BSEB • CLASS 10 • संस्कृत

समास (Samas) – पूरा पाठ आसान हिंदी में

अव्ययीभाव • तत्पुरुष • कर्मधारय • द्विगु • द्वंद्व • बहुव्रीहि

शून्य से शुरू — नियम, उदाहरण, विग्रह, ट्रिक्स और परीक्षा में आने वाले प्रश्न

1 समास क्या है? (बिल्कुल आसान भाषा में)

परिभाषा: जब दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक छोटा शब्द बनाया जाता है, उसे समास कहते हैं।

सीधे शब्दों में — दो शब्दों को जोड़कर एक नया शब्द बनाना ही समास है।

उदाहरण:

राजा + पुत्र = राजपुत्र नीला + कमल = नीलकमल माता + पिता = माता-पिता

समास-विग्रह क्या है?
समास से बने शब्द को तोड़कर उसके मूल शब्द और विभक्ति सहित रूप लिखना = समास-विग्रह।
जैसे: राजपुत्र → राजा का पुत्र
याद रखें: जोड़ना = समास, तोड़ना = समास-विग्रह। दोनों एक-दूसरे के उल्टे हैं।

2 समास के नियम (आसान हिंदी में)

समास करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें:

  • नियम 1: समास में विभक्ति (का, की, के, को, से, में) लुप्त हो जाती है।
  • नियम 2: समास में पूर्व पद और उत्तर पद में से जो प्रधान होता है, उसी के अनुसार समास का नाम रखा जाता है।
  • नियम 3: समास बनाने पर लिंग, वचन, कारक आदि का प्रयोग उत्तर पद के अनुसार होता है।
आसान फॉर्मूला: पहले शब्द को देखो — वह अव्यय है, संख्या है, विशेषण है, या कोई और?
दूसरे शब्द को देखो — क्या वह प्रधान है?
इन्हीं के आधार पर समास का प्रकार तय होता है।

3 समास के मुख्य प्रकार

प्रकार पहचान आसान उदाहरण
अव्ययीभाव पहला पद अव्यय (उपसर्ग/निपात) प्रतिदिन = प्रति + दिन
तत्पुरुष उत्तर पद प्रधान, पूर्व पद विभक्ति लुप्त राजपुत्र = राजा का पुत्र
कर्मधारय विशेषण-विशेष्य (दोनों में विशेषण) नीलकमल = नीला कमल
द्विगु पहला पद संख्यावाची त्रिलोक = तीन लोक
द्वंद्व दोनों पद समान और स्वतंत्र माता-पिता = माता और पिता
बहुव्रीहि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करें दशानन = दश आनन वाला (रावण)
ट्रिक: “अव्ययीभाव-तत्पुरुष-कर्मधारय-द्विगु-द्वंद्व-बहुव्रीहि” — यही छह प्रकार परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं।

4 अव्ययीभाव समास

परिभाषा: जिस समास में पहला पद अव्यय हो (जैसे प्रति, अनु, यथा, आ, उप, नि, अधि, अप) और दूसरा पद संज्ञा हो, तथा समस्त पद अव्यय की तरह प्रयुक्त हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।

समस्त पद समास-विग्रह
प्रतिदिनप्रति + दिन (हर दिन)
यथाशक्तियथा + शक्ति (शक्ति के अनुसार)
आजीवनआ + जीवन (जीवन भर)
अनुकूलअनु + कूल (कूल के अनुसार)
उपकूलउप + कूल (कूल के पास)
ट्रिक: जहाँ प्रति, अनु, यथा, आ, उप, नि, अधि, अप जैसे शब्द पहले आते हैं और पूरा पद अव्यय बन जाता है — वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।

5 तत्पुरुष समास

परिभाषा: जिस समास में उत्तर पद प्रधान हो और पूर्व पद में विभक्ति लुप्त हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

समस्त पद समास-विग्रह
राजपुत्रराजा का पुत्र
ग्रामवासीग्राम में वास करने वाला
धनहीनधन से हीन
रसोईघररसोई के लिए घर
विद्यार्थीविद्या के लिए अर्थी (इच्छुक)
ट्रिक: जहाँ विग्रह करने पर “का, की, के, को, से, में, के लिए” जैसी विभक्तियाँ आएँ, वहाँ तत्पुरुष समास होता है।

6 कर्मधारय समास

परिभाषा: जिस समास में पूर्व पद विशेषण और उत्तर पद विशेष्य हो, अर्थात् दोनों में विशेषण-विशेष्य का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।

समस्त पद समास-विग्रह
नीलकमलनीला कमल
महात्मामहान् आत्मा
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तम
कृष्णसर्पकृष्ण (काला) सर्प
देवदूतदेवता रूप दूत
ट्रिक: जहाँ विग्रह करने पर “वाला”, “रूप”, “जैसा” जैसे शब्द आएँ या विशेषण-विशेष्य का संबंध दिखे, वहाँ कर्मधारय समास होता है।

7 द्विगु समास

परिभाषा: जिस समास में पहला पद संख्यावाची हो, उसे द्विगु समास कहते हैं।

समस्त पद समास-विग्रह
त्रिलोकतीन लोक
चतुर्भुजचार भुजाओं वाला
सप्ताहसात दिनों का समूह
नवरात्रिनौ रातों का समूह
दशाननदश आनन वाला (रावण)
ट्रिक: जहाँ पहला पद संख्या बताता है (दो, तीन, चार, सात, नौ, दश आदि), वहाँ द्विगु समास होता है। लेकिन ध्यान रखें — यदि संख्यावाची पद के बाद कोई और पद प्रधान हो और वह किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करे, तो वह बहुव्रीहि हो सकता है (जैसे दशानन)।

8 द्वंद्व समास

परिभाषा: जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान हों और उन्हें “और” से जोड़ा जा सके, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।

समस्त पद समास-विग्रह
माता-पितामाता और पिता
राम-लक्ष्मणराम और लक्ष्मण
सीता-रामसीता और राम
दिन-रातदिन और रात
अन्न-जलअन्न और जल
ट्रिक: जहाँ विग्रह करने पर “और” आए, वहाँ द्वंद्व समास होता है।

9 बहुव्रीहि समास

परिभाषा: जिस समास में दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करें, अर्थात् कोई भी पद प्रधान न हो, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

समस्त पद समास-विग्रह संकेत
दशाननदश आनन वालारावण
चक्रधरचक्र धारण करने वालाविष्णु
नीलकंठनीला कंठ वालाशिव
पीतांबरपीत (पीले) अंबर वालाकृष्ण
लंबोदरलंबा उदर वालागणेश
ट्रिक: जहाँ विग्रह करने पर “वाला” आए और वह किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु का बोध कराए, वहाँ बहुव्रीहि समास होता है।

10 समास-विग्रह कैसे करें? (Step by Step)

  1. समस्त पद को ध्यान से पढ़ें और उसका अर्थ समझें।
  2. देखें कि इसमें कौन-से दो या दो से अधिक शब्द छिपे हैं।
  3. यदि विभक्ति लुप्त है, तो उसे उचित विभक्ति के साथ जोड़ें।
  4. यदि “और” आए तो द्वंद्व, “वाला” आए तो बहुव्रीहि, संख्या हो तो द्विगु, विशेषण-विशेष्य हो तो कर्मधारय, अव्यय पहले हो तो अव्ययीभाव, और विभक्ति लुप्त हो तो तत्पुरुष।
  5. अंत में जाँच करें — विग्रह से वही अर्थ निकल रहा है या नहीं।

हल किए हुए उदाहरण

समस्त पद समास-विग्रह समास का प्रकार
राजपुत्रराजा का पुत्रतत्पुरुष
नीलकमलनीला कमलकर्मधारय
त्रिलोकतीन लोकद्विगु
माता-पितामाता और पिताद्वंद्व
दशाननदश आनन वाला (रावण)बहुव्रीहि
प्रतिदिनप्रति + दिन (हर दिन)अव्ययीभाव
छोटा सा फंडा: विग्रह करते समय पहले देखो — पहला पद अव्यय है? संख्या है? विशेषण है? या दोनों समान हैं? इससे प्रकार तय करना आसान हो जाएगा।

11 परीक्षा में बार-बार आने वाले Important Examples

समस्त पद समास-विग्रह भेद
राजपुत्रराजा का पुत्रतत्पुरुष
ग्रामवासीग्राम में वास करने वालातत्पुरुष
धनहीनधन से हीनतत्पुरुष
नीलकमलनीला कमलकर्मधारय
महात्मामहान् आत्माकर्मधारय
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तमकर्मधारय
त्रिलोकतीन लोकद्विगु
चतुर्भुजचार भुजाओं वालाद्विगु
सप्ताहसात दिनों का समूहद्विगु
माता-पितामाता और पिताद्वंद्व
राम-लक्ष्मणराम और लक्ष्मणद्वंद्व
दिन-रातदिन और रातद्वंद्व
दशाननदश आनन वाला (रावण)बहुव्रीहि
चक्रधरचक्र धारण करने वाला (विष्णु)बहुव्रीहि
नीलकंठनीला कंठ वाला (शिव)बहुव्रीहि
प्रतिदिनप्रति + दिन (हर दिन)अव्ययीभाव
यथाशक्तियथा + शक्ति (शक्ति के अनुसार)अव्ययीभाव
आजीवनआ + जीवन (जीवन भर)अव्ययीभाव

12 याद रखने की TRICKS / SHORTCUTS

1. अव्ययीभाव: पहला पद अव्यय (प्रति, अनु, यथा, आ, उप) → प्रतिदिन, यथाशक्ति
2. तत्पुरुष: विभक्ति लुप्त → राजपुत्र (राजा का पुत्र)
3. कर्मधारय: विशेषण + विशेष्य → नीलकमल (नीला कमल)
4. द्विगु: पहला पद संख्या → त्रिलोक (तीन लोक)
5. द्वंद्व: “और” आए → माता-पिता (माता और पिता)
6. बहुव्रीहि: “वाला” आए और तीसरे अर्थ की ओर संकेत → दशानन (दश आनन वाला = रावण)
7. याद रखने का सूत्र: “अ-त-क-द्वि-द्वं-ब” — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व, बहुव्रीहि।

13 Common Mistakes (जहाँ बच्चे गलती करते हैं)

गलती 1: कर्मधारय और बहुव्रीहि में उलझ जाना।
सुधार: यदि विग्रह में “वाला” आए और वह किसी तीसरे व्यक्ति का बोध कराए → बहुव्रीहि; यदि केवल विशेषण-विशेष्य हो → कर्मधारय।
गलती 2: द्विगु और बहुव्रीहि में अंतर न कर पाना।
सुधार: द्विगु में पहला पद संख्या और उत्तर पद प्रधान होता है; बहुव्रीहि में दोनों पद मिलकर तीसरे अर्थ की ओर संकेत करते हैं।
गलती 3: तत्पुरुष में विभक्ति लुप्त न करना।
सुधार: विग्रह करते समय उचित विभक्ति (का, की, के, से, में) अवश्य लगाएँ।
गलती 4: अव्ययीभाव में पहले पद को संज्ञा मान लेना।
सुधार: अव्ययीभाव में पहला पद सदैव अव्यय (प्रति, अनु, यथा, आ, उप) होता है।
बचाव का तरीका: उत्तर लिखने के बाद हमेशा विग्रह करके जाँचें कि वही अर्थ निकल रहा है या नहीं।

14 BSEB Exam-Oriented Practice (उत्तर देखें पर क्लिक करें)

1. राजपुत्र का समास-विग्रह कीजिए।

राजा का पुत्र — तत्पुरुष समास

2. नीलकमल का समास-विग्रह कीजिए।

नीला कमल — कर्मधारय समास

3. त्रिलोक का समास-विग्रह कीजिए।

तीन लोक — द्विगु समास

4. माता-पिता का समास-विग्रह कीजिए।

माता और पिता — द्वंद्व समास

5. दशानन का समास-विग्रह कीजिए।

दश आनन वाला (रावण) — बहुव्रीहि समास

6. प्रतिदिन का समास-विग्रह कीजिए।

प्रति + दिन (हर दिन) — अव्ययीभाव समास

7. महात्मा का समास-विग्रह कीजिए।

महान् आत्मा — कर्मधारय समास

8. चतुर्भुज का समास-विग्रह कीजिए।

चार भुजाओं वाला — द्विगु समास

9. राम-लक्ष्मण का समास-विग्रह कीजिए।

राम और लक्ष्मण — द्वंद्व समास

10. चक्रधर का समास-विग्रह कीजिए।

चक्र धारण करने वाला (विष्णु) — बहुव्रीहि समास

11. यथाशक्ति का समास-विग्रह कीजिए।

यथा + शक्ति (शक्ति के अनुसार) — अव्ययीभाव समास

12. धनहीन का समास-विग्रह कीजिए।

धन से हीन — तत्पुरुष समास
आखिरी सलाह: रोज 10 शब्दों का समास-विग्रह लिखने की आदत बनाइए। 7 दिन में पूरा समास याद हो जाएगा।

15 एक मिनट में Quick Revision

समास का प्रकार पहचान उदाहरण
अव्ययीभावपहला पद अव्ययप्रतिदिन
तत्पुरुषविभक्ति लुप्तराजपुत्र
कर्मधारयविशेषण-विशेष्यनीलकमल
द्विगुपहला पद संख्यावाचीत्रिलोक
द्वंद्व“और” आएमाता-पिता
बहुव्रीहि“वाला” आए, तीसरा अर्थदशानन
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