कक्षा 12 इतिहास – अध्याय 13: महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन (सविनय अवज्ञा और उससे आगे)

महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महान नेता थे। उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को स्वतंत्रता दिलाई। गाँधी जी ने 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद जैसे आंदोलनों से अपनी पहचान बनाई। 1920 के असहयोग आंदोलन, 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व गाँधी जी ने किया।

इस अध्याय में हम महात्मा गाँधी के जीवन, उनके राजनीतिक विचारों, सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा उसके बाद के राष्ट्रीय आंदोलनों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। गाँधी जी का जीवन और उनके आंदोलन भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अंग हैं।

इस अध्याय का शीर्षक “महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन” इसलिए रखा गया है क्योंकि यह अध्याय गाँधी जी के नेतृत्व में चले राष्ट्रीय आंदोलनों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है।

1. महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

1.1 जन्म एवं परिवार

  • महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ।
  • उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी था।
  • उनकी माता का नाम पुतलीबाई था।
  • उनका वास्तविक नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था।
  • 13 वर्ष की आयु में उनका विवाह कस्तूरबा से हुआ।

1.2 शिक्षा

  • उन्होंने भावनगर में स्कूली शिक्षा प्राप्त की।
  • 1888 में वे बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए लंदन गए।
  • 1891 में उन्होंने वकालत की डिग्री प्राप्त की।
  • लंदन में उन्होंने भगवद्गीता, बाइबल और अन्य धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया।

1.3 दक्षिण अफ्रीका में अनुभव (1893-1914)

  • 1893 में गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका गए।
  • वहाँ उन्होंने नस्लीय भेदभाव का सामना किया।
  • पीटरमारिट्जबर्ग में ट्रेन से उतार दिए जाने की घटना ने उन्हें प्रभावित किया।
  • उन्होंने भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
  • वहाँ उन्होंने सत्याग्रह का प्रयोग किया।
  • 1914 में वे भारत लौट आए।

1.4 गाँधी जी के गुरु

  • राजचंद्र – आध्यात्मिक गुरु।
  • गोपाल कृष्ण गोखले – राजनीतिक गुरु।
  • टॉल्स्टॉय – अहिंसा के विचारों से प्रभावित।
  • रस्किन – श्रम की गरिमा के विचार से प्रभावित।
  • थोरो – सविनय अवज्ञा के विचार से प्रभावित।
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2. भारत में गाँधी जी के प्रारंभिक आंदोलन

2.1 चंपारण सत्याग्रह (1917)

  • यह बिहार के चंपारण जिले में हुआ।
  • यहाँ नील की खेती करने वाले किसानों का शोषण हो रहा था।
  • तिनकठिया प्रथा के अंतर्गत किसानों को अपनी भूमि का 3/20 भाग नील की खेती के लिए देना पड़ता था।
  • गाँधी जी ने किसानों की समस्या की जाँच की।
  • सरकार ने जाँच आयोग नियुक्त किया।
  • तिनकठिया प्रथा समाप्त कर दी गई।
  • यह गाँधी जी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह था।

2.2 अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918)

  • यह अहमदाबाद की कपड़ा मिलों में हुआ।
  • मजदूरों की माँग थी कि उनका वेतन बढ़ाया जाए।
  • गाँधी जी ने मजदूरों का समर्थन किया।
  • उन्होंने अनशन किया।
  • मजदूरों को 35% वेतन वृद्धि मिली।
  • यह गाँधी जी का पहला अनशन था।

2.3 खेड़ा सत्याग्रह (1918)

  • यह गुजरात के खेड़ा जिले में हुआ।
  • अकाल के कारण किसान फसल नहीं उगा सके।
  • सरकार ने भूमि राजस्व में छूट नहीं दी।
  • गाँधी जी ने किसानों को राजस्व न देने की सलाह दी।
  • सरकार ने राजस्व में राहत दी।
  • यह गाँधी जी का पहला किसान आंदोलन था।
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3. रौलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग हत्याकांड

3.1 रौलेट एक्ट (1919)

  • 1919 में रौलेट एक्ट पारित किया गया।
  • इसके अनुसार सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा के गिरफ्तार कर सकती थी।
  • इसे ‘काला कानून’ कहा गया।
  • गाँधी जी ने इसका विरोध किया।
  • उन्होंने 6 अप्रैल 1919 को हड़ताल का आह्वान किया।

3.2 जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)

  • यह अमृतसर (पंजाब) में हुआ।
  • जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोली चलवाई।
  • सैकड़ों लोग मारे गए।
  • इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया।
  • रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि त्याग दी।
  • गाँधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन वापस ले लिया।

3.3 खिलाफत आंदोलन

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफा की स्थिति संकट में थी।
  • भारतीय मुसलमानों ने खलीफा के समर्थन में आंदोलन शुरू किया।
  • गाँधी जी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया।
  • इससे हिंदू-मुस्लिम एकता को बल मिला।
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4. असहयोग आंदोलन (1920-22)

4.1 आंदोलन की शुरुआत

  • 1920 में कलकत्ता अधिवेशन में असहयोग आंदोलन शुरू हुआ।
  • नागपुर अधिवेशन (1920) में इसे मंजूरी मिली।
  • यह गाँधी जी का पहला राष्ट्रव्यापी आंदोलन था।

4.2 आंदोलन के कार्यक्रम

  • सरकारी नौकरियों का त्याग।
  • सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार।
  • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार।
  • अदालतों का बहिष्कार।
  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
  • हिंदू-मुस्लिम एकता।
  • अस्पृश्यता का उन्मूलन।
  • खादी का प्रचार।

4.3 आंदोलन का विस्तार

  • आंदोलन पूरे देश में फैल गया।
  • किसान, मजदूर, छात्र, स्त्रियाँ सभी शामिल हुए।
  • अनेक स्थानों पर हिंसा हुई।
  • चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) में 22 पुलिसकर्मी मारे गए।

4.4 आंदोलन का स्थगन

  • चौरी-चौरा कांड के बाद गाँधी जी ने आंदोलन स्थगित कर दिया।
  • गाँधी जी को 6 वर्ष की सजा हुई।
  • 1924 में उन्हें रिहा किया गया।
  • आंदोलन से जनता में राजनीतिक चेतना जागी।
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5. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34)

5.1 आंदोलन के कारण

  • साइमन कमीशन (1928) का विरोध।
  • लाहौर अधिवेशन (1929) में पूर्ण स्वराज की माँग।
  • 26 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
  • गाँधी जी ने 11 सूत्री माँगें रखीं।
  • अंग्रेजों ने माँगें नहीं मानीं।

5.2 नमक सत्याग्रह (दांडी यात्रा)

  • 12 मार्च 1930 को गाँधी जी ने दांडी यात्रा शुरू की।
  • यह साबरमती आश्रम से दांडी (गुजरात) तक 240 मील की यात्रा थी।
  • 6 अप्रैल 1930 को गाँधी जी ने नमक कानून तोड़ा।
  • 78 लोगों ने गाँधी जी के साथ यात्रा शुरू की थी।
  • दांडी पहुँचने पर हजारों लोग शामिल हुए।
  • यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

5.3 आंदोलन का विस्तार

  • नमक कानून तोड़ा गया।
  • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार हुआ।
  • सरकारी नौकरियों का त्याग किया गया।
  • किसानों ने राजस्व देना बंद किया।
  • स्त्रियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
  • अस्पृश्यता के विरुद्ध आंदोलन हुआ।

5.4 गाँधी-इरविन समझौता (1931)

  • 5 मार्च 1931 को गाँधी-इरविन समझौता हुआ।
  • गाँधी जी ने आंदोलन स्थगित किया।
  • अंग्रेजों ने राजनीतिक कैदियों को रिहा किया।
  • नमक कानून में ढील दी गई।

5.5 गोलमेज सम्मेलन

  • प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) – कांग्रेस ने बहिष्कार किया।
  • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) – गाँधी जी ने भाग लिया।
  • तृतीय गोलमेज सम्मेलन (1932) – कांग्रेस ने बहिष्कार किया।

5.6 पूना पैक्ट (1932)

  • रैमजे मैकडोनाल्ड ने सांप्रदायिक पंचाट की घोषणा की।
  • इसमें दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था थी।
  • गाँधी जी ने इसका विरोध किया और अनशन किया।
  • 24 सितंबर 1932 को पूना पैक्ट हुआ।
  • दलितों के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था की गई।

5.7 आंदोलन का अंत

  • 1934 में गाँधी जी ने आंदोलन वापस ले लिया।
  • आंदोलन से राष्ट्रीय चेतना मजबूत हुई।
  • कांग्रेस को जनाधार मिला।
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6. भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

6.1 आंदोलन के कारण

  • द्वितीय विश्व युद्ध की स्थिति।
  • क्रिप्स मिशन (1942) की असफलता।
  • अंग्रेजों का भारत छोड़ने का आह्वान।
  • गाँधी जी का ‘करो या मरो’ का नारा।

6.2 आंदोलन की शुरुआत

  • 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ।
  • गाँधी जी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया।
  • 9 अगस्त 1942 को गाँधी जी सहित अनेक नेताओं को गिरफ्तार किया गया।
  • यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

6.3 आंदोलन का स्वरूप

  • यह आंदोलन जनता का आंदोलन था।
  • छात्रों, मजदूरों, किसानों ने भाग लिया।
  • सरकारी भवनों, रेलवे स्टेशनों, डाकघरों पर हमले हुए।
  • समानांतर सरकारों की स्थापना की गई।
  • जयप्रकाश नारायण, अरुणा आसफ अली, यूसुफ मेहर अली आदि नेताओं ने नेतृत्व किया।

6.4 आंदोलन का परिणाम

  • आंदोलन को दबा दिया गया।
  • लेकिन इसने स्वतंत्रता की माँग को मजबूत किया।
  • अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
  • 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।
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7. गाँधी जी के राजनीतिक विचार

7.1 सत्य और अहिंसा

  • सत्य और अहिंसा गाँधी जी के जीवन के आधार थे।
  • उन्होंने सत्याग्रह का प्रयोग किया।
  • सत्याग्रह का अर्थ सत्य के लिए आग्रह।
  • यह अहिंसा पर आधारित था।

7.2 स्वराज

  • गाँधी जी स्वराज के समर्थक थे।
  • स्वराज का अर्थ स्वशासन।
  • उन्होंने पूर्ण स्वराज की माँग की।

7.3 स्वदेशी

  • गाँधी जी स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के समर्थक थे।
  • उन्होंने खादी का प्रचार किया।
  • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया।

7.4 अस्पृश्यता का उन्मूलन

  • गाँधी जी अस्पृश्यता के कट्टर विरोधी थे।
  • उन्होंने हरिजन शब्द का प्रयोग किया।
  • उन्होंने ‘हरिजन’ पत्रिका निकाली।
  • उन्होंने मंदिर प्रवेश आंदोलन चलाया।

7.5 हिंदू-मुस्लिम एकता

  • गाँधी जी हिंदू-मुस्लिम एकता के पक्षधर थे।
  • उन्होंने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया।
  • उन्होंने सांप्रदायिकता का विरोध किया।

7.6 स्त्रियों की भागीदारी

  • गाँधी जी ने स्त्रियों को आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
  • स्त्रियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
  • सरोजिनी नायडू, कस्तूरबा गाँधी, अरुणा आसफ अली आदि प्रमुख थीं।
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8. महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • सत्याग्रह – सत्य के लिए आग्रह, अहिंसा पर आधारित।
  • सविनय अवज्ञा – कानून का शांतिपूर्ण ढंग से उल्लंघन।
  • असहयोग – सरकार के साथ सहयोग न करना।
  • स्वराज – स्वशासन।
  • स्वदेशी – अपने देश में बनी वस्तुएँ।
  • तिनकठिया – नील की खेती की प्रथा।
  • रौलेट एक्ट – 1919 का काला कानून।
  • पूना पैक्ट – 1932 का दलितों के लिए समझौता।
  • करो या मरो – भारत छोड़ो आंदोलन का नारा।
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9. महत्वपूर्ण तथ्य

  • महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ।
  • गाँधी जी 1893 में दक्षिण अफ्रीका गए।
  • चंपारण सत्याग्रह 1917 में हुआ।
  • खेड़ा सत्याग्रह 1918 में हुआ।
  • जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को हुआ।
  • असहयोग आंदोलन 1920 में शुरू हुआ।
  • चौरी-चौरा कांड 5 फरवरी 1922 को हुआ।
  • दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को शुरू हुई।
  • गाँधी-इरविन समझौता 5 मार्च 1931 को हुआ।
  • पूना पैक्ट 24 सितंबर 1932 को हुआ।
  • भारत छोड़ो आंदोलन 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ।
  • गाँधी जी की हत्या 30 जनवरी 1948 को हुई।
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10. निष्कर्ष

अध्याय 13 “महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन” गाँधी जी के नेतृत्व में चले राष्ट्रीय आंदोलनों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय हमें सिखाता है:

  • गाँधी जी का जीवन – जन्म, शिक्षा, दक्षिण अफ्रीका का अनुभव।
  • प्रारंभिक आंदोलन – चंपारण, अहमदाबाद, खेड़ा।
  • रौलेट एक्ट और जलियाँवाला बाग – 1919 की घटनाएँ।
  • असहयोग आंदोलन – 1920-22 का राष्ट्रव्यापी आंदोलन।
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन – 1930-34 का आंदोलन, दांडी यात्रा।
  • भारत छोड़ो आंदोलन – 1942 का आंदोलन, करो या मरो।
  • गाँधी जी के विचार – सत्य, अहिंसा, स्वराज, स्वदेशी।

इस अध्याय का महत्व:

  • यह गाँधी जी के नेतृत्व को समझाता है।
  • यह राष्ट्रीय आंदोलनों को स्पष्ट करता है।
  • यह बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • यह स्वतंत्रता संग्राम को समझने में सहायक है।
  • यह आगे के अध्यायों को समझने की नींव प्रदान करता है।

इन नोट्स को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोग करें। सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को अच्छी तरह याद रखें और संभावित प्रश्नों का अभ्यास करें।

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