APNI KAKSHA • BSEB Class 10 Sanskrit

द्वादशः पाठः — असहिष्णुतायाः शमनम्

पीयूषम् (भाग-2) • अशांति का वातावरण और निवारण

📖 पुस्तक: पीयूषम् भाग-2 ✍️ कक्षा: 10 | बोर्ड: BSEB 🔤 संस्कृत — हिंदी अर्थ
📜 पाठ का संक्षिप्त परिचय

“असहिष्णुतायाः शमनम्” पाठ में आज के विश्व में फैली अशांति और उसके मूल कारणों का विवेचन किया गया है। वर्तमान समय में देशों, समुदायों और व्यक्तियों के बीच बढ़ती असहिष्णुता ने समाज में कटुता और द्वेष का वातावरण उत्पन्न कर दिया है। इस पाठ में बताया गया है कि द्वेष (ईर्ष्या) और असहिष्णुता ही अशांति के दो प्रमुख कारण हैं। परंतु भारत की संस्कृति सदा से सहिष्णुता, क्षमा और सद्भाव की रही है। इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि सहिष्णुता, प्रेम, करुणा और परोपकार की भावना से ही असहिष्णुता का शमन संभव है। यही विश्व शांति का मार्ग है।

१

अशांति और असहिष्णुता के कारण

संस्कृत पाठ
अद्य विश्वे अनेकाः समस्याः विद्यन्ते यासां कारणेन देशेषु आन्तरिकं बाह्यं च अशान्तिः वर्तते। सीमा, नदीजलम्, धर्मः, दलम् इत्यादीन् आश्रित्य स्वार्थप्रेरिताः जनाः असहिष्णवः भूत्वा परस्परं विरोधं कुर्वन्ति। असहिष्णुतायाः मुख्यं कारणं द्वेषः अस्ति। द्वेषात् एव असहिष्णुता जायते। असहिष्णुता च अशान्तिं जनयति।
सरल हिंदी अर्थ
आज विश्व में अनेक समस्याएँ विद्यमान हैं जिनके कारण देशों में आंतरिक और बाह्य अशांति है। सीमा, नदी-जल, धर्म, दल आदि को आश्रय मानकर स्वार्थ से प्रेरित लोग असहिष्णु होकर परस्पर विरोध करते हैं। असहिष्णुता का मुख्य कारण द्वेष है। द्वेष से ही असहिष्णुता उत्पन्न होती है। और असहिष्णुता अशांति को जन्म देती है।
भावार्थ
विश्व में अशांति का मूल कारण असहिष्णुता है, और असहिष्णुता का मूल कारण द्वेष है। स्वार्थ से प्रेरित होकर लोग सीमा, जल, धर्म और दल के नाम पर एक-दूसरे से विरोध करते हैं।
२

असहिष्णुता के लक्षण

संस्कृत पाठ
यदा कश्चित् जनः अन्यस्य जनस्य उन्नतिं दृष्ट्वा दुःखं प्राप्नोति, तदा सः असहिष्णुः भवति। यः परस्य गुणेषु असहिष्णुः सः ईर्ष्यालुः कथ्यते। असहिष्णुः जनः परस्य विनाशं कामयते। सः स्वार्थसिद्धये किमपि कर्तुं तत्परः भवति। एवंविधाः जनाः समाजे कलहं विवादं च जनयन्ति।
सरल हिंदी अर्थ
जब कोई व्यक्ति दूसरे की उन्नति को देखकर दुःखी होता है, तब वह असहिष्णु होता है। जो दूसरे के गुणों में असहिष्णु होता है, उसे ईर्ष्यालु कहा जाता है। असहिष्णु व्यक्ति दूसरे का विनाश चाहता है। वह स्वार्थ-सिद्धि के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहता है। ऐसे लोग समाज में कलह और विवाद उत्पन्न करते हैं।
भावार्थ
असहिष्णुता का पहला लक्षण है — दूसरे की उन्नति को देखकर दुःखी होना। ऐसा व्यक्ति ईर्ष्यालु होता है, दूसरे का विनाश चाहता है और समाज में कलह फैलाता है।
३

भारत की सहिष्णुता परंपरा

संस्कृत पाठ
भारतस्य संस्कृतिः सहिष्णुतायाः संस्कृतिः अस्ति। अत्र सर्वेषां धर्माणां सम्मानं क्रियते। वसुधैव कुटुम्बकम् इति भारतस्य प्राचीनः सिद्धान्तः। अहिंसा परमो धर्मः इति भारतीयाः मन्यन्ते। सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः इति भारतस्य प्रार्थना अस्ति।
सरल हिंदी अर्थ
भारत की संस्कृति सहिष्णुता की संस्कृति है। यहाँ सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” (पूरी पृथ्वी ही परिवार है) भारत का प्राचीन सिद्धांत है। “अहिंसा परमो धर्मः” (अहिंसा परम धर्म है) — ऐसा भारतीय मानते हैं। “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः” (सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों) — यह भारत की प्रार्थना है।
४

सहिष्णुता का महत्व

संस्कृत पाठ
सहिष्णुता जीवनस्य आधारः अस्ति। परिवारे, समाजे, राष्ट्रे च सहिष्णुता आवश्यकी। सहिष्णुतायाः अभावे कुटुम्बे कलहः भवति। समाजे द्वेषः वर्धते। राष्ट्रे अशान्तिः जायते। अतः सर्वेभ्यः सहिष्णुता आवश्यकी। सहिष्णुः जनः अन्यस्य मतं श्रृणोति। अन्यस्य विचारान् सम्मन्यते। सः क्रोधं न करोति। सः क्षमां करोति।
सरल हिंदी अर्थ
सहिष्णुता जीवन का आधार है। परिवार में, समाज में और राष्ट्र में सहिष्णुता आवश्यक है। सहिष्णुता के अभाव में परिवार में कलह होता है। समाज में द्वेष बढ़ता है। राष्ट्र में अशांति उत्पन्न होती है। इसलिए सभी को सहिष्णुता आवश्यक है। सहिष्णु व्यक्ति दूसरे की बात सुनता है। दूसरे के विचारों का सम्मान करता है। वह क्रोध नहीं करता। वह क्षमा करता है।
५

असहिष्णुता के निवारण के उपाय

संस्कृत पाठ
असहिष्णुतायाः शमनं कथं भवेत्? परोपकारेण, प्रेम्णा, करुणया, क्षमया च। यदि वयं परेषां हितं चिन्तयामः तर्हि असहिष्णुता न भविष्यति। यदि वयं सर्वान् प्रेम्णा पश्यामः तर्हि द्वेषः न भविष्यति। यदि वयं क्षमां कुर्मः तर्हि कलहः न भविष्यति। अतः प्रेम, करुणा, क्षमा, परोपकारः एव असहिष्णुतायाः शमनस्य उपायाः सन्ति।
सरल हिंदी अर्थ
असहिष्णुता का शमन कैसे हो? परोपकार, प्रेम, करुणा और क्षमा से। यदि हम दूसरों का हित चिंतन करें तो असहिष्णुता नहीं होगी। यदि हम सबको प्रेम की दृष्टि से देखें तो द्वेष नहीं होगा। यदि हम क्षमा करें तो कलह नहीं होगा। इसलिए प्रेम, करुणा, क्षमा और परोपकार ही असहिष्णुता के शमन के उपाय हैं।
भावार्थ
असहिष्णुता का निवारण प्रेम, करुणा, क्षमा और परोपकार की भावना से ही संभव है। जब हम दूसरों का हित चिंतन करेंगे, सबको प्रेम की दृष्टि से देखेंगे और क्षमा करेंगे, तब द्वेष और कलह समाप्त हो जाएँगे।
६

सहिष्णुता से विश्व शांति

संस्कृत श्लोक
यदा सर्वे जनाः सहिष्णवः भविष्यन्ति, तदा विश्वे शान्तिः स्थास्यति। असहिष्णुता एव अशान्तेः मूलं कारणम् अस्ति। तस्मात् सहिष्णुता सर्वैः अभ्यासनीया।
सरल हिंदी अर्थ
जब सभी लोग सहिष्णु होंगे, तब विश्व में शांति स्थापित होगी। असहिष्णुता ही अशांति का मूल कारण है। इसलिए सभी को सहिष्णुता का अभ्यास करना चाहिए।
भावार्थ
विश्व शांति का एकमात्र मार्ग सहिष्णुता है। असहिष्णुता ही अशांति का मूल कारण है। इसलिए सभी को सहिष्णुता का अभ्यास करना चाहिए।
🔤 महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Difficult Words)
संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
असहिष्णुताअसहनशीलता, दूसरे की उन्नति को सहन न करना
सहिष्णुतासहनशीलता, सहन करने की शक्ति
शमनम्शांत करना, निवारण
अशान्तिःअशांति, बेचैनी
द्वेषःईर्ष्या, दुश्मनी
कारणेनकारण से
आन्तरिकम्आंतरिक
बाह्यम्बाह्य, बाहरी
वर्ततेहै, विद्यमान है
सीमासीमा, हद
नदीजलम्नदी का जल
दलम्दल, समूह
स्वार्थप्रेरिताःस्वार्थ से प्रेरित
असहिष्णवःअसहिष्णु, असहनशील
परस्परम्परस्पर, एक-दूसरे से
विरोधम्विरोध
कुर्वन्तिकरते हैं
जायतेउत्पन्न होती है
जनयतिउत्पन्न करती है
उन्नतिम्उन्नति
दुःखम्दुःख
प्राप्नोतिप्राप्त करता है
गुणेषुगुणों में
ईर्ष्यालुःईर्ष्या करने वाला
विनाशम्विनाश
कामयतेचाहता है
स्वार्थसिद्धयेस्वार्थ की सिद्धि के लिए
तत्परःतत्पर, तैयार
कलहम्कलह, झगड़ा
विवादम्विवाद
संस्कृतिःसंस्कृति
सम्मानम्सम्मान
वसुधैव कुटुम्बकम्पूरी पृथ्वी ही परिवार है
अहिंसा परमो धर्मःअहिंसा परम धर्म है
सर्वे भवन्तु सुखिनःसभी सुखी हों
निरामयाःनिरोगी
आधारःआधार
अभावेअभाव में
वर्धतेबढ़ता है
श्रृणोतिसुनता है
सम्मन्यतेसम्मान करता है
क्षमाम्क्षमा
परोपकारेणपरोपकार से
प्रेम्णाप्रेम से
करुणयाकरुणा से
क्षमयाक्षमा से
चिन्तयामःचिंतन करते हैं
पश्यामःदेखते हैं
कुर्मःकरते हैं
स्थास्यतिस्थित रहेगी
अभ्यासनीयाअभ्यास करने योग्य
⭐ पाठ का मुख्य भाव
  • १
    अशांति का मूल कारण: द्वेष और असहिष्णुता ही अशांति के दो प्रमुख कारण हैं। द्वेष से असहिष्णुता उत्पन्न होती है और असहिष्णुता से अशांति।
  • २
    असहिष्णुता के लक्षण: दूसरे की उन्नति देखकर दुःखी होना, ईर्ष्या करना, दूसरे का विनाश चाहना और समाज में कलह फैलाना — ये सभी असहिष्णुता के लक्षण हैं।
  • ३
    भारत की सहिष्णुता परंपरा: भारत की संस्कृति सदा से सहिष्णुता, अहिंसा और सर्वधर्म समभाव की रही है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” इसका प्रमाण है।
  • ४
    सहिष्णुता का महत्व: सहिष्णुता जीवन का आधार है। परिवार, समाज और राष्ट्र — सभी के लिए सहिष्णुता अनिवार्य है।
  • ५
    निवारण के उपाय: प्रेम, करुणा, क्षमा और परोपकार की भावना से ही असहिष्णुता का शमन संभव है। यही विश्व शांति का मार्ग है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts)
  • १
    अशांति के दो प्रमुख कारण — द्वेष (ईर्ष्या) और असहिष्णुता।
  • २
    असहिष्णुता का मुख्य कारण द्वेष है।
  • ३
    जो पराये गुणों में असहिष्णु हो, उसे ईर्ष्यालु कहते हैं।
  • ४
    भारत की संस्कृति सहिष्णुता की संस्कृति है।
  • ५
    “वसुधैव कुटुम्बकम्” — पूरी पृथ्वी ही परिवार है।
  • ६
    “अहिंसा परमो धर्मः” — अहिंसा परम धर्म है।
  • ७
    “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः” — सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों।
  • ८
    असहिष्णुता का निवारण प्रेम, करुणा, क्षमा और परोपकार से होता है।
  • ९
    सहिष्णुता ही विश्व शांति का मार्ग है।
  • १०
    पाठ का संदेश — सहिष्णु बनो, शांति स्थापित करो।
🎯 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण पंक्तियाँ
  • ✦
    “असहिष्णुतायाः मुख्यं कारणं द्वेषः अस्ति।” — असहिष्णुता का मुख्य कारण द्वेष है।
  • ✦
    “द्वेषात् एव असहिष्णुता जायते। असहिष्णुता च अशान्तिं जनयति।” — द्वेष से असहिष्णुता और असहिष्णुता से अशांति उत्पन्न होती है।
  • ✦
    “वसुधैव कुटुम्बकम् इति भारतस्य प्राचीनः सिद्धान्तः।” — वसुधैव कुटुम्बकम् भारत का प्राचीन सिद्धांत है।
  • ✦
    “सहिष्णुता जीवनस्य आधारः अस्ति।” — सहिष्णुता जीवन का आधार है।
  • ✦
    “प्रेम, करुणा, क्षमा, परोपकारः एव असहिष्णुतायाः शमनस्य उपायाः सन्ति।” — प्रेम, करुणा, क्षमा और परोपकार ही असहिष्णुता के शमन के उपाय हैं।
⚡ Quick Revision
  • १
    असहिष्णुतायाः शमनम् = असहिष्णुता का निवारण
  • २
    अशांति के कारण = द्वेष और असहिष्णुता
  • ३
    असहिष्णुता का मूल = द्वेष
  • ४
    असहिष्णुता के लक्षण = उन्नति देखकर दुःख, ईर्ष्या, विनाश की कामना
  • ५
    भारत की संस्कृति = सहिष्णुता की संस्कृति
  • ६
    प्राचीन सिद्धांत = वसुधैव कुटुम्बकम्
  • ७
    परम धर्म = अहिंसा
  • ८
    प्रार्थना = सर्वे भवन्तु सुखिनः
  • ९
    शमन के उपाय = प्रेम, करुणा, क्षमा, परोपकार
  • १०
    संदेश = सहिष्णु बनो, शांति स्थापित करो
✦ सहिष्णुता जीवनस्य आधारः अस्ति ✦
(सहिष्णुता जीवन का आधार है)
Scroll to Top