APNI KAKSHA • BSEB Class 10 Sanskrit

नवमः पाठः — मन्दाकिनीवर्णनम्

पीयूषम् (भाग-2) • वाल्मीकीय रामायण (अयोध्याकाण्ड, सर्ग 95)

📖 पुस्तक: पीयूषम् भाग-2 ✍️ कक्षा: 10 | बोर्ड: BSEB 🔤 संस्कृत — हिंदी अर्थ
📜 पाठ का संक्षिप्त परिचय

“मन्दाकिनीवर्णनम्” पाठ वाल्मीकीय रामायण के अयोध्याकाण्ड के 95वें सर्ग से संकलित है। वनवास के प्रसंग में भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के साथ चित्रकूट पहुँचते हैं। वहाँ स्थित मन्दाकिनी नदी का वर्णन करते हुए राम सीता को सम्बोधित करते हैं। यह नदी प्राकृतिक उपादानों से युक्त होकर मन को हर लेती है। इसका वर्णन कालिदास ने रघुवंश महाकाव्य के तेरहवें सर्ग में भी किया है। अनुष्टुप् छन्द में महर्षि वाल्मीकि मन्दाकिनी के वर्णन में प्रकृति का यथार्थ चित्रण करते हैं। इस पाठ में 10 श्लोक हैं जिनमें राम मन्दाकिनी नदी की विभिन्न शोभाओं का वर्णन करते हैं।

१

विचित्र पुलिन वाली मन्दाकिनी

संस्कृत श्लोक
विचित्रपुलिनां रम्यां हंससारससेविताम्। कुसुमैरुपसंपन्नां पश्य मन्दाकिनीं नदीम्॥१॥
सरल हिंदी अर्थ
हे सीते! विचित्र बालू के तटों वाली, रमणीय, हंसों और सारस पक्षियों से सेवित तथा फूलों से परिपूर्ण इस मन्दाकिनी नदी को देखो।
भावार्थ
राम सीता को मन्दाकिनी नदी के प्राकृतिक सौंदर्य को दिखाते हुए कहते हैं कि यह नदी फूलों, हंसों और सारसों से सुशोभित है तथा इसके तट विचित्र बालू से युक्त हैं।
२

कुबेर की नलिनी के समान शोभा

संस्कृत श्लोक
नानाविधैस्तीररुहैर्वृतां पुष्पफलद्रुमैः। राजन्तीं राजराजस्य नलिनीमिव सर्वतः॥२॥
सरल हिंदी अर्थ
अनेक प्रकार के तट पर उगे हुए फूलों और फलों वाले वृक्षों से घिरी हुई यह नदी सब ओर से धनपति कुबेर की नलिनी (कमलों वाली सरोवर) के समान शोभायमान है।
भावार्थ
मन्दाकिनी नदी के दोनों तटों पर अनेक प्रकार के फूल-फल वाले वृक्ष उगे हुए हैं। यह नदी धनपति कुबेर के सरोवर की तरह सब ओर से अत्यंत सुंदर प्रतीत हो रही है।
३

मृगयूथों से पीये गए जल के घाट

संस्कृत श्लोक
मृगयूथनिपीतानि कलुषाम्भांसि साम्प्रतम्। तीर्थानि रमणीयानि रतिं संजनयन्ति मे॥३॥
सरल हिंदी अर्थ
हिरणों के झुण्डों द्वारा पिये जाने से जिसका जल कुछ मटमैला हो गया है, ऐसे इस नदी के रमणीय तीर्थ (घाट) मेरे मन में आनन्द उत्पन्न करते हैं।
भावार्थ
मन्दाकिनी नदी के घाटों पर हिरणों के झुंड जल पीते हैं, जिससे जल कुछ मटमैला हो जाता है। फिर भी ये रमणीय तीर्थ राम के मन में आनंद उत्पन्न करते हैं।
४

तपस्वियों का स्नान

संस्कृत श्लोक
जटाजिनधराः काले वल्कलोत्तरवाससः। ऋषयस्त्ववगाहन्ते नदीं मन्दाकिनीं प्रिये॥४॥
सरल हिंदी अर्थ
हे प्रिये (सीते)! जटाधारी, मृगचर्म धारण किए हुए और ऊपरी वस्त्र के रूप में वल्कल (वृक्ष की छाल) पहने हुए ऋषि उचित समय पर मन्दाकिनी नदी में स्नान करते हैं।
५

सूर्योपासना में लीन मुनि

संस्कृत श्लोक
आदित्यमुपतिष्ठन्ते नियमादूर्ध्वबाहवः। एते परे विशालाक्षि मुनयः संशितव्रताः॥५॥
सरल हिंदी अर्थ
हे विशाल नेत्रों वाली (सीते)! ये दूसरी ओर स्थित दृढ़ व्रत वाले मुनि नियमपूर्वक दोनों भुजाएँ ऊपर उठाकर सूर्य की उपासना कर रहे हैं।
भावार्थ
मन्दाकिनी के तट पर कठोर व्रत धारण करने वाले मुनि दोनों हाथ ऊपर उठाकर सूर्यदेव की उपासना कर रहे हैं।
६

नृत्य करता हुआ पर्वत

संस्कृत श्लोक
मारुतोद्धूतशिखरैः प्रनृत्त इव पर्वतः। पादपैः पुष्पपत्राणि सृजद्भिरभितो नदीम्॥६॥
सरल हिंदी अर्थ
वायु से हिलते हुए शिखरों वाला यह पर्वत मानो नृत्य कर रहा हो, और उसके वृक्ष चारों ओर नदी में फूल और पत्ते गिरा रहे हैं।
भावार्थ
हवा से पर्वत के शिखर ऐसे हिल रहे हैं जैसे वह नृत्य कर रहा हो। उसके वृक्ष नदी में चारों ओर फूल और पत्ते गिरा रहे हैं।
७

कहीं मणि जैसा जल, कहीं सिद्धजन

संस्कृत श्लोक
क्वचिन्मणिनिकाशोदां क्वचित्पुलिनशालिनीम्। क्वचित्सिद्धजनाकीर्णां पश्य मन्दाकिनीं नदीम्॥७॥
सरल हिंदी अर्थ
कहीं मणि के समान निर्मल जल वाली, कहीं सुन्दर बालू के तटों से युक्त और कहीं सिद्ध पुरुषों से भरी हुई इस मन्दाकिनी नदी को देखो।
भावार्थ
मन्दाकिनी नदी का सौंदर्य विविध रूपों में प्रकट होता है — कहीं मणि के समान निर्मल जल, कहीं सुंदर बालू के तट और कहीं सिद्ध पुरुषों का निवास।
८

वायु से उड़ते पुष्प और तैरते पक्षी

संस्कृत श्लोक
निर्धूतान् वायुना पश्य विततान् पुष्पसञ्चयान्। पोप्लूयमानानपरान् पश्य त्वं जलमध्यगान्॥८॥
सरल हिंदी अर्थ
वायु द्वारा उड़ाए गए और इधर-उधर बिखरे हुए फूलों के समूहों को देखो। और जल के बीच में तैरते हुए दूसरे पक्षियों को भी देखो।
९

चक्रवाकों की मधुर वाणी

संस्कृत श्लोक
तांश्चातिवल्गुवचसो रथाङ्गाह्वयना द्विजाः। अधिरोहन्ति कल्याणि निष्कूजन्तः शुभा गिरः॥९॥
सरल हिंदी अर्थ
हे कल्याणि (सीते)! अत्यन्त मधुर वाणी बोलने वाले और ‘रथांग’ (चक्रवाक) नाम से पुकारे जाने वाले वे द्विज (पक्षी) शुभ ध्वनि करते हुए वृक्षों पर चढ़ रहे हैं।
भावार्थ
चक्रवाक पक्षी मधुर वाणी में शुभ ध्वनि करते हुए वृक्षों पर चढ़ रहे हैं और मन्दाकिनी की शोभा को और बढ़ा रहे हैं।
१०

चित्रकूट और मन्दाकिनी की श्रेष्ठता

संस्कृत श्लोक
दर्शनं चित्रकूटस्य मन्दाकिन्याश्च शोभने। अधिकं पुरवासाच्च मन्ये तव च दर्शनात्॥१०॥
सरल हिंदी अर्थ
हे शोभने (सुन्दरी सीते)! चित्रकूट पर्वत और मन्दाकिनी नदी के दर्शन को मैं नगर में रहने से भी अधिक श्रेष्ठ मानता हूँ — और तुम्हारे दर्शन से भी (अर्थात् यह दृश्य तुमसे भी बढ़कर मनोहर है — श्लेष)।
भावार्थ
राम सीता से कहते हैं कि चित्रकूट और मन्दाकिनी के दर्शन उन्हें नगर में रहने से भी अधिक प्रिय लगते हैं। यहाँ ‘तव च दर्शनात्’ में श्लेष अलंकार है जो यह दर्शाता है कि यह दृश्य सीता के दर्शन से भी अधिक मनोहर है।
🔤 महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Difficult Words)
संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
विचित्रपुलिनाम्विचित्र बालू के तटों वाली
रम्याम्रमणीय, सुंदर
हंससारससेविताम्हंस और सारस से सेवित
कुसुमैःफूलों से
उपसंपन्नाम्परिपूर्ण, युक्त
तीररुहैःतट पर उगे हुए
वृताम्घिरी हुई
पुष्पफलद्रुमैःफूल-फल वाले वृक्षों से
राजन्तीम्शोभायमान
राजराजस्यकुबेर का
नलिनीम् इवकमल सरोवर के समान
मृगयूथनिपीतानिहिरणों के झुंडों द्वारा पीये गए
कलुषाम्भांसिमटमैला जल वाले
साम्प्रतम्अभी, वर्तमान में
तीर्थानिघाट, तीर्थ
रतिम्आनंद, प्रेम
संजनयन्तिउत्पन्न करते हैं
जटाजिनधराःजटा और मृगचर्म धारण करने वाले
वल्कलोत्तरवाससःवल्कल (छाल) का उत्तरीय वस्त्र पहने हुए
अवगाहन्तेस्नान करते हैं
आदित्यम्सूर्यदेव को
उपतिष्ठन्तेउपासना करते हैं
ऊर्ध्वबाहवःऊपर उठी भुजाओं वाले
विशालाक्षिहे विशाल नेत्रों वाली
संशितव्रताःदृढ़ व्रत वाले
मारुतोद्धूतशिखरैःहवा से हिलते शिखरों वाले
प्रनृत्त इवमानो नृत्य कर रहा हो
सृजद्भिःगिराते हुए
क्वचित्कहीं
मणिनिकाशोदाम्मणि के समान जल वाली
पुलिनशालिनीम्सुंदर तटों से युक्त
सिद्धजनाकीर्णाम्सिद्ध पुरुषों से भरी हुई
निर्धूतान्झकझोर कर बिखेरे हुए
विततान्फैले हुए
पुष्पसञ्चयान्फूलों के समूहों को
पोप्लूयमानान्तैरते हुए
जलमध्यगान्जल के बीच स्थित
अतिवल्गुवचसःअत्यंत मधुर वाणी वाले
रथाङ्गाह्वयनाःरथांग (चक्रवाक) नाम से पुकारे जाने वाले
द्विजाःपक्षी
अधिरोहन्तिचढ़ते हैं
कल्याणिहे कल्याणी
निष्कूजन्तःमधुर ध्वनि करते हुए
शुभाः गिरःशुभ वाणी
दर्शनम्दर्शन
शोभनेहे सुंदरी
पुरवासात्नगर में रहने से
मन्येमैं मानता हूँ
⭐ पाठ का मुख्य भाव
  • १
    प्रकृति सौंदर्य: मन्दाकिनी नदी का वर्णन प्राकृतिक सौंदर्य, हंस-सारस, फूल-फल वाले वृक्ष और निर्मल जल से युक्त है।
  • २
    तपस्वियों का वास: मन्दाकिनी के तट पर जटाधारी ऋषि-मुनि स्नान करते हैं और सूर्योपासना में लीन रहते हैं।
  • ३
    प्रकृति का सजीव चित्रण: पर्वत हवा से हिलते हुए मानो नृत्य कर रहा हो और वृक्ष फूल-पत्ते गिरा रहे हों।
  • ४
    विविध रूप: मन्दाकिनी कहीं मणि जैसे निर्मल जल वाली, कहीं सुंदर तटों वाली और कहीं सिद्धजनों से भरी हुई है।
  • ५
    चित्रकूट की श्रेष्ठता: राम चित्रकूट और मन्दाकिनी के दर्शन को नगरवास से भी अधिक श्रेष्ठ मानते हैं।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
  • १
    “मन्दाकिनीवर्णनम्” पाठ वाल्मीकीय रामायण के अयोध्याकाण्ड के 95वें सर्ग से संकलित है।
  • २
    इसमें 10 श्लोक हैं।
  • ३
    रचयिता महर्षि वाल्मीकि हैं।
  • ४
    राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के प्रसंग में चित्रकूट पहुँचते हैं।
  • ५
    राम सीता को सम्बोधित करके मन्दाकिनी का वर्णन करते हैं।
  • ६
    यह पाठ अनुष्टुप् छन्द में रचित है।
  • ७
    कालिदास ने रघुवंश के 13वें सर्ग में मन्दाकिनी का वर्णन किया है।
  • ८
    मन्दाकिनी चित्रकूट के निकट बहती है।
  • ९
    पाठ में कुबेर की नलिनी से तुलना की गई है।
  • १०
    पाठ का संदेश — प्रकृति का सौंदर्य मन को आनंदित करता है।
🎯 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण पंक्तियाँ
  • ✦
    “विचित्रपुलिनां रम्यां हंससारससेविताम्।” — विचित्र तटों वाली, रमणीय, हंस-सारस से सेवित।
  • ✦
    “राजन्तीं राजराजस्य नलिनीमिव सर्वतः।” — सब ओर से कुबेर की नलिनी के समान शोभायमान।
  • ✦
    “जटाजिनधराः काले वल्कलोत्तरवाससः।” — जटा, मृगचर्म और वल्कल वस्त्र धारण किए हुए।
  • ✦
    “आदित्यमुपतिष्ठन्ते नियमादूर्ध्वबाहवः।” — नियमपूर्वक भुजाएँ ऊपर उठाकर सूर्य की उपासना करते हैं।
  • ✦
    “दर्शनं चित्रकूटस्य मन्दाकिन्याश्च शोभने।” — चित्रकूट और मन्दाकिनी के दर्शन।
⚡ Quick Revision
  • १
    मन्दाकिनीवर्णनम् = मन्दाकिनी नदी का वर्णन
  • २
    स्रोत = वाल्मीकीय रामायण, अयोध्याकाण्ड, सर्ग 95
  • ३
    रचयिता = महर्षि वाल्मीकि
  • ४
    कुल श्लोक = 10
  • ५
    प्रसंग = राम-सीता-लक्ष्मण का चित्रकूट आगमन
  • ६
    वर्णनकर्ता = श्रीराम (सीता को सम्बोधित करके)
  • ७
    छन्द = अनुष्टुप्
  • ८
    तुलना = कुबेर की नलिनी से
  • ९
    कालिदास का वर्णन = रघुवंश, सर्ग 13
  • १०
    संदेश = प्रकृति का सौंदर्य मन को आनंदित करता है
✦ पश्य मन्दाकिनीं नदीम् — मन्दाकिनी नदी को देखो ✦
— राम का सीता के प्रति सम्बोधन
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