़ावा।
- मत्स्य पालन – मछली उत्पादन।
- पर्यटन – पर्यटन का विकास।
- पेयजल – पेयजल की आपूर्ति।
5.3 भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
भाखड़ा-नांगल परियोजना
- यह सतलुज नदी पर स्थित है।
- यह भारत की सबसे पुरानी बहुउद्देशीय परियोजना है।
- इससे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को लाभ होता है।
दामोदर घाटी परियोजना
- यह दामोदर नदी पर स्थित है।
- इसे ‘भारत की शोक नदी’ कहा जाता है।
- इसका उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण और विद्युत उत्पादन है।
हीराकुंड परियोजना
- यह महानदी पर स्थित है।
- यह विश्व का सबसे लंबा मिट्टी का बाँध है।
- यह ओडिशा में स्थित है।
नागार्जुन सागर परियोजना
- यह कृष्णा नदी पर स्थित है।
- यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में फैली है।
टिहरी बाँध परियोजना
- यह भागीरथी नदी पर स्थित है।
- यह भारत का सबसे ऊँचा बाँध है।
- यह उत्तराखंड में स्थित है।
सरदार सरोवर परियोजना
- यह नर्मदा नदी पर स्थित है।
- यह गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को लाभ पहुँचाती है।
5.4 बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लाभ
- सिंचाई सुविधाओं का विस्तार
- विद्युत उत्पादन
- बाढ़ नियंत्रण
- रोजगार के अवसर
- आर्थिक विकास
- पर्यटन का विकास
5.5 बहुउद्देशीय परियोजनाओं की समस्याएँ
- विस्थापन की समस्या
- पर्यावरणीय प्रभाव
- जलभराव
- मिट्टी का क्षरण
- अंतर्राज्यीय विवाद
- लागत में वृद्धि
6. वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting)
6.1 वर्षा जल संग्रहण का अर्थ
वर्षा जल संग्रहण वह प्रक्रिया है जिसमें वर्षा के जल को एकत्रित करके उसका उपयोग किया जाता है। यह जल संरक्षण का महत्वपूर्ण उपाय है।
6.2 वर्षा जल संग्रहण की विधियाँ
छत पर वर्षा जल संग्रहण
इसमें घरों की छतों पर गिरने वाले वर्षा के जल को पाइपों के माध्यम से टंकियों में एकत्रित किया जाता है। इस जल का उपयोग पीने, नहाने आदि के लिए किया जाता है। राजस्थान में इसे ‘टाँका’ कहा जाता है।
भूमिगत जल संग्रहण
इसमें वर्षा के जल को भूमि में पहुँचाकर भूमिगत जल स्तर को बढ़ाया जाता है। इसके लिए गड्ढे, कुएँ, बोरवेल आदि का उपयोग किया जाता है।
तालाब एवं झील निर्माण
गाँवों में तालाब और झीलें बनाकर वर्षा के जल को एकत्रित किया जाता है। यह जल सिंचाई और पशुओं के लिए उपयोग किया जाता है।
6.3 भारत में पारंपरिक जल संग्रहण विधियाँ
- टाँका – राजस्थान में छत पर वर्षा जल संग्रहण।
- खड़ीन – राजस्थान में खेतों में वर्षा जल संग्रहण।
- बावड़ी – राजस्थान और गुजरात में सीढ़ीदार कुएँ।
- जोहड़ – राजस्थान में तालाब।
- कुंड – राजस्थान में जल संग्रहण के लिए गड्ढे।
- एरी – तमिलनाडु में तालाब।
- सुरंगम – केरल में जल संग्रहण प्रणाली।
6.4 वर्षा जल संग्रहण का महत्व
- भूमिगत जल स्तर में वृद्धि
- जल की उपलब्धता में वृद्धि
- बाढ़ नियंत्रण
- मिट्टी के कटाव में कमी
- जल संरक्षण
7. सिंचाई (Irrigation)
7.1 सिंचाई का अर्थ एवं महत्व
सिंचाई वह प्रक्रिया है जिसमें फसलों को कृत्रिम रूप से जल उपलब्ध कराया जाता है। भारत में वर्षा का वितरण असमान है, इसलिए सिंचाई आवश्यक है।
7.2 सिंचाई के साधन
- कुएँ – भूमिगत जल का उपयोग।
- नहरें – नदियों से जल लाकर सिंचाई।
- तालाब – वर्षा जल संग्रहण द्वारा सिंचाई।
- बोरवेल – भूमिगत जल का उपयोग।
- फुहारा सिंचाई – आधुनिक सिंचाई विधि।
- टपक सिंचाई – जल की बचत करने वाली विधि।
8. जल प्रदूषण (Water Pollution)
8.1 जल प्रदूषण का अर्थ
जल प्रदूषण से तात्पर्य जल में हानिकारक पदार्थों के मिलने से जल की गुणवत्ता में कमी से है। इससे जल उपयोग के अयोग्य हो जाता है।
8.2 जल प्रदूषण के कारण
- औद्योगिक कचरा
- सीवेज
- कृषि रसायन
- तेल रिसाव
- धार्मिक गतिविधियाँ
- ठोस कचरा
8.3 जल प्रदूषण के प्रभाव
- स्वास्थ्य समस्याएँ
- जलीय जीवों का विनाश
- कृषि पर प्रभाव
- पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
- जल की उपलब्धता में कमी
8.4 जल प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
- सीवेज उपचार संयंत्र
- औद्योगिक कचरे का उपचार
- जैविक खेती
- जल स्रोतों की सफाई
- जन जागरूकता
- कानूनी प्रावधान
9. जल संरक्षण (Water Conservation)
9.1 जल संरक्षण का अर्थ एवं महत्व
जल संरक्षण से तात्पर्य जल के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण से है। यह भावी पीढ़ियों के लिए जल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है।
9.2 जल संरक्षण के उपाय
- वर्षा जल संग्रहण
- जल स्रोतों का पुनर्जीवन
- टपक सिंचाई
- जल का पुनःचक्रण
- जन जागरूकता
- कानूनी प्रावधान
- वृक्षारोपण
9.3 जल संरक्षण में सरकारी प्रयास
- राष्ट्रीय जल नीति
- जल संरक्षण अधिनियम
- नदी संरक्षण योजनाएँ
- जल संरक्षण अभियान
10. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
- जल संसाधन – पृथ्वी पर उपलब्ध जल के स्रोत जिनका उपयोग मानव कर सकता है
- सतही जल – नदियों, झीलों, तालाबों में उपलब्ध जल
- भूमिगत जल – भूमि के नीचे उपलब्ध जल
- जल अभाव – जल की कमी
- बहुउद्देशीय परियोजना – वह परियोजना जिसमें एक ही नदी घाटी में बाँध बनाकर अनेक उद्देश्यों की पूर्ति की जाती है
- वर्षा जल संग्रहण – वर्षा के जल को एकत्रित करके उसका उपयोग करना
- सिंचाई – फसलों को कृत्रिम रूप से जल उपलब्ध कराना
- जल प्रदूषण – जल में हानिकारक पदार्थों के मिलने से जल की गुणवत्ता में कमी
11. महत्वपूर्ण तथ्य
- पृथ्वी की सतह का 71% भाग जल से ढका है।
- पृथ्वी पर केवल 3% जल ताजा जल है।
- भारत में विश्व की 18% जनसंख्या और 4% जल संसाधन हैं।
- भाखड़ा-नांगल परियोजना सतलुज नदी पर स्थित है।
- हीराकुंड परियोजना महानदी पर स्थित है।
- टिहरी बाँध भारत का सबसे ऊँचा बाँध है।
- सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा नदी पर स्थित है।
- राजस्थान में ‘टाँका’ वर्षा जल संग्रहण की विधि है।
- दामोदर नदी को ‘भारत की शोक नदी’ कहा जाता है।
- टपक सिंचाई जल की बचत करने वाली विधि है।
12. निष्कर्ष
अध्याय 6 “जल संसाधन” भारत में जल संसाधनों के वितरण, उपयोग, संरक्षण तथा जल संबंधी समस्याओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:
- जल संसाधनों का महत्व – जल जीवन का आधार है।
- भारत में जल संसाधन – भारत में जल का वितरण असमान है।
- जल अभाव – यह एक गंभीर समस्या है।
- बहुउद्देशीय परियोजनाएँ – ये जल संसाधनों के विकास में सहायक हैं।
- वर्षा जल संग्रहण – यह जल संरक्षण का महत्वपूर्ण उपाय है।
- जल प्रदूषण – यह जल की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
- जल संरक्षण – यह भावी पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।
इस अध्याय का महत्व:
- यह जल संसाधनों की मूल अवधारणाओं को समझाता है।
- यह जल संरक्षण के महत्व को स्पष्ट करता है।
- यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह जल संबंधी समस्याओं को समझने में सहायक है।
- यह भूगोल के अन्य अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।
इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।
